Bhojpuri Spl: बिहार में मचल बा कोरोना पर कोहराम, सरकार के नींद हराम

हार के मुखिया नीतीश कुमार लगातार एह बात पर शान से इतरात रहले हां कि बिहार में कोरोना जांच देश में सबसे जोरदार रहल. मरे वाला के संख्या कम रहल. बाकिर एह घरी विपक्षी लोग एह दावा के राज खोल दिहले बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 4:00 PM IST
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पटना. बिहार देश-दुनिया में अइसन एगो सूबा ह, जहां किसिम-किसिम के घोटाला होत रहेला. चारा घोटाला त दुनिया में एतना चर्चा में रहल कि जे सुने, ऊ दांते अंगुरी काट लेव. लालू प्रसाद आज ओही केस में जेल के भीतर सजा काट रहल बाड़े. ओइसे तबियत खराब के नाम पर साल भर से ऊ रांची आ दिल्ली के अस्पताल में भर्ती होत रहल बाड़े. अबे दिल्ली में उनकर इलाज चल रहल बा. उनकरे शासन में स्कूटर आ मोटर साइकिल पर सांढ़-भैंसा ढोए के जानकारी सीएजी अपना रिपोर्ट में दिहले रहे.

ओकरा बाद घोटाला के सिलसिला एतना तेज भइल कि अब त गिनतियो भुला जाता कि केतना घोटाला बिहार में भइल बा. चारा घोटाला से शुरू भइल घोटाला के सिलसिला डामर (अलकतरा) घोटाला, दवाई घोटाला, शौचालय घोटाला, सृजन घोटाला, मेधा (टैलेंट) घोटाला तक पहुंच गइल बा. मोटामोटी अबहीं ले एतने घोटाला इयाद रहल हा, बाकिर अब एगो नया घोटाला एइमें जुड़ गइल बा. ऊ ह बेमारी घोटाला. बेमारी घोटाला के ठीक-ठीक समझे-समझावे के होखे त एकर नाम कोरोना घोटाला कहल जा सकेला.

बिहार के मुखिया नीतीश कुमार लगातार एह बात पर शान से इतरात रहले हां कि बिहार में कोरोना जांच देश में सबसे जोरदार रहल. मरे वाला के संख्या कम रहल. बाकिर एह घरी विपक्षी लोग एह दावा के राज खोल दिहले बा. लखीसराय, जमुई जइसन जिला में जांच भइल त पता चलल कि जांच करावे वाला के मोबाइल नंबर दस गो जीरो लिखल बा. मीडिया में खबर आइल आ हंगामा भइल त सरकार जांच करवलस आ कई डाक्टर लोग पर गाज गिर गइल. विपक्षी दल के लोग एकरा के एतना छीछालदेर कइल कि सांच सामने अपने आप आवे लागल.



प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव कोरोना जांच में गड़बड़ी के आरोप जब विधानसभा में लगवले त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी उनका के जवाब दिहले. एही जवाब में सांच सामने आ गइल. तेजस्वी कहले रहले कि अइसन कवन कारन रहे कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री भा दोसर मंत्री लोग के जब कोरोना रिपोर्ट पाजीटिव आइल त ऊ लोग सरकारी अस्पताल में ना जाके, एम्स भर्ती भइल लोग. एकर माने ई भइल कि सरकारी अस्पताल के हाल ठीक नइखे.
तेजस्वी के एह सवाल पर बिनबिना के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सदन में जवाब दिहले त ओही में सांच सामने आ गइल. नीतीश जी कहले कि जब उनकरा भतीजी के रिपोर्ट पाजीटिव आइल त ऊ अगिला दिन पटना एम्स में ओकर दोबारा जांच करवले. एम्स के जांच में रिपोर्ट निगेटिव हो गइल. एकर माने पहिलका रिपोर्ट गलत रहे. ओकरा के एम्स से लौटा दिहल गइल. उनकरा कहे के मतलब ई रहे कि उनका घर के केहू के इलाज एम्स में नइखे भइल. बाकिर विपक्ष के आरोप सांच हो गइल. विपक्ष बार-बार इहे आरोप लगावता कि कोरोना जांच में गड़बड़ी भइल बा. ई बड़हन स्कैम साबित हो सकेला. एकरा जांच खातिर विधानसभा के कमेटी बने के चाहीं. रात भर में केहू कइसे पाजीटिव से निगेटिव हो सकेला.

खैर, मीडिया में खबर आइल रहे कि जांच करावे वाला के मोबाइल नंबर दस गो जीरो लिखल बा. नीतीश जी एहू बात के सफाई दिहले कि जांच करावे वाला के मोबाइल नंबर जीरो-जीरो कइसे लिखाइल. ऊ कहले के सबका लगे मोबाइल ना होला. एही से मोबाइल नंबर के खाना में डाक्टर लोग जीरो-जीरे लिख दिहल. नीतीश जी के सफाई में दम त बा, बाकिर ऊ ई ना साफ क पवले कि जब अइसने बात रहे त जवना डाक्टर लोग के सस्पेंड कइल गइल, ऊ काहें खातिर कइल गइल. हालांकि नीतीश जी कबूल कइले कि गड़बड़ी के जब जानकारी सरकार के मिलल त ओई पर कारर्वाई भइल.

नीतीश जी के दावा बा कि बिहार में कोरोना से मरे वाला के रेट देश में सबसे कम रहल बा. नीतीश जी के इहो दावा बा कि देश में कोरोना के जेतना जांच भइल बा, ओह से बेसी जांच बिहार में भइल बा. बिहार के आबादी देश के आबादी के 8.4 प्रतिशत बा. एकरा बादो जांच, इलाज आ एहतियात से नुकसान ओतना नइखे भइल, जेतना बाकी स्टेट में भइल. नीतीश जी के सगरी दावा के खारिज करत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के ई कहनाम बा कि कोरोना जांच में बड़हन घोटाला भइल बा. एंटीजेन टेस्ट के किट खरीदे में करोड़ों रुपया के घोटाला भइल बा. जांच होखे त कोरोना के नाम पर अउरी कई गो घोटाला सामने आ सकेला. एह से विधानसभा के कमेटी बने के चाहीं, जवन एकर ईमानदारी से साफ-साफ जांच क सके.

इयाद होई, कोरोना जब चढ़ंती पर रहे, ओही बेरा नीतीश जी अपना हेल्थ सेक्रेटरी के हटा दिहले. आज ले एह बात के पता ना चल पावल कि अइसन ऊ काहें कइले, जबकि केंद्र सरकार रिटायर होखे वाला अपना हेल्थ सेक्रेटरी के एक्सटेंशन दे दिहलस. एह से कि कोरोना में जेतना काम उनका जानकारी में भइल रहे, दोसरा केहू के अइला से ओई पर असर पड़ जाइत. (लेखक ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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