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Ganesh Visarjan: अनंत चतुर्दशी के दिने होई गणपति बप्पा के प्रतिमा के विसर्जन, भजन पर नाचेलें भक्त

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गणेश चतुर्थी से चालू भइल 10 दिन चले वाला गणेश उत्सव अब अपना समापन पर बा. परसों गणेश विसर्जन ह अउरी सभे गणपति बप्पा के पोखरा, कुंड भा नदी समुंदर में विसर्जित करके अगिला साल फेरु आवे खातिर विनती करी. ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’...ई नारा त सुनले होखब. जब लोग विसर्जन पर जाला त ई सबसे ढेर गूँजेला आ साथे गूँजेला गणपति भजन, ओ भजन के धुन, जे पर लोग नचेला, झूमेला अउरी उत्साह आ खुशी से भर जाला.

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गणपति बप्पा के बुद्धि अउरी प्रसन्नता के देव मानल जाला. उहाँ के अपना भक्तन के बुद्धि अउरी खुशी के आशीर्वाद देनी. एह साल 2021 में गणपति विसर्जन के तिथि पड़त बा 19 सितंबर के. आवे वाला रविवार के अनंत चतुर्दशी बा. आ एही दिन गणपति बप्पा के महापूजन के समापन होई अउरी उहाँ के जल में मग्न होखब.

अइसन मान्यता बा कि गणपति बप्पा माता पार्वती के साथे धरती पर एह दस दिन के दौरान वास करेनी अउरी भक्तन से मेल मिलाप अउरी ओह लोग के आशीर्वाद देहला के बाद वापस अपना पिता श्री शंकर जी के लगे माई पार्वती के साथे लवट जानी. भादो के अँजोरिया के चतुर्दशी के दिने अनंत चतुर्दशी होला अउरी एही दिन उहाँ के लवटब आ ओहि दिन आखिरी विसर्जन होई. काहें कि बहुत लोग जे अपना घरे गणपति जी के बोलवेला, उहाँ के प्रतिमा के स्थापना करेला, उ तीन दिन पर, पाँच दिन पर, छव दिन पर भी विसर्जन करेला. अनंत चतुर्दशी काहें विसर्जन होला अउरी अनंत देव के के कहल जाला, एकरा पीछे भी पौराणिक कथा बा.

अनंत चतुर्दशी के पूजा काहें होला?

सनातन धर्म के पुराण में अनंत चतुर्दशी के कथा के जहां उल्लेख मिलेला, उ युधिष्ठिर से जुड़ल बा. भइल का कि द्वापरयुग में जब पाँचो पांडव जुआ में आपन राज पाट अउरी सम्मान-प्रतिष्ठा हार के वनवास के दंड भोगत रहे लोग तब भगवान श्रीकृष्ण ओह लोग से कहनी कि तोहन लोग के अनंत चतुर्दशी के व्रत करे के चाहीं. युधिष्ठिर पुछलें कि अनंत देव के ह? तब श्रीकृष्ण कहनी कि भगवान श्री विष्णु के ही अनंत देव कहल जाला. सब जाना अनंत चतुर्दशी के व्रत कइल लोग आ ओकर प्रभाव पड़े लागल. उ लोग हर तरह से बलवान अउरी समृद्ध होखे लागल लोग आ अंत में कौरव के विशाल सेना के हरा के हस्तिनापुर के आपन साम्राज्य आ आपन सगरो अधिकार उ लोग वापस ले लिहल लोग.

एह दिन नारायण के अनंत रूप के पूजा होला. उहाँ के विधि विधान से पूजा अउरी व्रत कइला से सभ तरह के कष्ट दूर होला अउरी अक्षय पुण्य मिलेला माने कि कबो ना खत्म होखे वाला पुण्य के प्राप्ति होला.

