Bhojpuri: लोहिया जी के नाराजगी के बाद भी बी पी मंडल मंत्री बनल रहले, लेकिन...

सुशील मोदी अउर रोहिणी आचार्या के ट्वीटर पs लड़ाई तs खतम होखे के नांवे नइखे लेत. घरेलू महिला (राबड़ी देवी) के मुखमंतरी बनावे के बात पs बिबाद हो रहल बा. ई समाजवादी विचारधारा के भटकाव कहल जाई कि राबड़ी देवी मुखमंतरी बन गइली. अगर राममनोहर लोहिया जिंदा रहिते तs ऊ जरूर एकर बिरोध करिते. का राजद में अउर केहू घरेलू महिला ना रही ?

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नीलाभ भइया के बगइचा में आम तुरात रहे. उनकर छोट भाई वेदप्रकाश आम बटोरत रहन. नीतिमोहन के फोन गइल तs उहो बगइचा में आ गइले. नीतिमोहन अइले तs वेदप्रकाश उनका साथे मचान पs बइठ के बतियावे लागले . अतने में नीलाभ भइया पानी में डूबल एक बल्टी आम ले अइले. वेदप्रकाश मोबाइल बंद कर के कहले, नीलाभ भइया, सोनरिअववा आम के मिठास के कवनो जबाब नइखे. ई आम ना मिसरी के ढेला हs. तीनों जना बल्टी में से आम निकाल के खाये लागल लोग.

नीतिमोहन आम के चोभा मार के कहले, ई बगइचा में तs मिठास के बहार बा लेकिन बिहार के राजनीत में खंटास ही खंटास बा. सुशील मोदी अउर रोहिणी आचार्या के ट्वीटर पs लड़ाई तs खतम होखे के नांवे नइखे लेत. घरेलू महिला (राबड़ी देवी) के मुखमंतरी बनावे के बात पs बिबाद हो रहल बा. नीतिमोहन के बात सुन के नीलाभ भइया कहले, ई समाजवादी विचारधारा के भटकाव कहल जाई कि राबड़ी देवी मुखमंतरी बन गइली. अगर राममनोहर लोहिया जिंदा रहिते तs ऊ जरूर एकर बिरोध करिते. का राजद में अउर केहू घरेलू महिला ना रही ? ई का राजशाही हs कि राजा अपना जगह पs पत्नी के गद्दी पs बइठा दिहें ?

1967 के बिधानसभा चुनाव

वेदप्रकाश पूछले, आच्छा नीलाभ भइया, एह बिबाद में राममनोहर लोहिया के नांव कइसे आ गइल ? अगर ऊ जिंदा रहिते तs कइसे राबड़ी देवी को मुखमंतरी बने के विरोध करिते ? आम के आंठी फेंक के नीलाभ भइया कहले, राममनोहर लोहिया करम अउर धर्म से समाजवादी रहन. ऊ ‘सौ में पावे साठ’ के बात जरूर कर रहन लेकिन राजनीत में नियम सिद्धांत के भी ओतने जरूरी मानत रहन. ऊ राजनीत में जात के नांव पs पैदा के उठावे के बिरोधी रहन. 1967 के बिहार बिधानसभा चुनाव में पहिल बेर गैरकांगरेस सरकार बनल रहे. ई अजगुत खिचड़ी सरकार रहे. पहिला बेर जनसंघ के साथे कौमनिस्ट भी सरकार में शामिल भइले. संसोपा के जनक्रांति दल भी समर्थन मिलल रहे. महामाया प्रसाद सिन्हा मुखमंत्री बनले. करपूरी ठाकुर ठाकुर शिक्षा मंतरी बनले. ओह घरी बी पी मंडल भी समाजवादी पार्टी के नेता रहन. यादव समाज में उनकर बहुत अच्छा परभाव रहे. 1967 के लोकसभा चुनाव में बीपी मंडल सांसद चुनाइल रहन. लेकिन जब बिहार में महामाया सरकार बने लागल तs बीपी मंडल भी मंतरी बने खातिर जिद करे लगले. समाजवादी पाटी के नेता लोग बीपी मंडल के समझावे लगले कि सांसद चुनइला के बाद राज्य सरकार में मंतरी बनल ठीक बात नइखे. लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देला के बाद उपचुनाव के भी जोखिम उठावे के पड़ी. लेकिन बीपी मंडल बिहार में मंतरी बने के जिद पs अड़ल रहले.
का सोचत रहन लोहिया जी ?

