Bhojpuri: शुरू हो गइल खेती-किसानी के समय, तैयारी में जुटलें किसान

सरकारी स्तर पर 15 जून से खरीफ के सीजन मानल जाला, बाकी गांव देहात में खरीफ फसल के तैयारी रोहिन नक्षत्र से शुरू हो जाला. धान के बेहन रोहिन में पहिला बारिश के समय पड़ जाए के चाही. एह साल यास तूफान के वजह से रोहिन नक्षत्र में अतना बरसात भईल हा कि भादो फेल हो गईल हा.

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आइल खरीफ फसल के बुवाई के समय. किसान अपन नाधा, नरैली ठीक करें लगले.. वइसे गांव में ये समय खेती के काम बैल पर आधारित नइखे रह गईल. बाकि किसान आज भी, खेती के मशीन, औजार के तैयारी वइसे शुरू करेले. सरकारी स्तर पर 15 जून से खरीफ के सीजन मानल जाला, बाकी गांव देहात में खरीफ फसल के तैयारी रोहिन नक्षत्र से शुरू हो जाला. धान के बेहन रोहिन में पहिला बारिश के समय पड़ जाए के चाही. एह साल यास तूफान के वजह से रोहिन नक्षत्र में अतना बरसात भईल हा कि भादो फेल हो गईल हा.

मृगड़ाह नक्षत्र एक हफ्ता से खूब तवत बा. बाकी बरसात के आवग के संभावना बराबर बनल रहत बा. गांव में एगो कहावत प्रचलित बा कि भादो तीन ना कातिक तेरह. मतलब ई कि अगर खेत तैयार होखे तब तीन दिन में भदई के आ तेरह दिन में कातिक के बुवाई पूरा हो जाई. एकरा अलावा हर इलाका में खेती आ मौसम के आपसी संबंध के संगे संगे खेती में किसानन के व्यक्तिगत रुचि आ ओमे तनिकों लापरवाही से होखे वाला नुकसान से भी आगाह करावल गईल बा. बतावल गईल बा कि,,,,,

आसाड़ सावन करी गमतरी.
कातिक खाय मालपुआ..
माई, बहिनिया पूँछन लागे,
कातिक किता हुआ..

मतलब ई भईल कि भदई के खेती के वखत तनिकों लापरवाही होई, आ कातिक महीना में किसान कवनों तरह के मौज मस्ती में मशगूल हो जाई तब किसान के भदई आ कातिक दुनों चौपट हो जाई. एह से खेती के काम गरम लोहा पर हथौड़ा मरला जइसन तत्परता से होवे के चाही. असल किसान एह मामला में कवनों चूक ना करें. बाकी किसानन के फसल के बाद सरकार के फैसला के बारी आवत बा, ओह समय सरकार के कंजूसी आ चालाकी साफ नज़र आवत बा. अभी हाल ही में सरकार के ओर से खरीफ फसलन के न्यूनतम समर्थन मूल्य के घोषणा भईल हा. खरीफ के मुख्य पैदवार धान अउर मक्का पर क्रमशः 72 रुपये और बीस रुपये दाम बढावें के ऐलान भईल बा.

दावा होत बा कि धान के ई अबतक के सबसे ज्यादा रेट घोषित भईल बा. पिछलका साल धान के दाम 1866 रुपये प्रति कुंतल से बढ़ा के एह साल 1940 रुपये प्रति कुंतल अउर मक्का 1850 रुपये बढ़ा के 1870 रुपये प्रति के घोषणा भईल बा. बाकी एह घोषित दाम पर भी किसानन के खरीद हो जाई, एकर कवनों गारंटी नइखे. सरकार की ओर से बतावल जात बा कि ई दाम किसानन के लागत मूल्य से पचास प्रतिशत ज्यादा बा. जब कि हकीकत ई बा कि एह घोषित दाम में किसान के आपन परिवार के मेहनत आ खेत के किराया शामिल नइखे. अगर ई दुनों चीज शामिल कइल जाइ तब किसान के वास्तविक लागत पर पचास फीसद फायदा देबे के दावा कइल जा सकेला.

