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भोजपुरी विशेष - कई गो बड़का बड़का कलाकारन के याद दिलावेला दिसंबर महीना

दिसंबर महीना में कई गो बड़ भोजपुरी कलाकार के जन्मतिथि पड़ेला.

दिसंबर महीना में कई गो बड़ भोजपुरी कलाकार के जन्मतिथि पड़ेला.

भोजपुरी आ कहल जाय त लोक के रचना में पूस के जाड़ा के खूब जिक्र आवेला. अंग्रेजी में इ महीना दिसंबर के आस पास ही रहेला. इहो संयोग ह कि दिसंबर महीना भिखारी ठाकुर, शैलेन्द्र, कैलाश गौतम, भोलानाथ गहमरी आ पंडित गणेश चौबे कई बड़ कलाकारन के याद दिला देला. कुछ कलाकार येही महीना में पैदा भइल रहले त कुछ बड़ कलाकार येही महीना में इ दुनिया छोड़ देले रहले.

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जन्म आ मृत्यु पर त केहू के बस बा ना लेकिन एगो बात बा कि कवनो आदमी अगर महान हो गइल त ओकर पैदा होखे आ मूये वाला डेटवो महान हो जाला, ख़ास हो जाला, उत्सव के तिथि बन जाला, उल्लास के तिथि बन जाला. दुनिया ओकर जन्मतिथि आ पुण्यतिथि मनावेला. बा कि ना ए चनेसर चाचा?
त असहीं रजाई में बइठले बइठल सोचनी ह कि ए पूस के जाड़ में माने दिसंबर के महीना में के-के महापुरुष दुनिया में आइल आ के-के महाप्रयाण कइलस त आँखि के सोझा लमहर लिस्ट बन गइल. दुनिया में कमे आदमी बा का ? एक से एक लीजेंड ... एक के बाद एगो कई भोजपुरिया महापुरुष के चेहरा उभरल जे एही दिसंबर में दुनिया में आइल भा दुनिया से गइल जइसे कि भिखारी ठाकुर, गणेश चौबे, भोलानाथ गहमरी, कैलाश गौतम, शैलजा श्रीवास्तव, गीतकार शैलेन्द्र आ गीतकार-संगीतकार लक्ष्मण शाहाबादी आदि.

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पूछे के लइका (नयका पीढ़ी) पूछदिहन स कि गणेश चौबे, भोलानाथ गहमरी, कैलाश गौतम आ शैलजा श्रीवास्तव - ई कुल्हि के लोग ह. पूछे के त भोजपुरी टीवी चैनल के एक जानी एंकर-प्रोड्यूसर आपन नाक-भौं सिकोड़ के पूछली – हू इज भिखारी?  भरत शर्मा व्यास जी के इंटरव्यू करत में जब भरत जी भिखारी ठाकुर जी के नाम लेनी तब पूछली. जइसे कॉर्पोरेट में एक जानी एगो नामचीन टीवी सीरियल के प्रोड्यूसर से कहली- ठीक है, प्रेमचंद की कहानी है पर आपने प्रेमचन्द का बायोडाटा नहीं जमा किया. तबे से हमार आँख खुलल..भाई रे, नोकरी खातिर योग्यता से बेसी मालिक के कृपादृष्टि जरुरी बा. ज्ञान त देर सबेर आइये जाई, मालिक के मानल जरुरी बा. त चलीं जेकरा मालूम बा ठीके बा, नइखे मालूम त हई संक्षिप्त जानकारी परोसत बानी भिखारी ठाकुर, गणेश चौबे, भोलानाथ गहमरी, कैलाश गौतम, शैलजा श्रीवास्तव, गीतकार शैलेन्द्र आ गीतकार-संगीतकार लक्ष्मण शाहाबादी जी का बारे में.

