Bhojpuri Spl: वामपंथियन के अउर कमजोर करी विचारधारा से भटकाव

बंगाल क वामपंथी दल भी सालों से धर्म बा धार्मिक विचारधारा से दूरी बनवले रहे. देश क सेकूलर संविधान के बादो बंगाल क वामपंथी दल सब धर्म के समान भाव से नाही देख कर सब धर्म से दूरी बनवले रहे. कहे क माने इ कि बंगाल में तीन दसक तक वामपंथी राज में कौअनों धर्म के खुश बा नाराज करे क कौअनों परयास नाही भइल.

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  • Last Updated: March 12, 2021, 1:45 PM IST
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महान जर्मन दार्शनिक अउर मार्क्सवादी विचारधारा क जनमदाता कार्ल मार्क्स मानव जाति खातिर धर्म के अफीम क निशा के बरोबर मानत रहलें. माने कि मनुष्य धर्म क ओट में सुख खोजत रहेला अउर समूचा जिनगी दुख से घेराइल रहेला. इ विचारधारा के मानेवाला दुनिया भर क मार्क्सवादी लोग धर्म से दूर रहेगा क ही परयास करेला. बंगाल क वामपंथी दल भी सालों से धर्म बा धार्मिक विचारधारा से दूरी बनवले रहे. देश क सेकूलर संविधान के बादो बंगाल क वामपंथी दल सब धर्म के समान भाव से नाही देख कर सब धर्म से दूरी बनवले रहे. कहे क माने इ कि बंगाल में तीन दसक तक वामपंथी राज में कौअनों धर्म के खुश बा नाराज करे क कौअनों परयास नाही भइल. शायद एही के चलते वामपंथी राज में कौअनों तरह क धार्मिक तनाव भी नाही भइल.

शासन सत्ता जाए के बाद बंगाल में कमजोर हो गइल वामपंथी दल अब आपन विचारधारा से ही भटके लागल ह. विधानसभा चुनाव से पहिले कांग्रेस के साथे महाजोट बन जइला के बादो वामपंथी दल फुरफुरा शरीफ क मुखिया अब्बास सिद्दकी क इंडियन सेकूलर फ्रंट के साथे चुनावी तालमेल कइके इ बात साबित कर देलस कि बंगाल क वामपंथी अब आपन विचारधारा से समझौता करे लागल ह. कांग्रेस त केरल में पहिले भी मुस्लिम लीग के साथे चुनावी तालमेल करत रहे. केरले में एक बार वामपंथी दलो हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा वाला भारतीय जनसंघ के साथे सरकार बनवले रहे. लेकिन उ एक बार क परयोग रहे ओकरा बाद कब्बो दूनो विचारधारा साथे नाही आइल. अब वामपंथी दल बंगाल में इ परयोग करत ह. का इ सब मुस्लिम वोटरन के अपना ओर करे खातिर कइल गइल परयास ह कि मुस्लिम वोट में विभाजन करे क रणनीति ह जेसे कि ममता दीदी क पार्टी क हार तय हो सके. इ तरह क सवाल बंगाल क बुद्धिजीवियन क मन में चल रहल ह.

वामपंथी दलन क परयोग बा रणनीति चाहे जौअनों हो लेकिन उनकर एगो धार्मिक संगठन वाला दल के साथे चुनाव लड़े क फैसला देर सबेर इ दलन के ही कमजोर करी. काहे से कि वामपंथी विचारधारा वाले बुद्धिजीवी चाहे उ बंगाल क होखे बा देश भर क, इ चुनावी तालमेल से नाराज हउअन. सबकर सोच इहे ह कि आपन विचारधारा से समझौता कइला से वामपंथी दलन क कौअनो भला नाही होई. उलटे भाजपा के ही लाभ होई. अब बंगाल क वामपंथियन के मन में ममता से बदला लेवे क भावना जोर मारत हव त अलगे बात ह लेकिन भाजपा के लाभ पहुंचावे क हद तक बदला लेवे क उनकर भावना उनके अउरों कमजोर करी. विचारधारा से भटकला क नुकसान बंगाल के वामपंथी दलन के पहिले भी हो चुकल ह. ज्योति बसु क राज में पड़ोस क देश बांग्लादेश क लेखिका तसलीमा नसरीन क पुस्तक लज्जा क प्रकाशन के बाद जब उहा क कठमुल्लन के चलिता तसलीमा के देश छोड़े क पड़ल त बंगाल क वामपंथी राज में ही उनके संरक्षण मिलल. बाद में बुद्धदेव भट्टाचार्या के राज में बंगाल क कठमुल्लन के दबाव में वामपंथी सरकार आपन हाथ खड़ा कर देलस त तसलीमा के दिल्ली आवे क पड़ल.

