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Bhojpuri: गोवा संघर्ष में डॉ. राम मनोहर लोहिया के योगदान

Bhojpuri: गोवा संघर्ष में डॉ. राम मनोहर लोहिया के योगदान

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बिना डॉ राम मनोहर लोहिया गोवा के इतिहास अधूरा; गोवा के आजादी में डॉ राम मनोहर लोहिया के ऊहे योगदान रहें, जवन देश के आजादी में महात्मा गाँधी जी के रहल बा. आज देश के आजादी 75 वां साल पूरा हो गईल. देश एह अवसर के ‘अमृत महोत्सव’ के रूप में धूमधाम से मनावें के तैयारी में लागल बा.

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गोवा के आजादी के भी एह 60वां साल आ डॉ राम मनोहर लोहिया के नेतृत्व शुरू भईल सत्याग्रह आंदोलन के 75 वाँ साल पूरा होत बा. भारत में गोवा के आजादी के खास मतलब एह नाते भी बा कि गोवा, भारत में सबसे पहिले यूरोपीय उपनिवेशवाद के ठिकाना बनल, सबसे लम्बा समय तक आ सबसे क्रूरतम तरीका से पुर्तगाली शासकन के दंश झेंलत, देश के आजादी के चौदह साल बाद दिसंबर 1961 ई में आजाद भईल.

डॉ राम मनोहर लोहिया 18 जून 1946 के मडगांव से गोवा के पुर्तगाली साम्राज्य से ‘छुटकारा’ दिलावें खातिर सत्याग्रह आंदोलन के आगाज कइलें रहनीं. डॉ लोहिया के एह पहिलका भाषण में ही आह्वान कइनीं कि “ एह सभा के बहुत सीमित मकसद खातिर बुलावल बा. आपके न्योता देत बानीं कि आपके बोलें पर, सभा करें पर जवन पाबन्दी बा, आप महसूस करीं कि ऊँ कानून अब इहवाँ लागू नइखें. बाकी इहो याद रखें के चाहीं कि पुर्तगाली शासन से आजुए गोवा ना आजाद हो जाई. ब्रिटिश हुकूमत से भारत के आजादी के संगवे गोवा के आजादी निश्चित मिलीं.” ओह सभा से ही गोवा वासियन के एह बात के भरोसा हो गईल कि अब पुर्तगाली हुकूमत बहुत दिन तक कायम ना रहीं.

यहां एह बात के ध्यान दिवावल जरूरी बा कि गोवा के लोगन के सभा करें, संगठन बनावें आ कुछ छपवावें, के यहाँ तक कि शादी के कार्ड भी बिना सेंसर के छपवाएं 18साल तक कवनों अधिकार ना रहें. डॉ लोहिया के सभा से एगो बात अउर साफ हो गइल कि जब आम लोगन में नेतृत्व पर भरोसा कायम हो जाला आ लोग शासन के आतंक-अत्याचार से मुक्त हो जाला, तब आपना हक़ के लड़ाई खुदे लड़े लागेला. जइसे गाँधी जी नमक सत्याग्रह के समय भी देखें के मिलेला.लगभग ऊहे काम लोहिया जी के 18जून1946 में मडगांव के पहिला सत्याग्रह से शुरू हो गईल.दरअसल एह आंदोलन से ही गोवा के आजादी के बुनियाद पड़ल. लगभग पांच हजार लोग ओह सभा में जुटल रहलन. ओह सभा के बाद राम मनोहर लोहिया अउर जर्मनी में छात्र जीवन के जमाने से उनकर मित्र रहें डॉ जुलियो मेनेजिस के गिरफ्तारी भईल, आ दुनो जाना के गोवा के सीमा से बाहर निकाल दिहल गईल.

डॉ मेनेजिस के बुलावें पर ही सन 1942 के आंदोलन में लाहौर जेल से रिहाई के बाद डॉ लोहिया गोवा पहुँचल रहलन. डॉ मेनेजिस बतावलें बाड़न कि गोवा के मामलों में डॉ लोहिया की दिलचस्पी सन 1938 से बढ़े लागल रहें. कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी के विदेशी विभाग के सचिव के नाते डॉ लोहिया एक छोटी पुस्तिका ‘स्ट्रगल फ़ॉर सिविल लिबर्टी’ नाम से लिखलें रहनीं. ओह पुस्तिका में डॉ लोहिया जी बतावत बानी कि “ नागरिक स्वतंत्रता के मोर्चा एक खास मोर्चा है. जनता को जगाए रखने के लिए. ताकि उसकी कमर सीधी रहें और झुकने न पावें. इससे जनता में अत्याचार के विरुद्ध लड़ने की भावना बनीं रहती हैं.” लोहिया जी बतावत बानीं कि 17 जुलाई 1789 के जब फ्रांस के जनता किले नुमा ‘वस्तोल जेल’ को ध्वस्त कर देलस, ओही दिने फ्रांसीसी राजतंत्र की समाप्ति अउर फ्रांसीसी क्रांति के नींव पड़ल. एह क्रांति के गर्भ से ही दुनिया के लोकतंत्र में “समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के भावना मजबूत भईल.

