भोजपुरी में सेनुर के महत्व: सेनुरे कारानावा हो बेटी...छोड़ेलु तू घरवाs हमार

जवन औरत सिन्दूर लगावेली भा लगवले बाड़ी उ बिआहल हड़ी. सेनुर सुहाग के प्रतीक हऽ.
जवन औरत सिन्दूर लगावेली भा लगवले बाड़ी उ बिआहल हड़ी. सेनुर सुहाग के प्रतीक हऽ.

सेनुर के महत्व जीवन में खूबे बा. जब कवनो लइका जनम लेला तऽ ओह लइका के छठी (Chhath Puja) के दिन रोरी के टीका लागेला. जनम देबे वाली माई सिन्दूर लगावेली आ पूजा करेली.

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  • Last Updated: November 5, 2020, 10:16 AM IST
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पटना. एगो बिआहल मेहरारु लोग खातिर सेनुर के केतना महत्व बा, ई बात केहु से छुपल नइखे. हर मेहरारु लोग चाहे ला कि ऊ लोग जब तक जिंदा रहस, तब तक उनकर सेनुरा आबाद रहो. हमनी के बियाह में जहां एक देने कन्यादान होखेला, त दुसरा देने सेनुर दान भी होखेला. सेनुर के महत्व पर मेहरारु लोग कए गो गीत भी गावेली जा. रऊआ खुदे पढ़ीं...
काहवां के सेनुरहारवा ए सेनुर बेंचे आवेला जी
आरे काहवां के बिटुइया ए सेनुर बेसाहेली जी
अनजान गांव के सेनुरहारवा ए सेनुर बेंचे आवेला जी
अनजान गांव के गोरी बिटुइया ए सेनुर बेसाहेली जी ...

बाबाऽ - बाबा पुकारिना
बाबा ना बोलेले हो


बाबा के बरजोरी
सेनुर बर डालेले हो ......

बियाह के माहौल बा
बियाह के माहौल बा. सेनुरदान के बेरी अइसन - अइसन ढेरे गीत औरत आ मेहरारू सब के मुंह से निकल रहल बा . सतर साल के बुढ़िया दादी होखस , भौजाई होखस, फुआ होखस , बहिन होखस चाहे चाची होखस सबके कंठ से गीत फूट रहल बा . छोटकी - छोटकी लइकिओ सुर में सुर मिलवले बाड़ी सन. उ सब तऽ कुछ अधिके खुश बाड़ी सन . कबो एने आवताड़ी सऽ , तऽ कबो ओने जा ताड़ी सन . ओहिजा भीड़ लागल बा . अधिका लोग नया - नया कपड़ा पहिरले बा . सबके बड़ी खुशी बा . बाकी ओही में कुछ लोग अइसन बा जेकर चेहरा देखे में रुआंसी जइसन लागता . अइसन लागता कि उन्हुकुरा काठ मार दिहले बा . उन्हकर छाती के दरद चेहरा पऽ दिखता . असल में बाबु माई लइकी के जनम देले रहे , कलेजा के टुकड़ा के पलले रहे , पोसले रहे , खेलल रहे , कुदल रहे , रुसल रहे , मनवले रहे, हर मुसीबत में खड़ा रहे.. उ करेजा के टुकड़ा एगो रसम भइला के बाद एह लोग से दूर हो जाई . बेटी से अलग भइला के बारे में सोच - सोच के छाती में दरद बनता . बाबु आ माई परेशान भी बाड़ें . बाकी एगो उमंगों बा . लोग बिधी- बिधान में लागल बा.

जनम देबे वाली माई सिन्दूर लगावेली आ पूजा करेली
ई सब एगो मंडप में हो रहल बा. कइगो बांस गाड़ के माड़ो बनल बा, ओह माड़ो में पियरी माने पियर कपड़ा -साड़ी पहिर के लइकी बइठल बाड़ी, आ बगल में धोती - कुर्ता भा पैंट- कमीज पहिर के एगो लइका बइठल बाड़े. कुछ महिला सब कपड़ा से ओहार लगावताड़ी. लइका आ लइकी के ओहार लाग गइल. लइकी बइठले बाड़ी, तबे लइका थोड़ा नेहुर के लइकी के माथा में भा मांग में सिंहोरा में से पटसन से सेनुर निकाल के भर दिहलें. मांग में सेनुर भरे के काम उ पांच बेरी कइलन. माने उ लइका ओह लइकी के सिन्दूर दान कर दिहलें. ओह घरी कइगो मंतर भी पढ़ल जाला. ओहार में सिन्दूर दान होला बाकी ओहिजा पंडित जी, नाऊ, नाउन, गोतिया भाई - भवधी के लोग के संगही लइका के घर के कई लोग ओहिजा रहेला. गीत भी खूबे गावाला.

का होलाss सेनुर- दान? का बा महत्व
सेनुर के महत्व हमनी किहां खूबे बा. ई बहुते पुराना रिवाज हऽ. शादी में कइगो रसम कइला के बाद सिन्दूर दान होला. ओही घरी लकड़ी के बनल गोल आकार के पिटारा जेकरा के सिन्होरा कहल जाला, ओही में सिन्दूर रखल रहेला आ सेनुरदान के बाद उ सिन्होरा लइकी के दे दिहल जाला. सिन्दूर दान बहुते महत्त्वपूर्ण दान हऽ. एह में लइकी के मांग में जवन लइका सिन्दूर भर दिहलें , उ लइकी जीवन भर खातिर उन्हकर हो जाई. लइका के संगे - संगे लइकी उन्हकर मेहरारु बनके उन्हुकुरा घरे आ जाई. अब उ लोग संगे - संगे जीही. ऊ लइकी दोसरा घरे, दोसरा गांव में जनम जरुर लेले रही बाकी अब जीवन भऽ सिन्दूर दान करेवाला के साथे रहिहें. अब चाहे दुख होखे चाहे सुख होखे, आंधी आवे भा तुफान आवे, ओही परिवार में उ रहिहन. सेनुर के बारे में गीत भी गावल जाला . एगो गीत में बखान भइल बा कि सेनुर के खातिर लइकी कहां से कहां चल जाली, देखीं एगो गीत.
हटिया के सेनुरा महंग भइले बेटी
टिकुली भइले अनमोल
चुटुकी सेनुरवा के कारन
बेटी हो छोड़ेलु तू घर हमार ...

