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Bhojpuri: कमलापति क मुख्यमंत्री क कुर्सी कइसे गइल रहल, पढ़ी अंदर क कहानी

425 सदस्यन वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास 280 सदस्य रहलन, अउर पार्टी के सदन में पूरा बहुमत रहल. फिर भी 12 जून, 1973 के कमलापति क सरकार चलि गइल अउर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होइ गयल. पढ़ीं कइसे...

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सन 1971 में उत्तर प्रदेश क मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह इस्तीफा देइ देहलन. एकरे बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कमलापति त्रिपाठी के प्रदेश क मुख्यमंत्री बनउलिन. कमलापति ओह समय चंदौली से विधायक रहलन. त्रिभुवन नारायण सिंह अउर कमलापति त्रिपाठी दूनों बनारस क दिग्गज कांग्रेसी नेता रहलन. लेकिन दूनों नेतन क गुट ओह समय अलग-अलग होइ गयल रहल. ओह समय कांग्रेस दुइ फाड़ होइ गइल रहल -इंदिरा कांग्रेस अउर आर्गनाइजेशन कांग्रेस में. कमलापति इंदिरा गांधी गुट में रहलन, जबकि त्रिभुवन नारायण सिंह विरोधी गुट ऑर्गनाइजेशन कांग्रेस से रहलन. प्रदेश क राजनीति ओह समय बनारस से तय होत रहल. त्रिभुवन के बाद जब कमलापति मुख्यमंत्री बनलन तब बनारस में चारों ओर इहय चर्चा रहल कि चाहे त्रिभुवन होय या कमलापति प्रदेश पर राज बनारसय करी.

425 सदस्यन वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास 280 सदस्य रहलन, अउर पार्टी के सदन में पूरा बहुमत रहल. फिर भी 12 जून, 1973 के कमलापति क सरकार चलि गइल अउर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होइ गयल. आज के जमाने के हिसाब से इ बात सुनि के अटपटा लगी, लेकिन तब क जमाना कुछ अउर रहल. राजनीति में तीन तिकड़म ओह समय भी रहल, लेकिन ओहू क एक स्तर रहल, अउर नैतिकता रहल. आज राजनीति में स्तर अउर नैतिकता ताखा पर रखाइ गयल हौ. कमलापति के ओही नैतिकता के नाते इस्तीफा देवय के पड़ल रहल.

दरअसल, सन 1973 के मई महीना में उत्तर प्रदेश में एक अइसन घटना घटल जवन एकरे पहिले अंगरेजन के जमाने में ही घटल रहल. प्रोविंसियल आर्म्ड कांस्टैबलरी यानी पीएसी क 12वीं बटालियन उत्तर प्रदेश में विद्रोह कइ देहलस. पीएसी उत्तर प्रदेश क एक रिजर्व पुलिस बल हौ. मेला, त्योहार, खेल, चुनाव, दंगा जइसन विशेष परिस्थिति में पीएसी तैनात कइल जाला. पीएसी पीटय बदे बदनाम हौ. पीएसी विद्रोह क कई कारण रहल. बल के जवानन क सेवा शर्त बहुत खराब रहल. ऊपर से बड़का अधिकारी जवानन पर धाक जमावय. अधिकारी लोग तमाम जवानन से घरे क काम करावय. जवानन के संगे जानवरन जइसन बरताव कयल जात रहल. गुलाम जइसन जिनगी जीयत जीयत जवान लोग आजीज आइ गइलन अउर अंत में उ विद्रोह कइ देहलन. विद्रोह के बाद अइसन माहौल होइ गयल रहल, जइसे कि उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त होइ गयल हौ. स्थिति नियंत्रण से बहरे होइ गयल. हालत इ रहल कि कब का होइ जाई, कवनो ठेकाना नाहीं. ओही समय पाकिस्तान में तानाशाही चलत रहल. एह के नाते अउर डर बनल रहल. मुख्यमंत्री कमलापति के नेतृत्व वाली राज्य सरकार एकदम से असहाय होइ गइल. सरकार के अपील अउर चेतावनी क कवनो असर नाहीं होत रहल.

अंत में विद्रोह पर नियंत्रण करय बदे सेना बोलावल गइल. सेना के भी विद्रोह पर नियंत्रण करय में काफी मशक्कत करय के पड़ल. सेना सबसे पहिले जहां-जहां पीएसी क शस्त्रागार रहलन, ओके अपने कब्जा में लेहलस. एह दौरान पीएसी के जवानन से सेना क मुठभेड़ होइ गइल. पीएसी क 30 जवान मारल गइलन. सैकड़न जवान गिरफ्तार कइ लेहल गइलन. अदालत में कुल 65 मुकदमा चलल. लगभग 800 जवानन के अदालत में पेश होवय के पड़ल. डेढ़ सौ लोगन के दुइ साल से लेइ के आजीवन कारावास तक सजा भइल. सेना पर गोली चलावय के आरोप में 500 जवानन के नौकरी से बर्खास्त कइ देहल गयल.

ओह समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के.सी. पंत 30 मई, 1973 के राज्यसभा में बतउले रहलन कि विद्रोह पर नियंत्रण करय के दौरान सेना क भी 13 जवान मारल गइलन अउर 45 जवान घायल होइ गइलन. बाईस से 25 मई तक चलल कार्रवाई के परिणामस्वरूप विद्रोह त नियंत्रण में आइ गयल, लेकिन विपक्ष पूरी घटना बदे कमलापति सरकार के जिम्मेदार ठहरइलस. स्थिति क नजाकत समझि के इंदिरा गांधी के निर्देश पर कमलापति पूरी सरकार के साथ 12 जून, 1973 के इस्तीफा देइ देहलन. राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होइ गयल. कुल डेढ़ सौ दिना तक राज्य में राष्ट्रपति शासन रहल. एकरे बाद इंदिरा गांधी केंद्र से हेमवती नंदन बहुगुणा के मुख्यमंत्री बनाइ के भेजलिन.

एतने बड़े राजनीतिक उठापटक के बाद भी कमलापति क राजनीति खतम नाहीं भइल. 1973 में ही उ राज्यसभा में चलि गइलन, 1975 में इंदिरा गांधी ओन्हय रेलमंत्री बनाइ देहलिन अउर 1977 तक उ देश क रेलमंत्री रहलन. वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन क आज जवन शानदार इमारत अउर स्वरूप देखाला, उ कमलापति क ही देन हौ. कमलापति स्टेशन क विस्तार अउर नवीनीकरण करउलन. कई रेलगाड़ी बनारस से चलउलन. जनता पार्टी सरकार के पतन के बाद 1980 में मध्यावधि चुनाव भयल अउर कांग्रेस भारी बहुमत के साथ फिर सत्ता में आइल. कमलापति वाराणसी संसदीय सीट से लोकसभा में पहुंचलन. इंदिरा गांधी ओन्हय फिर रेलमंत्री मनउलिन. एदइयां कमलापति क्षेत्र के लोगन के रोजगार बदे बनारस के खालिसपुर में रेलवे क कंकरीट स्लीपर बनावय वाला काराखान लगवउलन. वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन क शानदार इमारत अउर खालिसपुर क कंकरीट स्लीपर कारखाना आज भी कमलापति के स्मृति के ताजा कइ देला. (सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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