डॉ राम मनोहर लोहिया जइसन नेता खातिर ई बहुते स्वाभाविक कि जब अपना देश के लोगन के नागरिक अधिकार के उल्लंघन के मामला सामने आई, तब ओकर प्रतिरोध में जरूर खड़ा होवें के चाहीं. एक तरह से देखल जाय, तो आजादी के बाद भी प्रतिरोध के राजनीति के सबसे जीवंत नेता डॉक्टर राम मनोहर लोहिया थे. यहाँ इहो ध्यान दिहल जरूरी बा कि जब डॉ लोहिया सन 1936 में नागरिक स्वतंत्रता खातिर बात करत बानीं, तब दुनिया के सामने संयुक्त राष्ट्र संघ के 10 दिसम्बर 1948 में घोषित मानवाधिकारों का चार्टर सामने ना आइल रहें. बाद में अपना देश के लोकतंत्र जब कभी निरंकुशता की ओर बढ़े, तब ओकरा पर अंकुश लगावें खातिर जयप्रकाश नारायण के प्रयास से आपातकाल के पहिले “पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टी” के गठन भईल. वी एम तारकुंडे, रजनी कोठरी, अउर अरुण शौरी जइसन लोग भी एह आंदोलन से जुड़ल रहें.

यहां ई बात याद राखल जरूरी बा कि नागरिक अधिकारों के बहाली खातिर डॉ लोहिया के नेतृत्व में जुटल लोग गोवा के आज़ादी के शरुआती प्रेरक बनल. गोवा के टी बी कुन्हा, पुरूषोत्तम काकोडकर, लक्ष्मीकांत भेम्बरे को पुर्तगाली मिलिट्री कोर्ट के सामने ‘ट्रायल’ से गुजरें के पड़ल. डॉ राम मनोहर लोहिया जब दुबारा गोवा की सीमा में दाखिल भइनीं तब गाँधी जी के तार प्रप्त भईल. गाँधी जी के आदेश रहें कि “ गोवा में प्रवेश के पहिले मुझसे मिलें.” एकरा पहिले गाँधी जी अपना पत्रिका ‘हरिजन’ में लेख लिखीं के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के गोवा आंदोलन के समर्थन दे चुकल रहनीं. गाँधी जी के अलावा कांग्रेस के दूसरा नेता के गोवा के आंदोलन में कवनों रुचि ना रहें.

जवाहरलाल नेहर खातिर गोवा के आजादी के मुद्दा “गाल पर उगल फुंसी के बराबर रहें, जवना के देश के आजादी मिलला के बाद मसल दिहल जाई.” पर गाँधी जी गोवा के मुद्दा के प्रति गंभीर रहनीं. पर अतना जरूर चाहत रहनीं कि “ गोमांतकों को गोवा की आजादी की लड़ाई खुद लड़ना चाहिए.“ गाँधीजी30 जून 1946 को ‘हरिजन’ में ‘लोहिया की चुनौती’ शीर्षक लेख में लिखत बानीं कि “ गोवा के लोगन के अपना जेहन से पुर्तगाली सरकार के डर से वइसे ही मुक्त हो जायें के चाहीं जइसे देश के दूसरा हिस्सा के लोग ब्रिटिश हुकूमत के डर से मुक्त हो चुकल बा. अपना मूलभूत नागरिक अधिकार के प्रति सजग हो गइल बा. गोववासियों के बीच धर्म के लेकर कवनों मतभेद ना होखें के चाहीं. विभिन्न धर्मिक समूहन के बीच ई आपसी कलह आ लड़ाई झगड़ा के वजह धर्म ना होखें के चाहीं.”

लोहिया के गोवा सत्याग्रह खाली गोवा के सत्याग्रह आ नागरिक अधिकारों की बहाली तक ना सीमित रहें. ‘ ओपन लेटर टू गोवा पीपुल’ गोवा के जरिये भविष्य के पूरा नक्शा डॉ साहब पेश करत बानीं. गोवा के भौगोलिक सीमा विस्तार से लेकर, भाषा संस्कृति, सहकारी खेती, गांधी के ग्रामस्वराज्य, औघोगिक विकास, बिजली निर्माण, प्रतिरोध के हथियार के रूप में सत्याग्रह के तरीके अउर ई चेतावनी भी कि “ भारतीय गणराज्य के तहत ब्रिटिश हुकूमत गोवा जइसन छोट राज्य के भी बर्दाश्त न कर सकें. गोवा के या त पुर्तगाली हुकूमत के सौंपी दीं, चाहें सीधे अपना नियंत्रण में ले लीं.” सत्याग्रह कार्यकर्म के बारे में बतावत बानीं कि छात्रन के मिलिट्री टैक्स ना देबे चाहीं, स्काउट परेड में ना शामिल होखें के चाहीं. शराब के दुकान पर धरना पर्दर्शन के जिम्मेदारी महिलाओं को संभालना चाहिए. यहाँ ई बतावल जरूरी बा कि तब गोवा के आबादी महज पांच लाख रहें, बाकि दुनिया के सबसे ज्यादा ‘पियक्कड़’ ओह समय गोवा में रहलन. पुर्तगाली शासन के तब 18 लाख रुपये की आमदनी शराब से प्राप्त होत रहें.