जवन औरत सिन्दूर लगावेली भा लगवले बाड़ी उ बिआहल हड़ी. सेनुर सुहाग के प्रतीक हऽ. जवन औरत बिधवा हो जाली ऊ सेनुर ना लगावेली. अइसे सब औरत के इच्छा होला कि उ लोग सुहागिने मरे. माने जब उन्हकर पति जिंदा होखस तबे उन्हकर मृत्यु हो जाए. ओइसे सुहागिन औरत जब मरेली तऽ उन्हुकुरा के पूरा ओढ़ा पहना के आ सिन्दूर लगा के दाह- संस्कार कइल जाला. ई रिवाज आजो बा.

जनम देबे वाली माई सिन्दूर लगावेली आ पूजा करेली
सेनुर के महत्व जीवन में खूबे बा. जब कवनो लइका जनम लेला तऽ ओह लइका के छठी के दिन रोरी के टीका लागेला. जनम देबे वाली माई सिन्दूर लगावेली आ पूजा करेली. एकरा संगे- संगे जब कवनो लइका लड़ाई लड़े भा कवनोss शुभ काम करे जाला तऽ ओकरा माथा पऽ रोरी के टीका लगावल जाला. एकरा संगही लोग कहेला कि सीता जी अपना मांग में सिन्दूर लगावत रहीं. एक बार सीता जी के मांग में सिंदूर देख के हनुमान जी सीता जी से पूछलें कि रउआ लाल सिन्दूर काहे लगाइना? तऽ सीता जी कहनी कि एह से प्रभु जी खुश रहेलें. ई बात सुन के हनुमान जी भगवान राम जी के खुश करे खातिर पूरा शरीर में लाल सिन्दूर लगा लिहलें. एह बात से भी समझल जा सकेला कि सिन्दूर के रिवाज कितना पुराना हऽ.

तऽ देवी जी लोग के सेनुर चढ़ावेली
हिन्दू धर्म में औरत लोग जब कवनो मंदिर में जाली तऽ देवी जी लोग के सेनुर चढ़ावेली. दुर्गा जी, काली जी, लक्ष्मी जी , सरस्वती जी , पार्वती जी भा अउर कवनो देवी जी होखीं , सबके सेनुर चढ़ावल जाला . देवी के सेनुर चढ़ावला के बाद औरत सब अपना माथा में सिन्दूर लगावेली. कतहुं - कतहुं देवी के प्रसाद के रूप में सिन्दूर भी मिलेला . ओह सेनुरा के घरे ला के बाद में औरत सब लगावेली. सेनुर कई रंग के होला जइसे लाल , पियर , भाखारा , कुम कुम. एगो गीत में मईया खातिर अलग-अलग रंग के सेनुर के बतकही होता , देखीं एह गीत के ...

ठुमुकी , ठुमुकी मईया अइली देवघारवा
मलिया बोलेला जय - जयकार
कवन सेनुरा आसन मईया के
कवन सेनुरा डासन
कवन सेनुरा मईया के सिंगार
लालाका सेनुरा आसन मईया के
पियरका सेनुरा डासन
भाखारा सेनुरा मईया के सिंगार ..
मईया बसेली बड़ी दूर हो
गमक आवे बेला के
ए मईया तोहके सेनुरा चढ़इबो
टीका पेन्हइबो दिन रात ….

गीत में एकर बखान खूबे भइल बा
सेनुर लगावे के रिवाज बहुते पुराना हऽ. गीत में एकर बखान खूबे भइल बा. कुछ लोग इहो कहेला कि भारत में शुरू से अनार्य लोग रहत रहे, उ लोग भी सेनुर चढावत आ लगावत रहे. जब आर्य लोग अइलें तऽ ओही समय में कइगो अइसन परंपरा रहे जवना के उ लोग भी अपनवलें.ओही समय में सिन्दूर लगावे के शुरू भइल होई. बाद में हमनी के ई परंपरा बन गइल. आदिवासी के कइगो देवी अइसन बाड़ी जेकरा के सिन्दूर चढ़ेला. सेनुर के उपयोग खूब होला.

सेनुर एगो खनिज पदार्थ हऽ
सेनुर एगो खनिज पदार्थ हऽ.  पथर जइसन ढोका होला, ओकरा के पिस -पिस के बुरादा अइसन बना के खूबे महीन भा बारीक बना दिहल जाला. पहिले इ हर जगे मिलत होई आ ओकरा के घरे ला के सिलवट पऽ दरल जात होई. शादी के एगो गीत में सेनुर दरे के बात होता , देखीं एह गीत के...

सेनुर दरऽ , सेनुर दरऽ
माई के बहिनिया सब पितिआइन के
अरोसिन के परोसिन के
सेनुर दरहीं ना जाने उन्हकर बेटा ...
आजो हमनी किहां सेनुर बड़ुए . आज ढेरे सेनुर बाजार में बने लागल बा आ बिकाए लागल बा. ओकरा बादो ओकरा से लगाव कम नइखे भइल आ आगहुं कम ना होई . ओकरा साथे आस्था बनल रही .
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