दू गो नाम भिखारी ठाकुर आ महेंदर मिसिर त आजकल सभका जुबान पर बा. ओकरो जुबान पर जेकरा भोजपुरी के भ भी ठीक से नइखे मालूम काहे कि इ दूनू जना एह घरी ट्रेंड में बा लोग. मंच से नेता होखस भा अभिनेता भिखारी ठाकुर के नाम पर खूब भाषणबाजी होता. थोक में एह दूनू जना के नाम पर अवार्ड बाँटल जाता. अइसहीं आ अइसने लोग के अवार्ड दियाता जइसे हिंदी के कई गो संस्था निराला के नाम पर अइसन लोग के अवार्ड देले जेकरा जीवन में भा सृजन में कुछुओ निराला नइखे. लक्ष्मण शाहाबादी के गीत-संगीत भोजपुरिया लोग के जुबान प बा. उनका गीत-संगीत के बल प केतना फिल्म सुपर-डुपर हिट भइली सन बाकिर आम आदमी त दूर सिनेमा के रोटी तूड़े वाला अधिकांश लोग लक्ष्मण शाहाबादी के नामो नइखे जानत. भाई हो, ई उ लोग ह जे मरलो के बाद जीयत बा अपना गीत में, संगीत में, रचना में, सृजन में, कर्म में. हमार ( मनोज भावुक ) एगो शेर बा –
बहुत बा लोग जे मरलो के बाद जीयत बा
बहुत बा लोग जे जियते में यार मर जाला

हमनी के कवना श्रेणी में बानी जा, ई त इतिहास लिखी बाकिर जे इतिहास लिख गइल बा, आईं ओकरा बारे में जानल जाव -
भिखारी ठाकुर- ( जन्मतिथि - 18 दिसम्बर सन् 1887 )
बहुमुखी प्रतिभा के धनी भिखारी ठाकुर एके साथे गीतकार,संगीतकार,निर्देशक, संचालक, सूत्रधार ही ना रहले बल्कि एक लोक कलाकार रहलनl जिनका व्यक्तित्व में एके साथे लोकगीतकर आ लोकनाटकार समाहित हो गइल रहे.

प्रमुख कृति-

‘विदेसिया’, ’बेटी-बेचवा’, ‘भाई-विरोध’, ‘कलजुग प्रेम, ‘राधेश्याम बहार’, गंगा-अस्नान, ‘बिधवा-बिलाप’, पुत्र-बध’, गबरघिचोर’ रहे.

रामलीला के प्रति स्नेह रखे वाला भिखारी ठाकुर स्वयं मण्डली बना रामलीला शुरू कइले, जे बाद में रामलीला से आपन रास्ता बदल लोक-नाटक के ओर मुड़ गइल. इहे लोकनाटक उनका जीविका के साधन रहे आ समाज-सुधार के हथियार भी. उनकर स्वयं के रचल नाटकन में अपना समाज मे व्याप्त कुरीति पर प्रहार कइल गइल बा. इनकर कोशिश रहे कि उनका नाटकन के प्रभाव से अपना समाज में बदलाव आ जाव.

भिखारी ठाकुर के लगभग 28-29 कितबन के प्रकाशन 1938 से 1962 के बीच भइल. ई भारत के ही अन्य राज्यन में ही सिर्फ अपना नाटक-मण्डली के साथे ना गइले बल्कि ओह देशन में भी गइले जहाँ भोजपुरी भाषा-भाषी लोग अधिक या कम संख्या में रहत रहे. भिखारी ठाकुर के राहुल सांकृत्यायन भोजपुरी के शेक्सपियर आ अनगढहीरा कहले. जगदीश चन्द्र माथुर इनका के भरतमुनि परम्परा के कहले बाड़ल. अंग्रेज सरकार इनका के राय बहादुर के खिताब देहलस त बिहार सरकार इनका के ताम्र-पत्र से सम्मानित कइलस.

पंडित गणेश चौबे- ( जन्मतिथि- 5 दिसम्बर 1912 )
पं0 गणेश चौबे जी लोकगीत, लोककथा, बुझउअल, कहाउत, रसम-रेवाज, लोक विश्वास आ जाति-प्रथा आदि विषयक सामग्रियन के संग्रहकर्ता आ भोजपुरी भाषा, लोक-साहित्य आ शिष्ट-साहित्य के अध्येता रहीं. पंडित जी पुरान पोथियन-पाण्डुलिपियन के खोज कइनी आ एह में से तकरीबन सात सौ के एगो संग्रह बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के दान दिहनी, जवन उहाँ ‘चौबे संग्रहालय’ के रूप में सुरक्षित बा.
पंडित जी के लिखल तीन गो किताब छप चुकल बाटे. भोजपुरी में प्रकाशित इहाँ के किताब के नाम बाटे- ‘भोजपुरी के प्रकाशित ग्रन्थ’ जवन अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य-सम्मेलन के ओर से 1976 ई0 में प्रकाशित भइल. इहाँ के विभिन्न पत्र-पत्रिकन में छपल आठ निबंधन के संग्रह ‘भोजपुरी: कुछ समस्या आ समाधान’ 1977 ई0 में स्वागत समिति, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के सीवान अधिवेशन के द्वारा प्रकाशित करावल गइल. पंडित जी के तिसरका महत्वपूर्ण ग्रन्थ बाटे, ‘भोजपुरी प्रकाशन के सइ बरिस’, जवना में सन् 1882 ई0 से लेके 1902 ई0 के बीच में प्रकाशित तमाम भोजपुरी किताबन के ब्योरेवार जानकारी दिआइल बाटे. शोधी लोग खातिर ई ग्रन्थ आंख के काम करी, जवना के प्रकाशन भोजपुरी अकादमी 1982 ई0 में कइलस. पं0 गणेश चौबे जी मरे से पहिले अपना तीन गो ग्रन्थ के अंतिम रूप देवे में लागल रहनी. पहिला प्रमुख ग्रन्थ बा- ‘भोजपुरी हिन्दी कोश’ जवना में लगभग 25 हजार भोजपुरी के आपन शब्द के संग्रह कइनी. अउर दू ग्रन्थ भोजपुरी लोकगीत, आ लोककथा पर रहे जवन पूरा ना हो सकल.

