Bhojpuri: आजो गूँजत रहेला प्रणयी जी के लिखल फ़िल्मी गीत, सुनबs त सुनते रह जाइब

आज से 31 साल पहिले एगो फिल्म आइल ‘ पिया के गाँव ‘. आरा के रहनिहार मुक्ति नारायण पाठक ओकर निर्माता रहलें. गंगा किनारे मोरा गाँव, सजनवा बैरी भइलें हमार आ बिहारी बाबू फेम दिलिप बोस निर्देशक रहलें. चित्रगुप्त जी संगीत निर्देशक रहलें. ओह फिलिम के एगो गीत आजो खूब मशहूर बा.

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जब-जब फ़िल्मी गीतन के साहित्य के संस्कार मिलल, गीत खिल गइल. भोजपुरी सिनेमा के सन्दर्भ में बात करीं त भोजपुरी सिनेमा के सुपर हिट गीत देवे वाला शैलेन्द्र, मजरुह सुल्तानपुरी, अंजान आ कैफी आजमी खाली सिनेमा के गीतकार ना रहे लोग बलुक एगो स्थापित कवि आ शायर भी रहे लोग.

ओही तरह भोजपुरी साहित्य में रमल मोती बीए, भोलानाथ गहमरी, डॉ. रामनाथ पाठक प्रणयी, प्रो. उमाकांत वर्मा आ ब्रजकिशोर दूबे जइसन गीतकार जब सिनेमा में गीत लिखल त हलचल मचा देलस.

आज से 31 साल पहिले एगो फिल्म आइल ‘ पिया के गाँव ‘. आरा के रहनिहार मुक्ति नारायण पाठक ओकर निर्माता रहलें. गंगा किनारे मोरा गाँव, सजनवा बैरी भइलें हमार आ बिहारी बाबू फेम दिलिप बोस निर्देशक रहलें. चित्रगुप्त जी संगीत निर्देशक रहलें. भोजपुरी के माधुरी दीक्षित कहाये वाली मीरा माधुरी हिरोइन रहली. दानीश, अजीतेश, जयतिलक, जयश्री टी, अरूणा ईरानी, मानिक चैधरी, देव मल्होत्रा, नारायण भंडारी, मुरारी पाण्डेय, वीणा राय, माधुरी मिश्रा, विजय खर्रे आ अमित जइसन कलाकारन से सजल रहे ई फिल्म बाकिर फिल्म के असली सिंगार ओकर गितवे रहे. गीत लिखनी डॉ. रामनाथ पाठक प्रणयी. उ गितवा आजो गूँजत रहेला. प्रणयी जी गीतन के प्राणवान बना देत रहीं.

ई साल प्रणयी जी के जन्म शताब्दी वर्ष ह. एही महीना में आज से सौ साल पहिले उहाँ के जनम भइल. रामनाथ पाठक से उहाँ के डॉ. रामनाथ पाठक ‘’प्रणयी ’’ कइसे बननी, इ बताइब बाकिर पहिले उहाँ के लोकप्रिय फिल्म पिया के गाँव के कहानी पूरा क लीं.

पिया के गाँव फिल्म हम पहिला बार रेनुकूट, सोनभद्र के सिनेमा हॉल में 86-87 में होली के आस-पास देखले रहीं. ओकर गीत जुबान पर चढ़ल रहे. बाद में गरमी के छुट्टी में गाँवे सिवान जाईं त नाच में ई गितवा खूब बाजे. 96-97 में पटना प्रवास के दौरान जब थियेटर से जुड़नी आ सिनेमा पर लिखे-पढ़े लगनी त एह फिल्म के प्रोड्यूसर मुक्ति नारायण पाठक से भेंट भइल आ कई बार भइल. एह फिल्म के मेकिंग आ सब किरदार के बारे में जननी. उहाँ के फिल्म के बुकलेट आ फोटो देहनी. मीरा माधुरी के फोटो देख के त हम पगलाइये गइल रहनी. आग लगावन फोटो रहे. खैर, उ दोसर ममिला बा. ओह पचरा में रउरा सब के नइखे पड़े के. मीरा माधुरी के चेहरा आ तनीमनी अदा माधुरी दीक्षित से मिलत रहे. माधुरी दीक्षित हमार फेवरेट हई. हम दूनू जानी से नइखीं मिलल. मीरा माधुरी त महुआ फिल्म के बाद गायबे हो गइली. ओकरा प्रोड्यूसर अनिल राणा से बिआह भइल. ओकरा बाद पता ना ...

