Bhojpuri Spl: भोजपुरिया स्वाभिमान आ गौरव के अनमोल थाती रहन डॉ गणेश प्रसाद

डॉ. गणेश प्रसाद अइसन अनमोल रतन रहलन, जेकर नांव-जस सउंसे दुनिया-जहान में फइलल-पसरल रहे आ ऊ बलिया के पहिल मनई रहलन, जेकर नांव अंगरेजी विश्वकोश में दरज रहे. कहल जाला कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात.

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जवन समाज अपना बेशकीमती विरासत के भुला-बिसरा देला, अपना महान विभूतियन के इयाद ना करे, ऊ भलहीं कतनो विकास भा बढ़न्ती कऽ लेउ, बाकिर ओकर कतहीं थेघ-अलम ना होला आ ओइसन समाज एहसान फरामोश कहाला. भोजपुरी के गौरव डॉ गणेश प्रसाद एगो अइसने महान विभूति रहलन,जेकरा के हमनीं के एकदमे भुला-बिसरा देले बानीं जा. नवकी पीढ़ी के त ई पतो ना होई कि के रहलन गणेश प्रसाद?

लरिकाईं आ पढ़ाई-लिखाई
गणेश प्रसाद अइसन अनमोल रतन रहलन, जेकर नांव-जस सउंसे दुनिया-जहान में फइलल-पसरल रहे आ ऊ बलिया के पहिल मनई रहलन, जेकर नांव अंगरेजी विश्वकोश में दरज रहे. कहल जाला कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात. गणेश प्रसाद जनमजात मेधावी रहलन आ अगहन महीना के अमवसा का दिने 15नवम्बर, 1876 के बलिया जिला के जलालपुर में कायथ परिवार के बाबूजी रामगोपाल लाल आ माई जूठन देवी का कोख से जनमल गणेश प्रसाद लरिकाइएं से अंतर्मुखी आ पढ़ाई-लिखाई में अतना तेज-काबिल रहलन कि पनरह साल से कमे उमिर में जिला स्कूल,बलिया से इंट्रेन्स के इम्तिहान पहिला दरजा से पास कऽके आठ रोपया के वजीफा पावे लगलन. फेरु त प्रयागराज (ओह घरी इलाहाबाद) के म्योर कॉलेज से इंटरमीडिएट आ इलाहाबाद विश्वविद्यालय से गणित विषय में बीए आउर एम ए के उपाधि प्रथम श्रेणी में हासिल कइलन. कहल जाला कि इम्तिहान का पहिले ऊ पाठ्यक्रम के चालीस बेरि हल कऽके इम्तिहान से एकदम निफिकिर हो जात रहलन. इलाहाबाद यूनिवर्सिटिए से जब ऊ सन् 1898 में डी एससी के उपाधि लिहलन,त ऊ ओह विश्वविद्यालय के पहिल छात्र रहलन,जेकरा के डी एससी के उपाधि मिलल रहे.

जब ऊ कुजाति छंटइलन
ओह घरी भोजपुरिया समाज के का हाल रहे,एकर अंदाज एही बात से चलि जाई कि गणेश प्रसाद जब अपना विलक्षण मेधा से छात्रवृत्ति पाके सन् 1899से 1904 ले कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से गणित में शोध कऽके स्वदेश लवटलन,त उन्हुका अवदान प नाज़ करे का जगहा सउंसे बिरादरी उन्हुका के कुजाति छांटि दिहलस.ई एगो नमूना बा तत्कालीन सामाजिक रूढ़िवादिता-अंधविश्वास-कुरीति के. बाकिर तरक्कीपसन गणितज्ञ गणेश प्रसाद इचिकियो विचलित ना भइलन आ ताजिनिगी हरसंभव कोशिश कइलन कि भोजपुरिया समाज के बढ़न्ती होखे आ ओकर नांव देश-दुनिया में उजागर होखे.

विदेशी भाषा पर अधिकार
एक ओरि कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उन्हुकर गणितीय शोध सउंसे दुनिया में चरचा के विषय बनल,उहंवें दोसरा ओरि उन्हुका भाषा-प्रेम के खास जिकिर होखे कि कैम्ब्रिज से छुट्टी पावते गांटिगन विश्वविद्यालय में जा-जाके ऊ अंगरेजी का संगहीं जर्मन,फ्रेंच आउर इटालियन भाषा में पूरा अधिकार आ दक्षता हासिल कऽ लेले रहलन. उन्हुकर नांव विश्वप्रसिद्ध गणितज्ञ का रूप में अंगरेजी के विश्वकोश में शामिल कइल गइल रहे.

