जब लोकसभा में गूंजलs फिलिमी गीत—कवन गीत लालू जी गवले अउर कवन गीत रवि किशन

जब लोकसभा में गूंजलs फिलिमी गीत—कवन गीत लालू जी गवले अउर कवन गीत रवि किशन
अंगरेजी के कहावत और उर्दू के शेर त संसद में चलते रहेला, रवि किशन उहां भोजपुरियो के रंग जमा चुकल बाने

परधानमंत्री जब बनारस में भोजपुरी बोल के भाषण शुरू कइले तो लागल कि अब ई भाषा के इज्जत मिल जाई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2020, 3:35 PM IST
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भोरे अखबार उठइबे कइनी कि मोबाइल के घंटी बाजल. मोबाइल उठवनी तs देखनी कि फुलेना बाबू के फोन रहे. परनाम पाती भइल तो फुलेना बाबू कहनी, रामसकल ! तहरा के एगो तकलीफ देवे खातिर फोन कइनी हं. का हs से कि हमरा लइका के पटना में एतवार के परीक्षा बा. कोरोना के आफत में एह घरी कहीं ठहरलो मोसकिले बा. अगर तहरा कवनो दिकत ना होखे तs..... हम बीचे में उनकर बात काट के कहनी, ई तs हमार अहोभाग्य कहाई कि रऊआ हमरे घरे पधारीं. एतवार के हमरा बैंको नइखे जायेके. रऊआ साथे बइठ के बात कइला कतना दिन भइल. मने मन कहनी, फुलेना बाबू रउबे पढ़वला के फल बा कि आज रामसकल तिवारी बैंक के मनेजर बाड़े. डॉ. फुलेना प्रसाद कौलेज में मैथ पढ़ावत रहीं. अइसन ज्ञानी गुरु अपना जीवन में ना देखनी. उनका खातिर मन में बड़ा इज्जत रहे. अपना लइका साथे उहां के हमरा घरे अइनी. रात में खइला-पीला के बाद गप सड़क्का शुरू भइल. फुलेना बाबू पुछनी, का हो रामसकल, तहार भोजपुरी हितैषी मंच के का हाल बा ? भोजपुरी सिनेमा के हीरो लोग तs अब सांसदो बन गइल बा, का कुछओ मदद मिलेला ला ?

के जानी भोजपुरी के मरम ?
कुछ देर फुलेना बाबू देने देखनी, सोचनी कि ईहां के बैंक के काम के बदले भोजपुरी मंच के बात काहे पूछs तानी ? फेन कहनी, ना एह घरी त बैंके के काम से फुर्सत नइके मिलतs. पांच-छह महीना से भोजपुरी मंच के काम नाहिंए के बराबर बा. हां जनवरी में सांसद रवि किशन से मोलकात भइल रहे. रवि किशन तs भोजपुरी के अठवां अनुसूची में शामिल करावे खातिर बूता भर जोर लगाइले बानी. पुलेना बाबू कहले, नरेन्द्र मोदी बनारस आवले तs भोजपुरी में चार लाइन बोल के बाहबाही लूटेले, ऊ काहे नाइखन अपना सांसद के बात सुनतs बाड़े ?  हम कहनी, इहे त दिक्कत बा, मोदी जी भोजपुरी बोल के ताली त बटोरे ले, लेकिन अठवां अनुसूची के बात चुप्पी साध लेवे ले. जुलाई 2019 में रवि किशन लोकसभा में भोजपुरी के अठवां अनुसूची में शामिल करे के खातिर जोरदार भाषण देले रहीं.

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जब रवि किशन लोकसभा में गवले भोजपुरी गाना


गोरखपुर के सांसद रवि किशन 2 जुलाई 2019 के लोकसभा में जवन भाषण देले रहीं ओकर कौवनो जोड़ा नइखे. ऊ कहले, देश में 25 करोड़ लोग भोजपुरी बोले अउर समझे वाला बाड़न लेकिन तबहुओं ई अठवां अनुसूची में नइखे. परधानमंत्री जब बनारस में भोजपुरी बोल के भाषण शुरू कइले तो लागल कि अब ई भाषा के इज्जत मिल जाई. भाषण करतs करतs ऊ भोजपुरी के मिठास बतावे खातिर गावे लगले....
हे गंगा मइय़ा तोहे पियरी चढ़ाइबो.. सईंया से कर दे मिलनवा...

तबे लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला जी बीच में टोकले, गावे के कथा बाद में होई कबो... तब रवि किशन कहले, महोदय हथजोड़िया करत बानी कि भोजपुरी के अठवां अनुसूची में शामिल करे प विचार कइल जाए. गंगा मइया तोहे पियरी चढ़ाइबो भोजपुरी के पहिला सिनेमा रहे. इ फिलिम के बनावे में राष्ट्रपति राजेन्द्रो बाबू के सहजोग रहे. फुलेना बाबू कहले, जब एतना निहोरा कइला के बादो सरकार बात नइखे सुनत तs भाजपा के सरकार बनला के का फैदा, बनारसी मोदी के परधानमंतरी बनला के का फैदा ? अब भोजपुरी के इज्जत ना मिली तs कब मिली?

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जब लालू जी लोकसभा में गवले फिल्मी गाना
फुलेना बाबू के सवाल के हमरा पाले कौवनो जवाब ना रहे. हम बाते टारे खातिर कहनी, अइसन नइखे कि रविये किशन जी लोकसभा में गाना गवले रहन, लालुओ जी इ काम कर चुकल बाड़े. 2008 में भारत जब अमेरिका से परमाणु समझौता कइले रहे तs कौमनिस्ट पाटी मनमोहन सरकार से सपोट खींच ले ले रहे. सरकार के बहुमत साबित करे खातिर एसपेसल सेशन बोलावल गइल. 21 जुलाई के मनमोहन सिंह विसवास परसताव पेश कइले. 22 जुलाई 2008 के भोट रहे. ओह घरी लालू जी रेल मंतरी रहीं. विसवास परसताव के समरथन में लालू जी वामपंथी दलन प अपना अंदाज में चुटकी ले ललन.

लालू परसाद लाल झंडा वला लोगन देने देख के कहले, तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं, तुम किसी और को चाहोगे तो मुसकिल होगी.... एकरा बाद जे ठहाका लागलs कि पूछीं मत. लालू परसाद ओह दिन अपना रंग में रहीं, ऊ कहले, परमाणु डील प भले कौमनिस्ट लोग अलगा बा लेकिन उनका लोग से हरमेसा नाता बनल रही. इहो बात पर ऊ फिल्मी गाना गवले- सौ साल पहले हमें तुम से प्यार था, आज भी है और कल भी रहेगा....  लालू परसाद ई दूनो गाना कागज प लिख के लोकसभा में आइल रहीं. ऊहां के अपना भाषण से अइसन रंग जमावनी कि संभे हंसत-हंसत लोटपोट हो गइल. फुलेना बाबू हमार बात सुन के मुसकाये लगले अउर कहले, तूं त खिस्सा-कहानी में माहिर हो गइल बाड़s. उनका के जम्हाई लेत देख के कहनी, हं चलीं सूतल जाव, भोरे जागहूं के होई.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)
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