Bhojpuri: कल्पनाथ राय अचानक कइसे बनलन इंदिरा गांधी क दुलरुआ, पढ़य अंदर क कहानी

कल्पनाथ राय कांग्रेस में शामिल भइले के साथ ही इंदिरा गांधी क दुलरुआ बनि गइलन. तीन बार लगातार राज्यसभा क सदस्यता एह बाती क प्रमाण हौ. बड़े-बड़े नेतन के कांग्रेस में एतना सम्मान नाहीं मिलल. कल्पनाथ क पार्टी में अइसन दबदबा देखि के कांग्रेस के बाकी नेतन के अचरज होय कि एक नया आदमी पार्टी में आइके एतना रसूख कइसे बनाइ लेहलस.

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  • Last Updated: April 20, 2021, 7:40 PM IST
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कल्पनाथ राय पूर्वांचल में कांग्रेस क एक कद्दावर नेता रहलन. मउ जिला क घोसी संसदीय क्षेत्र कल्पनाथ क गढ़ रहल. घोसी से ओन्हय केव भी हराइ नाहीं पइलस. कल्पनाथ राय इहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़लन, निर्दलीय लड़लन, जेल में रहि के भी लड़लन, लेकिन घोसी क उ हमेशा सरताज रहलन. हलांकि कल्पनाथ के मरले के बाद घोसी में ओनकर विरासत बिखरि गइल. कल्पनाथ घोसी से अपने काम के दम पर जीतत रहलन. पूर्वांचल में घोसी क जेतना विकास कल्पनाथ कइलन, इलाके में केव भी नेता अपने क्षेत्र क एतना विकास नाहीं कइ पउलस. कल्पनाथ राय क छवि विकास पुरुष क रहल अउर क्षेत्र क जनता ओनके कामकाज क मुरीद रहल.

कल्पनाथ राय कांग्रेस में शामिल भइले के साथ ही इंदिरा गांधी क दुलरुआ बनि गइलन. तीन बार लगातार राज्यसभा क सदस्यता एह बाती क प्रमाण हौ. बड़े-बड़े नेतन के कांग्रेस में एतना सम्मान नाहीं मिलल. कल्पनाथ क पार्टी में अइसन दबदबा देखि के कांग्रेस के बाकी नेतन के अचरज होय कि एक नया आदमी पार्टी में आइके एतना रसूख कइसे बनाइ लेहलस. लेकिन इ त अंदर क बात रहल. कवनो भी पार्टी में प्रगति ओही क होला, जे पार्टी हाईकमान क भरोसा जीति लेय. कल्पनाथ अब इंदिरा गांधी क भरोसा कइसे जीतलन, एकरे पीछे एक अंदर क कहानी हौ. इ कहानी कल्पनाथ अउर कांग्रेस के अंदर से छनि के आइल हौ सूत्रन के माध्यम से. इ कहानी केतनी सही, केतनी गलत हौ, हम नाहीं कहि सकित, लेकिन जवने तरीके से कांग्रेस में कल्पनाथ क अचानक कद बढ़ल, ओह हिसाब से कहानी सही लगयला.

बहरहाल, अब कहानी पर. कल्पनाथ राय कांग्रेस में जाए से पहिले राजनारायण क चेला रहलन. कल्पनाथ जब गोरखपुर विश्वविद्यालय में पढ़त रहलन, तबय राजनारायण ओन्हय समाजवादी युवजन सभा क उत्तर प्रदेश क महासचिव बनाइ देहले रहलन. कल्पनाथ भी राजनारायण के नक्शेकदम पर चलय अउर जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी के नीति क तीखी आलोचना करय. छात्र राजनीति के दौरान गोरखपुर विश्वविद्यालय में 1967 क गोलीकांड कल्पनाथ के नेहरू विरोध क नतीजा रहल. गोलीकांड में राय क एक मित्र मारल गयल रहल, जवने क प्रतिमा आज भी विश्वविद्यालय में मौजूद हौ. विरोध के राजनीति के दौरान कल्पनाथ काफी लोकप्रिय होइ गयल रहलन अउर एही दौरान कांग्रेस क कद््दावर नेता हेमवती नंदन बहुगुणा से ओनकर परिचय भयल. कांग्रेस ओह समय अंदरूनी कलह से जूझत रहल अउर पार्टी दुइ फाड़ होइ गइल रहल. नेतन क एक गुट के. कामराज के साथे रहल अउर दूसरका गुट इंदिरा गांधी के साथे. हेमवतीनंदन बहुगुणा इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई) के साथे रहलन.

