अपना शहर चुनें

States

भोजपुरी में पढ़ें - तीसिया के तेलवा करहिया जरे रे ननदी..

तीसी चमत्कारिक रूप से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद ह.
तीसी चमत्कारिक रूप से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद ह.

तीसी, Flax Seed या अलसी सेहत खातिर बहुत गुणकारी ह. कब्ज से लेकर कैंसर रोके तक में एकर प्रयोग होता. शहर में लोग एकर छोट छोट पैकेट किनी के ले आवता. जबकि भोजपुरी बोले वाला ज्यादतर इलाका में कभी एकर प्रयोग एतना आम रहल कि लोकगीत तक में तीसी के जिक्र आवेला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 5:57 PM IST
  • Share this:
तीसी के तेल में बनल वेंजन यानी खाना तिकसावले. एह वजह से भोजभात में ओकरा तेल के इस्तेमाल कम होत रहल हा. एकरा तेल के एगो अउरी कमी रहल हा. चढ़ल कराही में ओकर तेल बाकी तेलन के तुलना में ढेरे जरेला. ई ओकर जरे वाला सुभावे ह कि भोजपुरी में एगो लोकगीते बा.
तीसिया के तेलवा, करहिया जरे रे ननदी
ओइसे जरे जियरा हमार रे छोटकी ननदी.

चढ़ल कराही से जइसे तिसी के तेल खतम हो जात रहे. कुछु ओइसहिं तीसियो भोजपुरी समाज से धीरे-धीरे गायब हो गइल. पिछलकी सदी के आखिरी दशक में जइसे-जइसे आधुनिकता देस में दस्तक देबे लागल. देसी ज्ञान-विज्ञान, चाल-ढाल, दवा-दुआ, खानपान, पहिनावा-ओढ़ावा सब में बाजार के पइठ बढ़त गइल. अइसे में बाल के लटियावे वाला तिसी कइसे बांचि सकत रहे. हालांकि भोजपुरी समाज लटियाये वाला तिसी के तेल के महत्व के आपाना ढंग से स्वीकार कइले रहे. भोजपुरी इलाका के धोबिया गीत में एकर चर्चा खूबे भइल बा.
तीसिया के तेलवा में मथवा बन्हवले रे भउजी.

तीसी के तेल भले ही सरसों, नरियर के तेल नियर साफ आ गुनी ना रहे. लेकिन ऊ ओतनो अवगुनियो ना रहे कि ओकर तिरस्कार कइ दिहल जाऊ. भोजपुरी लोक एकरा के मानत रहे. मानत त भोजपुरी के क्रांतिकारी कवि महेंदर मिसिर जियो रहले. तबे उ लिखले रहले.
तीसिया के तेलवा में मथवा बन्हवलीं


ए ननदिया मोरी रे,
माथ मीसे गइनीं रामा बाबा के पोखरवा
ए ननदिया मोरी रे.
टिकुला गिरल मंझधार
ए ननदिया मोरी रे.

भोजपुरी में पढ़ें - कोरोनाकाल में करम-योग- जिनिगी जीए के कला

तीसी के तेल के माथा में लगला के बाद ई तय रहे कि बाल लटियाई. ओकरा में चिपचिपापन आई. त अगिला दिन माथ मिसहीं के परी. करइल के चिकन माटी से. ओहू में महेंदर मिसिर सौंदर्य खोजि लिहले. ई तीसी के महिमा रहे कि महेंदर मिसिर के नजरिया. एह पर विचार त होखहीं के चाहीं.बाकिर ई सच बा कि सौंदर्य आ प्रेम में भी जवना तीसी के दखल रहे.ऊ धीरे-धीरे दूर हो गइल. बाजार व्यवस्था के एगो खासियत ह.ऊ जाहां आवेला.स्थानीय व्यवस्था,परंपरा आ संस्कृति के आपाना राह में सबसे बड़ बाधा मानेला. त ओकरा के परंपरावाद के बहाने किनारे लगावत चलि जाला. आ जब ऊ स्थापित हो जाला. ओकर ताकत निर्विवाद हो जाले. त ऊ स्थानीय संस्कृति आ ज्ञान-विज्ञान के आपाना ढंग से आपन अंग बनावेला. आ ओकरा जरिये भी कारोबार करे लागेला. एह पूरा प्रक्रिया में ऊ ओह सब के स्थापित करेलागेला.जवना के ऊ पिछड़ा मानि के छोड़ि चुकल रहेला. अगर एह प्रक्रिया में स्वास्थ्य आ दोसर कारण जरूरी हो गइल त पारंपरिक चीजन के आधुनिक बनावे के प्रक्रिया तेज हो जाला. इहां ई बतावल जरूरी बा कि तिसियो के साथ नवका बाजार व्यवस्था ऊहे काम करतिया.

