Bhojpuri: राजनीति में नाप-जोख के बोल काहे कि बाहुबल 'अनंत' नइखे

राजनीत में अदावत के बहुत नजदीक से देखले-बूझले रहन. मने मन ऊ सोंचे लगले कि एक समय बिधायक अनंत सिंह, नीतीश कुमार के केतना करीबी रहन. आज ऊ लालू जी गुनगान कर रहल बाड़े. लेकिन लालू जी से वफादारी देखावे में अनंत सिंह मरजदा के भूला गइले. ऊ सांसद सुशील सुशील मोदी के खिलाफ अतना अभद्र ट्वीट कइले कि ओकरा के ना लिखल जा सके ना कहल जा सके.

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  • Last Updated: April 16, 2021, 1:30 PM IST
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चइत नवरात्रा में शिवपूजन चा के दलान पs सुंदरकांड के आयोजन रहे. स्वामी अखिलानंद पाठ शुरू करे से पहिले कहले, अगर मनुष्य के जिनगी संवारे के बा तs ओकरा रामचरित मानस जरूर पढ़े भा सुने के चाहीं. ई खाली पवित्र ग्रंथ ही ना हs बलिक जीवन के सम्पूर्ण जीवन दर्शन भी हs. सुदंरकांड पाठ शुरू भइल. कुछ देर के बाद स्वामी जी चौपाई पढ़ले-

प्रवसि नगर किजै सब काजा, हृदय राखि कौसलपुर राजा.

गरल सुधा रिपु करहीं मिताई, गोपद सिंधु अनल सितलाई..

मतलब, रउआ नगर में प्रवेश करीं अउर भगवान श्रीराम के मन में सुमिर के सभ काम करीं. अइसन कइला से बिस भी अमरित के समान हो जाला. दुश्मन भी ओकर संघतिया बन जाला. समुंदर गाय के खुर के समान गड़हा में समा जाला. दहकत आग भी शीतल हो जाला. स्वामी जी कहले, ई चौपाई के दोसर पंक्ति के बहुत चमत्कारी महत्व बा. अगर केहू शत्रु के मित्र बनावल चाहत बानी तs एह चौपाई के दोसर पंक्ति के जरूर पाठ करे के चाहीं. बिसुनदयाल बहुत गौर से पंडित जी के बात सुनत रहन. पिछिला साल बिधायक के चुनाव हार गइल रहन. राजनीत में अदावत के बहुत नजदीक से देखले-बूझले रहन. मने मन ऊ सोंचे लगले कि एक समय बिधायक अनंत सिंह, नीतीश कुमार के केतना करीबी रहन. आज ऊ लालू जी गुनगान कर रहल बाड़े. लेकिन लालू जी से वफादारी देखावे में अनंत सिंह मरजदा के भूला गइले. ऊ सांसद सुशील सुशील मोदी के खिलाफ अतना अभद्र ट्वीट कइले कि ओकरा के ना लिखल जा सके ना कहल जा सके. राजनीति में बिरोध खातिर एगो बिधायक अइसन फूहर बात कहल जा सकेला ?
सवारथ लागि करहिं सब प्रीति...

स्वामी जी, सुंदरकांड के पाठ के बीच्चे में आदिमी के सोभाव पs चर्चा करे लगले. ऊ रामचरित मानस के एगो अउर चौपाई पढ़ले

सुर नर मुनि सब कै यह रीती.



सवारथ लागि करहिं सब प्रीति..

मतलब, देवता, मनुष्य अउर मुनि के एक्के रीति बा कि ऊ सवारथ खातिर ही केहू से प्रेम करे ले. लेकिन सवारथ भी दू तरीके के होला. पहिला ई कि जब केहू दोसरा के फैदा पहुंचवला के बाद आपन फैदा सोचे. एकरा में केहू के बेलकुल तपलीख ना होखे. दोसर ई कि केहू के नोकसान पहुंचा के आपन फैदा के बात सोचल जाव. ई बात सुन के बिसुनदयाल के बुझाइल कि स्वामी जी उनके ई प्रसंग सुना रहल बाड़े. बिधायक अनंत सिंह तs दोसरा के नोकसान पहुंचा के पाटी में आपन छबि बनावल चाहत बाड़े. लेकिन उनका ई बात जरूर इयाद राखे के चाहीं कि राजनीति में दोस्ती अउर दुश्मनी कबो अस्थायी ना रहे. बाहुबल भी समय के साथ हवा में बिलीन हो जाला. इहे अनंत सिंह खातिर पूर्व सांसद अरुण कुमार ईसारा ईसारा में नीतीश कुमार के छाति तूरे के बात कहले रहन. अइसन भासा के परयोग करे वला अरुण कुमार आज कहां बाड़े ? ना सांसद बाड़े, ना बिधायक बाड़े. अब तs ऊ अनंत सिंह के तरफदारी भी ना कर सकस. ई सभ बात सोच के बिसुनदयाल के मन बेचैन हो गइल. सुंदरकांड पूरा भइला के बाद जब ऊ उठे लगले तs मनोहर कहले, हमहूं साथे चलब.

