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Bhojpuri में पढ़ें- सचहूं प्रेम गली बहुते सांकर बिया

Bhojpuri में पढ़ें- सचहूं प्रेम गली बहुते सांकर बिया

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गांव के बाजार में अचानके एगो बुजुर्ग सवाल क दिहुअन- “नवहा लोगन में ढेर जाना तलाक के केस लड़ता. ई काहें जी? जीवन भर साथ निभावे वाली परिपाटी कहां बिला गइल?” सचहूं पहिले छोट जिलन में फैमिली कोर्ट में तलाक के कौनो ममिला ना सुनात रहल ह. आजकाल कई गो जिलन में फैमिली कोर्ट में तलाक के फाइलन के अंबार लागल बा.

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त गौर कइला पर पता चलता कि ना पति में बर्दास्त करेके स्वभाव बा आ ना पत्नी में. पति होखो भा पत्नी, अहंकार नाक पर बइठल रहता. नई पीढ़ी के अधिकांश लड़का- लड़की समझदार, एडजस्ट करे वाला आ कर्मठ बा लोग.

अधिकांश लड़किन में स्त्री मर्यादा के ख्याल बा, आ एगो गरिमा का साथे लड़की जीवन जीयतारी सन. कुछुए लड़की अइसन बाड़ी, जौन हर बतिए में सुपिरियारिटी चाहतारी सन. एह तरह के लड़की भा लड़का के ई भाव रहता कि हम्हीं जौन चाहतानी तौन होखो. हम्हीं घर के हर चीज कंट्रोल करीं. जे हमार ना सुनीं, ओकरा के हम ठीक क देब. पहिले जब लड़किन के बियाह होत रहल ह त महतारी लड़की के सिखा के भेजत रहलि ह- “बेटी केहू कुछ खराबो बोले त ओकर ख्याल मत करिह. बस आपन व्यवहार सही रखिह. धीरे- धीरे तोहार व्यवहारे तोहरा के सम्मान दियवावे लागी.”

गौर करीं त महतारी के ई शिक्षा वेद- उपनिषद के तितिक्षा के ट्रेनिंग रहल ह. माने आदमी के हर बात में उत्तेजित ना होखे के चाहीं, तनाव में ना आवे के चाहीं. अति भावुकता आदमी के जीवन के बैलेंस खराब क देले. इमोशन त ठीक बा बाकिर प्रेक्टिकल भी रहल जरूरी बा. त पहिले के महतारी जीवन मंत्र जानत रहल ह लोग. ईहे शिक्षा लड़का के भी देबे के चाहीं. जहां तक होखे बर्दाश्त कर. अति हो जाता तब रिएक्ट कर. अब शायद ओकर कमी हो गइल बा. संबंध निबाहे में एगो मिनिमम आचार संहिता होला. ऊ का? त सरकार जब जीवन भर साथे रहेके बा त ई मान के चलीं कि केहू भी आदमी संपूर्ण नइखे.

सबका में कुछ ना कुछ दोष बा. केहू में ढेर दोष बा त केहू में कम. पति भा पत्नी ओकरा के सुधारे के कोशिश करो बाकिर ओकरा के लेके बहुत तनाव में मत रहो. कोशिश सफल भइल त ठीक, आ ना भइल त कौनो बात ना. समझावत रहीं आ प्रेम, आदर आ सौहार्द्र के जगह छोड़ले रहीं. रउरा हृदय के कुल जगहिए घृणा, आक्रोश आ तनाव से भरि देब त प्रेम आ सौहार्द्र खातिर कौनो जगहिए ना बांची. एकर माने रउरा पाजिटिव चीजन के अपना अंतःकरण से दूर भगा देले बानी आ खाली निगेटिव चीज रउरा के घेरले रहता. अइसन ना होखे के चाहीं. त पति भा पत्नी के बीच प्रेम के एगो बरियार खूंटा गाड़े के जरूरत परेला. ई खूंटा तबे गड़ा सकेला जब अहंकार केंद्रीय स्थान पर ना रहे. ना त “हम बड़ त हम बड़” के तनाव जड़ जमावे लागी. त मुश्किल ई बा कि जौन नवहा जोड़ा तलाक के ममिला अदालत तक ले ले गइल बा, ओकरा बीच में इगो के लड़ाई बा.