भोलानाथ गहमरी- ( जन्मतिथि- 17 दिसंबर, 1923 )
अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष भोलानाथ गहमरी जी के तीन गो भोजपुरी गीत संग्रह प्रकाशित भइल जवन गहमरी जी के प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंचा देलस- बयार पुरवइया, अंजुरी भर मोती आ लोक रागिनी. गहमरी जी भले तीन गो हिन्दियो के रचना कइले बानी लेकिन इहाँ के पहचान भोजपुरी गीतन के राजकुमार के रूप में भइल. कवने खोंतवा में लुकइलू आहि रे बालम चिरई ...जइसन कालजयी गीत के ना सुनले होई. भोजपुरी के हीनता-बोध से बाहर निकाल के जन-जन में भोजपुरी के प्रति स्नेहिल समादर-भाव भरे वाली उहाँ के एगो रचना बा -
नेह सनल भाषा ई / अमिरित रस घोरे,
गाँव नगर गीत मधुर/ प्रान संग जोरे,
पतझर के दिन जइसे लागे बहार के
जय-जय-जय-जय हिन्दी बिन्दी लिलार के,
जय-जय-जय भोजपुरी पायल झनकार के..

कैलाश गौतम- ( पुण्यतिथि- 9 दिसंबर, 2006 )
कैलाश गौतम लोक कवि, जन कवि, गँवई संस्कृति के कवि, आदमी के दिल में सीधे उतर जाए वाला कवि, देर तक गूँज-अनुगूंज करत रहे वाला लोकप्रिय कवि. 'अमौसा के मेला ', 'गुलबिया के चिठ्ठी ', 'बड़की भौजी, 'कचहरी न जाना',' गाँव गया था गाँव से भागा', 'पप्पू की दुल्हन'.... हर कविता में लोक के प्रति संवेदना, मनःस्थिति के मनमोहक चित्रण, गाँव के मिट्टी के खुशबू आ मिठास. गागर में सागर भरे के अद्भुत क्षमता. 8 जनवरी 1944 में चंदौली (उत्तर प्रदेश) में जनमल कैलाश जी आल इंडिया रेडियो के आकाशवाणी इलाहाबाद केंद्र से जुड़ल रहनी आ उहाँ से मुक्त होते हिंदुस्तान अकादमी के अध्यक्ष पद प मनोनीत हो गइनी.

उत्तर प्रदेश सरकार के सर्वोच्च सम्मान यश भारती आ प्रसिद्ध ऋतुराज सम्मान जइसन अनेक सम्मान से सम्मानित कैलाश गौतम जी के किताब बा - 'सीली माचिस की तीलियाँ '(कविता संग्रह), जोड़ा ताल '(कविता संग्रह), 'तीन चौथाई आन्हर ' (भोजपुरी कविता संग्रह), 'सिर पर आग '(गीत संग्रह), 'तंबुओं का शहर '(उपन्यास), 'आदिम राग' (गीत-संग्रह), 'बिना कान का आदमी' (दोहा संकलन) अउर 'चिन्ता नए जूते की '(निबंध-संग्रह).

