Bhojpuri Spl: बंगाल में गूंजत बा हंसुआ के बियाह में खुरपी के गीत

ई सभे जानेला कि लोकसभा के चुनाव राष्ट्रीय मुद्दा पर लड़ल जाला आ विधानसभा चुनाव के मुद्दा स्थानीय होला. ई फार्मूला बंगाल में उलट गइल बा. भाजपा आ सीपीएम-कांग्रेस-आईएसएफ जहां बंगाल में भ्रष्टाचार, तोलाबाजी, रंगदारी, परिवारवाद के मुद्दा पर ममता बनर्जी के घेरे के कोशिश कर रहल बाड़ी सन, ओही जा ममता बनर्जी महंगाई के मुद्दा पर आपन परचार शुरू कइले बाड़ी.

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बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी हंसुआ के बियाह में खुरपी के गीत गावत बाड़ी. तृणमूल कांग्रेस के प्रचार देख त इहे बुझाता. ई सभे जानेला कि लोकसभा के चुनाव राष्ट्रीय मुद्दा पर लड़ल जाला आ विधानसभा चुनाव के मुद्दा स्थानीय होला. ई फार्मूला बंगाल में उलट गइल बा. भाजपा आ सीपीएम-कांग्रेस-आईएसएफ जहां बंगाल में भ्रष्टाचार, तोलाबाजी, रंगदारी, परिवारवाद के मुद्दा पर ममता बनर्जी के घेरे के कोशिश कर रहल बाड़ी सन, ओही जा ममता बनर्जी महंगाई के मुद्दा पर आपन परचार शुरू कइले बाड़ी. रसोई गैस, डीजल-पेट्रोल के दाम में बढ़त के खिलाफ ऊ मोरचा खोल दिहले बाड़ी. सिलीगुड़ी आ कोलकाता के रैली में ममता के मुंह से खाली महंगाई के बात निकलल.

ईहो बात सांच बा कि बंगाल के लोग महंगाई पर बड़ा जल्दी रिएक्ट करेला. 10-20 पइसा ट्राम-बस के किराया बढ़ला पर बंगाल में लोग आंदोलन पर उतरत रहल बा. ममता के बुझाता कि ओइसने माहौल बनावल जा सकेला. देशभर में महंगाई से जनता जवनी गंतिया तबाह बिया, ओकरा के मुद्दा बना के एह चुनाव में वैतरऩी पार कइल जा सकेला. अइसन करत में ममता भुला जा तारी कि महंगाई के नाम पर लोग उनका के वोट देइयो दी त महंगाई घटावल उनका बूता के बात नइखे. उनका एतने फिकिर रहल हा त आसाम नियर डीजल-पेट्रोल पर वैट 5 रुपया घटा दीती, बाकिर खुदे एक रुपया से बेसी ना घटा पवली.

ममता मुसलमान लोग के टिकट पिछला 57 से घटा के अबकी 42 क दिहले बाड़ी. एकरा के कहल जाला, आग लगला पर इनार खोनल. कबो बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ संसद में तब के बंगाल के वामपंथी सरकार के खिलाफ ऊ गर्जल करस आ खिसिया जास. बाकिर जब आपन सरकार बना लिहली त उहे घुसपैठिया उनकर सबसे प्रिय हो गइले. जब एनआरसी आ सीएए के बात उठल त सबसे पहिले एकरा विरोध में ममता ही उतरली. साफ कह दिहली कि उनका सूबा में ई लागू ना होई. एह बीच रोहिगिया मुसलमान के घुसपैठ भी बड़ तादाद में बंगाल में होत रहल. एह से बंगाल के ओइसन लोग ममता से कन्नी काट लिहल भा काटे के फिराक में बा, जे घुपैठ से परेशानी महसूस करत रहे भा अबहियों करत बा.