इंदिरा गांधी पार्टी के मजबूत करय में जुटल रहलिन अउर एही बदे उ बहुगुणा के नवंबर 1973 में उत्तर प्रदेश क मुख्यमंत्री (नवंबर 1973 से नवंबर 1975) बनाइ के भेजलिन. बहुगुणा ओह समय केंद्र सरकार में सूचना मंत्री रहलन. इलाहाबाद बहुगुणा क गढ़ रहल अउर हिंदी पट्टी में ओनकर मजबूत पकड़ रहल. कुछ ही महीना में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होवय के रहल, अउर बहुगुणा के कपारे पर पार्टी के जीतावय क जिम्मेदारी रहल. ओन्हय कल्पनाथ जइसन तेज-तर्रार नेतन क जरूरत रहल. बहुगुणा कल्पनाथ के ओरी चारा फेकलन अउर कल्पनाथ चारा लपकि लेहलन.
कल्पनाथ राजनीति में राजनारायण के नाते जरूर आयल रहलन, लेकिन ओन्हय दरअसल चारा क ही तलाश रहल. राजनारायण की नाईं फकीरी ओन्हय पसंद नाहीं रहल. लेकिन सोशलिस्ट पार्टी मुराद पूरा होवय क उम्मीद ओन्हय नाहीं देखात रहल. एक दिना उ राजनारायण से संकुचात क धीरे से कहलन कि नेताजी बहुगुणा जी कांग्रेस में बोलावत हयन, आप क का राय हौ. राजनारायण उखड़ि गइलन अउर कहलन कि तै अबहिअय बहुगुणवा के पास चलि जो. जो बहुगुणवा क मलाई चाट, हमरे सामने आज के बाद से मत देखाए. कल्पनाथ सिर झुकइले चुपचाप उहां से निकलि गइलन अउर फिर दोबारा राजनारायण के सामने नाहीं गइलन. कल्पनाथ 1974 में कांग्रेस में शामिल होइ गइलन.

मार्च 1974 में उप्र विधानसभा चुनाव में बहुगुणा के नेतृत्व में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से वापसी कइलस. लेकिन कल्पनाथ राय से जवन वादा कयल गयल रहल, उ पूरा नाहीं भयल. हाईकमान तक कल्पनाथ क पहुंच रहल नाहीं, अउर बहुगुणा ओन्हय टरकावत रहलन. कल्पनाथ के लगय लगल कि ओनके साथ धोखा होइ गयल. उ बहुगुणा से फाइनल बात करय क समय लेहलन, अउर बहुगुणा ओन्हय एक दिना रात के खाना पर बोलउलन. बहुगुणा पहाड़ी बाभन रहलन, जवने के नाते खाए-पीए क शौकीन रहलन. दूनो नेतन के बीच खाए से जादा पीअय क दौर चलल अउर लंबी बातचीत भइल. बहुगुणा जब पी के मस्त भइलन तब उ नशा के हालत में कल्पनाथ राय के सामने आपन उ कुल योजना उगिल देहलन, जवन उ इंदिरा गांधी के खिलाफ बनावत रहलन. भारतीय राजनीति क नटवरलाल कहय जाए वाला बहुगुणा अपने मास्टर क ही कुर्सी पलटय क योजना बनावत रहलन. उ कल्पनाथ राय से कहलन कि बस थोड़ा अउर इंतजार कइ ल, ओकरे बाद उप्र का, पूरे देश क सत्ता अपने हाथे में रही, जवन कहबा तवन बनाइ देब.

