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if ram vilas becomes railway minister then lalu does not face the problems bhojpuri ashok kumar sharma

Bhojpuri में पढ़ें- 2004 में रामविलास जी बनिते रेलमंत्री, तs लालू जी ई संकट में ना फंसिते

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आरा से पटना खातिर टरेन खुलल तs रजनीकांत समान सरियावे लगले. गौरीशंकर झोरा से अखबार निकाल के पढ़े लगले. अखबार में रेलवे भरती घोटला के खबर परमुखता से छपल रहे. रजनीकांत जब सीट पs बइठले तs गौरीशंकर कहले, अगर लालू जी 2004 में रेल मंतरी ना बनल रहिते तs आज उनका ई दिन ना देखे पड़ित. ओह घरी सोनिया गांधी रामविलास पासवान जी के रेल मंतरी बनावल चाहत रही. लेकिन लालू जी रेल मंतरी बने खातिर अड़ गइल रहन.

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बिहार में राबड़ी जी के सरकार रहे. लोकसभा में लालू जी भिरी 24 सांसद के ताकत रहे. मनमोहन सिंह के मिलीजुली सरकार बनावे खातिर लालू जी सहयोग जरूरी रहे. लालू जी के जिद के आगे कांगरेस के झुके के पड़ल. लालू जी एक तरह से बलजोबरी रेलमंतरी बन गइले. ओह घरी तs लालू जी रेलमंतरी बने के आपन जीत समझले रहन. लेकिन आज ईहे जीत उनका खातिर चिंता के कारण बन गइल बा. ना ऊ रेल मंतरी बनल रहिते ना उनका पs रेलवे भरती घोटला के आरोप लागल रहित. कभी-कभी अदिमी के ताकत ही ओकर परेशानी के कारण बन जाला. लेकिन ई बात समय बीतला के बाद महसूस होला. रजनीकांत पूछले, लालू जी कइसे रेल मंतरी बनल रहन, एकरा खातिर का बिबाद भइल रहे ?

2004 में रामविलास जी बने वला रहन रेलमंतरी, लेकिन…

गौरीशंकर कहले, अक्टूबर 2017 में लोजपा के राजगीर में सम्मेलन भइल रहे. एह सम्मेलन में रामविलास जी भरल सभा में कहले रहन कि 2004 में ऊ लालू जी अड़ंगा के चलते रेल मंतरी ना बन पाइल रहन. कैबिनेट शपथग्रहण के पहिले सोनिया गांधी अउर मनमोहन सिंह रामविलास जी के रेलमंतरी बनावे के भरोसा देले रहन. लेकिन लालू जी दबाव बना के खुद्दे रेल मंतरी बन गइल रहन. दरअसल लालू जी कइसे रेल मंतरी बनले, एकर कहानी में एगो जबरदस्त ट्विस्ट बा. 2004 में यूपीए के सरकार बनल. यूपीए में 145 सीट के साथे कांगरेस सबसे बड़ पाटी रहे. राजद के 24 सीट मिलल रहे. सरकार गठन में लालू जी अहम भूमिका रहे. लालू जी कांग्रेस के कमजोर समझ के गृहमंतरी खातिर दावा ठोक देले. लेकिन कांग्रेस कवनो कीमत पs गृह मंतरालय अपना पास राखल चाहत रहे. कांगरेस लालू जी के बात माने के मूड में ना रहे. तब तक लालू जी चारा घोटला मामला में तीन बेर जेल जा चुकल रहन. ऊ जमानत पs बहरी रहन. हालांकि तब तक कवनो मामला में ऊ दोषी साबित ना भइल रहन. कांगरेस शिवराज पाटिल के गृह मंतरी बनावे के फैसला कर ले ले रहे. जब लालू जी समझ गइले कि अब गृह मंतरालय ना मिली तब ऊ रेल मंतरी बने खातिर दबाल बना देले. कांगरेस एक बेर लालू जी के मांग खारिज कर चुकल रहे. अब ऊ दोसरा मांग खारिज करे के स्थिति में ना रहे. एह स्थिति में लालू जी के रेलमंतरी बना दिहल गइल. तब सोनिया गांधी अउर मनमोहन सिंह के कहे से रामविलास जी रसायन, खाद अउर इस्पात मंतरी बने खातिर राजी कर हो गइले.

