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Bhojpuri: काली मिर्च के खेती कर रउआ लोग भी कर सकेनी आपन दोगुना इनकम! जानीं

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काली मिर्च के बारे में सब लोग इहे जानेला कि ऐकर खेती दक्षिण भारत के राज्य केरल, तमिलनाडु आ कर्नाटक में होला । कुछ खेती नॉर्थ ईस्ट के असम, मेघालय जइसन जगह पर होला । बात सहीयो बा । इहे सब जगह पे सबसे ज्यादा काली मिर्च होला.

  • News18Hindi
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दक्षिणी भारत के राज्य में काली मिर्च ज्यादा पैदा होला एकर मतलब इ नइखे कि हमनी के भोजपुरिया बेल्ट में काली मिर्च नइखे हो सकत । बिलकुल हो सकत बा, लेकिन ओकरा खातिर कुछ बेसिक बात के ध्यान रखे के पड़ी ।

रऊंवा सब अगर काली मिर्च के खेती कइल चाहत बानी त सबसे पहिले आपन इलाका के क्लाइमेट पर गौर करीं । काली मिर्च के खेती खातिर टेंपरेचर 10 से 40 डिग्री सेल्सियम के बीच रहे के चाहीं । इ कौनो लक्ष्मण रेखा नइखे लेकिन एकरा से ज्यादा चाहें कम होइला पर गांछ के दिक्कत होखेला । दोसर बात मिट्टी आ नमी । काली मिर्च के गांछ नमी वाला मौसम खोजे ला । बहुत गर्मी इ बरदाश्त ना कइ सकेला । इ खेती के खातिर मिट्टी तनि मजबूत चाहीं । बलुआ चाहें रेह मिट्टी में ऐकर फसल ना होई । माटी के पीएच मान 6 से 7 के बीच होखे के चाहीं । बरसाती इलाके में ऐकर फसल ज्यादा अच्छा होई ।
काली मिर्च के पौधा रऊंवा नर्सरी से ले सकेलीं । सपरे त रऊंवा खुदे ओकर लत्तर से कलम काट सकेनी । लेकिन इ काम कौनो जानकर से राय विचार कइले के बाद करे के चाहीं । कुछ लोग सीधे दाना से बिया बना लेनी लेकिन ओकर उपज कम होला । कलम से पैदावार ज्यादा होला ।

काली मिर्च के रोपे से पहिले ओकर सपोर्टिंग गांछ के हिसाब किताब देख लीं । काली मिर्च लत्तर होला आ इ कौनो गांछें पर होला । एकर लत्तर ऊ गांछ के सहारे सहारे ऊपर चढ़त जाला । अच्छा बात बा कि काली मिर्च के लत्तर एगो यूकिलिप्टस के छोड़ के बाकी सब गांछ पर चढ़ जाला । नारियल, सुपारी, सेमर, शीशम, सखुआ, महोगनी, आम, महुआ जौन मन उ गांछ पर रऊंवा एकरा के चढ़ा सकेलीं ।

गांछ जमीन में लगावे से पहिले क्यारी में गोबर या वर्मी कम्पोस्ट जरूर डाल दीं । मिट्टी में कीड़ा मकौड़ा ना रहे के चाहीं । मौसम आ मिट्टी के हिसाब से पौधा में पानी देत रहीं । लेकिन इ बात के ध्यान रखीं कि जड़ में पानी जमा ना होखे । ना ता गांछ गल जाइ ।

गांछ लगावे के सबसे सही समय फरवरी- मार्च और सितंबर-अक्टूबर ह । बाकियो समय रऊंवा लगा सकत बानी लेकिन तब ओकरा बचावे में रऊंवा ज्यादा मेहनत करे के पड़ी । जहां तक काली मिर्च के बीमारी के बात बा, दू चीज पर नजर गड़ाई के रखीं । पत्तई पर आ जड़-तना पर । पत्तई पर चित्ती पड़े, पत्तई फाटे लगे चाहें पत्तई पीइर होइके मुरझाए लागे त तुरंत ओकरा पर कीटनाशक के छिड़काव करीं । आ तबो ना सुधाइए, त ओकरा के तुरंत तुड़ के जला दिंही चाहें माटी में गाड़ दिहीं । ऐही तरी जड़ आ तना फाट के सूखे लागे त ओकरा के तुरंत उखाड़ के फेंक दिहीं । ना त बीमारी दूसरो गांछ तक फैल जाइ । प्योर नीम के खली मिल जाए त इ सब बीमारी से काफी हदतक बचाव हो जाइ।

काली मिर्च के पौधा के ठीक से सेवा करीं त इ 4-5 साल में फल देबे लागे ला आ 30-35 साल तक देला । कहीं कहीं त काली मिर्च के गांछ 60-70 साल तक फरेला । शुरू में गांछ से आधा किलो-एक किलो के पैदावार होइ लेकिन जब गांछ बड़ हो जाइ त एगो गांछ से साल में आराम से 12-15 किलो ले काली मिर्च मिले लागी । चूंकि काली मिर्च के लत्तर 30-40 फीट ऊंचाई तक चल जाला, ऐसे ऐकरा तुड़े खातिर ऊंच सीढ़ी के भी इंतजाम चाहीं ।

शुरू में काली मिर्च के दाना हरियर होला । पाके से पहिले रंग ललछोंह हो जाला आ आखिर में करिया कचनार । दाना के ऊपर पतला लेयर टाइप के परत होला जेकरा के रऊंवा रगड़ के अलग कइ सकत बानी । बहुत बड़ स्केल पर खेती करब त ओकर प्रोसेसिंग मशीन भी आवेला । दाना के तुड़ला के बाद बढ़िया से धूप में सुखा लेबे के चाहीं आ पैकिंग ऐ तरी करे के चाहीं कि ओकरा में कौनो तरह से नमी ना जावे पाए ।

आ एकर कीमत के त रऊंवा अंदाजे बटले बा । खुला मार्केट में काली मिर्च 600-700 रुपया प्रति किलो के बीच रहेला । इ हिसाब से होलसेल में रऊंवा के 400 रुपया प्रति किलो जरूर मिलल जाइ । एकरा आगे रऊंवा खुदे हिसाब लगा लीं । एको गांछ से 10 किलो काली मिर्च, एक किलो के कम से कम 400 रूपया, मने 10 किलो के 4000 रुपया ! इ हिसाब से एगो गांछ से 4000 रुपया, दस गो गांछ से 40000 रुपया ! ऐकरा आगे जेतना राऊर गांछ, ओतना ज्यादा राऊर कमाई !

आ सबसे खास बात बा कि इ एक्सट्रा कमाई बा ! काली मिर्च अपना खातिर रऊंवा से कौनो अलग से जगह जमीन नइखे मांगत ! ओकरा बस चढ़े के खातिर एगो अलंग चाहीं । जौन गांछ प रऊंवा काली मिर्च चढ़ाइब, ओकरा कमाई त अपना जगह बटले बा ! माने आम के आम आ काली मिर्च के अलग से दाम ! जय हो ।

(शशि कांत मिश्र वरिष्ठ पत्रकार हैं. लेख में लिखे विचार उनके निजी हैं. इस लेख के जरिए उन्होंने अपना अनुभव साक्षा किया है.)

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