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Bhojpuri: 52 के भइलें गोरखपुर सांसद-भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन

17 जुलाई 1969 के दिने मुंबई के सातांक्रूज इलाका में जनमल रवि किशन के बाबूजी पहिलहीं से मुम्बई में डेयरी के व्यापार करत रहलें. बाद में बिजनेस में घाटा भइल त सब छोड़कर गांव वापस आ गइलें. जानीं कइसन रहल फिल्म में रवि किशन के संघर्ष गाथा.

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जब सोना लगातार भट्टी में तपेला तब जाके कुंदन बनेला आ तबे जाके ओकर शोभा बढ़ेला. ओसहीं आदमी जब संघर्ष के आग में तपेला त उ सफल इंसान बनेला आ अपना कीर्ति से जग में जानल जाला. जीवन में सभकरा कठिन परीक्षा से गुजरे के पड़ेला. जे ओमें फेल होके लौट जाला उ किनारे पर रहि जाला. जे ओकरा में गिरत-पड़त-लड़त आगे बढ़त जाला, उहे सफल इंसान कहाला. एक अइसहीं सामान्य पत्थर से कुंदन बनल व्यक्ति के नाम ह रविकिशन. फिल्मी दुनिया के अनिश्चित सफर में आपन झण्डा लहरवला के बाद राजनीति जइसन पेंचीदा पेशा में अपना के फिट अउरी हिट करे वाला रवि किशन उर्फ रवि किशन शुक्ला के जन्मदिन के पूर्व संध्या पर उनके जीवन के खिड़की में झाँकल जाव.

17 जुलाई 1969 के दिने मुंबई के सातांक्रूज इलाका में जनमल रवि किशन के बाबूजी पहिलहीं से मुम्बई में डेयरी के व्यापार करत रहलें. सब कुछ बढ़िया चलत रहे फेर अचानक से उनके बिजनेस में लगातार घाटा होखे लागल त उ परिवार समेत जौनपुर जिला में अपना पैतृक गांव लौट अइलें. बचपन रवि किशन के बड़ा मुश्किल में बीतल. 17 साल के उमिर में रवि किशन वापस बंबई आके फिल्मन में करियर बनावे के इच्छा जाहिर कइलें. उनके पिता बंबई के हालचाल आ फिल्म इंडस्ट्री के संघर्ष के बारे में जानत रहलें. उ रवि के डेयरी के ही व्यवसाय शुरू करे के कहलें. किशोर रवि ना मनलें आ अपना माई से 500 रुपिया लेके मुम्बई फिल्मन में काम करे खातिर चल अइलें.

बंबई में सब कुछ उनका खातिर नया रहे, भले जन्म इहवें भइल रहे त का. उनके फिल्मन में काम करे खातिर खूब संघर्ष करे के पड़ल. हे स्टूडियो से हो स्टूडियो, हे डायरेक्टर से हो असिस्टंट के चक्कर लगावस. एक बार उ एगो किस्सा बतवलें कि संघर्ष के टाइम में हम रोज सबेरे खाना पीना खा के जूता पहिन के बइठ जाईं. काहें कि केहू जूता पहिन के सूत नइखे सकत, एकर माने कि हमरा उठ के कहीं जाहीं के बा, केहू से मिलहीं के बा. उनके 90 के दशक में बीग्रेड हिंदी फिल्म पीताम्बर में चांस मिलिये गइल. हालांकि अइसन छोट-छोट फिल्म मिले के सिलसिला त चले लागल बाकिर बड़हन ब्रेक खातिर उनके संघर्ष चलत रहे. उनके छोट-छोट हिंदी फिल्मन में जइसे आग का तूफान, उधार की ज़िंदगी में काम मिलत रहल. 1996 में उनके नितिन मनमोहन के फ़िल्म आर्मी मिलल जेमें लीड शाहरुख खान आ श्रीदेवी रहे लोग. एह फ़िल्म से उनके स्पेस अउरी पहचान दुनू मिलल. संजोग देखीं कि 2019 में नितिन मनमोहन के बेटी प्राची मनमोहन रविकिशन के बेटी रीवा किशन के अपना फिल्म 'सब कुशल मंगल' से बॉलीवुड में लॉन्च कइली.

रविकिशन के साइड रोल मिलत रहल आ गाड़ी खिसकत रहल. बाकिर किस्मत तब पलटा खइलस जब उनके 2003 में सलमान खान के अपोजिट तेरे नाम फिल्म में रोल मिलल. रवि एह में हीरोइन निर्मला (भूमिका चावला) के मंगेतर पंडित रामेश्वर के भूमिका निभवलें. एह फिल्म में उनके शानदार अभिनय के चलते सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता खातिर राष्ट्रीय पुरस्कार दिहल गइल. एकरा से दू साल पहिले 2001 में उ भोजपुरी फिल्मन में भी किस्मत आजमावे आ गइल रहलें आ 'सइयां हमार' नाम के फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभवलें रहलें. ई फिल्म चर्चा में आइल अउरी रविकिशन के भोजपुरी में लगातार फिल्म मिले लागल.