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भारी जीत से बहुगुणा क मनोबल बढ़ल रहल अउर चारों ओर ओनकर चर्चा होत रहल. एही बीच ब्लिट्ज क संपादक आर.के. करंजिया एक सभा में कहि देहलन कि बहुगुणा में देश क प्रधानमंत्री बनय क पूरा गुण हौ. इंदिरा गांधी इ कुल सुनय जरूर लेकिन बहुगुणा पर ओनकर एतना भरोसा रहल कि उ सपने भी नाहीं सोचि सकत रहलिन कि उ ओनके खिलाफ अइसन कुछ कइ सकयलन. इ उहय दौर रहल, जब इंदिरा गांधी रायबरेली से अपने निर्वाचन (1971) के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में राजनारायण से मुकदमा क सामना करत रहलिन.



लेकिन कहल गयल हौ कि राजनीति में जब बेटवा अपने बाप क नाहीं होत त बहुगुणा इंदिरा क कइसे होतन? अउर कल्पनाथ राजनारायण अउर बहुगुणा क कइसे होतन? बहुगुणा क प्लान सुनि के कल्पनाथ के पसीना टपकय लगल. नशा काफूर होइ गयल, खोपड़ी काम करय लगल. कल्पनाथ कवनो बहाने से महफिल से उठि गइलन अउर तत्काल उहां से निकलि गइलन. जवने मौका क तलाश रहल, उ मौका ओनके हाथे में आइ गयल रहल. इ मौका उ कवनों भी हाल में जाए नाही देवय चाहत रहलन. उ रातय के जहाज पकडलऩ अउर दिल्ली पहुंचि गइलन. सबेर होतय इंदिरा गांधी क दरवाजा खटखटाइ देहलन.

कल्पनाथ सोशलिस्ट पार्टी से कांग्रेस में शामिल भले ही भयल रहलन, लेकिन ओह समय एतना बड़ा नेता नाहीं रहलन कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बिना अपाॅइंटमेंट क ओनसे मिलि लेतिन. लेकिन कल्पनाथ के पास इंदिरा गांधी बदे जवन सूचना रहल, उ ओनकर सबसे बड़ी ताकत रहल अउर उ ताकत ओनके चेहरा पर संकल्प बनि के तैरत रहल. इंदिरा गांधी के मुलाजिमन से उ विनती कइलन कि कवनों भी हालत में माताजी से मुलाकात कराइ द नाहीं त अनर्थ होइ जाई. समय बहुत कम हौ अउर माताजी पर बहुत बड़ा संकट आइ गयल हौ. ओन्हय सूचना देब बहुत जरूरी हौ. कल्पनाथ क बात सुनि के अउर ओनकर हालत देखि के इंदिरा क मुलाजिम लोग एक बार सोचलन कि इ आदमी पागल हौ. लेकिन बार-बार आग्रह कइले के बाद उ सब भी परेशान होइ गइलन अउर अंत में संदेशा प्रधानमंत्री के पास पहुंचावल गयल.

इंदिरा गांधी भी इ संदेशा सुनिके परेशान होइ गइलिन अउर कल्पनाथ के मुलाकात बदे अंदर बोलउलिन. कल्पनाथ राय इंदिरा गांधी क बहुगुणा क पूरा प्लान बताइ देहलन. कल्पनाथ क बात सुनि के इंदिरा शुरू में सोचलिन कि इ आदमी चमचागिरी करय आयल हौ, अउर बहुगुणा जइसन भरोसेमंद नेता के खिलाफ गलत बयानी करत हौ. इंदिरा कल्पनाथ के काफी खरी-खोटी सुनउलिन. कल्पनाथ हाथ जोड़ि के कहलन कि माताजी हमय एही ठिअन बंद कराइ देय अउर एकर जांच कराइ लेय, अगर हमार बात सही न निकलय त हम फांसी चढ़य बदे तइयार हई.