जब लालू जी के रुख से बढ़ गइल रहे कांगरेस के टेंशन

रजनीकांत पूछले, 2004 में लालू जी के कइसे अहमियत बढ़ गइल रहे ? तब गौरशंकर कहले, 2004 के चुनाव में सीपीएम के 43 और समाजवादी पाटी के 36 सीट मिलल रहे. लेकिन लेफ्ट अउर सपा मनमोहन सरकार के बहरी से समर्थन देले रहे. दूनो दल सरकार में शामिल ना रहे. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अगस्त 2003 में उत्तर प्रदेश का मुखमंतरी बन गइल रहन. मुलायम सिंह के गैरमौजूदगी में लालू जी के यूपीए में अहमियत बढ़ गइल रहे. एक सीमा के बाद कांग्रेस, लालू जी के मना ना कर सकत रहे. सरकार बने के पहिले ही लालू जी आपन रुख कड़ा कर ले ले रहन. पहिले तs ऊ गृहमंतरी पद के डिमांड कर देले. फेन कांगरेस पs दबाव बनावे खातिर कह देले कि अभी सरकार में शामिल होखे खातिर बिचार बिमर्श बाकी बा. ई बयान के बाद कांगरेस के टेंशन बढ़ कइल रहे. लालू जी दिल्ली से पटना लौट अइले. पटना अइला के बाद ऊ कह देले की हमरा मंतरालय से अधिक बिहार के बिकास के चिंता बा. ओह घरी बिहार में राबड़ी देवी के सरकार रहे. लालू जी केन्द्र सरकार से बिहार खातिर बिसेस आर्थिक पैकेज के मांग कर देले.

कइसे बनले रेल मंतरी

गौरीशंकर तनी थम के फेन कहले. लालू जी के रुख देख के कांग्रेस के फिकिर बढ़ गइल. लालू जी के मनावे खातिर अर्जुन सिंह अउर आर के धवन के भेजल गइल. लेकिन लालू जी ना मनले. सोनिया गांधी गांधी अउर मनमोहन सिंह के बहुत कहला के बाद ऊ गृह मंतरालय के मांग छोड़ले. तब ऊ रेल मंतरी बने खातिर अड़ गइले. मजबूर कांगरेस उनकर मांग मान लेलस. एकरा अलावे लालू जी रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, तस्लीमुद्दीन, जयप्रकाश नारायण यादव, एमएम फातिमी, कांति सिंह अउर अखिलेश सिंह के भी मंतरी बनावे में कामयाब हो गइले. बाद में 2008 में राजद के रधुनाथ झा भी केन्द्रीय मंतरी बनले. मतलब राजद के 24 में से 9 सांसद मंत्री बन गइल रहन. ओह घरी केन्द्र में लालू जी के तूती बोलत रहे. कहल गइल बा कि ताकत जबून ना होखे लेकिन ताकत के अति जबून हो जाला. लालू जी के रेलमंतरी बनला के चारे साल बाद उनका पs रेलवे भरती में गड़बड़ी के आरोप लागे लागल. 2008 में जदयू के दू सांसद कागजात के साथ बतवले रहन कि कइसे लालू जी अपना पक्ष में गवाही देवे वला के रेलवे में नौकरी बांट देले रहन. ओह घरी तs कुछ ना भइल लेकिन 14 साल बाद ईहे बिबाद लालू जी के चिंता बढ़ा देले बा. बाते-बात में टरेन पटना पहुंच गइल. तब रजनीकांत अउर गौरीशंकर उतरे के तइयारी करे लगले.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.a)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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