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Bhojpuri Special: बातचीत से ही होखे के चाहीं किसान आंदोलन के फैसला, पढ़ीं पूरा मामला

एकरा पहिले भी देश में किसान आंदोलन भइल बा। देश के आजादी के पहिले आ बाद में भी।
एकरा पहिले भी देश में किसान आंदोलन भइल बा। देश के आजादी के पहिले आ बाद में भी।

खेती में सुधार लागू होखे के बा, फेर भी अगर किसान लोगन के आपत्ति बा त बातचीत के रस्ता बंद कइला से काम ना बनी. साथ में इहो सोचल जरूरी बा कि जब अलग अलग इलाका में खेती के लागत अलग अलग बा तब एके तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य पूरे देश पर लागू कइल कहां तक जायज बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 7:02 PM IST
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आज देश में कृषि सुधार कानून के बाबत सरकार या किसानन के बीच बातचीत जवना मुकाम पर पहुंच गइल उ लोगन खातिर स्वामी विवेकानंद जी के एगो संदेश ई बा कि दुनिया के इतिहास से ई सबक लिहल जा सकेला कि उतेजना के माहौल में कवनों तरह के सुधार के चाहे जवन प्रयत्न भईल होखे उ कभी अपना उद्देश्य के प्राप्त करे में सफल नइखे कइले। उलटे उ अपना उद्देश्य के विफल कइले बा। गांधीजी के भी अइसने सुझाव रहें कि ई प्रकृति के नियम ह कि जवन लक्ष्य जवना बिधि से प्राप्त कइल जाला, ओकर ओइसहीं रक्षा हो सकेला कवनों दोसरा बिधि से ना। स्वामी विवेकानंदजी के एगो अउर सुझाव किसान आंदोलन के अगुवा आ सरकार के नुमाइंदा लोगन के याद राखे के जरूरत बा कि कवनों खराबी के दूर करें खातिर उतेजनापूर्ण आंदोलन चाहे कानून के बल पर एकबाएक लागू कानून के रदोबदल कइला उहे नतीजा होला जवन आज देखात बा।

अगर आज के एह किसान आंदोलन के अपना हक हासिल करें खातिर किसान सत्याग्रह के संज्ञा दिहल जा तब लागत नइखे कि आंदोलन के कुछ अगुवा लोग गांधीजी के किसान सत्याग्रह से कवनों सबक लेबे के तैयार बा। गांधीजी के आग्रह रहें कि सत्याग्रही के अपना विपक्षी से बातचीत के गुंजाइश हमेशा बरकरार राखे के चाही आ बातचीत से कभी पीछे ना हटे के चाहीं। आज किसानन के कुछ नेता लोग सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से गठित कमेटी के सामने भी बातचीत करें के तैयार नइखे। दूनो पक्ष अपना अपना हठ पर कायम बा।पूस के रात के हल्कू किसान की तरह ठंड के बहादुरी से सामना करत आत्मोत्सर्ग पर आमादा।

एकरा पहिले भी देश में किसान आंदोलन भइल बा। देश के आजादी के पहिले आ बाद में भी। यहां ई याद कइल जरूरी बा कि चौरीचौरा में 23 पुलिस वालन के हत्या के बाद गांधीजी बारदोली किसान सत्याग्रह स्थगित क देले रहनी। एह किसान आंदोलन में अबतक 60 किसान शहीद हो चुकल बाड़न, बाकी सरकार के रुख आ किसान नेतावन के हठ के आगे केहूं के कवनों अकिल काम नइखे करत। बारदोली किसान आंदोलन में जवना किसान के जमीन ज़ब्त हो गइल रहें,ओह किसानन के जमीन वापसी के लेके एह आंदोलन के नेता सरदार बलभभाई पटेल के दावा रहें कि अगर किसान सत्याग्रह के नियम के ठीक से पालन करिहें तब ओ लोगन के जमीन के वापसी सांकल बजावत अपने आप दरवाजा तक पहुँची। सवाल बा कि आज के किसान आंदोलन के नेता अइसन कवनों दावा करेंके स्थिति में बा लोग कि 60 किसानन के शहादत के बाद किसान कानून पूरी तरह वापास हो जाई, याकि कृषि के सेहत सुधारे खातिर भविष्य में कवनो सुधार के जरूरत नइखे।