जब एक बोली से बदल गइल रहे बिहार के राजनीत

बिशुनदयाल के मन में स्वामी जी बात घूमत रहे. आदिमी के कबहुओं आपन बाहुबल पs अभिमान ना करे के चाहीं. बाहुबल समय के आनी-जानी हs. आज बा काल्ह नइखे. ऐह से हरमेसा नाप तउल के बोले के चाहीं. बिशुनदयाल के गमसुम देख के मनोहर कहले, का सोचल रहल बाड़s ? बिशुनदयाल जब बिधायक अनंत सिंह के ट्वीट के बारे में बतवले तs उहो सोचे लगले. कुछ सोच के मनोहर कहले, इंसान के जिनगी में बोली-बचन के बहुत अहमियत बा. इहे बोली इज्जत दियावे ला, इहे बोली जिल्लत दियावे ला. सोच लs कि शहाबुद्दीन केतना बड़ा बाहुबली रहन. ऊ जीरादेई से दू बेर बिधायक अउर सीवान से चार बेर सांसद रहन. एगारह साल से जेल में रहला के बाद ऊ 2016 में जमानत पs छूटल रहन. लेकिन जेल से निकलला के बाद ऊ कह देले कि नीतीश कुमार परिस्थिति के सीम रहन. ओह घरी लालू-नीतीश एक भइल रहे लोग. इहे एक बयान (बोली) से बिहार के राजनीत बदल गइल. लालू नीतीश के दोस्ती टूटे के बिया रोपा गइल. शहाबुद्दीन के बाहुबल कवनो काम ना आइल. कानून के अइसन शिकंजा कसल कि उनका फेन जेल जाये के पड़ल. एक बोली से शहाबुद्दीन आपन भी नोकसान कइले अउर राजद के भी. बहुत मोसकिल से राजद के सत्ता मिलल रहे लेकिन बीच्चे में छीना गइल.

बिरोध ओतने ठीक कि नजर मिलावे के गुंजाइस रहे

मुन्ना शुक्ला भी जदयू के बाहुबली बिधायक रहन. उनकर पत्नी अन्नु शुक्ला भी बिधायक रही. एक समय मुन्ना शुक्ला के भी तूति बोलत रहे. लेकिन जब समय गिरल तs उनका चुनाव हारे के पड़ल. 2015 के चुनाव में उनकर हार का भइल कि राजनीत में दरकिनार हो गइले. बाहुबल पानी के रवानी हs. आज बा काल्ह नइखे. लेकिन आदिमी के निजी संबंध हरमेसा असथाई रहेला. दल अलग भी होखे तs दिल के अलग ना करे के चाहीं. सांसद ललन सिंह अउर नीतीश कुमार में भी खटपट भइल रहे. लेकिन फेन दूनो जना एक हो गइले. उपेनदर कुसवाहा अउर नीतीश कुमार मे केतना बरियर झंझट भइल लेकिन फेन मेल हो गइल. कब के केकरा से दोस्ती हो जाई अउर केकरा से दुसमनी, केहू ना बता सके. जवन आनंत सिंह के लालू जादव देखल ना चाहत रहन आजे उहे राजद के समर्पित नेता बन गइल बाड़े. अनंत सिंह के हनुमान कहाये वला बंटू सिंह आज राजद के प्रवक्ता हो गइल बाड़े. बिहार के राजनीत में का कबो केहू सोचले रहे कि अनंत सिंह अउर लालू जादव में मेल हो सकेला ? लेकिन आज ई सत्य बा. विरोध ओतने ठीक बा जवना से कि नजर मिलावे के गुंजाइस बांचल रहे. काहे से कि केहू अनंतकाल तक महंथ ना रहे. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)


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