Bhojpuri: एशिया क सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय बीएचयू क जनम कइसे भयल, पढ़ीं

बनारस में विश्वविद्यालय खोलय के पीछे कई कारण रहल. काशी प्राचीन समय से शिक्षा अउर संस्कृति क केंद रहल, अउर दूसर बड़ा कारण इ रहल कि इहां थियोसाफिकल सोसायटी क अध्यक्ष, अउर शिक्षाविद डा. एनी बेसेंट पहिलय से प्रतिष्ठित सेंट्रल हिंदू कालेज चलावत रहलिन. मालवीय एनी बेसेंट के शिक्षा अभियान से बहुत प्रभावित रहलन अउर 1903 में ओनके अभियान में मदद बदे 250,000 रुपिया चंदा भी जुटाइ के देहले रहलन.

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू क नाव अउतय मन में पंडित मदनमोहन मालवीय क नाव अपने आप उभरि आवयला. बीएचयू के बनावय में तमाम लोगन क खून-पसीना लगल हौ, लेकिन मालवीय विश्वविद्यालय क चेहरा रहलन. बीएचयू के जनम क कहानी गंगा के धरती पर उतारय से कम रोचक नाहीं हौ. मालवीय के इ बात समझि में आइ गयल रहल कि अंगरेजन से भारत क लोग तबय मुकाबला कइ सकयलन जब पढ़ि-लिखि के समझदार होइ जइहय. एकरे बदे आधुनिक विज्ञान अउर प्रौद्योगिकी क शिक्षा जरूरी हौ. काफी सोच-विचार के बाद उ आधुनिक विज्ञान के शिक्षा से युक्त अंगरेजी माध्यम क आवासीय विश्वविद्यालय बनारस में खोलय क योजना बनउलन. एकर प्रस्ताव बनारस में दिसंबर 1905 में आयोजित कांग्रेस के 21वें अधिवेशन में पहिली बार पेश कइ गयल.

बनारस में विश्वविद्यालय खोलय के पीछे कई कारण रहल. काशी प्राचीन समय से शिक्षा अउर संस्कृति क केंद रहल, अउर दूसर बड़ा कारण इ रहल कि इहां थियोसाफिकल सोसायटी क अध्यक्ष, अउर शिक्षाविद डा. एनी बेसेंट पहिलय से प्रतिष्ठित सेंट्रल हिंदू कालेज चलावत रहलिन. मालवीय एनी बेसेंट के शिक्षा अभियान से बहुत प्रभावित रहलन अउर 1903 में ओनके अभियान में मदद बदे 250,000 रुपिया चंदा भी जुटाइ के देहले रहलन. एनी बेसेंट के अभियान से ही बनारस में यूनिवर्सिटी खोलय क मालवीय के प्रेरणा मिलल. बनारस के मिंट हाउस में 1904 में विश्वविद्यालय पर चर्चा भी भयल रहल.

एनी बेसेंट जुलाई 1898 में सेंट्रल हिंदू कालेज क स्थापना कइले रहलिन. पहिला प्रिंसिपल डा. आर्थर रिचर्ड्सन रहलन. स्कूल क शुरुआत कर्णघंटा पर एक केराया के इमारत में भयल. बाद में तत्कालीन काशीनरेश प्रभुनारायण सिंह कमच्छा पर एक इमारत अउर 70 एकड़ जमीन देहलन. फिर कालेज अपने परिसर में चलय लगल. कालेज इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध रहल अउर इहां 12वीं कइले के बाद विद्यार्थिन के इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला मिलि जाय.

कालेज अपने काम के बल पर तेजी से आगे बढ़त रहल अउर अब एनी बेसेंट कालेज के यूनिवर्सिटी में बदलय क योजना बनावय लगलिन. एही बीच मालवीय 1905 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय क औपचारिक प्रस्ताव पेश कइलन. एनी बेसेंट विश्वविद्यालय स्थापना के दिशा में अपने तरीके से लगल रहलिन अउर उ 1907 में एक रायल चार्टर बदे आवेदन कइलिन. लेकिन ब्रिटिश हुकूमत ओनके आवेदन पर कवनो प्रतिक्रिया नाहीं देहलस. दूसरी तरफ मालवीय अपने मिशन में आगे बढ़त रहलन अउर 2011 में उ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सोसायटी क गठन कइलन, विशिष्ट नागरिकन से सोसायटी क सदस्य बनय क अपील कइलन. मालवीय क योजना सामने अइले के बाद एनी बेसेंट ओनसे मुलाकात कइलिन अउर यूनिवर्सिटी क योजना मिलि के आगे बढ़ावय क निर्णय भयल.
अंगरेजी हुकूमत मालवीय के आपन विरोधी मानत रहल. अंगरेज इंपीरियल लैजिसलैटिव कौंसिल में चार अप्रैल, 2019 के प्रेस बिल पर अउर छह अगस्त, 1910 के राजद्रोह अधिनियम पर मालवीय के भाषण से नाराज रहलन. अंगरेज इ भी नाहीं चाहत रहलन कि भारत में अइसन कवनों विश्वविद्यालय खुलय, जहां पढि-लिखि़ के भारतीय लोग अंगरेजन से मुकाबला करय के स्थिति में होइ जायं. लेकिन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय क अभियान एतना व्यापक होइ गयल रहल कि ब्रिटिश हुकूमत परेशान रहल. अंगरेजन के एह बात क डर रहल कि अनुमति न देहले पर हिंदू लोग खिलाफ होइ जइहय.

विश्वविद्यालय बदे जरूरी चंदा जुटि गइले के बाद मालवीय 10 अक्टूबर, 1911 के शिमला में वाइसराय से मुलाकात कइलन. मुलाकात सार्थक नाहीं रहल. लेकिन प्रयास फिर भी जारी रहल. अंत में काफी टालमटोल के बाद 11 मार्च, 1915 के इंपीरियल लैजिसलैटिव कौंसिल यानी संसद में बीएचयू के स्थापना से संबंधित विधेयक पेश कयल गयल. कौंसिल क सदस्य (शिक्षा) हरकोर्ट बटलर विधेयक पेश कइलन. विधेयक पेश करत समय उ कहलन, ’’हम आज भारत में एक नया अउर बेहतर विश्वविद्यालय क उदय देखत हई. इ एक आवासीय विश्वविद्यालय होई. नया विश्वविद्यालय हर जाति-धर्म के लोगन के शिक्षा देई, लेकिन हिंदू समुदाय के लोगन खातिर इहां धार्मिक निर्देश पर जोर देइ जाई. विश्वविद्यालय क संचालन अउर प्रबंधन भी हिंदू समुदाय क लोग ही करिहय.’’

मालवीय भी कौंसिल क सदस्य रहलन अउर विधेयक पर उ भी आपन विचार व्यक्त कइलन. विधेयक में हिंदू धर्म पर खास जोर देहले के नाते मालवीय आशंकित रहलन कि कौंसिल क मुस्लिम सदस्य एकर विरोध कइ सकयलन. मालवीय अपने भाषण में कहलन कि बीएचयू आत्ममुक्ति अउर धर्म के अइसन मर्म के बढ़ावा देई, जवने से आदमी-आदमी के बीच प्रेम अउर भाईचारा बढ़ी. बीएचयू में धर्म के शिक्षा क व्यापक उद्देश्य इहय हौ. विधेयक पहली अक्टूबर, 1915 के पास होइ गयल.



बीएचयू में भूगोल विभाग क प्रोफेसर आनंद दीपायन क कहना हौ कि जवने समय बीएचयू के स्थापना क मुहिम चलत रहल, ओह समय देश में सांप्रदायिक माहौल धीरे-धीरे तइयार होत रहल. इस्लामिक सुधारक, शिक्षाविद सर सैयद अहमद खान मुस्लिम विश्वविद्यालय खोलय के अभियान में जुटल रहलन अउर एह क्रम में उ 1858 में मुरादाबाद में अउर 1863 में गाजीपुर में स्कूल खोललन अउर 1877 में अलीगढ़ में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कालेज क स्थापना कइलन. इहय कॉलेज 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में बदलि गयल.

दीपायन के अनुसार, मालवीय सनातनी ब्राह्मण जरूरत रहलन, लेकिन आधुनिक विज्ञान के महत्व से भी उ वाकिफ रहलन. विज्ञान-प्रौद्योगिकी के तरफ ओनकर रुझान धीरे-धीरे बढ़त गयल.

बहरहाल, वाइसराय लार्ड हार्डिंग चार फरवरी, 1916 के बसंत पंचमी के दिना नगवा में काशी हिंदू विश्वविद्यालय क आधारशिला रखलन. जबतक बीएचयू क परिसर बनत रहल, तबतक विश्वविद्यालय क कक्षा सेंट्रल हिंदू कालेज के इमारत में चलल. एक समझौता के तहत कालेज क प्रभार 27 नवंबर, 1915 के हिंदू यूनिवर्सिटी सोसायटी के हाथे सौंपि देहल गयल रहल. अक्टूबर 1917 में एक सरकारी अधिसूचना जारी भयल अउर सेंट्रल हिंदू कालेज बीएचयू के अधीन होइ गयल. आज भी कमच्छा पर स्थित सेंट्रल हिंदू स्कूल बीएचयू के अधीन हौ.

तत्कालीन काशीनरेश प्रभुनारायण सिंह विश्वविद्यालय बदे 1300 एकड़ जमीन दान देहलन. सुंदर लाल विश्वविद्यालय क पहिला कुलपति नियुक्त कइ गइलन. विश्वविद्यालय क कुलगीत शांतिस्वरूप भटनागर तइयार कइलन. विश्वविद्यालय में एह समय तीन संस्थान, 14 फैकल्टी, 140 विभाग, चार केंद्र, लड़किन क एक काॅलेज अउर तीन स्कूल हयन. लगभग 1700 अध्यापक अउर आठ हजार शिक्षणेतर कर्मचारी देश-विदेश के लगभग 30 हजार विद्यार्थिन के पढ़ाई में मदद करत हयन. परिसर में कुल 62 छात्रावास हयन, जवने में लगभग 13,000 विद्यार्थी रहयलन. विश्वविद्यालय क 2700 एकड़ क एक दूसर विशाल परिसर मिर्जापुर में हौ, जवने के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर कहल जाला. (सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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