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Bhojpuri: देव दिवाली: आज धरती से अकासे तक जगमगाई तिरलोकी क नगरी काशी

Bhojpuri: देव दिवाली: आज धरती से अकासे तक जगमगाई तिरलोकी क नगरी काशी

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तीनों लोक क तेवहार काशी क देव दिवाली आइ गयल हौ. आज तिरलोकी नाथ के माथे क चंद्रमा तृतीया से पूर्णमासी में बदलि जाई जब एक साथे लाखन दीया से काशी अकासे से लेइ के जमीनी तक अजोरिया से नहाइ उठी. जइसे 33 करोड़ देवता दिवाली मनावय काशी आवयलन, ओइसय असमाने क कुल तरई दीया बनि के काशी में टिमटिमाए लगयलिन. काशी क लोग देवतन के स्वागत बदे पूरी तरह तइयार हउअन.

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आज हर घर, मंदिर, कुंड, पोखरा, तलाब दीया से जगमगाइ उठिहय. सरकार के ओरी से एह साल कुल 12 लाख दीया गंगा माई के 84 घाटन पर अउर घाटन के ओह पार रेती में जरावय क बंदोबस्त कयल गयल हौ. एकरे अलावा लगभग 10 लाख दीया शिव क गण लोग यानी काशी वासी अपने ओरी से अपने-अपने घरन पर, 23 हजार मंदिरन में, सैकड़न कुंड अउर तलाबन पर जरइहय.

गंगा घाटे पर अउर घाटे के ओह पार रेती में दीया जरावय बदे कुल 120 समिति बनावल गइल हौ अउर हरेक समिति के एक-एक हजार दिया जरावय क जिम्मेदारी देहल गइल हौ. एकरे बदे ओन्हय दिया, बाती अउर 21 हजार लीटर सरसों क, तिल्ली क तेल सरकार के ओरी से बांटल गयल हौ. बनारस के अलावा जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, चंदौली के कोहारन से दीया खरीदल गयल हयन. दीया क आर्डर काफी पहिलय पर्यटन विभाग देइ देहले रहल. दशाश्वमेध अउर अस्सी घाटे पर गोबरे से बनल दीया जराइ जइहय.

पर्यटन विभाग के एक अधिकारी क कहना हौ कि एह साल देव दिवाली क कई ठे आकर्षण हयन. पंचगंगा घाटे क हजारा दीपस्तंभ अउर अकाश दीप त देव दिवाली क नैसर्गिक आकर्षण हयन, एह साल असमाने से काशी दर्शन क विशेष व्यवस्था कयल गयल हौ. गरम हवा वाला गुब्बार से काशी क असमानी नजारा लेवय क बंदोबस्त पहिली बार भयल हौ. एक गुब्बारा के उड़ान में चार से बारह लोग सवार होइहय. गुब्बारा उड़ावय वाला आठ ठे विशेषज्ञ पायलट लिथुआनिया, पोलैंड अउर ब्रिटेन से आयल हयन. गुब्बारा उड़ान एक घंटा क होई अउर एकर टिकट 300 रुपिया रखल गयल हौ. लेकिन कोरोना योद्धा, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, पद्मपुरस्कारी, अनाथ बच्चा, रेहड़ी-पटरी वाला अउर कवनो क्षेत्र में खास योग्यता रखय वाली औरतन बदे इ उड़ान मुफ्त रखल गयल हौ.

एकरे अलावा खिड़किया घाटे पर आतिशबाजी अउर चेतसिंह घाटे पर लेजर शो क आयोजन कयल गयल हौ. राजघाट पर चार दिना क गंगा महोत्सव भी विश्वमोहन भट्ट के वीणावादन के साथे 17 नवंबर से शुरू होइ गयल हौ, जवने क समापन 20 नवंबर के स्थानीय कलाकारन के सम्मानित कइ के कयल जाई. पिछले साल कोरोना के नाते गंगा महोत्सव नाहीं होइ पइले रहल. कुल मिलाइ के काशी एह समय कोरोना क दरद भुलाइ के आस्था अउर उत्सव के दुनिया में डूबि गयल हौ.