अब इंदिरा गांधी के भी सुबहा होवय लगल. लेकिन उ कल्पनाथ से कहलिन कि अगर बात गलत निकलल तब तोहार खैर नाहीं. इंदिरा तत्काल अंदरूरी जांच क व्यवस्था कइलिन अउर केहूं के काने भनक तक नाहीं लगल. जांव में कल्पनाथ क पूरी बात सही निकलल. एकरे बाद बहुगुणा अचानक दिल्ली तलब कइ गइलन अउर केंद्र सरकार में ओनकर जरूरत बताइ के 29 नवंबर, 1975 के ओनसे इस्तीफा लेइ लेहल गयल. लेकिन ओन्हय जब वापस केंद्रीय सूचना मंत्री नियुक्ति कयल गयल तब उ समझि गइलन कि ओनके साथ खेल होइ गयल हौ अउर अब पार्टी में ओनकर दाना-पानी उठि गयल हौ. उत्तर प्रदेश क कमान उत्तराखंड क ही एक दूसर बाभन नेता नारायणदत्त तिवारी के सौंपि देहल गयल. कुछ समय बाद बहुगुणा के सूचना मंत्री पद से भी हटाइ देहल गयल अउर एकरे बाद बहुगुणा 1977 में कांग्रेस से भी इस्तीफा देइ देहलन. बहुगुणा अब जगजीवन राम अउर नंदिनी सतपथी के साथ मिलि के कांग्रेस फार डेमोक्रेसी नामक पार्टी क गठन कइलन अउर पार्टी क महासचिव बनलन. सार्वजनिक तौर पर हलांकि बहुगुणा कांग्रेस छोड़य क दूसर कारण बतइले रहलन. लेकिन सच्चाई त इहय रहल कि बहुगुणा इंदिरा के नजर से गिरि गयल रहलन, जवने के नाते उ ओन्हय कांग्रेस से दूधे के मक्खी की नाईं निकालि के फेंकि देहले रहलिन.

दूसरे तरफ इंदिरा के नाकी में दम करय वाले राजनारायण क चेला कल्पनाथ राय इंदिरा के आंखी क तारा बनि गइलन. लगातार तीन बार राज्यसभा क सदस्यता एकर प्रमाण हौ. राजनीतिक गलियारा में इ बात हर कोई के पता हौ कि जबतक इंदिरा गांधी जिंदा रहलिन कल्पनाथ बदे ओनकर दरवाजा 24 घंटा खुलल रहय. कल्पनाथ राय 1974 में ही कांग्रेस संसदीय दल के कार्यकारी समिति क सदस्य बनि गइलन अउर राज्यसभा क सदस्य भी. कल्पनाथ 1980 में प्रमोट कइके पार्टी क महासचिव बनाइ देहल गइलन अउर दुबारा राज्यसभा क सदस्य भी. इंदिरा गांधी 1982 में कल्पनाथ के अपने मंत्रिमंडल में शामिल कइलिन. ओन्हय संसदीय मामले अउर उद्योग विभाग क उपमंत्री बनउलिन. पार्टी ओन्हय 1986 में तीसरी बार राज्यसभा में भेजलस. 1989 में ओन्हय घोसी से लोकसभा क टिकट मिलल, जहां से उ जीत हासिल कइलन. घोसी से उ लगातार चार बार सांसद रहलन. राजीव गांधी अउर पी.वी. नरसिम्हा राव कलपनाथ के अपने सरकार में शामिल कइलन. भ्रष्टाचार क कई आरोप भी लगल, लेकिन कल्पनाथ हर मामले में बेदाग बरी होइ गइलन. राजनीति में 58 साल क उमर जवानी मानल जाला अउर एह हिसाब से कल्पनाथ अपने जवानी में ही छह अगस्त, 1999 के इ दुनिया छोड़ि के चलि गइलन. (लेखक सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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