खैर, पिया के गाँव फिल्म आ ओकरा गीतन में हम जवना मीरा माधुरी के देखले रहनी उ भीतर ले धंस गइल रहली. उनके चक्कर में हम मुक्ति नारायण पाठक से मिले जाईं बाकिर हाथे खाली फिल्म के बुकलेट आ पोस्टर आइल.

पोस्टर में लिखल रहे-
राजपुर गाँव के स्कूल हेडमास्टर हरिशंकर के परिवार के कहानी हऽ- ‘पिया के गाँव’. कहानी के केन्द्र में उनकर छोटकी बेटी राधा, जवन शहर में उच्च शिक्षा प्राप्त करे आइल बाड़ी के डॉ. अमित से प्यार हो जाता... बाकिर अमित के बाप का ओर से पूरहर दहेज के मांग शादी में रोड़ा बनत बा... आ फेर राधा के लम्बा संघर्ष अपना पिया के गाँव जाये खातिर करे के पड़ता...

जब हिरोइन के डॉक्टर से प्यार भइल त डॉ. रामनाथ पाठक प्रणयी जी के लिखे के पड़ल कि ‘ ए डाक्टर बाबू बताईं दवाईं... ए बबुनी तोहरा भितरिया दरद बा, लागल करेजवा में गरम शरद बा, आला लगाइब त अउरी बुझाई... ए डाक्टर बाबू... नाड़ी तू देखलऽ, तू आला लगवलऽ... ऊपर से नीचे ले देखलऽ परखलऽ, तबहूँ न असली दरदिया समझलऽ... सुइया गड़ा के तू कतना दुखवलऽ, हवऽ ना डाक्टर, तू हवऽ कसाई.... ए डाक्टर बाबू...’’

बात अतने ले रहित त कवनो बात ना रहित. प्रणयी जी एगो अउर गीत में कहत बानी- ‘’ टीसेला नस-नस बिरहिया के बोलिया, हाले सियावल सकेत भइल चोलिया... केहू के लागल नजरिया, महुरिया के बान हो गइल, घेरि आइल करिया बदरिया उमिरिया तूफान हो गइल. ‘’

त फिल्म त हिट हो गइल बाकिर साहित्य जगत में बवाल मच गइल. प्रणयी जी स्थापित साहित्यकार रहनी. ‘ जड़वा के रतिया, गरीबवन के छतिया, पछुआ बहेला बिछीमार / अंगिया में धधकत बा अगिया गरिबिया के अंखिया में छलकत बा लोर. ‘ जइसन गीत साहित्य में रचलें रहनी त उहाँ के जम के आलोचना भइल. खैर, सिनेमा के ग्रामर दोसर होला आ उहाँ प्रोड्यूसर- डायरेक्टर के हिसाब से चले के पड़ेला.

‘पिया के गाँव’ में कुल नौ गो गीत बा, जवना में उक्त दूनो गीतन के अलावे अउरी चार गो गीत अपना समय में खूबे हलचल मचइले रहे-

‘’ आँख से आँख मिलिके जे चार हो गइल, साँच मानऽ जिनिगिया हमार हो गइल ‘’ आ ‘’आँख में सुरतिया तोहरी माथ पर बिपतिया, हाय! कहवाँ जाई सगरो अन्हरिया हो राम ‘’ रउरा सुनले होखब. बाद बाकी जवन दूगो गाना बा, उ रियालिटी शोज में खूब देखे-सुने के मिलेला. हम जी टीवी के सारेगामापा भोजपुरी संस्करण के प्रोजेक्ट हेड रहीं. प्ले लिस्ट में पिया के गाँव के ई दुगो गाना - ‘ पहिले पहिल हम अइलीं गवनवाँ, देखली डीजल गाड़ी हो दिलवर जानी’ आ ‘ जुग-जुग जीयसु ललनवाँ’ भवनवाँ के भाग जागल हो, ललना लाल होइहें कुलवा के दीपक मनवाँ में आस लागल हो’ शामिल रहे.