शैलजा श्रीवास्तव- ( पुण्यतिथि- 31 दिसम्बर 1989)
शैलजा जी के जन्म सारण, बिहार के एगो प्रबुद्ध आ प्रतिष्ठित परिवार में भइल रहे. उच्च शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय में भइल जहाँ से संस्कृत में स्नातक कइनी आ बाद में सहित्याचार्य के परीक्षा में स्वर्ण पदक प्राप्त कइनी. शिक्षा विभाग, बिहार सरकार में 1985 तक कार्यरत रहनी. “चिंतन कुसुम “ (1981) आ “कादम्बरी “ (2013) दु गो महत्वपूर्ण किताब भोजपुरी में प्रकाशित आ पुरस्कृत बा. दर्जनों कहानी आकाशवाणी पटना आ गोरखपुर से प्रसारित बा लेकिन अप्राप्य बा.

शैलजाजी के भाषा के आत्मा काव्यात्मक ह चाहे उहाँ के रचना हिंदी, भोजपुरी आ उर्दू में होखे. साथ ही उहाँ के गद्य- लेखन में महारत हासिल रहे, भोजपुरी भाषा में ओईसन गद्य के सर्वथा अभाव बा. शैलजा जी के रचना संसार से मुख़ातिब भइला के बाद जे बात सबसे ज़्यादा प्रभावित करेला उ ह भाव आ भाषा में लय, एकरूपता आ भाषा आ भाव के सहज संप्रेष के क्षमता. अद्भुत शब्द चयन के साथ मनोहारी प्रतीक आ बिम्ब उहाँ के प्रवाहमयी भाषा के सरसता आ ऊँचाई प्रदान करेला. शैलजा जी के रचना संसार एगो सुंदर फुलवारी जइसन बा जेकर व्यापक आयाम के मूल्याँकन अभी पूर्ण रूप से नइखे भइल. अपना जीवन काल में अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन के आयोजक के रूप में भी उहाँ के महत्वपूर्ण योगदान रहे. विदुषी आ कुशल प्रशासक शैलजा जी बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न होखे के साथ साथ स्नेह आ सौहार्द के प्रतिमूर्ति रहनी.

शैलेन्द्र- ( पुण्यतिथि- 14 दिसम्बर 1966)
शैलेन्द्र भारतीय सिनेमा जगत के एगो बड़ शख्सियत रहनी. बॉलीवुड में एक से बढ़के एक सदाबहार गीत लिखला के बाद उहां के धमक भोजपुरी में भी देखे के मिलल. भोजपुरी के पहिला फिलिम ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ के गीत उहें के लिखनी. ई आश्चर्य के विषय बा कि रावलपिंडी, पंजाब (ब्रिटिश इंडिया) में पैदा भइल आ मथुरा में पलल बढ़ल अउरी मुंबई में रहे वाला शैलेन्द्र भोजपुरी के एतना सुंदर अउरी ऐतिहासिक गीत लिखनी.

उहां के हिंदी फिलिम तीसरी कसम के गीत ‘चलत मुसाफिर मोह लियो रे’ के भुलाइल ना जा सकेला. हालांकि एकरा पीछे शैलेन्द्र के भोजपुरिया कनेक्शन रहे. उहां के पूर्वज लोग बख्तियारपुर आरा (बिहार) के निवासी रहे त शैलेन्द्र के अन्दर भोजपुरी भाषा के संस्कार परिवार से मिलल रहे.
30 अगस्त 1923 के जनमल शैलेन्द्र के मृत्यु मात्र 43 साल के उमिर में ही हो गइल, जेकरा पीछे लोग उहां के निर्माण कइल एकमात्र फिलिम ‘तीसरी कसम’ के बुरा तरह से फ्लॉप भइल मानेला. इहे फिलिम बाद में हाउसफुल रहल आ हिंदी सिनेमा के क्लासिक फिलिम साबित भइल. शैलेन्द्र भोजपुरी के कई गो उल्लेखनीय फिलिम में गाना लिखनी जइसे कि मितवा, नइहर छुटल जाए, गंगा, सइयां से नेहिया लगइबे, विधना नाच नचावे आदि.