रविकिशन से साल 2002 में हमार पहिला मुलाकात फिल्म सिटी, मुंबई में, मोहन जी प्रसाद के फिल्म ‘ सइयां से कर द मिलनवा हे राम’ के सेट पर भइल आ हम उनके साक्षात्कार लेहले रहनी. तब हम लगातार भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज लोग से मिलत रहनी, साक्षात्कार करत रहनी. अमिताभ बच्चन, सुजीत कुमार, राकेश पाण्डेय आ कुणाल सिंह समेत दर्जनों महारथी लोग के साक्षात्कार कइनी. ओही कड़ी में मोहन जी प्रसाद से मिले गइल रहनी त उ रवि किशन से परिचय करववले. तब रवि किशन पांकी में लोटल रहलें आ ‘ कागज़ प कबो, कबो धरती पर हम उनकर नाम लिखत बानी’’ गाना के शूटिंग चलत रहे.

रविकिशन में बहुत संभावना लउकल. कुछ साल बाद (2005 में) उनके भोजपुरी फिल्म 'पंडित जी बताईं ना बियाह कब होई' रिलीज भइल आ करोड़ों में कमाई कइलस. इहे साल रहे जब भोजपुरी सिनेमा के आधुनिक युग के बाकायदा श्री गणेश हो गइल. 2005 में ही उनकर फिल्म आइल, ‘कब होई गवनवा हमार’. एह फिल्म के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार मिलल आ रविकिशन एगो नामचीन अभिनेता बन गइलें आ आवे वाला साल में लगातार हिट फिल्म देके रवि भोजपुरी के सुपरस्टार अभिनेता बन गइलें.

रवि किशन के हिन्दी फिल्मन में भी अच्छा रोल मिले लागल आ उ साउथ इंडस्ट्री में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभावे लगलें. लगभग 150 फिल्मन में रविकिशन काम कर चुकल बाड़ें. उनके कुछ उल्लेखनीय हिन्दी फिल्मन में तेरे नाम, आन, 1971, मुक्काबाज़, बटला हाउस, फिर हेरा फेरी आदि बा.

रवि किशन साल 2014 में राजनीति में अइलें आ अपना जिला जौनपुर से लोकसभा के चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लडलें बाकिर हार गइलें. फेर साल 2019 में योगी के मुख्यमंत्री बन गइला के बाद खाली भइल गोरखपुर सीट से उ चुनाव जीत के मोदी 2.0 सरकार में सांसद बनलें आ अब राजनीति में बहुत सक्रिय बाड़ें.

2002 से लेके अब तक ना जाने केतना बेर रवि किशन के साथे मंच साझा करे के मौका मिलल. कई बार हमरा संचालन में उ भाषण दिहलें, सेमीनार-परिचर्चा आ अधिवेशन में भाग लिहलें. सारेगामापा के भोजपुरी संस्करण के हम प्रोजेक्ट हेड रहनी, लेखक रहनी आ रवि जी एंकर त उहाँ भी लम्बा समय तक साथे रहे के आ उनका बमभोला स्वभाव से रुबरु होखे के मौका मिलल.

2018 में जब दुनिया के हर क्षेत्र के अचीवर्स के इंटरव्यू के सिलसिला शुरू कइनी त रवि किशन से भी बहुत लम्बा बातचीत कइनी. उ वीडियो देखल जा सकेला. ओह में उ राजनीति में उतर के भोजपुरी खातिर कुछ करे के चिंता व्यक्त कइले रहले. सांसद बनला के बाद उ भोजपुरी के संवैधानिक दर्जा दिआवे के आपन वादा ना भुलइलें आ शुरुआत पुरजोर आवाज़ में संसद में आपन बात रखलें. ओकरा कुछ दिन बादे उ भोजपुरी भाषा के आठवीं अनुसूची में शामिल करे खातिर बिल भी पेश कर देहलें. बिल पेश करत में उ भोजपुरी में ‘हे गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ गीत भी गा देहलें, जवना के खूब चर्चा भइल.

भोजपुरी फिल्मन अउरी गीतन में अश्लीलता के ऊपर उठ रहल विवाद पर उ कुछ दिन पहिलहीं बयान देहलें आ कहलें कि ‘हम सालो पहिले एगो अश्लील भोजपुरी गाना पर एक्टिंग कइलें रहनी जेकर आजुओ हमरा खेद बा. भोजपुरी इंडस्ट्री में अश्लील गाना बंद होखे आ आवे वाला समय में ई बहुत बड़हन उद्योग बने, हमार इहे प्रयास बा. उ योगी सरकार अउरी नीतीश सरकार के चिट्ठी लिखके भोजपुरी में अश्लील गीतन पर रोक लगावे खातिर सख्त कानून बनावे के मांग कइलें बाड़ें. उ सूचना अउरी प्रौद्योगिकी मंत्री के भी चिट्ठी लिख के एह पर ध्यान दिअवलें बाड़ें. काल्ह 52 साल के हो रहल शानदार अभिनेता और उभरत नेता रविकिशन के जन्मदिवस पर हार्दिक शुभकामना!
( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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