प्राध्यापक से कुलपति ले
जवना म्योर सेंट्रल कॉलेज में गणेश प्रसाद एगो विलक्षण प्रतिभासम्पन्न छात्र का रूप में शोहरत हासिल कइले रहलन, ओही कॉलेज से अतिरिक्त प्राध्यापक के पद पर उन्हुका अध्यापन के शुरुआत भइल रहे. गणित के उच्च शिक्षा में मानक स्थापित करे खातिर उहां से बनारस के क्वींस कॉलेज में गणेश प्रसाद जी के तबादला हो गइल रहे. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राचार्य के पद पर सन्1918 में एह गणितज्ञ के बहाली भइल.देश-विदेश में बढ़ल शोहरत के देखत गणेश प्रसाद के कुलपति के पद पर प्रतिष्ठित कइल गइल. फेरु त कुलपति आ प्राचार्य-दूनों जिम्मेदारी उहेंके निबाहे के परल.दूनों पद के तनखाह सउंपल गइल,बाकिर उहांके खाली प्राचार्य के वेतन स्वीकार कइनीं आ कुलपति के तनखाह लवटा दिहनीं.

गणित-शोध से विधान सभा तक
डॉ आशुतोष मुखोपाध्याय गणेश प्रसाद जी के गणित का क्षेत्र में ऐतिहासिक अवदान से प्रभावित होके सादर कोलकाता लिआ जाके उहां घोष चेयर के प्रधान बनवले. आगा चलिके हाडिंग्स चेयर के प्राध्यापको का रूप में गणेश प्रसाद जी के सेवा लिहल गइल. ओह घरी उहां के बदउलत गणित-शोध के काम चरमोत्कर्ष पर पहुंचि गइल रहे. अतने ना, चाहे काशी विश्वविद्यालय होखे भा इलाहाबाद या आगरा विश्वविद्यालय-हरेक जगहा के कार्यकारिणी में गणेश प्रसाद जी के शामिल कऽके विश्वविद्यालय गौरवान्वित होत रहलन स. उहांके इंडियन साइंस कांग्रेस के गणित आउर भौतिक विज्ञान शाखा के सभापतिओ बनावल गइल रहे.सन् 1924से 1927 ले गणेश प्रसाद जी उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्यो रहनीं.

भारतीय भाषा के पोषक
हालांकि गणेश प्रसाद जी अंगरेजी, जर्मन,फ्रेंच, इटालियन जइसन विलायती भाषा के गहिर ज्ञान रहे,बाकिर उहांके सही माने में भारत आ भारतीय भाषा के पोषक रहनीं. उहांके ओही घरी एह बात के सिफारिश आ ऐलान कइले रहनीं कि देश के मए विश्वविद्यालयन में सभ विषय के उच्च शिक्षा हिन्दी में दिहल जाए के चाहीं आ लरिकन के शुरुआती पढ़ाई के माध्यम भोजपुरी भा अउर ओह हलका के लोकभाषा-बोली के बनावे के चाहीं. गणेश प्रसाद जी अपना सिद्धांत के अतना पक्का रहनीं कि उहांके अपना गणित विषयक तमाम उच्च स्तरीय ग्रंथन के हिन्दी में अनूदित करे के काम शुरू कऽ देले रहनीं, बाकिर एही बीच 6मार्च,1935 के एकाएक दिमागी नस फाटि गइल रहे आ उहांके एह लोक से मुकुती मिलि गइल रहे.

सामाजिक सरोकार
गणेश प्रसाद जी के इकलौती बेटी रहली कृष्ण कुमारी,जेकरा पर उहांके आपन जान-परान लुटावत रहनीं, काहें कि पत्नी पहिलहीं सरग सिधारि चुकल रहली. बाकिर बेटिओ महज सोरह बरिस के उमिर में क्षय रोग से पीड़ित होके सन् 1909में एह निठुर संसार से कूच कऽ गइल रहली. ओही घरी कोलकाता के एगो अंतरराष्ट्रीय गणित सेमिनार में गणेश प्रसाद जी के व्याख्यान देबे के रहे. उहांके अपना दिल प पथल राखिके ऊ ऐतिहासिक व्याख्यान देले रहनीं. गणेश प्रसाद जी में सामाजिक सरोकार कूटि-कूटि के भरल रहे. जवना घरी उहांके विलायत से पढ़ाई कऽके लवटल रहनीं,बिरादरी के लोग कहले रहे कि जदी ऊ प्रायश्चित कऽ लेसु, त जाति से बहिष्कृत ना कइल जाई, बाकिर उन्हुका ई दकियानूसी शर्त मंजूर ना रहे. उहांके साफ कहनाम रहे कि भलहीं हमरा के बिरादरी से बहरिया दिहल जाउ, बाकिर हम ताजिनिगी सउंसे समाज के जगावत रहबि आ प्रगतिशील सोच भरत रहबि. बाकिर हाय रे मतलबी समाज! आपन देश, आपन लोग सही माने में गणित के रतन, देश रतन के भुला-बिसरा दिहल. तबे नू अउर जगहा के त छोड़ दीं,उहांके जनमभूइं बलियो में गणेश प्रसाद, विलक्षण गणितज्ञ के इयादि में ना कवनो स्मारक, ना शोध संस्थान भा गणित के कवनो पीठ बा. इहां ले कि कवनो पुस्तकालयो-वाचनालय भी नइखे. (लेखक भगवती प्रसाद द्विवेदी जी वरिष्ठ साहित्यकार हैं.)

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