Bhojpuri: माया से ना छूटेला पीछा, तृष्णा अउर वासना ना होखे कबो शांत, लेकिन...

हमनी का मुंह से “माया” शब्द का जाने कतना हाली बोलले होखब जा, बाकिर ओकर गहराई से अपरिचिते रहल बानी जा. लेकिन ई का होखेला माया, जेकरा चक्कर में बार-बार जन्म, मरण अउर नाना प्रकार के दुख भोगे के परेला? पढ़ीं...

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संत कबीर के जेतने पढ़ीं, पियास बढ़ते जाला. हमनी का मुंह से “माया” शब्द का जाने कतना हाली बोलले होखब जा, बाकिर ओकर गहराई से अपरिचिते रहल बानी जा. संत कबीर माया के अनंत प्रभाव के रेखांकित कइले बाड़े आ ओकरा के “महाठगिनि” कहले बाड़े. ईहो कहले बाड़े कि- “कौन ठगवा नगरिया लूटल हो.” आदि शंकराचार्य लिखले बाड़े कि- “पुनरपि जन्मम, पुनरपि मरणम, जननी जठरे, पुनरपि शयनम”- माया के प्रभाव में बार- बार जन्म, मरण आ नाना प्रकार के दुख भोगे के परेला. एने संत कबीर कहले बाड़े- “माया मुई न मन मुवा, मरि मरि गया सरीर”. त माया में एतना आकर्षण बा कि तृष्णा आ वासना कबो शांत ना होखे.

मुए के घरी आइल बा, बाकिर वासना बा कि धधकता. हई मिल जाइत, त हऊ मिल जाइत- एकरे तृष्णा. अचानके प्राण पखेरू उड़ि जाई आ मए वासना धइले रहि जाई. बाकिर माया के प्रभाव देखीं कि ऊहे वासना सूक्ष्म लोक से फेर खींचि के रउरा के पृथ्वी पर ले आई आ कौनो माता के गर्भ में डाल दी. संत कबीर कतनो कहिहें- “पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात/एक दिना छिप जाएगा,ज्यों तारा परभात” बाकिर मन वासना के प्रति लुकलुकाइले रही. त का हमनी के मन वासना के एतना गुलाम हो गइल बा कि दुख- बिपति के बावजूद ओही में डूबल रहे के चाहता? त एकरे जबाब में एगो बड़ा सुंदर धार्मिक कथा बा- एक बेर भगवान श्रीकृष्ण आ नारद मुनि कहीं जात रहे लोग. नारद मुनि भगवान से पुछले कि अच्छा ई बताईं कि जब रउरा जानत रहनीं हं कि माया बड़ा दुस्तर बिया, बड़ा नचावे वाली बिया आ बुद्धिमान आदमी के मति मार देले त रउरा ओकरा के काहें बनवनीं आ बनवनीं त ओकरा से छुटकारा पावे के उपाई काहें ना बतवनीं? भगवान चुपे रहले. त नारद मुनि काहे के मानसु, ऊ भगवान कृष्ण से कहले कि त रउरो एह माया के सवाद चीखीं. खाली हमनिए पर प्रयोग करब आ रउरा ओकरा से अछूता रहब? ई त अन्याय बा. त भगवान कहले कि ठीक बा. सामने एगो सूअरी बिया जौन अपना बचवन के दूध पियावतिया. ओही के शरीर में हम प्रवेश करतानी. बाकिर जब तीन महीना बीति जाई त तूं हई मंत्र हमरा लगे आके पढ़िह, हम सूअरी के शरीर से निकलि के आ जाइब. आ जदि हम बाहर ना अइनीं त हई एगो बरछी ले ल, एही से सूअरी पर प्रहार कके ओकरा के मुआ दीह. हम तुरंते ओकरा शरीर में से बाहरा निकलि आइब. बाद में हम सूअरी के जिंदा क देब. नारद मुनि के ई प्रस्ताव अच्छा लागल. कहले कि ठीक बा भगवन, रउरा एह सूअरी के शरीर में ढुकि जाईं. भगवान सूअरी के शरीर में ढुकि गइले.

