Bhojpuri Spl: झारखंड में निवेश, नौकरी, एमओयू आ उद्योग के सांझा-पराती

दिल्ली में झारखंड सरकार उद्योगपति लोग के जुटान स्टेक होल्डर्स कांफरेंस के नाम पर कइलसि हा. एमे झारखंड के मुखिया हेमंत सोरेन भी शामिल भइले. ऊ साफ-साफ कहले कि सरकार हरदम ओह लोगन के साथ रही, जे झारखंड में निवेश करी. लेकिन इ बात केतना धरातल पर उतरी?

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 2:05 PM IST
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झारखंड में निवेश, नौकरी, एमओयू आ उद्योग के गीत सूबा के सगरी सरकार अबले सांझा-पराती अइसन गावत आइल बाड़ी सन. बाबूलाल मरांडी से ले के अर्जुन मुंडा, कोड़ा आ अब हेमंत सोरन के सरकार तक एह गीत के समय-समय पर गावत-सुनावत आइल बाड़ी सन. टटका मामला हेमंत सोरेन सरकार के बा. हाले दिल्ली में झारखंड सरकार उद्योगपति लोग के जुटान स्टेक होल्डर्स कांफरेंस के नाम पर कइलसि हा. एमे झारखंड के मुखिया हेमंत सोरेन भी शामिल भइले. ऊ साफ-साफ कहले कि सरकार हरदम ओह लोगन के साथ रही, जे झारखंड में निवेश करी. कवनो भय के बात नइखे. नक्सली समस्या बा त ओकरा के ओरवावे खातिर सरकार कोशिश में लागल बिया. झारखंड में उद्योग नीति उद्योगपति के लोग से सुझाव लेके बनी. झारखंड में सगरी संसाधन मौजूद बा. कांफरेंस में फ्लिपकार्ट आ फिक्की के संगे एमओयू भी भइल.

इहवां ले त सब ठीक बा. सचहूं झारखंड में संसाधन के कमी नइखे. खान-खदान, बंदरगाह, रोड, मजूर जइसन उद्योग खातिर जरूरी सब कुछ बा. बाकिर नक्सल समस्या अइसन बा कि जल्दी केहू उद्योगपति हिम्मत ना जुटा पावे. एकरा संगे-संगे करप्शन झारखंड के कोढ़ रहल बा. कवनो अइसन नया काम नइखे, जवना में देर-सबेर गड़बड़-घोटाला उजागर ना भइल होखे. कवनो प्रोजेक्ट के डीपीआर होखे, भा नाली-गली के मरम्मत आ निर्माण, नौकरी में बहाली के बात होखे भा किरानी से कलक्टर तक के तबादला, सब जगह करप्शन भेंटा-धरा जाई. एह करप्शन में मंत्री से मुख्यमंत्री आ अफसर से किरानी तक धराइलो-पकड़ाइल बा लोग पहिले. मामला-मुकदमा अबहीं चलते बा.

खैर, बात होत रहल हा निवेश, नौकरी, एमओयू आ उद्योग के. साल 2017 में निवेश खातिर ओह बेरा के मुख्यमंत्री रघुवर दास एगो बड़हन आयोजन मोमेंटम झारखंड के नाम से कइले. एह आयोजन खातिर एतना तामझाम भइल, जेतना कवनो राज्य में ना भइल होई. पहिला बात कि आयोजन पर करीब 100 करोड़ रुपया खरच भइल. देश-विदेश में 8 जगहा पर रोड शो भइल. अमेरिका आ सिंगापुर में अफसर लोग के दल लेके रघुवर दास खुदे रोड शो में शामिल भइले. देश में कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु आ हैदराबाद में भी रोड शो भइल. एह रोड शो पर 2 करोड़ 36 लाख रुपया खरचा आइल. चीन के छोड़ बाकी देश-विदेश के रोड शो में अफसर लोग के संगे रघुवर दास खुदे गइले. आयोजन के भव्यता एही से समझे के चाहीं कि हाथी हवा में उड़े लागल. हवा में उड़त हाथी आयोजन के लोगो रहे. एकर हासिल केहू जाने के चाहे त बतावे के जरूरत नइखे. एको पइसा के निवेश ना आइल. लाखों-करोड़ों के एमओयू कागजे पर रह गइल. जब उद्योग लगबे ना कइल त नौकरी के बतकहिये बेकार बा. जब रघुवर दास के सरकार गइल त एहू पर सवाल उठे लागल बा. करप्शन खोजाये लागल बा.

एह आयोजन के सहभागी भी कवनो अदना संगठन ना रहे. उद्योग-व्यापार जगत के बड़हन संगठन फिक्की आ सीआईआई आयोजन के सारा इंतजाम कइले रहे. देश-दुनिया में एकरा खातिर जेतना रोड शो भइल, ओकर जिम्मा एही दूनू संगठन के रहे. ई दूनू संगठन मिल के रोड शो के आयोजन में 2 करोड़ 36 लाख 27 हजार रुपया खरच कइले सन. अगर बांट के देखल जाव कि कहवां के रोड शो पर केतना खरच भइल त समझे में अउरी आसानी होई. अमेरिका के रोड शो में 12 लाख 95 हजार 321 रुपया खरच भइल. चीन में 9 लाख 52 हजार 330 रुपया आ सिंगापुर में 39 लाख 63 हजार 685 रुपया रोड शो पर खरचा कइल गइल. अब देश के देख लीहल जाव. दिल्ली के रोड शो पर 61 लाख 74 हजार 653, मुंबई में 44 लाख 9 हजार 379, बेंगलुरु में 21 लाख 81 हजार 827, कोलकाता में 31 लाख 51 हजार 451 आ हैदराबाद में रोड शो पर 14 लाख 98 हजार 913 रुपया खरच कइल गइल.
एकरा पहिले बाबूलाल मरांडी आ अर्जुन मुंडा के टाइम में भी एमओयू के भरमार लाग गइल रहे. बतावल जाला कि 150 से बेसी एमओयू ओह लोगन के शासन में भइल. एइमे पहिले से जमशेदपुर में कारखाना चलावत टाटा के संगे जिंदल आ मित्तल समूह के लोग भी रहे. उद्योग महकमा के आंकड़ा देखल जाव त तकरीबन 3 लाख करोड़ रुपया के निवेश के एमओयू ओह समय भइल. 42 हजार करोड़ के स्टील प्लांट खरसावां में लागे वाला रहे. लक्ष्मी नारायण मित्तल के समूह 40 हजार करोड़ आ जिंदल समूह के 35 हजार करोड़ निवेश के बात रहे. दीया लेके केहू खोज आवे तबो झारखंड में आज ओह लोगन के मिलल मुशकिल बा. केतना काम भइल आ केतना लोग के नौकरी मिलल, ई बतकही त अलहदा बा.

अब हेमंत के हिम्मत देखल बाकी बा. हिम्मत के बात एह से कि एक ओर त ऊ कहत बाड़े कि उद्यमी लोग निर्भीक हो के निवेश करे, उद्योग नीति ओह लोगन के सलाह से बनावल जाई. दूसरा ओर ऊ इहो घोषणा करत बाड़े कि निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण लोकल लोग के दीहल जाई. एहू से बड़ बात ई बा कि हेमंत पत्थलगड़ी के केस में जेतना लोग के नाम आइल बा, ओकरा के वापस लेबे के ऐलान कइले बाड़े. पत्थलगड़ी झारखंड के बड़हन समस्या बा. जहां ई होला, उहां आदिवासी परंपरा-कानून के मुताबिक केहू दोसर बिना अनुमति के ढूक ना सकेला. जहां तक निर्भीक हो के निवेश के बात बा, जहिया ई बात ऊ कहत रहले, ओकरा दूसरे दिने गश्ती में निकलल पुलिस टीम पर नक्सली रिमोट बम से हमला क दिहले सन. तीन गो जवान शहीद हो गइले आ तीन गो घायल हो के इलाज करावत बाड़े. जहवां पुलिस पर हमला होखे, बिना लेवी दिहले केहू कवनो काम ना क पावे, ओइजा कुछू केहू कह लेव, निवेश-उद्योग के बतकही बेमानी बा. (लेखक ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं, यह उनके निजी विचार हैं.)
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