महात्मा गांधी जी के ई भरोसा रहे कि अहिंसा के नीति अगर कहीं ठीक से लागू होखे संभावना बा त किसानन के जीवन में आ महिलावन के जीवन में।किसानन के बारे में गांधीजी के ई धारणा रहें कि आजतक देश के किसान कभी केहुके गुलाम नइखे रहल।आज हरियाणा, पंजाब में जवन हिंसक घटना होत बा, ओके देखिके का ई दावा कइल जा सकेला कि गांधीजी के जवन विचार किसानन के बारे में रहें उ आजो कायम बा।आज से एक सौ साल पहिले अवध किसान आंदोलन के भी ई सीख रहें कि हिंसा के बल पर कवनों बड़ा लक्ष्य हासिल नइखे भइल।एह आंदोलन के नेता बाबा रामचन्द्र गांधीजी के सहयोग के गरज से बनारस आके निवेदन कइले रहें, बाकी गाँधी जी खातिर ओह वख्त ब्रिटिश हुकूमत से मुक्ति बड़ा सवाल रहें। जवाहरलाल जी जरूर ओह आंदोलन में शिरकत कइले रहनी।तब देश में ब्रिटीश हुकूमत अपना पूरा शबाब पर रहें। गांधीजी के जब चंपारण के रास्ता में कानून उलंघन के नोटिस मिलल तब उहां के बिना कवनों हुजत के खुद कानून के हवाला करके एगो नया मिशाल पेश कइली,जवन ओ समय के नेता लोग खातिर एगो नये रणनीति रहें। गांधीजी के नेतृत्व में ओह आंदोलन में किसानन के उ सब कुछ हासिल भइल आ किसानन के मुसीबत से निजात मिलल।
आज किसानन के मुख्य समस्या ई बा कि हरित क्रांति से जवना पंजाब हरियाणा, पच्छिमी उत्तर प्रदेश के किसानन के सबसे ज्यादा फायदा भइल रहें, उहें किसान आज सबसे ज्यादा धरना प्रदर्शन में शामिल बाड़न। अबतक न्यूनतम समर्थन मूल्य से सबसे ज्यादा फायदा एहि किसान लोगन के भइल बा।जब कि न्यूनतम समर्थन पूरे देश खातिर लागू होला।एह समर्थन मूल्य में एगो व्यवहारिक खामी ई बा कि जब अलग अलग इलाका में खेती के लागत अलग अलग बा तब एके तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य पूरे देश पर लागू कइल कहां तक जायज बा।एह समर्थन मूल्य पर भी पूरे देश में छह फीसद से ज्यादा खरीददारी ना होखे। ओह में गेंहू धान के जतना खरीदारी होला ओह में लगभग अस्सी फीसद हिस्सा अकेले पंजाब हरियाणा होला। जब कि गेहूँ सबसे ज्यादा पैदा होता मध्यप्रदेश प्रदेश में बाकी एम एस पी पर खरीद पंजाब, हरियाणा से होला। मध्यप्रदेश,उत्तरप्रदेश के बारी ओकरा बाद आवेला।सबसे कम खरीद बिहार से पिछला सत्र में भइल।

मक्का खरीद पर कोरोना के कारण बुरा असर
कोरोना के वजह से मक्का खरीद पर बड़ा बुरा असर उहा के किसानन के झेले के पड़ल। आजो आठ सौ से एक हजार से ज्यादा दाम धन के किसानन के बिहार ,पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानन के नइखे मिलत।का अइसन शिकायत पंजाब, हरियाणा के किसानन के भी बा?अगर एह लिहाज से देखल जा त सबसे फायदेमंदधंधा आज के दिन में ई रहीं कि बिहार ,पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानन से सस्ते दाम पर धान आ मक्का खरीद करके न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पंजाब, हरियाणा में बेचल जाय। आज असल सवाल ई बा कि दक्षिण के राज्यन के आ पर्वोतर के राज्यन के भी चिंता कवन सरकार करीं? आज के आंदोलनकारी किसान नेता लोगन के एकरो चिंता करेंके चाहीं। एक ओर जहां एम एस पी पर पूरे खरीद के लगभग सतर से अस्सी फीसद खरीददारी अकेले पंजाब हरियाणा से होत बा, ओकरा तुलना में महज साढ़े तीन फीसद उत्तरप्रदेश में आ साढ़े सात फीसद पच्छिम बंगाल में धान के खरीद होई तब एम एस पी पर खरीद के का मतलब रहीं जाइ?दरअसल न्यूनतम समर्थन मूल्य के अगर एहि रूप में जारी रहीं तब ओकरा के अब विकेन्द्रित करेके जरूत बा। ताकि पूरे देश के किसानन के लाभ होखे।

खाली पंजाब, हरियाणा के किसानन के ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हक नइखे। गनीमत बा कि अभी अइसन मांग दूसरा प्रदेश से नइखे उठल। कवनों बड़ा उद्देश्य के हासिल करें खातिर स्वामी विवेकानंद जी के राय में तीन बात मुख्य होला। पहिला हृदय की अनुभव शक्ति। का सचमुच देश की सरकार अउर आज के किसान आंदोलन के नेता किसानन के दुर्दशा को देखिके परेशान बा?क्या एह वजह उ लोगन के इतना बेचैनी बढ़ गईल बा कि रात के नींद गायब हो गइल बा।? यदि हाँ, तब का एह समस्या के समाधान खातिर दोनों पक्षन के ओर से कवनों लचीला रुख अपना के रास्ता निकाले के अबतक के कोशिश के कवनों नतीजा निकलल? आज अगर किसान नेता लोगन के ई पक्का भरोसा बा कि उ लोग जवन जिद पर अड़ियल रुख अपनवले बा उ पूरा देश के किसानन के हक में बा?

अगर एकर जवाब हाँ में बा तब जइसन राजा भर्तहरी के राय रहें कि आज के संदर्भ में सरकार अउर ओकर मुलाजिम, किसान नेता आ देश के किसान बिना एह बात के फिक्र के कि चतुर सुजान लोग एह आंदोलन के बड़ाई करी कि निंदा करी, एह आंदोलन में अउर केतना किसानन के शहादत होई? तब तक रुख पर दुनों पक्ष कायम रहें। अपना रास्ता से केहुके हटे के जरूरत नइखे। अगर एकर फैसला बातचीत के बजय न्यायालय से होई, तब ई देश के लोकतांत्रिक सेहत खातिर अच्छा ना होइ।जइसे न्यायालय में ई तर्क दिहल जात बा कि अइसन हर कानून के बदले खातिर लोग सड़क जाम कर दी। वइसे कहीं ई नौबत मत आ जाय कि लोकहित कवनों फैसला खातिर आम लोग न्यायालय के मुँह जोहे लागे।
( लेखक स्वतंत्र पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. ये उनके निजी विचार है.)
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