नीतिमोहन पूछले, का बीपी मंडल के जिद पूरा भइल ? नीलाभ भइया जबाब देले, बीपी मंडल के जिद के बात जब राममनोहर लोहिया के मालूम भइल तs बहुत अनराज भइले. मिलीजुली सरकार में दल के संख्याबल के मोताबिक जगह देवे खातिर मगजमारी होत रहे. एह धक्काधुक्की में अगर कवनो सांसद के मंतरी बनावल जाइत तs एक बिधायक के हकमारी हो जाइत. बीपी मंडल जब मनवला से ना मनले तब लोहिया जी धमाका कर देले. लोहिया जी के निजी सचिव उर्मिलेश जी के एगो चिट्ठी पटना के अखबार में छपल. अपरील 1967 में छपल ई चिट्ठी में लिखल रहे, यादव महासंघ अउर दोसर यादव नेता लोहिया जी भिरी चिट्ठी लिख के बीपी मंडल के महमाया सरकार में मंत्री बनावे के मांग कर रहल बाड़े. अइसन हजारों चिट्ठी आ रहल बा. लेकिन सवाल ई बा कि का मंडल बाबू ही खाली जादव कुल में पैदा भइल बाड़े ? बिनायक परसाद जादव, रामसेवक सिंह, रामएकबाल बरसी, प्रेमलता राय भी जादव कुल के ही नेता हवें. नियम सिद्धांत तूरला से का जादव कुल के रक्षा हो सकेला ? लोहिया जी के नाराजगी के बादो बीपी मंडल मंत्री बने के जिद ना छोड़ले. बिहार में पहिला बेर गैरकांगरेस सरकार बनावल जादा जरुरी रहे. मोसकिल से कांगरेस के हार भइल रहे. आपसी लड़ाई में अगर ई मौका हाथ से निकल जाइत तs जनता माफ ना करित. लोहिया जी चुप लगा गइले. बीपी मंडल सांसद रहते हुए भी बिहार में हेल्थ मिनिसटर बन गइले.

लोहिया जी के बात ना माने के का नतीजा भइल ?



वेदप्रकाश पूछले, एकरा बाद का भइल ? नीलाभ भइय कहले, लोहिया जी के निक बात केहू ना मानल लेकिन एकर कीमत समाजवादी पाटी के चुकावे के पड़ल. 1967 के चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (संसोपा) , कांगरेस के बिकल्प के रूप में उभरल रहे. लेकिन सोशलिस्ट पाटी में सवारथ के अइसन लड़ाई शुरू हो गइल कि दू तीने साल में कहनी खतम हो गइल. बीपी मंडल मंतरी बनले. 51 दिन खातिर मुखमंतरी भी बनले लेकिन एकर नतीजा ई भइल कि गैरकांगरेस सरकार टूट फूट के बरबाद हो गइल. जवन गैरकांग्रेसवाद लोहिया जी के सपना रहे ओकरा के भूला के बीपी मंडल कांगेरस के ही सहजोग से सरकार बनवले. लेकिन कांग्रेस 51 दिन बाद कांग्रेस के ही कुछ नेता अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में भोट देके मंडल सरकार गिरा देले. एकरा बाद कांग्रेस के लीडर भोला पासवान शास्त्री के अगुआइ में सरकार बनल. समाजवाद के सपना बालू के भीत अइसन भरभरा गइल. लोहिया जी पिछड़ावाद से प्रबल समरथक रहन लेकिन ओकरो से बेसी राजनीति में सिद्धांत के समरथक रहन. अगर लोहिया जी 1997 में जिंदा रहिते तs ऊ रबड़ी देवी के भी मुखंतरी बने के विरोध कर सकत रहन. ओह घरी लालू जादव के जगह लेवे खातिर जनता दल में कईअक गो मजबूत नेता रहन. नीलाभ भइया के बात सुन के वेदप्रकाश अउर नीति मोहन सोच बिचार में डूब गइले. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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