एकरा के 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा भंजा लिहलस. जब 18 सीट पर भाजपा के कब्जा हो गइल, तबे ई बात साफ हो गइल रहे कि ममता के दांव उल्टा पर गइल बा. मुसलिम वोट बैंक बनावे खातिर ममता के मुसलिम प्रेम केहू से छिपल नइखे. बंगाल में मुसलिम आबादी करीब 30 परसेंट मानल जाला. पहिले ई वोट वामपंथी सरकार के संगे रहे. एह से वामपंथी लोग घुसपैठिया मुसलमान के भारी संख्या में बंगाल के वोटर बना के अपना पक्ष में कइले रहे. ओह लोगन के राशन कार्ड भी बन गइल. बाद में उहे घुसपैठी लोग ममता के संगे आ गइल. एनआरसी लागू होइत त ओकरा पैमाना पर अइसन लोग के पहचान हो जाइत. एही से ममता बनर्जी बंगाल में एनआरसी आ सीएए के खिलाफ हो गइली. काहें कि वामपंथी सरकार के खतम भइला के बाद ई सगरी वोट उनकरे संगे हो गइल रहल हा.
एह बीचे बंगाल के मुसलिम समाज में अब्बास सिद्दीकी के उदय हो गइल. फुरफुरा शरीफ अइसन संस्था के पीरजादा बन के ऊ बीजेपी सरकार के खिलाफ अपना समाज के लोग के गोलबंदी शुरू क दिहले. बाद में जब उनका आपन ताकत के एहसास भइल त अलगे एगो सियासी फ्रंट- आईएसएफ बना के चुनाव लड़े के ऐलान क दिहले. शुरू में त ओवैसी भी उनका संगे आ गइले आ अब्बास के बंगाल में लीडर बना के चुनाव लड़े के घोषणा कइले. बाद में अब्बास उनहूं के धोखा देके वामपंथी पार्टी आ कांग्रेस के संगे चुनाव लड़े के तैयारी में लाग गइले. तालमेल हो गइल. सीट उनका 30 गो मिली. ऊ आपन ताकत 28 फरवरी के कोलकाता में वामपंथी दल के रैली में देखाइयो दिहले. मतलब ममता से मुसलिम वोट भी बिदक गइल. एइसे उनकर 30 परसेंट के नुकसान के अनुमान लगावल जाता.

बंगाल में विधानसभा के 294 गो सीट बा. 291 सीट पर ममता आपन उम्मीदवार उतार दिहले बाड़ी. 107 गो उम्मीदवार 50 साल से कम उमिर के बाड़े. 51 गो सीट औरत लोग के मिलल बा. अपवाद छोड़ के बुढ़ऊ लोग के टिकट ना मिलल. मुसलिम उम्मीदवार पिछला बार से 15 गो घटा दिहली. नया चेहरा, महिला आ मुसलिम उम्मीदवार घटा के ऊ ई साबित करे के कोशिश कइली कि उनका पार्टी में अब बेदाग चेहरा बा. भ्रष्टाचार के जवन आरोप ममता सरकार पर विपक्ष लगावत रहल हा, ओकर काट एह तरीका से ममता खोज लिहली. मुसलिम लोग के तरजीह देबे के आरोप से बचे खातिर ऊ डेढ़ दर्जन ओह तबका के टिकट काट दिहली. बाकिर ममता के लगे त कवनो मुद्दा बा ना. ऊ त केंद्र सरकार से मिलल हेल्थ स्कीम- आयुष्मान भारत आ किसान खातिर किसान सम्मान निधि के अपना इहां लागू ना क के लोग के अउरी दुश्मन बन गइली. एही के भंजावे में भाजपा लागल बिया. भाजपा के कहल ई बा कि बंगाल खातिर ओकरा मन में का बा, ऊ बंगाल खातिर योजना लागू क के देखावल चाहत रहल हिया, बाकिर ममता बनर्जी के जिद से ओई पर पानी फिर गइल. ममता के लगे अब बंगाल के कवनो मुद्दा नइखे बांचल, सिवा सीएए आ एनआरसी के विरोध के, जवना के भोग उनका के जनता लोकसभा चुनाव में दे दिहलस.

बंगाल में बीजेपी के 200 पार के नारा के गणित समझल जरूरी बा. लोकसभा चुनाव में 126 विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के बढ़त रहे. उत्तर आ दक्खिन बंगाल में ओकर पकड़ मजबूत हो गइल बा. बांग्लादेश से सटल इलाका में घुसपैठ यानी एनआरसी-सीएए के सवाल पर भाजपा आपन पैठ बना लिहले बिया. चुनाव घोषणा से पहिलही ओकरा संगे टीएमसी, कांग्रेस आ सीपीआई के करीब अढ़ाई दर्जन विधायक आ गइल रहले. ममता के टिकट पहिले बांट दिहला से भाजपा के फायदा ई भइल कि जेकर टिकट कटल ऊ, भाजपा के दरबार में हाजिरी बजावे लागल. भले भाजपा ओह लोगन के टिकट देव भा ना देव, बाकिर ममता के बाजा बजवावे में ओह लोगन के इस्तेमाल जरूर करी. ममता के पार्टी के हाल त अब ई हो गइल बा कि जेकरा के टिकट दिहली, उहो भागत बा. सरला मुर्मू के ममता टिकट दिहली, काल्ह ऊ टिकट लौटा दिहली आ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े के तैयारी में लाग गइल बाड़ी. (लेखक ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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