Bhojpuri Spl: आ रहल बा मिठाई के त्योहार, हो जाईं होली के रंग में सरोबार

होली एगो अइसन परब ह जेमे छोट बड़ बूढ़ सबिका क मन में उमंग भर जाला. एमे अउर रंग डालेला मर मिष्ठान. अइसे त मर मिठाई के बिना हमनी क कौअनो परब त्योहार पूरा न होला. होली में त मर मिठाई क एगो अलगे स्थान ह. खाए पिये वाला इ परब, पुआ अउर गुजिया जइसन मिष्ठान क सवाद बिना पूरा ना हो सकेला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 12:36 PM IST
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फागुन क बयार बंसत पंचमी से ही बहे लागल ह, जेके फगुनहट कहल जाला. फगुनहट चलला के साथे ही होली क रंग भी लोगन क मन के रंगे लागे ला अउर होली के हफ्ता भर पहिले से ही लोगन क तन भी रंगाए लागे ला. बिहार अउर पूर्वांचल में त बसंत पंचमी के दिने से लोग अबीर गुलाल उड़ावे लगे लं. होली एगो अइसन परब ह जेमे छोट बड़ बूढ़ सबिका क मन में उमंग भर जाला. एमे अउर रंग डालेला मर मिष्ठान. अइसे त मर मिठाई के बिना हमनी क कौअनो परब त्योहार पूरा न होला. होली में त मर मिठाई क एगो अलगे स्थान ह. खाए पिये वाला इ परब, पुआ अउर गुजिया जइसन मिष्ठान क सवाद बिना पूरा ना हो सकेला.

बिहार अउर पूर्वांचल क भोजपुरिया समाज में पुआ सवाद त अइसन घुलल मिलल ह कि एकरा बिना कौअनो परब त्योहार क कल्पना न कइल जा सकेला. तेपर होली में त एकर सवाद अउर बढ़ जाला. पुआ माने गेहूं क आटा में दूध आ चीनी बा गुड़ मिला के बनावन घोल जेमे आपन क्षमता के बराबर मिलावल जाला किशमिश अउर छोहाड़ा. इ गाढ़ा घोल के गरम देसी घी बा डालडा में छान के बने ला पुआ. होली में बिहार पूर्वांचल क गांव देहात बा शहर में घरे घरे बनेला पुआ. होली खेले आवे वालन मेहमानन के पुआ जरूर परोसल जाला. कहूं कहूं कटहर क तरकारी बा आलू दम के साथे त कहूं कहूं भांग बा ठंडई के साथे. भांग ठंडई छान के जे मेहमान पुआ क सवाद लेला ओकर मजा दोगुना हो जाला.

कहल जाला कि भांग छनला के बाद लोगन क भूख बढ़ा जाला एकरा बाद उ केतना पुआ खा जाला ओके पतो न चलेला. कुछ लोगन के पुआ क ढेर मजा कटहर क तरकारी बा आलू दम से आवेला त कुछ लोग पुआ निछाने खाइल पसंद करेला. पुआ जइसन मीठा के तरकारी के साथे खाए के मजा होली जइसन परब पर ही उठावल जा सकेला. माने नमकीन व मीठा दूनो क सवाद एक्के साथे. नॉनवेज क शौकीन लोग त मांस मुर्गा के साथो पुआ क सवाद उठावे ला. नॉनवेज क शौकीन लोग त होली के दिने मांस मुर्गा बनावे से परहेज ना करेला. पुआ चाहे जइसे खाइल जाओ होली के दिन ओके खाए क अलगे मजा ह.

समय के साथे पुआ बनावे क विधि में भी बदलाव आइल. बिहार अउर पूर्वांचल में त होली दिने आजो सादा पुआ बनावे क ही चलन ह जऔन बिना खराब होले हफ्ता भर चल जाला. लेकिन कुछ शौकिन लोग अब होली के दिने मालपुआ भी बनावे लगल ह. उहो शहरी इलाका क लोग. मालपुआ बनावे क आम विधि त सादा पुआ बनावे जइसन ही ह खाली ओमे पुआ क घोल में ढेर मात्रा में खोआ भी मिलावल जाला अउर घी बा डालडा में छनला के बाद ओके चीनी क चासनी में डुबावल जाला. चासनी में लिपटल होवे के चलिते एकर सवाद सादा पुआ से अधिका आवेला लेकिन एके एगो दूगो खइला के बादे मन भर जाला. दोसरा ओर सादा पुआ चाहे जेतना खाला मन ना भरेला भलेहू पेट भर जाए. एकरा अलावे चाशनी में लपटल होवे के चलते मालपुआ के ढेर दिन तक रखला में खराब होबे के डर रहेला. एही के चलिते बिहार अउर पूर्वांचल में सादा पुआ के ही बनावे अउर खावे खिआवे क चलन ह.
होली क मिठाई क चरिचा एगो अउरो देसी मीठा गुजिया के बिना पूरा ना हो सकेला. मैदा सूजी अउर खोआ से बनल इ मीठा के त समूचा उत्तरी भारत में गुजिया ही कहल जाला लेकिन बिहार क कई इलाका में एके पिड़किया भी कहल जाला. होली के दू तीन दिन पहिले से ही घरे घरे पिड़किया बा गुजिया बनावल शुरू हो जाला. केहू खाली खोआ डाल के गुजिया बनावे ला ता केहू सूजी अउर खोआ डाल के. मैदा क लोइ में सूजी खोआ क मिश्रण डाल के बनावल गुजिया के घी डालडा में छान के तैयार कइल जाला देसी मीठा गुजिया बा पिड़किया. होली के दिने आवे वाले मेहमानन के गुजिया अउर मैदा क नमकीन ( नमक पारा ) परोसल जाला. अबीर गुलाल मलला के बाद मेहमानन के गुजिया से मुंह मीठ करावल जाला. वइसे त घर में बनल गुजिया क सवाद क बाते कुछ अउरो ह लेकिन आजकल बनावे क झंझट झमेला से बचे वाला लोग बाजार में बनल गुजिया भी घरे ले आवे ला.

बाजार माने मिठाई क दुकान में आजकल माने होली क मौका पर गुजिया भी खूब बिकात ह. होली के हफ्ता भर पहिले से छोट बड़ मिठाई के दुकानन में गुजिया बिकाए लगे ला. जब कऔनो मीठा क बाजारीकरण होला त ओकर बनावे क विधि भी बदल जाला. बाजार में बनल अधिकतर गुजिया चाशनी में लपटल होला. कुछ नामी मीठा क दुकानन में देसी माने सादो गुजिया भी मिलेला. बनेवा क झमेला से बचे खातिर पइसा वाला लोग ओके खरीद के ले आवे ला लेकिन घर में बनल सादा गुजिया क कऔऩो जोड़ ना ह. कहे क माने इ कि अब सब कुछ बाजार में मिले लागल ह … गुजिया से लेके मालपुआ तक लेकिन होली में जऔन मजा देसी पुआ अउर घर में बनल गुजिया से आवे ला उ सवाद बाजार में बनल मीठा में खोजला से भी नाही मिली. (डिस्क्लेमर- लेखक सुशील कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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