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Bhojpuri में पढ़ें- बिहार बोर्ड के मैट्रिक टॉपर, जे बनले IAS के भी टॉपर

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अभय मोहन जी बिहार बोर्ड से मैट्रिक पास कइले रहीं. ओकरा बाद IAS में चुनाइल रहीं. रिटायर भइला के बाद पढ़े-पढ़ावे से सरोकार रहे. रिपोटर रमन कुमार उहां के इंटरभ्यू खातिर पहुंचल रहन. परनाम-पाती के बाद रमन पूछले, रउआ तs बिहार बोर्ड के बहुत पुरान पासआउट हईं, कवनो यादगार कहानी बताईं जवना से कि आज के जुवा पीढ़ी के सीख मिल सके.

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अभय मोहन जी कुछ देर सोचत रहले. फेन तनी उत्साह से कहले, आज हम अइसन बिहार बिभूति के कहानी बताइब जवना पर हर कोई गर्व महसूस कर सकेला. बिहार बोर्ड में एगो असन टौपर भइल बाड़े जे IAS ( यूपीएससी) के परीक्षा में भी टौप कइले बाड़े. ई बात सुन के रमन कुमार कहले, बिहार के माटी में बहुत खासियत बा. एक से बढ़ के एक लाल पैदा भइल बाड़े. लेकिन बिहार के मैट्रिक टौपर के IAS में टौप करे के कहानी, सचमुच अदभुत बा. रिजल्ट के मौका पs ई कहानी बहुत प्रेरणादायी रही.

मैट्रिक टौपर, IAS टौपर

अभय मोहन जी कहानी शुरू कइले. ई कहानी हs बिहार के एगो अइसन प्रतिभावान छात्र के जे अफसर के रूप में ईमानदारी अउर आत्मसम्मान के अमिट इतिहास बनवले. इनकर नाम रहे आभास कुमार चटर्जी. पूर्णिया के रहे वला रहन. बिहार बोर्ड से 1957 में मैट्रिक के परीक्षा देले रहने. पूरे बिहार में पहिला स्थान मिलल रहे. मतलब 1957 में बिहार बोर्ड के मैट्रिक टौपर रहन आभास कुमार चटर्जी. ओह घरी पूर्णिया जइसन सुदूर जिला से बिहार टौपर निकले से बहुत लोग अचरज में पड़ गइल रहे. लेकिन आभास जी प्रतिभापुंज रहीं. अपना जीवन में कभी सेकेंड ना कइनी . हरमेसा फस्ट. आभास जी कौलेज में पढ़े खातिर पटना पहुंचले. पटना कौलेज में नांव लिखाइल. आइ अउर बीए में भी आभास जी टौप कइले. आगा के पढ़ाई खातिर दिल्ली पहुंचले. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से मास्टर डिग्री लिहले. आभास जी 1966 में यूपीएससी के परीक्षा में बइठनी. एह प्रतिष्ठित परीक्षा में भी उहां के पहिला स्थान मिलल. बिहार कैडर में आइएएस बननी. आभास जी बिहार के पहिला यूपीएससी टौपर रहीं. मतलब ई कि IAS के परीक्षा में बिहार 1966 में ही अपना टैलेंट के झंडा गाड़ देले रहे. आभास जी ही ऊ होनहार विद्यार्थी रहन जे बिहार बोर्ड के मैट्रिक टौपर होखे के साथ साथ यूपीएससी के भी टौपर बनल रहन.

ईमानदारी अउर कर्तव्यनिष्ठा के मिसाल

रमन कुमार पूछले, एक अफसर के रूप में आभास जी का जोगदान रहे ? तब अभय मोहन जी कहले, आभास जी ईमानदारी अउर कर्तव्यनिष्ठा के प्रतिमूर्ति रहीं. नियम के पालन करे में हरमेसा तत्पर. सामने कतनो बड़ नेता रहस, दबाव में बेल्कुल ना आवत रहन. सरकारी कैदा कानून के पालन अउर गरीब के सेवा ही उनकर अफसरी रहे. 1981 में आभास जी बिहार पथ परिवहन निगम के महाप्रबंधक बनल रहीं. स्टेट बस पहिले बहुत घाटा में चलत रहे. लेकिन आभास जी के बागडोर मिलते एकर कायाकलप हो गइल. बस समय पs चले लागल. लूट-खसोट बंद हो गइल. कर्मचारी लोग के समय पs वेतन मिले लागल. बेवस्था ठीक भइल तब बिहार पथ परिवहन निगम मोनाफा में चले लागल. ई बदलाव देख के सभी केहू खुश हो गइल. लेकिन आभास जी नियम तूरे वला लोग के खिलाफ बहुत सख्ती बरते लगनी. गड़बड़ी करे वला पs एक्शन लेवे में देर ना लागत रहे. एही क्रम में आभास जी के परिवहन निगम के चैयरमैन आर झा से ठन गइल. चेयरमैन के पद राजनीतिक पद रहे. ओह घरी जगरनाथ मिसिर जी मुखमंतरी रहन. आर झा जी उनकर नजदीकी आदमी रहन. चेयररमैन पs अवैध बहाली के आरोप रहे. जांच में आभास जी आरोप के सही पवले. तब ऊ चेयरमैन के खिलाफ मुख्यसचिव अउर सीएम के चिट्ठी लिख देले.

1992 में IAS के नौकरी छोड़ देनी आभास जी

अभय मोहन जी के इंटरभ्यू जारी रहे. अक्टूबर 1981 में मुखमंतरी दस IAS अफसर के सुपरटाइम स्केल में प्रमोशन दे के बदली कइले रहन. एकरा में आभास जी के भी नांव रहे. तब आभास कुमार चटर्जी ऐह फैसला के विरोध कर देले. ऊ मुखमंतरी जगरनाथ जी के चिट्टी लिख के कहले, “मैं इस प्रमोशन को अस्वीकर करता हूं. मुझे अपने मौजूदा ग्रेड में ही शेष करियर तक सेवा करने का मौका दिया जाए. वैसे सुपरटाइम स्केल एक अधिकारी के लिए बहुत बड़ी चीज होती है जो उसे 16 साल की अच्छी सेवा रिकॉर्ड के बाद प्राप्त होता है. लेकिन मुझे यह स्वीकार नहीं है.” आभास जी के ईमानदारी से बहुत लोग के दिक्कत भी होखे लागल रहे. नेता लोग परेशान हो गइले काहे से कि ऊ केहू के सुनत ना रहन. उनका के तरह-तरह से तंग कइल गइल. आभास जी बुनकर लोग के कल्य़ाण खातिर बहुत काम कइले रहन. पूर्णिया में पहिले मलेरिया के बहुत प्रकोप रहे. ओकर दुख दर्द नजदीक से महसूस कइले रहन. एह से ऊ मलेरिया उन्मूलन खातिर मिशन मोड में काम कइले रहन. लेकिन 1992 में स्थिति बिपरित होखे लागल. लालू जी मुखमंतरी रहन. एक बेर आभास जी एगो मंतरी के कामकाज पs नियम के सवाल उठा देले. बात बढ़ गइल. तब स्वाभिमानी आभास जी नौकरी छोड़े में तनिको देर ना लगवले. ऊ कहले रहन, “इस पतनशील व्यवस्था से खुद को अलग करना ही मेरे लिए बेहतर है.” अभय मोहन जी कहले, आभास जी जइसन बिहार टौपर पs भला केकरा नाज ना होई. ई कहानी के साथे अभय मोहन जी के इंटरभ्यू खतम हो गइल. रमन कुमार अपना आफिस लौट गइले.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri, Bhojpuri News

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