लक्ष्मण शाहाबादी- (पुण्यतिथि- 19 दिसम्बर 1991)
शिवगंज, आरा के रहनिहार, 16 मई 1938, में जनमल लक्ष्मण प्रसाद श्रीवास्तव उर्फ लक्ष्मण शाहाबादी के फ़िल्मी गीत-संगीत ना खाली भोजपुरिहा लोग अपितु दोसरा भाषा के भोजपुरी प्रेमी लोग भी अक्सर गुनगुनात रहेला. इहाँ के गीत-संगीत आ संवाद के वजह से कई दर्जन फिल्म सुपर-डुपर हीट भइल. कुछ फिल्म में इहां के सिर्फ गीत लिखले बानी, कुछ में गीत आ संवाद दुनो. कुछ में गीत आ संगीत दुनो देले बानी आ कुछ में गीत-संगीत के साथे संवाद लेखन भी कइले बानी. शाहाबादी जी के कुछ प्रमुख फिल्म बा
गीत-संवाद- धरती मईया, गंगा किनारे मोरा गाँव , गीत-संगीत-संवाद- दूल्हा गंगा पार के, छोटकी बहू', गीत-संगीत- ‘दगाबाज बलमा’, हमार दूल्हा, 'गंगा-ज्वाला', 'बेटी उधार के', 'गंगा आबाद रखिहऽ सजनवा के', 'राम जइसन भइया हमार', गीत - सजाई द मांग हमार, पिया निर्मोहिया, गंगा सरजू, भैया दूज, पिया परदेसिया बिहार सरकार के सिंचाई विभाग में अकॉउंटेंट रहनी लक्ष्मण शाहबादी जी बाकिर जब फिल्म में मामला जमे लागल त लिभ विदाउट पे लेके पूरा समर्पित होके फिल्म में काम करे लगनी. गीतकार-संगीतकार के रूप में स्थापित हो गइनी त फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी उतरनी. चर्चित कथाकार मधुकर सिंह के कहानी पर फिल्म बनल दूल्हा गंगा पार के. एह फिल्म के निर्मात्री रानीश्री लक्ष्मण शाहबादी जी के धर्मपत्नी हईं. दूल्हा गंगा पार के फिल्म के संवाद, गीत, संगीत सब शाहाबादी जी के ह. 1986 में बनल उनइस गो फिलिम में से सबसे सफल फिल्म साबित भइल रहे दूल्हा गंगा पार के. एह फिल्म के गीत, “बोल बम के नारा बा, इहे एक सहारा बा” चाहे ” स्वागत में गारी सुनाई जा, चलs सखी मिलके, केकरा ईयाद नइखे.

सुप्रसिद्ध संगीतकार ‘चित्रगुप्त’ जी के साथ भी लक्ष्मण जी के जोड़ी खूब जमल. गंगा किनारे मोरा गांव आ धरती मईया एही जोड़ी के कमाल के नाम ह. लक्ष्मण शाहाबादी के लिखल धरती मईया के गीत ‘जल्दी जल्दी चलू रे कहँरा’, केहू लुटेरा केहू चोर हो जाला’, ‘ जाने कइसन जादू कइलू, मन्तर दीहलू मार’, चाहे गंगा किनारे मोरा गांव के गीत, जइसे रोज आवेलू तू टेर सुन के, मेला में सइयां भुलाइल हमार, दे द पीरितिया उधार धरम होई, भीजे रे चुनरी भीजे रे चोली भीजे बदनवा ना आ चाहे जिआ द सइयां चाहे मुआ द, तहरे भरोसे बानी किरिया खिआ ल, ओह घरी गांव-गांव, गली-गली गूंजे. साहित्य आ सिनेमा के बीच संतुलन के नाम ह लक्ष्मण शाहाबादी. उनकर श्रृंगार गीत भी कमाल के होत रहे, “चांद जइसे चमके तोहार देहिया” चाहे अलका याग्निक के आवाज़ में,“ अइसे जन रूपवा निहार ए सजन हमरा लाज लागेला” में केतना सलीका से बात कहाइल बा.

भैया दूज’ के गीत ‘कहंवा गइल लरिकइयां हो, तनी हमके बता द’ चाहे ‘एही फागुन में कई द बियाह बुढ़ऊ’ केतना लोकप्रिय भइल रहे. चाहे ‘दुलहा गंगा पार के’ के टाइटल गीत ‘काहे जिया दुखवलs, चल दिहलs मोहे बिसार के / अतना बता द ए दुलहा गंगा पार के’ आहा, आहा लइकिया गुनगुनाते रहs स.
19 दिसम्बर 1991 के भोजपुरी संगीत के ई सितारा धरती छोड़ के आकाश में टिमटिमाये लगलें लेकिन उनका गीत-संगीत से आज भी रौशन बा भोजपुरी सिनेमा के संसार. ई अलग बात बा कि केहू उनका खातिर भा उनका नाम पर कुछ ना कइल, उनकर आपन कहाये वाला लोग भी. तब हमरा उनके लिखल गीत ईयाद आ गइल,
"कहे के तs सभे केहू आपन, आपन कहाये वाला के बा....

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के मर्मज्ञ हैं और ये इनके निजी विचार हैं. )

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