संगठन आप लोगन के अइसने कार्यकर्म से खड़ा होखें के चाहीं. इस लिए यह समझल जरूरी बा कि “ नागरिक अधिकार के बहाली अपने आप में पर्याप्त नइखें. वह इस लिए जरूरी था कि आपको पुरानी गलीज शासन व्यवस्था से मुक्ति मिलें. ब्लैक मार्केटिंग से निजात मिलें. ताकि आपको समय से कंट्रोल से चावल और गुड़ मिल सकें.“

डॉक्टर राम मनोहर लोहिया एक अइसन गोवा के सपना देखत रहनीं जवना के भौगोलिक सीमा के तहत पड़ोसी जिला कारवार, सामंतबाड़ी, रत्नागिरी अउर बेलगांव भी शामिल हों. गोवा उत्तर भारत अउर दक्षिण भारत के मिलन स्थली हों. गोवा के भाषा के सवाल भी तब डॉक्टर साहब सुलझा देले रहनीं. जवाहरलाल नेहरू नेहरू से पहिले डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जी कहलें रहनीं कि “गोवा की भाषा कोंकणी होनी चाहिए. यह दुनिया की सबसे मीठी भाषा है.”

गोवा के भविष्य में आजादी के बाबत डॉ लोहिया जी 8 जुलाई 1946 के एगो प्रेस व्यक्तब्य में कहत बानीं “ई ठीक बा कि देश के आजादी के संगवे गोवा भी आजादी हासिल करीं. पर एह तरह के विचार में त एक तरह के अकर्मण्यता अउर अपने को ही खात्मा के विचार छिपल बा. गोवा ओह तरह के संघर्ष काहें ना कर सकें, जइसे अपना आजादी खातिर बलिया, सतारा के लोग कइलें रहें. येह मामला में त गोवा भाग्यशाली बा कि ओकरा सामने बलिया के लोगन के जोरदार संघर्ष अउर सतारा के लोगन के दृढ़ता सामने बा.” यहां ई बतावल जरूरी बा कि देश के आजादी के पांच साल पहिले ही 1942 बलिया आजाद हो गइल रहें. महाराष्ट्र में सतारा अउर पश्चिम बंगाल में मेदनीपुर भी कुछ समय खातिर ब्रिटिश हुकूमत से मुक्त हो गईल रहें.

डॉ लोहिया के गोवा सत्याग्रह के आह्वान पर पूरा देश के ख़ासकर समाजवादी विचारधारा लोग गोवा के आजादी के आंदोलन में शरीक भईल रहें. लखनऊ के मेयर रहें दाऊ जी गुप्ता, मध्यप्रदेश के मशहूर समाजवादी नेता रहें पूव सांसद यमुना प्रसाद शास्त्री, पश्चिम बंगाल से सांसद त्रिदिव चौधरी, बलिया से साहित्यकार- चिंतक डॉ राम विचार पांडे अउर बलिया के पहिला डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के सदस्य रहल गंगा शरण सिंह प्रमुख रहें. त्रिदिव चौधरी सन 1955 में डॉ राम मनोहर लोहिया के आह्वान पर गोवा आंदोलन में भाग लेबे पहुँचल रहें. गोवा आंदोलन में त्रिदिव चौधरी के बारह साल के सजा सुनावल गईल रहें. 19 महीना बाद जब जेल से रिहा भइलें तब ओकर अनुभव “ सलजाजेरे उन्नीस मासे” में कइले बाड़न. एह किताब के अउर गोवा आंदोलन पर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के खुद लिखल “एक्शन इन गोवा” के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया रिसर्च फाउंडेशन ( नयी दिल्ली ) की ओर से गोवा के आजादी 60 साल अउर गोवा सत्याग्रह के 75 साल पूरा भइला के अवसर हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, कोंकणी अउर बांग्ला में अनुवाद कर के छापल जात बा. नवम्बर के आखिरी सप्ताह में गोवा में दो दिन के सम्मेलन होत बा. एह सम्मेलन में गोवा के आजादी के आंदोलन में देश भर से शामिल जीवित चाहें परिवार के केहूँ सदस्य के बुला के समानित करें के भी योजना भईल बा.

(मोहन सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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