पिया निरमोहिया के टायटल सांग भी प्रणयी जी के लिखल रहे. ‘’ हाय रे करम भइले पिया निरमोहिया, सपनवा भइले ना / मोरा सुखवा के दिन राम सपनवा भइले ना ‘’. कैय्याम अहमद के स्वर आ श्याम सागर के संगीत से सजल ई गीत भावुक गीत बन पड़ल बा.

अब कहानी प्रणयी जी के. आज से सौ साल पहिले, शाहाबाद (अब भोजपुर ) बिहार के धनछुँहा गाँव में 05 जून, 1921 के जनमल प्रणयी जी के माई उहाँ के नाम रखली रामनाथ बाकिर जब प्रणयी जी लइका रहनी पाँच बरिस के, तबे उ राम के पास चल गइली अपना रामनाथ के अनाथ क के. माई के नाम देवनंदनी देवी रहे आ बाबूजी के नाम इन्द्रजीत पाठक. नवे बरिस में बिआह हो गइल. पत्नी के नाम राधा देवी रहे.

माई के मुअला के बाद प्रणयी जी अपना बड़ भाई यज्ञनारायण पाठक किहां बनारस आ गइनी आ ओही जी पढनी-लिखनी. 1938 में व्याकरणाचार्य भइनीं आ 1942 में साहित्याचार्य. बनारस के घाट पर कोढ़ियन के दशा देख के बहुत विचलित भइनी आ ओह लोग के इलाज खातिर आयुर्वेद में आचार्य भइनी. बाद में ' संस्कृत नाटकों में जैन नाटककारों का योगदान ' विषय पर पीएचडी कइनी.

रोजी-रोटी खातिर डुमराँव राज के रसायन अधीक्षक आ राजवैद्य नियुक्त भइलीं. ओकरा बाद कई जगे मास्टरी कइनी. एच पी जैन कॉलेज आरा में प्राकृत संस्कृत के अध्यापक बनलीं आ ओही जी से 1983 में रिटायर भइलीं.
लिखे-पढ़े आ कविताई के लकम लड़िकाइयें में लाग गइल रहे. प्रणयी जी के संस्कृत-हिन्दी-भोजपुरी में लगभग तीन दर्जन किताब छपल बा. "साथी" उहाँ के हिंदी गीतन के पुस्तक ह त "राष्ट्रवाणी" संस्कृत गीतन के पुस्तक.

चौदह बरिस के उमिर में " राष्ट्रवाणी " संस्कृत काव्य के प्रकाशन भइल जवना के चलते बनारस में उहाँ के ‘’ प्रणयी ‘’ टाईटल से नवाजल गइल. काहे कि ओह पुस्तक के बी०एच०यू० के संस्कृत विभाग में पाठ्यपुस्तक के रुप में चलावे के स्वीकृति मिल गइल रहे जवन आजु तलक चल रहल बा.

कोइलिया, सितार, पुरइन के फूल, कचनार आ सोना अइसन भोर प्रणयी जी के चर्चित भोजपुरी किताब ह. ' कलश ' आ ' हिलोर ' नाम के भोजपुरी पत्रिका के सम्पादन भी कइनी प्रणयी जी. बाकिर उहाँ के प्रसिद्धि गीतकार के रूप में हीं भइल.
प्रणयी जी 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में जेलो गइनीं.

फिल्म लाइन में प्रणयी जी ज्यादा ना चलनी. उहाँ अश्लील गीतन के ढेर डिमांड रहे जवन उहाँ के मंजूर ना रहे. मुम्बई छोड़ के आरा आ गइनी.

... आ 16 अगस्त 1987 के अष्टमी तिथि के त दुनिये छोड़ देनी बाकिर अपना साहित्य में, अपना गीतन में सदियन तक गूँजत रहब प्रणयी जी.

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं. )

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