भोजपुरी समाज के ऊ लोगन के यादि होई. जे जिनगी के चार-पांच दसक बीता देले बा. जइसहीं बूनी बाजत रहे. धनरोपनी के तेयारी होखे लागत रहे. तब हर ओह घरे में ओखरी में मूसर के धमाका सुनाए देबे लागत रहे. जेकरा इहां धान रोपाई होखे के रहे. धनरोपनी करे वाला मजदूर लोगन के चाना के घुघुनी के संगे भूंजल तिसी आ महुआ के लाटा दियात रहे जलपान में. एह खातिर घर-घर भूंजल तिसी आ भुंजल महुआ के मिलाकर ओखरि में कूटाई होत रहे आ ओह प्रक्रिया से लाटा बनत रहे.

जइसहीं जाड़ आवत रहे. घर-घर में तिसी भूंजी के ओकरा के कूटि के लिसलिसा बनाइ दिहल जात रहे. ओकरा के भूंजल चउरठ के गुर के पाग में मिलाके लड्डू बनावल जात रहे. जवना में भुंजल सोंठ आ मेथी के भी पिसि के मिलावल रहत रहे. ओह से बनल लड्डू के भोजपुरी इलाका में कहीं कसार त कहीं मेथी त कहीं सोंठि कहल जात रहे.ई जाड़ा के दिन के पउष्टिक नाश्ता आ कलेवा होत रहे. अब एकर चलन भोजपुरी इलाको में कम हो गइल बा.

एम्स के ट्रामा सेंटर के घटना
एह घरी पांच साल पहिले एशिया के सबसे बड़का अस्पताल दिल्ली के एम्स के ट्रामा सेंटर के घटना यादि आवत बा. भोजपुरी सामाजिक इलाका के एगो कनिया एम्स के हड्डी विभाग में आपाना एड़ी के दरद के इलाज खातिर पहुंचल रहली. त उहां के सबसे बड़का डाक्टर उनुका का एगो-दूगो एक्सरसाइज सुझवले आ कहले कि दूनो बेरा तीसी भूंजि के एक-एक चम्मच खाए के कहले. ऊ महिला सोचले रहली कि डाक्टर साहेब दू-चार गो नाया जामाना वाला टेबलेट-कपसूल दिहें.बहरहाल उनुकर एड़ी के दरद ठीक हो गइल बा.

भोजपुरी में तीसी के पैदावार भले कम हो गइल बा. बाकिर ऊ दिल्ली-मुंबई के चमकदार मॉलन में फ्लेक्स सीड के नाम से खूबे महंगा बिकाता. एकर वजह बा कि ई गुणन के खान बा. ई एंटीफंगल बा यानी फंगल इन्फेक्शन के खत्म करे होला. एही संगे ऊ एंटीऑक्सीडेंट भी बा यानी मुक्त कण के असर कम करे वाल बा. एकरा सेवन से हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तदाब कम रहेला. एकरा नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम रहेला. एकरा संगे एकरा सेवन से मधुमेह यानी चीनिया रोग नइखे होखे वाला. संगे-संगे ई खून के थक्का कम करे वाला गुण से भी भरपूर बा. एकरा सेवन से कैंसर आ ट्यूमर ना हो सकेगा.एकरा नियमित सेवन से जोड़न के दर्द में राहत मिलेला. कब्ज में राहत मिलेला.

एकर तेल गाढ़ होला. त ओकर इस्तेमाल पेंट, रंग आ वार्निश बनावे में होला. कपड़ा धोवे वाला साबुनो बनावे में एकरे ज्यादा इस्तेमाल होला. आ रऊंआ सभ ई जानि के हैरत में रहि जाइबि कि आजुकाल के फैसन के महंगा कपड़ा लिनेन एकरे सूता से बनेला. आ ई सूता बनेला ओकरा पौधा के. एकरा पौधा के एगो आउर खासियत ह. एकरा के कवनो जानवर ना खाला. एह वजह से पहिले गहूं के खेत में खेतके चारों तरफ दू-तीन लाइन तीसी बोआत रहल हा. भोजपुरी इलाका में कहल जाई कि दू-तीन धारी यानी किनारी तीसी बोआत रहल हा.एह से गहूं के खेत आवारा जानवरन के चराई से बचि जात रहल हा.आ मिश्रित खेती में गहूं संगे तीसियो हो जात रहल हा.

जइसे-जइसे अब तीसी के मांग बढ़ता. ओइसे-ओइसे अब फेरू से किसान लोग एकरा खेती बढ़ावे लागल बा. ओइसे दुनिया में खाए खातिर सबसे ज्यादा संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटाइना आ भारत में तीसी के खेती होला.जबकि रेशा खातिर बेल्जियम, रूस, पोलैंड, नीदरलैंड, फ्रांस आ चीन में पैदावार होला.

बहरहाल तीसी के बहार लवटता. उमेद कइल जा सकेला. कि एहके जरी भोजपुरी समाज के किसान अब समृद्धि के नाया इतिहास रचि सकेला लोग. एह बहाना फेरू से भोजपुरी समाज आपाना लोकराग में डूबि सकेला.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज