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भोजपुरी में पढ़ें - कोरोनाकाल में करम-योग- जिनिगी जीए के कला

कोरोना काल के अवसाद अउरी परेशानी से बचे के उपाय करम योग में बा.
कोरोना काल के अवसाद अउरी परेशानी से बचे के उपाय करम योग में बा.

कोरोना के अवसाद के समय कहल जा सकेला. रोग के डर रोजगार के चिंता, आ कुल्हि मिला के जड़ता के ओर ले जाए वाला काल चलता. अइसना में अगर कहीं से उम्मीद मिलेला त आध्यात्म से और इ आध्यात्म प्राचीन हिंदू साहित्य गीता में खूब बा. जरूरत बा एकरा के समझला के.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 12:42 PM IST
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कोराना काल में जब सउंसे दुनिया घरन में सिमटल बिया आ निराश-हताश लोग अवसादग्रस्त होके अकबकाइल बा, सकारात्मक राह सुझावे आ मनुजता के करम-पथ से जोड़े के दिसाईं करम-योग के अहम भूमिका हो सकेला. श्रीमद्भगवतगीता ना खाली एगो धार्मिक-आध्यात्मिक-दार्शनिक ग्रंथ ह, बलुक भारतीय संस्कृति के अनमोल धरोहरो ह.एह में सिरिफ लीलापुरुषोत्तम श्रीकृष्ण के, अर्जुन के करमपथ प लवटावे का गरज से दिहल ज्ञान के उपदेशे भर नइखे, सही माने में एह में जिनिगी जीए के कला आ विज्ञान के बेजोड़ समन्वय बा. धरम उहे, जवन धारन करे. एह से कवनो अदिमी कबो धरम से निरपेक्ष ना हो सके. सभसे बड़हन धरम होला-करम का ओरि जीव-जान से प्रवृत्त भइल. एही से करम के सभसे बड़ पूजा आ अपना हाथे के जगरनाथ मानल गइल बा.

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आजु भूमंडलीकरण-बाजारवाद आउर भारतीय संस्कृति के छरनशीलता के एह दौर में, जब अदिमी अपना राह से भटकिके तमाम करिया करतूत में लपिटाइल बा आ कवनो हथकंडा अपना के ढेर से ढेर दौलत संहोथल जिनिगी के मकसद बनि गइल बा, गीता के करम-योग के उपादेयता अउर बढ़ि
जात बा. विलासिता आउर अहम् का मद में चूर मनई मनुजता भुला गइल बा आ अपसंस्कृति के शिकार होके दईंतो से गइल-गुजरल हरकत करे प उतारू बा. ई निर्विवाद सांच बा कि हरेक मनई का भीतर इंसान आ शैतान-दूनों मौजूद रहेला.
जब ऊ मानवता का खिलाफ कवनो काम करेला, त इंसान से हैवान बनि जाला आ उहे अदिमी जब अच्छाई के राह प चलत सतकरम के आपन जिनिगी बना लेला, तब ऊ सही माने में इंसान आ देवता बनि जाला. हमनीं के संस्कृति आदिकाल से ई सनेस देत आइल बिया कि जब परिवार के हरेक मनई शिष्ट, मर्यादित आ संस्कारवान होई, तबे बेहतर समाज के निरमान संभव हो पाई. ई कुल्हि आवेला-संत-महापुरुषन के सतसंग से, सत्साहित्य के अनुशीलन से, ज्ञान हासिल कइला से, प्रकृति-पर्यावरण के संरक्षण से आ जिनिगी में वैज्ञानिक अउर तरक्की-पसन सोच अपनवला से. जब कवनो खास मानुस में एह किसिम के सोच विकसित होला, त ऊ महापुरुष बनि जाला आ धरम के स्थापना अउर सतकरम के अहमियत हो जाला-


परित्राणाय साधुनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्,
धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे.

जइसन करनी, ओइसन भरनी
कृष्ण भगवान अर्जुन के साफ-साफ समुझावत कहले रहलन- 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन.' अदिमी पहिले कवनो मकसद तय करेला, फेरु अपना मकसद ले पहुंचे खातिर काम शुरू करेला. बाकिर काम से अधिका ऊ फल का बारे में सोचे लागेला.

एही से ऊ सम्पूर्ण समर्पित भाव से काम में जुटि ना पावे. एह से गीता के करम-योग एह बात के खुलासा करेला कि हमनीं के फल के फिकिर छोड़िके सउंसे समरपन आउर मनोयोग से अपना करम में लीन हो जाए के चाहीं. काम करेके हक त आपन बा, बाकिर नतीजा केहू दोसरा के हाथ में बा. तुलसी बाबा एही करम-योग के दोसरा ढंग से साफ करत कहत बाड़न-
कर्म प्रधान विश्व करि राखि,
जो जस करहिं सो तस फल चाखा.

कहे के मतलब ई कि दुनिया में करमे के अहमियत बा. जे जइसन करी,ओइसने ऊ फल पाई. जइसन करनी, ओइसन भरनी.

तीन तरह के लोग
एह असार संसार में तीन तरह के लोग होलन. पहिला किसिम के लोग करम में आवेवाली आफत-बिपत, बाधा-दिक्कत से डेराके काम के शुरुए ना करेला. अइसन मनई सभसे कमजोर, कामचोर आ सुविधाभोगी होला. दोसरा तरह के लोग काम शुरू त कऽ देलन, बाकिर जइसहीं बिघिन-कठिनाई के पहाड़ टूटि परेला, ऊ मुंह चोराके पाछा हटि जालन आ काम से हरदम-हरदम खातिर मुंह मोड़ि लेलन. बाकिर तिसरका प्रकार के परानी सभसे जीवटवाला होलन. ऊ काम शुरू करेलन.

त लाख आफत-बिघिन के बावजूद ऊ धीरज-साहस से ओह काम के अंजाम ले पहुंचावेलन आ कबहूं निराश-हताश होके ना बइठसु. अइसने अदिमी के अथक मेहनत आउर लगातार कइल कोशिश कामयाबी के मंजिल ले पहुंचावेले. कहलो जाला कि उड़ान पांख से ना होला, होसला से होला आ इहे होसला-बिसवास राखेवाला, हिम्मत ना हारेवाला लोग अपना मकसद ले जा पहुंचेला.सांच पूछीं, त मंजिले खुद अइसना लोग का लगे आके कदम चूमेले:
कदम चूम लेती है खुद आके मंजिल
मुसाफिर अगर अपनी हिम्मत न हारे.

राष्ट्रगौरव राजेन्दर बाबू त राष्ट्रपति भवनो में ई पांती अपना टेबुल का सोझा राखत रहनीं: हारिये न हिम्मत, बिसारिये न हरि नाम,
जाहि विधि राखें राम, वाहि विधि रहिये.

निष्काम करमयोग
बाकिर गीता के करमयोग सही माने में निष्काम करमयोग ह. निष्काम करमयोग में लपिटाइल मनई कबो ई ना सोचे कि फल कब मिली, कइसे मिली? ऊ त करमे में सेवा आ समरपन भाव से एह तरे लवसान हो जाला कि आपन सुधियो-बुधि भुला-बिसरा देला.अपना होसो-हवास के खबर ना रहेला ओकरा. फेरु त बहुते बड़हन आ यादगार कामयाबी हासिल होला,बाकिर ऊ सफलता ओकर मकसद ना होला. ऊ त निष्काम भाव से करम में लागल रहेला. एगो पागल नियर. ऊ दिन के दिन आ रात के रात ना बूझे. अइसने बेमिसाल अनवरत साधना से कवनो ऐतिहासिक कृति सिरिजाले,कवनो अभूतपूर्व खोज होला आ देस-दुनिया के चकित करेवाली अजगुत रोशनी फूटेले.करमयोग जेकरा जिनिगी के मकसद बनिजाला, ऊ कर्मयोगी कहाला-निष्काम कर्मयोगी.

भगवान के हाथ-हथियार
अइसन कठिन साधना करेवाला साधक परमारथ के भावना से संचालित होला. सवारथ से ऊपर उठल रहेला.हरदम स्थितप्रज्ञ होला ऊ. आपन कवनो सुख आ दु:ख ओकरा के आनंदित भा उद्वेलित ना करे.अइसने महामानव के लछन समुझावत भगवान गीता में कहत बाड़न-
दुखेषु अनुद्विग्न मना,सुखेषु विगत स्पृह:.
वीतराग भय-क्रोध: स्थित धीर्मुनिरुच्यते..

कहल गइल बा-'योग: कर्म सुकौशलम्.'
अइसने लोग महामानव कहाला आ मानवतावादी विचारन के अपना करम में साकार करेला. अइसन लोग के निष्पाप परानी कहल जाला, जेकरा आचरन पर कबो शक-सुबहा के गुंजाइश ना होला. निष्काम भाव से करम में लागल अइसन लोग भगवान के हाथ-हथियार होला. भगवान कृष्ण के त गीता में कहनामे बा:
लभन्ते ब्रह्म निर्वाण: मृषय: क्षीण कल्मषा:.
छिन्नद्वैधा यतात्मना: सर्वभूतहिते रता:..

आजु के अवसाद, तनाव, आपाधापी आ डांवाडोल परिस्थिति में निराश-हताश, इहां ले कि खुदकुशियो करेके सोचेवाला नकारात्मक सोच के सिकंजा में जकड़ल लरिकन, नवही से लेके पुरनकी पीढ़ी तक के लोगन खातिर गीता के करमयोग ना खाली जिनिगी जीए के माने-मकसद बतावेला, बलुक मानवतावादी आउर सकारात्मक सोच से जीवन के सार्थकता, जिनिगी जीए के कला आ तौर-तरीको पर गौरतलब रोशनी डालेला. आजु के विषम हालात में एह करमयोग के खास अहमियत बा. तबे आंतर के मानवतावादी चाह जीत के मंजिल ले पहुंचा सकेले. गीतकार जावेद अख्तर एगो कविता में कहलहूं बाड़न-
चाह बा त मंजिल बा,मंजिल बा त रास्ता बा,
रास्ता बा त मुश्किलो बा,मुश्किलो बा त होसला बा,
होसला बा त बिसवास बा, आ,बिसवास बा त विजय बा .
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