Bhojpuri: पुरनिया लोग कहले बा- कम खाईं, गम खाईं... पढ़ीं काहें...

हर आदमी के प्रवृति के अनुसार हर उम्र के अनुसार मात्रा आ सतुलन अलगा- अलगा तरह से परिभाषित होई. त वाग भट्ट जी एगो साधारण नियम बना दिहले. कहले कि आमाशय (पेट) के चार भाग में बांट दीं. ओमें से दू भाग में अन्न के सेवन करे के चाहीं- दाल, चावल, सब्जी, रोटी. तिसरका भाग में द्रव पदार्थ जइसे पानी, छाछ दूध, खीर वगैरह. चौथा भाग वात, पित्त, कफ के नैसर्गिक क्रिया खातिर खाली छोड़ दीं.

  • Share this:

अच्छा त कम खाईं माने? कतना कम खाईं. एगो त महामारी के डर से घरे बइठल- बइठल अइसहीं भूखि नइखे लागत. खाते का बा आदमी? अइसहीं मन में डर अमाइल बा कि ठंडा चीज नइखे खाए के. बाकिर पुरनिया लोगन के बात के हवा में ना उड़ावल जा सकेला. ई गहिर बात बा. वाग भट्ट ऋषि कहले बाड़े कि संतुलित मात्रा में सही प्रमाण में खाइल भोजन जठर अग्नि के धधका देला आ धीरे- धीरे भोजन ठीक से पचि जाला. त संतुलित मात्रा हर आदमी खातिर अलग- अलग रही.

हर आदमी के प्रवृति के अनुसार हर उम्र के अनुसार मात्रा आ सतुलन अलगा- अलगा तरह से परिभाषित होई. त वाग भट्ट जी एगो साधारण नियम बना दिहले. कहले कि आमाशय (पेट) के चार भाग में बांट दीं. ओमें से दू भाग में अन्न के सेवन करे के चाहीं- दाल, चावल, सब्जी, रोटी. तिसरका भाग में द्रव पदार्थ जइसे पानी, छाछ दूध, खीर वगैरह. चौथा भाग वात, पित्त, कफ के नैसर्गिक क्रिया खातिर खाली छोड़ दीं. त पेट के जौन चौथा भाग बा, ऊहे कम खाए के पुरनिया लोगन के सूत्र से हू-ब-हू मिलता. वाग भट्ट कहले बाड़े कि अगर रउरा गरिष्ठ भोजन करतानी त अउरी कम खाईं. ठूंस- ठूंस के खइला के पुरनिया लोग आत्महत्या कइल कहत रहल ह. हमनी का गांव में एगो खवैया आदमी रहले ह- भभोरन सिंह. उनुका बारे में मशहूर रहल ह कि ऊ अतना खाले कि भोजन उनुका घांटी तक भरि जाला. खैर घांटी तक त केहू चाहिओ के ना खा सकेला. ई अतिश्योक्ति अलंकार के गंवई मजाक ह. बाकिर पचास साल होत- होत भभोरन सिंह के मृत्यु हो गइल. कारण रहे- अति भोजन.

रउरा सब जानते बानी कि भोजने ना कौनो चीज के अति बुरा ह. त पुरनिया लोग एहीतरे ना कहले रहल ह कि कम खाईं, ऊ लोग कौनो तरह के अतिवाद से बचे के कहत रहल ह लोग. भगवान के प्रति आसक्ति छोड़ि के, अउरी कौनो चीज के प्रति अतिरेक जीयते नरक भोगवा देला. आयुर्वेद कहता कि भोजन में छव गो रस रहे के चाहीं. बाकिर ई रस मनुष्य के सूट करता कि ना, देखि लेबे के चाहीं. ई छव गो रस के आई गिनल जाउ- मधुर (मीठा), लवण (नमकीन), अम्ल (खट्टा), कटु (कड़ुवा), तिक्त (तीखा) आ कषाय (कसैला). ढेर लोगन के खट्टा चीज सूट ना करे. तुरंते अमल के शिकाइत होखे लागी. कइसन दो ढेकार आवे लागी. एही से बैद लोग कहेला कि रउरा शरीर खातिर का ठीक बा, जांच लीं. बाकिर सबसे जरूरी बा कि शरीर के पोषक तत्व मिलत रहे. एने कुछ विशेषज्ञ लोग कहता कि कोरोना के विषाणु ग्लूकोज पाके फले- फूले लागतारे सन. खाना में ग्लूकोज बंद क दीं सभे. कोरोना के मरीज अपने आप निष्क्रिय हो जाई. बाकी सरकार रउरा ऊहे करीं, जौन राउर डाक्टर कहता. ग्लूकोज खाए के चाहीं कि ना, कतना मात्रा में खाए के चाहीं, ई रउरा डाक्टर से बढ़िया केहू ना बताई.

