Bhojpuri: कोरोना के बावजूद भोजपुरी इलाका में बा होली के उल्लास, लेकिन बढ़ता अश्लीलता

कोरोना के डर के बावजूद भोजपुरिया इलाकन के चट्टी-चौराहन पर होली के हुलास लोगन के कपार पर चढ़ि के बोलि रहल बा. संस्कृति आ परंपरा के एह तेवहार में जोगीरा के बहाने अश्लीलता के असर त पहिलहुं रहल बा. बाकिर पिछिला कुछु साल में एह में बढ़ोतरीये भइल बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 5:17 PM IST
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फगुआ नगीचा गइल बा. कोरोना के डर के बावजूद भोजपुरिया इलाकन के चट्टी-चौराहन पर होली के हुलास लोगन के कपार पर चढ़ि के बोलि रहल बा. संस्कृति आ परंपरा के एह तेवहार में जोगीरा के बहाने अश्लीलता के असर त पहिलहुं रहल बा. बाकिर पिछिला कुछु साल में एह में बढ़ोतरीये भइल बा. एकर असर ई बा कि खेत जोतत टेक्टर होखे, भा सड़कि पर सामान ढोवत पिकेट, सब में लागल साउंड सिस्टम में एह घरी लहरदार फगुआ के गीत बाजता. एह गीतन में लहरि कम, फुहड़ता ढेरे बा. लागता कि एह गीतन के लिखे वाला कवि-रचनाकार लोग आपन सगरी प्रतिभा फूहड़ता के कल्पना करे में लगा देले बा. एह गीतन में फूहड़ता एतना बा कि ओकर तोख आ उदाहरणो ना इहां दिया सकेला.

आपाना मिठास खातिर भोजपुरी बोली-बानी पूरा दुनिया में मसहूर बिया. एकरा में किसिम-किसिम के गहरा अरथ वाला रचना लिखाइल. जवना बानी में कबो कबीर आत्मा आ परमात्मा के गूढ़ भेद खोलले रहले, जवना बानी के आपना रचनन में तुलसी दास जी इस्तेमाल कइ के भगवान राम आ सीता जी के गुणगान कइले बाड़े, जवना बानी में महेंदर मिसिर दिल के छू लेबे वाला पूरबी लिखले बाड़े, भिखारी ठाकुर के बिदेसिया जेकर सिरमौर बाटे, मोती बीए के लिखल फिल्मी गीतन में मिसिरी नियर मिठाई बाटे, ओह भाषा के सड़क छाप होली गीत सुनि के भोजपुरिया समाज के प्रबुद्ध लोगन के सिर शरम से गड़ि जाला.

अचरज के बात ई बा कि पहिले फूहड़ गीतन के सड़क छाप स्थानीय कैसेट कंपनी बनावत रहलसि. बाकिर अब एह चालान में नामी-गिरामी म्यूजिक कंपनियों जुटि गइल बाड़ी स. ओहू ले दिलचस्प ई बा कि एह गीतन के कार्यक्रम यू ट्यूब समेत सोशल मीडिया के मंचन पर खूब प्रस्तुत कइल जा रहल बा. ओकरा से गायक लोग नाम आ दाम खूब कमाता.

एह गीतन के हालि ई बा कि एहनि में महिला शरीर के गोपन अंगन पर केहू रंग लगावे के कहता त केहू अश्लील इशारा करता. अधिकांश गीतन में जीजा-साली आ भउजाई-देवर के बहाने मेहरारून के अंगन के फूहड़ बर्णन बा. दिलचस्प ई बा कि एह गीतन में मास्टर साहेब के चरित्रहनन त बड़ले बा, कालेज के प्रोफेसरो लोगन के भी लबार आ आपाना शिष्या सब के सौंदर्य पर लालची नजर वाला बतावल जाता. एकर असर ई होला कि जइसहिं फगुआ के मौसम आवेला, फूहड़ गीतन से माहौल गुंजाए लागेला, शरीफ महिला-लइकी चलेले से भी झिझके लागेली.
भोजपुरी में एगो कहाउत कहाला कि फगुआ में बुढ़वो देवर लागेला. एकर मतलब ई ना ह कि हर बूढ़ आपन लाज-लेहाज छोड़ि के आपाना छौंड़ी के उमिर वाली लइकिन पर लट्टू होके घूमत रहेला. हर समाज में अच्छा-बुरा लोग होला. लेकिन भोजपुरिया-खासकर फगुआ के गीतन के विषय आताना फूहड़ आ महिला के सौंदर्य के छिछला आ फूहड़ बर्णन के एह दिन में बाढ़ि आइल बा कि ओह से भोजपुरी समाज के एक ही छबि बनता, लबार, सेक्स लोलुप आ लालची. ई ठीक बा कि एह चलन के बढ़ावे में ओह सिनेमा के ज्यादा हाथ बा, जवन सिनेमा हाल के लोकप्रियता के दिनन में सुबह के शो में चलत रहली स. ई कहे में कवनो संकोच ना होखे के चाहीं कि ओह घरी के ढेर फिल्मन के विषय अइसन रहे, जवना से यौन कुंठा ही बढ़े के रहे. जवना बोली-बानी की पहिलकी फिलिम ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ अर्थपूर्ण फिलिम होखे, जवना भाषा में ‘लागी नाहीं छूटे राम’ जइसन फिलिम बनल होखे, जवना भाषा में ‘रूठि गइले संइया हमार’, ‘दूल्हा गंगा पार के’ होखे, ओह में खासकर पिछली सदी के आखिरी दसक के आखिरी साल से लेके एह सदी के पिछिला दशक तकले अइसन फिलिम ढेर बनली स, जवना में ना त कहानी रहे ना गीत. हां, उहनी के हिट करे खातिर बाजारू मसाला, चलताउ भाषा आ फूहड़ गीत खूब रहे. अइसन फिलिमन के नाव लिहल, एह लेख के अपमाने होई. दिलचस्प ई बा कि ओह घरी के हीरो लोग आजुकाल राजनीतियो में चमकता लोग. जाहिर बा कि एह से भोजपुरी समाज में फूहड़पन के बढ़ावा मिलल.

ई ठीक बा कि फगुआ हास्य आ लास्य के तेवहार ह. एह में हंसी-मजाक खूब चलेला. लेकिन मजाक उहे आच्छा लागेला, जवना में लक्षणा वाली भाषा के इस्तेमाल होला. भोजपुरी समाज में एगो कहाउत बा कि घूघ वाली कनिया के सब देखल चाहेला, आ लंगटुआ के ओरि केहू देखल ना चाहेला. बाकिर भोजपुरी समाज में ई चालान बदलि गइल बा.

बसंत नवजीवन के तेवहार ह, प्रकृति के सौंदर्य के प्रतीक ह, एह में प्रकृति जइसे नाया कपड़ा पहिनि लेले. ऊ नवजीवन के संदेस देले, जिनिगी में उत्साह भरेले, अइसन उत्साह जवना में सौंदर्ये खाली ना होला, ओह में संदेश भी होला, ओह में फूहड़ता ना होला. बेहतर होई कि भोजपुरिय समाज भी एह बारे में सोचे. फूहड़ गीतन के विरोधे ना करे, ओकर बायकाट करे. तबे जाके भोजपुरी समाज के असल आ उदात्त चेहरा दुनिया के सामने आ पाई. तबे भोजपुरी के सपूतन के लेके दुनिया के नजर भी बदलि. लेकिन बाड़ाका सवाल ई बा कि एह फूहड़पन के खिलाफ भोजपुरिया समाज का एकजुट होई.
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