गणपति विसर्जन पर बाजे वाला भजन

गणपति विसर्जन पर अधिकतर भजन जवन बाजेला, ओह में नृत्य वाला बीट होला, रीदम होला, ढोल – नगाड़ा के ध्वनि होला, झाल-मंजीरा के धुन होला, जेके सुनते, जवन आदमी ना नाचत होखे ओकरो गोड़ थिरके लागेला. उहो नाच उठेला जे सालों से नाचल भुला गइल बा, दुख अउरी तृष्णा में बेकल बा. जवन गीत सबसे हिट बा, उ बा नवका अग्निपथ के ‘देवा श्री गणेशा’. एह गाना में एगो विशाल ऑर्केस्ट्रा बाजेला. एह गाना के कॉम्पोजर अउरी संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल अपना साक्षात्कार में कहले रहल लोग कि जब ई गाना बनावत रहनी जा त हमनी सौ से अधिक साज-बाज वाला के साथे लाइव आर्केस्ट्रा में ई गाना रिकॉर्ड कइनी जा. ई गाना सुनके लगबो करेला कि जेतना भव्यता एह में बा ओतने भव्यता से ई बनलो होई. एह गीत के हिन्दी सिनेमा के मशहूर गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य लिखले बाड़ें.

अजय अतुल मराठी ह लोग अउरी उहाँ के लोक संगीत के बहुत सुंदरता से अपना संगीत में प्रयोग करेला लोग. सभे जानत बा कि महाराष्ट्र कला आ संगीत में शुरुए से धनी रहल बा. एकर झलक ओ लोग के गीत-संगीत में लउकेला, भले उ हिन्दी में होखे भा मराठी में. एही जोड़ी के लिखल, कम्पोज कइल अउरी संगीत से सजावल एगो गाना बा, एकदंताय वक्रतुंडाय. एके गवले बाड़ें महान गायक अउरी संगीतकार शंकर महादेवन. ई गीत भी खूब बाजेला.

कुछ गीत शांत अउरी मधुर ध्वनि वाला भी विसर्जन में बाजेला, जे पर लोग कूद-कूद के नाचेला ना बाकिर झूमेला, गणेश जी के सुमिरन करेला. जइसे दर्द का रिश्ता (1982) में हरिहरन के आवाज में एगो मधुर भजन ‘मेरे मन मंदिर में तू भगवान रहे, मेरे दुख से कैसे तुम अनजान रहे…’. बहुत ही मार्मिक अउरी सुंदर भजन बा गणेश जी के. एगो गणपति भजन हमरो (मनोज भावुक) लिखे के मौका गणेश जी देहले रहनी जवन भोजपुरी के मशहूर गायिका प्रियंका सिंह गवले बाड़ी. ओ भजन के एक एक वाक्य हमरा दिल से निकलल रहे अउरी काफी श्रोता ओह के पसंद भी कइलें.

मनोज भावुक के लिखल गणेश भजन

मेरे मन के आँगन में आओ गजानन
हरो कष्ट, दुख को मिटाओ गजानन

मुझे इस तरह से गमों ने है घेरा
कि लगता नहीं है कि होगा सवेरा
तुम्हीं मुझमें सूरज उगाओ गजानन
मेरे मन के…

अनाड़ी हूँ, मुझको नहीं ये पता है
कि अच्छा है क्या और क्या-क्या बुरा है
तुम्ही मुझको रस्ता दिखाओ गजानन
मेरे मन के…

मैं सुख खोजते, दुख के दरिया में आया
तो जाना कि है कौन अपना पराया
तुम्हीं हो बस अपना, बचाओ गजानन
मेरे मन के…

एह भजन में बहुत नृत्य वाला बीट्स त नइखे बाकिर एगो दुख से बेकल भक्त के गुहार बा. अइसन अउर भी गीत, भजन बाटे जवन विसर्जन के दिने बाजेला अउरी दर्शक उहाँ के भक्ति से सराबोर हो जाला. गणपति बप्पा सभपर कृपा करीं, इहे विनती बा. गणपति बप्पा मोरया!

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं. )

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