गम खाईं
ईहो रोचक कहाउत बा. गम खाईं. एकर मतलब ई कि बात- बात पर टेंसन मत लीं. हर चीज सहज रूप से लीं. गंभीर आ कठिन समस्या आ गइल त ओकरा के हल करेके उपाय सोचीं बाकिर आपन नींद मत हराम करीं. खूब सूतीं. मन फ्रेश हो जा त समस्या पर आईं. ऋषि लोग कहले बा कि सूते के बेरा मन खाली कके सूते के चाहीं. मन पर सात टन के बोझ लेके सुतला पर बिहान भइला उठे के बेरा मन भारी रही. त गम खाईं माने रउरा मन में कुछु के शॉक लागल बा, त ओकरा झड़हेरि के फेंक दीं. अब देखीं, एइजे रउरा हमरा पर गरमा जाइब. रउरा कहब कि कहल आसान बा, कइल मुश्किल. लेक्चर मत दीं. व्यवहारिक बात बताईं. त सरकार, हम अपना ओर से कुछ नइखीं कहत. साधु- संत लोग कहि गइल बाड़े कि जइसे व्यायाम से शरीर चुस्त आ पुष्ट होला, ओही तरे मानसिक तनाव के झटकारि देबे के अभ्यास भा कसरत करे के परी. एके दिन में तनाव के हमनी का ना झटकारि सकेनी जा. ओकर अभ्यास करे के परी.

केहू रउरा के फूहर- पातर बोल देउ त बुरा लागिए सकेला. बाकिर संत लोग कहले बा लोग कि तनाव, दुख, गम के कबहियों बटोरि के ना राखे के चाहीं. काहें से कि ई कुल दिमाग के ढेर जगह छेंके ले सन. तनाव, दुख, कुढ़न, ईर्ष्या, द्वेष वगैरह के विकार कहल बा. एही से ई कहाउत बा कि कम खाईं, गम खाईं. गम के ना खाइब त ऊ कपार पर जाके बइठिए जाई. गम के खा के पचा घालीं. बहुत लोग अइसन बा जे कहेला कि जिनिगी से जल्दी छुटकारा मिलित त बढ़िया होइत. त सरकार, ना राउर जनम रउरा बस में बा आ ना मृत्यु. त जिनिगी के कोसत रहला से कौनो फायदा ना मिली. जतना संभव बा, गम के चबात रहीं. आज के गम आजे चबाए के परी. ओकरा के काल पर छोड़ल ठीक नइखे. जीवन अइसहीं एगो जटिल उपन्यास कहाला. जब शरीर एइजे रहि जाएके बा त एह शरीर से जुड़ल गम आ तनाव भी एइजे खतम हो जाउ. ओकरा के अनेरे ढोअला से का फायदा बा. कम खाई आ गम खाईं. भोजन स्थूल बा आ गम सूक्ष्म बा. सूक्ष्म चीज ढेर तंग करेला. त एही से ओकरा के भोजन का संगे जोड़ि के कहाउत कहल बा कि जइसे भोजन के पचावतानी ओही तरे गम आ तनाव के भी पचाईं. रउरा में पचावे के ताकत बा. रउरा भुला गइल बानी कि ई ताकत रउरा भीतरे बा. (विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज