Bhojpuri: हाजीपुर में तs खेला खतम रहे रामविलास पासवान के, लेकिन...

खगड़िया जिले के रहे वाला रामविलास पासवान खातिर हाजीपुर कइसे बन गइल करमभूमि ? हाजीपुर के राह में रामविलास पासवान खातिर कम रोड़ा ना बिछावल गइल रहे. लेकिन ऊ कइसे सब बाधा के पार कइले, एकरा से चिराग पासवान के सीख लेवे के चाहीं.

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“रामविलास पासवान हाजीपुर के माई मानत रहन. हाजीपुर के माटी से ही उनकर देश अउर दुनिया में पहचान मिलल रहे. पासवान परिवार खातिर हाजीपुर कवनो तिरथ से कम नइखे. पशुपति पारस भी पहिला बेर सांसद बनले तs हाजियेपुर से. अब चिराग पासवान लोजपा में आपन जगह मजबूत करे खातिर हाजीपुर से ‘आशीर्वाद यात्रा’ शुरू करे वला बाड़े.” शंभुनाथ अतना कह के अखबार खटिया के सिरहाना राख देले. सामने बइठल गौरीकांत कहले, हाजीपुर के कइसे भुला सकेले चिराग पासवान ? अगर उनका रामविलास पासवान के बिरासत संभाले के बा तs हाजीपुर के जनता से आशीर्वाद लेवहीं के पड़ी. हाजीपुर के जौहरी लोग ही तय करिहें कि लोजपा के हीरा के बा ? चिराग पासवान कि पशुपति पारस ? अवधबिहारी दूनो जना के बात सुन के कहले, का तूं लोग जानत बड़s कि खगड़िया जिले के रहे वाला रामविलास पासवान खातिर हाजीपुर कइसे बन गइल करमभूमि ? हाजीपुर के राह में रामविलास पासवान खातिर कम रोड़ा ना बिछावल गइल रहे. लेकिन ऊ कइसे सब बाधा के पार कइले, एकरा से चिराग पासवान के सीख लेवे के चाहीं.

हाजीपुर में इंट्री के पृष्ठभूमि
गौरीकांत अउर शंभुनाथ पूछले, कइसे ? तs अवधबिहारी कहले, अइसन ना रहे कि हाजीपुर के राजनीत, रामविलास पासवान के सोना के थारी में सजा के मिलल रहे. हाजीपुर से उनकर पत्ता साफ करे खातिर कम कोशिश ना भइल रहे. लेकिन ऊ तs लोकनायक जयप्रकाश जी के महिमा रहे कि रामविलास पासवान के बाल बांका ना भइल. अगर जेपी ना रहिते तs रामविलास पासवान खातिर हाजीपुर सपना हा जाइत. रामविलास पासवान 1969 में संसोपा के टिकट पs अलौली (खगड़िया) से बिधायक बन चुकल रहन. लेकिन 1972 के चुनाव में ऊ हार गइल रहन. ई हार के बाद ऊ केन्द्र के राजनीत में जाये के तइयारी करे लगले. 1975 में जब इमरजेंसी लागल तs उनको जेल जाये के पड़ल. ओही घरी से जयप्रकाश नारायण, रामविलास पासवान के करमठता से परभावित रहन. 1977 में जब लोकसभा के चुनाव होखे लागल तs जनता पाटी में भी टिकट बंटवारा होखे लागल.