कतने केस में त पति- पत्नी एक दूसरा के देखे के नइखे चाहत. हालांकि अइसन लोगन के संख्या तीस प्रतिशत के करीब बा. फिर भी अइसन प्रवृत्ति समाज में बढ़ो ना, एकर ख्याल राखे के परी. अच्छा, एगो अउरी बात बा. नवहा लोगन में कुछ पति भा पत्नी बड़ा बड़- बड़ उम्मीद लेके आवता लोग. बियाह का बाद हई सुख मिली, हऊ सुख मिली. हेतना घूमे- फिरे आ मार्केटिंग करे के मिली. जौन चाहब तौन होई. वगैरह, वगैरह. अब पति अपना नोकरिए में पिसाइल रहतारे, उनुका एतना टाइम नइखे कि ऊ जब चाहे तब इंज्वाय करे चल जासु. कंपनी वर्क फ्राम होम क देले बाड़ी सन त अपना कर्मचारी के सेंट्रल आफिस से मानीटर भी करतारी सन. अब पतिदेव, पत्नी के कहल करसु कि कंपनी के? जाहिर बा कंपनिए के कहल सुनिहें काहें से कि ओही से तनखाह मिले के बा आ ओही से घर चले के बा. ओने पत्नी अगर समझदार ना रहली त ताना मारे लगिहें आ पति के जीवन तनावपूर्ण हो जाई. ओहीतरे पत्नी भी अगर नौकरी करतारी त उनुकरो संगे कई गो जिम्मेदारी बा. नोकरी करे वाला दस घंटा, बारह घंटा तक कंप्यूटर पर वर्क फ्राम होम करता लोग. पति- पत्नी दूनो जदि एह समस्या से जूझता लोग तब त आपसी समझदारी बन जाई.

बाकिर ओही में एक आदमी जदि पति भा पत्नी से ज्यादा उम्मीद लगा के बइठल रही त दिक्कत बा. अरे भाई जतना देर तूं खटतार ओतने देर पत्नियो खटतारी. त पत्नी से ई उम्मीद काहें करतार कि ऊ तोहरा के ताजा रोटी आ स्वादिष्ट सब्जी बना के खिया देउ. अधिकतर पति समझदार बाड़े आ कामकाजी पत्नी से अइसन उम्मीद ना करेले. बाकिर कुछ मामलन में ई समस्या बा. ओहीतरे कुछ लड़कियो बा लोग जे खाली अपने सुविधा, असुविधा के देखता लोग. ओह लोगन में समग्र सोच नइखे रहत. एकांगी सोच रहता. सबका के लेके चले के परी. खाली पति- पत्नी रहता लोग तबो पति के पत्नी के आ पत्नी के पति के ख्याल राखहीं के परी. ओइजा जदि कौनो निजी स्वार्थ टकराता त लड़ाई- झगड़ा आ तनाव होखबे करी. एइजे तनी संवेदनशीलता के जरूरत बा. कुछ मामला में त ई देखल जाता कि लड़का- लड़की दूनो पढ़ल लिखल आ समझदार बा लोग बाकिर तबो लड़ाई होइए जाता. ओकर कारन जिद आ अहंकार का अलाव कुछु नइखे.

अब देखीं शादी के समय सात गो कौन- कौन वचन पति स्वीकार करेला. ई कुल बात वधू अपना वर से मनवावेले. पहिला वचन- कन्या वर से पहिला वचन मांगेले- जदि रउरा कबो तीर्थयात्रा करे जाईं त हमरो के अपना संगे लेके जाइब. जदि रउरा कौनो व्रत-उपवास भा दोसर कौनो धार्मिक काम करीं त अपना वाम भाग (बांयां ओर) बइठाइब. दोसरका वचन- जेतरे रउरा अपना मां- पिता जी के सम्मान करतानी ओही तरे हमरो मां- पिता जी के सम्मान करब. तिसरका वचन- रउरा हमार देखभाल युवावस्था, प्रौढ़ावस्था आ वृद्धावस्था में करब. चौथा वचन- परिवार के कुल दायित्व के जिम्मेदारी आ आवश्यकता के पूर्ति के जिम्मेदारी रउरा ऊपर रही-. पांचवां वचन- घर के काम- बियाह वगैरह, लेन-देन भा अन्य अउरी कौनो खर्च करत समय रउरा हमरो राय लेब. छठवां वचन- जदि हम अपना सहेलियन का संगे बइठल बानी त ओइजा रउरा हमार अपमान ना करब. रउरा जुआ वगैरह के दुर्गुण से दूर रहब. सातवां वचन- रउरा पराई स्त्री के मां अइसन समुझब. हमनी के पति- पत्नी के बीच केहू दोसर साझेदार ना रही.

त बियाह हमनी के 16 गो संस्कारन में से एगो ह. एकर जीवन में बड़ा महत्व बा. बहुत लोग कौनो कारन से जीवन भर कुंआरे रहि गइल बा. ओमें से ढेर लोग त अकेलहीं खुश बा. बाकिर कुछ लोग पछतात रहेला कि बियाह काहें ना कइनीं. बियाह भइल रहित त आपन सुख- दुख दोसरा से बंटितीं. त बहुत लोग मजाक में कहेला कि बियाह मथुरा के पेड़ा ह, जे खाला ऊहो पछताला आ  जे ना खाला ऊहो पछताला. खैर ई त भइल मजाक के बात. बाकिर नवहा लोगन में जौन कुछ लोग बियाह का बाद ना पटला से फट ते कोर्ट में तलाक खातिर मामला दायर क देता लोग, ओह लोगन के आत्मनिरीक्षण करेके चाहीं कि हमार कहां गलती बा. प्रेम तत्व के हर जगह जरूरत बा. आ प्रेम गली बहुते पातर होले, सांकर होले. एह गली के बंद कइल, जीवन भर तड़पे के रास्ता खोलल बा.

(विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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