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Bhojpuri लोक के राम - चईत के नवमी अति मनभावन रे

भोजपुरी में बच्चा के जनम पर सोहर गावे के परंपरा बा.सायेदे कवनो सोहर बा, जवना में राम के तोख आ वर्णन नइखे. एह हिसाब से भ ...अधिक पढ़ें

संस्कृति पुरूष हउअन राम. जियत खानी राम, आखिरी यात्रा पर राम, दुख-दर्द पर राम, तीज-तेवहार पर राम. भारतीय संस्कृति में राम के ई व्याप्तिए ह कि राम हर मोका पर हर सनातनी के जुबान पर बाड़े।
तुलसी बाबा लिखि गइल बाड़े,
जाके ना प्रिय ना राम-वैदेही.
तजिय कोटि वैरी सम, परम सनेही.

तुलसी बाबा अइसहीं नइखल ई लिखि गइल बाड़े. ठीक बा कि ऊ रामजी के भक्त रहले, दरअसल सनातन समाज पूरा संसारे के सिया-राम मय मानेला. सायेद इहे वजह रहे कि तुलसी बाबा इहो लिखि गइल बाड़े, सिया राम मय सब जग जानी. राम खाली धार्मिक ग्रंथन के अवतारी पुरूषे ना हवन, ऊ खाली देवता आ भगवान ना हवन, बल्कि ऊ भारतीय समाज के जीवन हउअन. इहे वजहि बा कि भारतय के सायदे कवनो लोक साहित्य बा, जवना में राम के मोहक आ संस्कारी चित्त के वर्णन नइखे.

रामजी के जन्मस्थली अयोध्या भले अवधी इलाका में होखे, बाकिर रामजी के जनम के लेके भोजपुरी लोक साहित्य भरल बा.राम जनम के हर लोक रचनाकार अपना-अपना ढंग से ओइसहीं देखले बा, जइसे भक्त कवि लोग राम के देखले बा.
भोजपुरी में बच्चा के जनम पर सोहर गावे के परंपरा बा.सायेदे कवनो सोहर बा, जवना में राम के तोख आ वर्णन नइखे. एह हिसाब से भोजपुरिया परिवार में जनमे वाला हर बालक राम होला, ओकर माई कौशल्या होली आ पिता दशरथ होले.
मोका राम जनम के रामनवमी के बा. त एगो सोहर देखीं,
रामजी के भइले जनमवां
मनवा झूमत बा
दशरथ लुटावेले अन-धन सोनवा,
कोशिला लुटावसु खजनवा
मन झूमत हो.
भारतीय समाज में बेटा के जनमला के नेग-चार देबे, खुसी-उत्साह जतावेके परंपरा बा. एह गीत में ओहि के वर्णन बा.

जब भगवान जी अपनहीं मानुष देहि धइ के जनमिहें त अयोध्या के भागि जगबे नूं करी. एह सोहर में अयोध्या के भागि के जगला के संगे उहवां के राजमहल के चित्रांकन कइसन भइल बा, एह के रूप देखीं.
धनि-धनि अयोध्या रउरो भाग त परम सुहावन हो,
ललना कहवां जनमले राम, त कहवां लछुमन नूं हो
केकरा जनमले भरत,
उठे सोहर हो

भगवान जनमिहें त दुनिया में उत्साह होखबे करी, खाली भक्त लोगन खुश थोड़े रहिहें.प्रकृति के उत्साहित भइल स्वाभाविक भा, भोजपुरी के एह सोहर में एही उत्साह के देखीं,
जाहि दिन राम जनमले धरती आनंद भइली हो,
ललना ऋषि-मुनि होखेले आनंदित,
त फूल बरसावेले हो.

रामजी के जनम के वर्णन के कतने लोकगीत मिलिहें. उहनिए में से एगो इहो बा. चइत के नवमी के भगवान के जनमला के बाद कइसे अयोध्या के महल में बधाव बाजता, एह के देखीं,
चइत अंजोरिया के नवमी, त राम जनमले हो,
ललना बाजे लागल अवध बधाव,
महलिया उठे सोहर हो

राजमहल में एगो छोड़िं, चार-चार गो सुंदर आ प्रतापी राजकुमार अवतरित होइहें त नेग-चार मांगे वाला ना जुटिहें, कइसे हो सकेला.

आधुनिक चिकित्सा तंत्र के अइला के पहिले पहिले बच्चा के जनम घरहीं में होत रहल हा. जनम दियावे के स्थानीय स्तर पर ही प्रशिक्षित मेहरारू होत रहली हा. भोजपुरी में उहन लोग के धगड़िन आ दाई कहल जात रहल हा. एह लोक रचना में देखीं, कइसे धगड़िन आ मंगनी-पवनी राजकुमार के जनम के संतिर आपन नेग मांगता लोग. एह दृश्य के उभारे में ई लोक रचना कतना सफल बा, रऊंओ देखीं,
मचिया बइठल रानी कोसिला,
सिंहासन राजा दशरथ हो,
मोरे राजा हमरा तिलरिया के साध,
तिलरिया हम लेहब हो…
धगडिन मांगेली अंगवा के अंगिया,
राजा जी के पगिआ नु हो,
ललना मांगेली दूनों कान के सोनवा,
लहसि घरवा जाईब हो

भोजपुरी के एगो चइता देखीं, चइता जनाते बानीं सभे कि ओकर सुर आ ताल सोहर से अलगा होला..एहू में राम जी के जनम के चित्रण देखीं,
दशरथ के खिलले अंगनवां हो रामा
भइले ललनवां.
कोसिला के राम मिलले ललनवां
सुमितरा के गोदिया लखन बलवानवा.
झूले लगले सोने के पलंगवा रामा.
भरत भुआल अइले
कैकयी के अंचरवा.

चइता में त कहहिं के नइखे.चूंकि चइते भगवान के जनम भइल रहे, एह वजह से चइता में भी रामजी के खूबे वर्णन बा. एगो उदाहरण देखीं,
चईत के रामनवमी अति मनभावन ए रामा.
अयोध्या में रामजी जनमले ए रामा.
हर सोहर में चारो भाइयन संगे रामजी, दशरथ जी आ उनुका तीनों माई लोगन के किसिम-किसिम से चर्चा भइल बा,
दशरथ के जनमले राम,
अवध में बाजे बजनवा ए रामा.

भोजपुरी लोकगीत जइसे झूमर, खिलौना, विवाह, संस्कार, निर्गुण, भजन इत्यादि में रामजी के किसिम-किसिम के मनोहारी छवि बा. राम नवमी के मोका बा. कोरोना काल में भगवान राम के जनम के मोका पर कोरोना के काटे खातिर एह गीतन संगे सुमिरन करीं. (लेखक उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

आपके शहर से (पटना)

Tags: Bhojpuri, Bhojpuri News

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