हाजीपुर में रामविलास पासवान के आगमन
अवधबिहारी कहले, रामविलास पासवान भी जनता पाटी के महत्वपूर्ण नेता रहन. 1977 के चुनाव में उहो टिकट के दावेदार रहन. जयप्रकाश नारायण के रामविलास पासवान से बहुत स्नेह रहे. जेपी राजनीतिक परिवर्तन के क्रांति तs कइले लेकिन उनका पद-प्रभाव के कवनो लालसा ना रहे. टिकट बंटवारा में उनकर कवनो दखल ना रहे लेकिन उनकर बिराट रूप के सामने बड़-बड़ नेता भी नतमस्तक रहन. जेपी के बात के बिरोध करे के हिम्मत केकरो में ना रहे. एक दिन जेपी रामविलास पासवान से कहले, आपको हाजीपुर से चुनाव लड़ना है, तैयारी शुरू कीजिए. लेकिन जनता पाटी चुनाव संचालन समिति हाजीपुर से रामविलास पासवान के टिकट काट के रामसुंदर दास के उम्मीदवार बना देलस. लोकनायक जेपी के जब ई बात मालूम भइल तs ऊ कुछ ना कहले. ऊ शांति से क्रांति करे वला नेता रहन. रामविलास पासवान के टिकट कटला के अगिला दिन हाजीपुर में धमाका हो गइल. जब भोर भइल तs लोग अचंभा में पड़ गइले. गली-गली में पोस्टर साटल रहे जवना में जेपी घोषणा कइले रहन कि रामविलास पासवान हमारा उम्मीदवार है. करीब दस हजार अइसन पोस्टर से पूरा हाजीपुर पट गइल रहे. पटना से लेके दिल्ली तक हड़कंप मच गइल. पूरे देश में रामविलास पासवान अकेले अइसन नेता रहन जेकरा के जेपी आपन कंडिडेट कहले रहन.

जेपी के आशीर्वाद से रेकौड जीत
गौरीकांत पूछले, का रामविलास पासवान के टिकट जानबूझ के काटल गइल रहे ? तs अवध बिहारी जबाब देले. ओह घरी बिहार जनता पाटी में कर्पूरी ठाकुर, सत्येन्द्र नारायण सिन्हा, मधु लिमये जइसन नेता के टिकट बितरण में बिशेष प्रभाव रहे. जेपी के फैसला से ई लोग को जोर के झटका लागल. जेपी के फैसला पलटे के ताकत केकरो में ना रहे. जेपी के सलाह पs रामविलास पासवान निर्दलीय हाजीपुर से पर्चा भर देले रहन. जेपी के कंडिडेट के खिलाफ जनता पाटी के कवन नेता के चुनाव लड़े के हिम्मत रहे ? अंत में जनता पाटी रामसुंदर दास के उम्मीदवारी वापल ले लेलस. पासवान जनता पाटी के उम्मीदवार बन के लड़ले. लेकिन तब पूरा हाजीपुर में ई बात फैल गइल रहे कि पासवान के जीत, जेपी के निजी जीत बा. एकरा बाद अइसन एकतरफा भोटिंग भइल कि रामविलास के जीत के वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गइल. ऊ 4 लाख 24 हजार भोट से जीत के गिनिज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नांव लिखवले. एकरा बाद रामविलास पासवान हाजीपुर के माटी में रच-बस गइले. जनता पाटी तs उनकर टिकट काट देले रहे लेकिन जेपी के स्नेह उनका के हाजीपुर के हीरा बना देलस.

दू बेर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनावे वला सीट
शंभुनाथ के सवाल पs अवध बिहारी कहले, हाजीपुर के जनता, उनका से केतना प्यार करत रहे ई 1989 के चुनाव से साबित हो गइल. रामविलास पासवान नाया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनवले. ऊ कांगरेस उम्मीदवार महावीर पासवान के 5 लाख 4 हजार 448 भोट से हरवले रहन. ऊ हाजीपुर में जरूर दू लोकसभा चुनाव हरले लेकिन एही सीट से दू बेर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनावे के दुर्लभ गौरव भी मिलल. भारत में अतना गौरव वला शायदे कवनो चुनाव क्षेत्र बा. कहल जाला कि हाजीपुर के कण-कण में रामविलास पासवान बसल बाड़े. जब 2019 में ऊ चुनाव लड़े से इंकार कर देले अउर अपना जगह पs पशुपति पारस के हाजीपुर से कंडिडेट बनवले तs कतना लोग कहे लागल कि अब लोजपा के हार तय बा. लेकिन पशुपति पारस के जीत से साबित हो गइल कि हाजीपुर के जन-मन में रामविलास पासवान बाड़े. बहुत तेयाग अइर तपस्या के बाद उनका ई अस्थान मिलल रहे. चिराग पासवान के भी जनता के दिल में जगह बनावे खातिर हाजीपुर के माटी के नमन कर के संघर्ष के रास्ता पs चले के पड़ी. शंभुनाथ अउर गौरीकांत हुंकारी भर के एह बात के समर्थन कइले. (अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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