इ खाली संजोग ना ह कि एकरा बादे 2011 क विधानसभा क चुनाव में वामपंथियन क बिदाई हो गइल. तीस साल क राज में वामपंथी सरकार पर बंगाल में कल कारखाना चौपट होवे से लेके चहू ओर विकास रुकले क दागो लगल लेकिन जब से बुद्धदेव बाबू राजकाज संभलने तब से नया उद्योग धंधा लगावे क परयासों होइल. एही के चलिते सिंगूर अउर नंदीग्राम आंदोलन भी होइल जेके सहारे ममता दीदी बंगाल क सत्ता पर कबजा जमा पइलीं. इ संजोग ह कि बंगाल के विकास रोके क दाग मिटावे क परयास में ही वामपंथी सरकार बंगाल से मिट गइल. लेकिन एकरा पीछे कहीं न कहीं कठमुल्लन के आगा ठेहूना टेकले क भी नुकसान भी वामपंथियन के होइल. जेके नाराज नाही करे क परयास रहे उहे वोटबैंक ममता के साथे चल गइल अउर सेकूलर हिंदू भी नाराज भइलें से अलगा. 2019 क लोकसभा चुनाव में त बचल खुचल वामपंथी हिंदू भी भाजपा के साथे चल गइलें जेकरा चलिते भाजापा बंगाल में आपन सांसदन क संख्या 2 से बढ़ा के 18 तक ले गइल. ममता क भी धर्म विशेष के लोगन के खुश करे क परयासे भाजपा के बंगाल में आपन जड़ मजबूत करे में काम आइल.
इतिहास गवाह ह कि सेकूलर देस में जब कबहू कौअनो धर्म विशेष के लोगन क खुश करे क परयास होइल सत्ता में बइठल लोगन के नुकसाने उठावे क पड़ल. 1986 में शाह बानो केस सुप्रीम कोर्ट क फैसला के बाद जब मुस्लिम समाज नाराज हो गइल त ओके दूर करे खातिर राजीव गांधी संसद में कानून बना देलें. इ कानून बनले से हिंदू समाज क लोग नाराज हो गइलें कि कांग्रेस सरकार मुस्लिम समाज के खुश करे खातिर सुप्रीम कोर्ट क फैसला पलट देलें. कहल जाला कि राजीव गांधी हिंदू समाज क नाराजगी दूर करे क परयास में आपन सलाहकारन क सलाह पर अयोध्या में विवादित स्थल क ताला खुलवा देलें. ओकरा बादे से देस क राजनीति में एगो नया मोड़ त अइबे करल, कांग्रेस से मुसलमानों बिजुक गइलें. कहे क माने इ कि राजीव गांधी क एके खुश करे ओके नाराज करे फेरो ओके खुश करे ओके नाराज करे क रणनीति क नुकसान कांग्रेस के आजो तक झेले क पड़त ह. कहे क मतलब इ कि आपन विचारधारा से केहू तरह क समझौता राजनीतिक दलन के ही देर सबेर नुसकान पहुचवले ह अउर आगे भी पहुंचावत रही. बंगाल में वामपंथी दलो उहे रास्ता पर चलत हउअन. (लेखक सुशील कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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