एक बात के अउर ध्यान दिहल जरूरी बा कि खेती के काम में प्रयोग आवें वाला डीजल के दाम में पिछला एक साल में 22 रुपये से 23 रुपये की बढ़ोतरी भईल बा. ओकरा तुलना में धान मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य के बढ़ल दाम के तुलना करें के चाही कि किसान ज्यादा फायदे में बाड़न कि सरकार के समर्थन मूल्य ज्यादा बढ़ल बा. अभी पिछले रबी के मुख्य फ़सल गेंहू के खरीद में रोज रोज़ नया नया नियम कायदा लागू होत बा. किसान आपन गेहूं के पैदावार बेंचे खातिर रोज़ रोज सरकारी मुलाजिम के यहां दौड़ लगावत बाड़न आ हर समर्थवान से चिरौरी बाड़न. कहीं सरकार 15 जून के बाद गेहू के खरीद पर पाबंदी लगा दी, तब बहुत से किसान आपन पैदावार ना बेंच पइहें.

अभी आलम ई बा कि गरमी के मौसम में पैदा होखे वाला मक्का के समर्थन मूल्य भले 1875 रुपये प्रति कुंतल घोषित हो गईल बा, बाकी गांव में लॉक डाउन के दौरान मक्का के कीमत 800 रुपये से 850 रुपये प्रति कुंतल से ज्यादा दाम देबे के कवनों बनिया तैयार नइखे. एह तमाम अवरोध, अड़चन के बावजूद लॉक डाउन के दौरान ही ई दुसरका साल बा जब एक ओर देश के अर्थव्यवस्था में चौतरफा गिरावट दर्ज होत बा दूसरी ओर अकेले कृषि क्षेत्र बा जहां 3.6% के बृद्धि दर्ज भईल बा. अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच दावा करत बा कि एह साल भारत के घरेलू उत्पादन में 9.5% के गिरावट होखे के उम्मीद बा. एकरा बावजूद मौसम विभाग भविष्यवाणी कइले बा कि मानसून के चाल ठीक समय पर ठीक दिशा में बढ़ रहल बा. उम्मीद ई कइल जात बा कि जुलाई के पहिलका सप्ताह तक अउर कवनों अवरोध ना आई तब मानसून पूरा उत्तर भारत के सराबोर कर दी. तब तक भदई के फसल के बुवाई के काम पूरा हो जाई. आ किसान भाई खेत के गुड़ाई के काम में लग जइहें.

एह अनुकूलता के मद्देनजर ही सरकार के अनुमान बा कि एह साल खरीफ फसल के बुवाई के रकबा में16.4% के बृद्धि होई. एह आशावाद के एगो खास वजह इहो बा कि पिछले दस साल की तुलना में देश के जलाशय में ये साल 21% ज्यादा पानी भरल बा. हाल में रिजर्ब बैंक के मुद्रा नीति समीक्षा बैठक में भी एह बात के जिक्र भईल कि लगातर दूसरा साल सामान्य मानसून के वजह से खरीफ के पैदावार त बढबे करीं, देश के आर्थिक गतिविधि में तेजी आई. मौजूद समय में देश के अन्न भंडार में 100 मिलियन टन अनाज के भंडारण हो चुकल बा. किसानन के मेहनत के बलबूते ही ई सम्भव भईल कि सरकार 80 करोड़ लोगन के 5 किलों अनाज मुफ्त में देबे के घोषणा कइले बा. एह कोरोना काल में लोगन के मौत के भरपाई त कवनों और तरह से ना हो सकें.

बाकी एह आपद काल में जब किसान लोगन के भूख मितावें लगातार मेहनत करके अन्न के भंडार भरत बा, ओकर भी कोरोना काल में भी भईल नुकसान भरपाई करें के उपाय सरकार के करके के चाही.एगो काम सरकार नीतिगत रूप में कर सकेला,आ जवना से किसानन के कोरोना के वजह से भईल नुकसान के कुछ हद तक भरपाई हो जाई. सरकार के ई इन्तजाम करें के चाही कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरा जवन अभी तक प्राकृतिक आपदा तक सीमित बा, ओकरा के बढ़ाकर मानव निर्मित आपदा मसलन खासकर कोरोना काल में विशेष समय तक के लिए लागू कर देबे के चाही. काहे कि अभी तक के शोध से जवन तथ्य सामने ऑइल बा ओकरा से इहे मालूम होत बा कि कोरोना मानव निर्मित बीमारी बा. किसानन के एह वजह से जतना नुकसान भईल बा उ प्राकृतिक ना आदमी के वजह से नुकसान भईल बाटे. एह उपाय से किसानन के कुछ हद कोरोना के मार से निजात मिली जाइत. (मोहन सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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