तीन महीना बीति गइल. भगवान कृष्ण के अता- पता ना लागे. देखते- देखते छव महीना बीत गइल. तब नारद मुनि सूअरी का लगे गइले आ भगवान के दीहल मंत्र पढ़ले. बाकिर भगवान बाहरा आवे के नांवे ना लेसु. तब नारद मुनि बरछी उठा के प्रहार करे चलले. भगवान देखले कि अब खून- खराबा हो जाई. त चुपचाप भगवान सूअरी के शरीर से बाहरा निकलि के नारद मुनि के सामने खड़ा हो गइले. नारद मुनि कहले कि भगवान, रउरा त बाहरा आवे के नांवे ना लेत रहनीं हं. त भगवान कहले कि माता सूअरी के रूप में हमरा बचवन के दूध पियावत आ ओकनी के प्रति प्रेम में एतना विस्मृत हो गइल रहनीं हं कि बाहरा आवे के मने ना करत रहल ह. त नारद मुनि कहले कि देखनीं नूं, कि माया केतना ताकतवर अस्त्र बिया, केतना मोहक बिया? भगवान कहले कि हं. ई बात त सांच बा. बाकिर हम मनुष्य जाति के बरदान देतानी- जे केहू, माया के बंधन से मुक्ति खातिर एकनिष्ठ होके प्रार्थना करी, भक्ति करी ओकरा के हम माया से मुक्त क देब. नारद मुनि बड़ा खुस भइले. चल आज भगवान मनुष्य खातिर एगो बरदान दिहले. अब रउरा मन में ई आवत होई कि भगवान त सर्वव्यापी, अंतर्यामी, सर्वशक्तिमान हउवन, मायापति हउवन त ऊ कइसे माया का जाल में फंसि गइले? त ईहो भगवान के एगो लीला ह. जब हरि के अनंत कहल बा, त हमनी के का औकात कि उनुकरा लीला पर प्रश्न करब जा. ईहे लागता कि भगवान हमनी के आवश्यक शिक्षा देबे खातिर अइसन दृश्य उपस्थित कइले.

बाकिर भगवान एतने पर ना रुकले. कहले कि ए नारद मुनि हम त माया के सवाद चीखि लिहनीं. तूहूं चीख. नारद मुनि कहले कि कइसे? त भगवान कहले कि हमरा पियासि लागल बा. जा पानी ले आव. नारद मुनि कमंडल लेके चारो ओर तकले. देखले कि एगो औरत कुआं पर पानी भरतिया. ओकरा लगे गइले आ पानी मंगले. भगवान के लीला देखीं कि नारद मुनि ओह औरत पर आ ऊ औरत नारद मुनि पर मोहित हो गइल. दूनो लोग औरत के घर में आके रहे लागल लोग. औरत भी अविवाहित आ अकेले रहत रहे. दिन बीतल- साल बीतल. नारद मुनि के लइका- फइका भइले सन. सुख से दिन बीतत रहे. तले बहुत भयंकर बाढ़ आइल आ नारद मुनि के कुटी के बहावत ले के चलि गइल. नारद मुनि के पत्नी कहीं बहि गइली, लइका कहीं बहि गइले सन आ नारद मुनि फेर अकेले के अकेले. तलहीं उनुका भगवान के आवाज सुनाइल- नारद मुनि, हमरा पियास लागल बा आ तूं कहां चलि गइल. नारद मुनि चेतना में अइले आ देखले कि ऊ त ईनार पर कमंडल में पानी लेके खड़ा बाड़े. तुरंते जाके ऊ भगवान कृष्ण के गोड़ पर गिरि गइले आ उनुकर चरण धूलि लेके कपार पर लगवले आ कहले कि भगवन राउर लीला अपरंपार बा. माया के जाल सचहूं महाकठिन बा. हमरा के आसिरबाद दीं कि हम कबहूं एकरा वश में ना आईं. भगवान कहले कि तूंही ना संसार में जे केहू हमार भक्ति करी, माया के प्रपंच से पार हो जाई. त एही से कबीर आजुओ प्रासंगिक बाड़न. (विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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