काशी भगवान शिव क नगरी हौ, अउर भोलेनाथ कातिक पुन्नवासी के राक्षस राज तारकासुर के तीन लड़िकन क यानी त्रिपुरासुर क बड़े मुश्किल से बध कइले रहलन. ओही खुशी में देवता लोग स्वर्ग से काशी उतरि अइलन अउर तिरलोकी नाथ क आरती-पूजा कइलन, दिवाली मनइलन. उहय परंपरा आज भी काशी क लोग निभात हयन. देवतन के स्वागत में अकास दीप अउर धरती दीप जरावयलन. पहिले देव दिवाली क तेवहार व्यक्तिगत रहल, लेकिन 1915 में सार्वजनिक देव दिवाली मनावय क शुरुआत भइल. आज इ तेवहार आपन रोशनी पूरी दुनिया में बिखेरत हौ. काशी में गंगा अर्धचंद्राकार हइन. कहल जाला कि गंगा बाबा के माथे क आधा चांद हइन अउर जब कातिक के पुन्नवासी के गंगा क किनारा दीया से जगमगाए लगयला त इ आधा चांद पूर्णिमा में बदलि जाला. आस्था क इ अद्भुत दृश्य निहारय बदे देश-दुनिया से लोग काशी में उमड़यलन. घाटन पर सरसों फेंकय क जगह नाहीं रहि जात.

कोरोना के नाते पिछले साल देशी-विदेशी पर्यटक देव दिवाली पर काशी नाहीं आइ पइलन, स्थानीय लोगन के सहारे ही देव दिवाली मनावल गइल रहल. काशी के पर्यटन उद्योग से जुड़ल लोगन क बहुत नुकसान भइल रहल. लेकिन एह साल स्थिति कुछ सुधरल हौ. विदेशी पर्यटकन क टोटा हलांकि एह साल भी हौ, लेकिन देसी पर्यटकन क आमद बढ़ल हौ. होटल, नाव अउर बजड़ा क बुकिंग भी पिछले साल से जादा भइल हौ. एदइयां खास बात इ हौ कि होटल वाला ही एक साथे देव दिवाली क पूरा पैकेज बुक कइले हउअन, जवने में रहना-खाना, घूमना-फिरना अउर गंगा दर्शन, नौका विहार कुल शामिल हौ.

निषादन क नेता वीरेंद्र निषाद क कहना हौ कि विदेशी पर्यटक आवयलन त काफी फरक पड़यला, काहेें से कि एक विदेशी पर्यटक कम से कम डेढ़ से दुइ लाख रुपिया खर्च करयलन, जवने से नौका वालन के, होटल वालन के अउर दूसर दुकानदारन के सबके कुछ न कुछ फायदा होला. जबकि देसी पर्यटक कम से कम में काम निकालय चाहयलन. कमाई के लिहाज से देसी अउर विदेशी पर्यटकन में लगभग आधा से अधिक क अंतर होला. एह साल क स्थिति हलांकि पिछले साल से थोड़ा ठीक हौ, लेकिन कोरोना से पहिले वाली बात नाहीं हौ जब पूरा नाव-बजड़ा महीना दस दिना पहिलय बुक होइ जात रहलन. वीरेंद्र के अनुसार, एह साल साठ प्रतिशत से अधिक नाव, बजड़ा बुक भयल हयन. बनारस में छोट बड़ लगभग दुइ हजार नाव हइन. लगभग इहय हाल होटल क भी हौ. होटल कारोबारी हरीश सिंह क कहना हौ कि पिछले साल से स्थिति सुधरल हौ लेकिन पहिले वाला मजा नाहीं हौ. ओनकर कहना हौ कि देव दिवाली से जादा बुकिंग शादी-बियाह क हौ, जबकि पर्यटकन के आवय क इहय असली मौसम हौ. बनारस में लगभग साढ़े पांच सौ छोट बड़ होटल हयन, घाटे के किनारे छोड़ द त बाकी होटल खाली हयन.

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News, Diwali 2021

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