Home /News /bhojpuri-news /

भोजपुरी में पढ़ें– विवाह पंचमी के महत्व

भोजपुरी में पढ़ें– विवाह पंचमी के महत्व

.

.

काहें-कहीं विवाह पंचमी के शुभ मानल जाला आ कहीं अशुभ?एह साल विवाह पंचमी यानी मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी(अगहन शुक्ल पंचमी) 8 दिसम्बर के शुरू होत बा. शुभ मुहुर्त बुधवार सुबह 4 बजकर 54 मिनट से वृहस्पतिवार सुबह 3 बजकर 07 मिनट के बीच श्रवण नक्षत्र में पड़त बा.एह नक्षत्र में भारत में हर कार्य शुभ मानल जाला.जब कि मिथलांचल अउर नेपाल में विवाह पंचमी के दिन विवाह के शुभ ना मानल जाला.

अधिक पढ़ें ...

‘विवाह पंचमी’ के अवसर पर ही त्रेता युग में राम-सीता जी के शादी सम्पन्न भईल रहें.मिथलांचल में ई मान्यता बा कि विवाह पंचमी के अवसर पर शादी भईला के वजह से सीता जी के गृहस्थी कभी सुख-चैन से ना बीतल.एह अवसर पर विवाह के आजुओं मिथलांचल में शुभ ना मानल जाला.विवाह के बाद जब सीता जी ससुराल गइली, तब अठारह साल के उम्र में वनवास हो गईल.राम जी के राजगद्दी छोड़े के आदेश मिलल.वनवास के दौरान रावण के हाथे सीता जी के अपहरण भईल.रावण विजय के बाद पहिले वन में फिर अयोध्या में अग्नि परीक्षा से गुजरे के पड़ल.फिर दुर्मुख के शिकायत के बाद गर्भावस्था में दूसरका बार वनवास भईल.ऋषि वाल्मिकी के आश्रम में लव-कुश के जनम भईल.विवाह के बाद कभी सीता के- दुबारा जनकपुर जाएं के अवसर भी ना नसीब भईल.एगो कथा अइसनों मिलेला कि सीता के वनवास अउर अपहरण के पता राजा जनक के भी रहें.राम जी के भी सीता जी के वनवास के पता रहें.अयोध्या पहुँचला के बाद जब राम जी से आँख में आँसू के वजह पुछल गईल, तब उनका मन में भी ओह समय, अइसने हूक पैदा भईल रहें.फिर भी -अइसन कवन खास वजह रहें कि एह तमाम तरह के दुर्भाग्य के शिकार सीता जी के वाल्मीकि रामायण में- काव्यं रामायणं कृत्स्नं सीतायश्चरितं महत्-सीता जी के चरित्र के महानता के गुणगान कईल बा?

पहिला बात ई कि लोकजीवन में रामजी के मर्यादा पुरुषोत्तम के भूमिका में स्थापित करें में बहुत बड़ी वक्तिगत कुर्बानी सीता जी के करें के पड़ल बा.आम तौर पर कवनों स्त्री पर सबसे पहिला आ आसान आरोप ‘चरित्रहीनता’ के लागेला.भवभूति के उत्तर रामचरितम् नाटक के आरंभ में सूत्रधार खुद कह रहल बा – यथा स्त्रीणां तथा वाचां साधुत्वे दुर्जनो जनः( जैसे स्त्रियों की पवित्रता के बारे में, उसी प्रकार काव्यरचनाओं के बारे में लोग छिद्रान्वेषी हुआ करते हैं.) लोग देवी सीता के बारे में रावण के अपहरण के बाद अशोक वाटिका में रहला के वजह से लांछन लगावत रहल.रावण के चंगुल से छुटकारा के बाद सीता जी के अग्नि परीक्षा जंगल में हो चुकल रहें.उनकर पवित्रता भी प्रमाणित हो चुकल रहें.बाकि अयोध्या में ओह अग्नि परीक्षा पर केहूं भरोसा ना कईल.एह प्रतिकार में कालिदास के ‘रघुवंश’ में सीता जी, राजा के सामने ई प्रश्न करत बाड़ी- प्रमाण कवन सच मानल जाई? अग्नि परीक्षा के जवन आपके सामने भईल रहें? अथवा लोकापवाद के-जवन आप सुनले रहनीं? आँखन देखि के प्रमाण मानल जाई या काने सुनला के? फिर ओकर भाव स्पष्ट करत कहत बानी कि-कामचार्यसीति भावः.अर्थात आपने मनमानी की है.

एकरा बावजूद गुरु वशिष्ठ के आदेश पर रामजी सहमति जतावत कहत बानी कि- स्नेहं दयां च सौख्यं च यदि वा जानकीमपि.अराधनाय लोकस्य मुंचतो नास्ति मे व्यथा..( लोकरंजन के लिए स्नेह , दया, सुख अथवा जानकी को भी छोड़ते हुए मुझे कष्ट नहीं होगा.).ऊँ रामजी से बिछुड़ला पर सीता जी का कहत बाड़ी कि- जन्म जन्मांतर से जेकर दर्शन दुर्लभ बा.ओह, आर्य पुत्र के हम एक आँसू गिरले अउर दूसर आँसू आवें के बीच में देखत बानी.सीता के ई बात सुनीं के तमसा कहत बाड़ी- शोक अउर आनन्द से उत्पन्न आँसू बहाती हुई तुम्हारी दुग्ध-धवन दृष्टि मानो अपने हृदयेश को दूध की नहर की तरह स्नान कराती है.

ओह दाम्पत्य प्रेम में आसक्त सीता के ई शिकायत- बिल्कुल जायज बा कि- “अगिया में राम मोहि डारेनि लाई भूँजि काढ़ेनि.गुरु गेरुए गरभ से निकारेनि त कैसे चित मिलिहै..” गर्भावस्था में कवन अइसन पति होई, जवन अपना पत्नी के केहू के कहला पर-जवना के पवित्रता पहिले साबित हो चुकल बा.वनवास भेंज दी? लोकगीत में एगो इहो प्रसंग मिलेला- जब सीता जी के दुबारा अग्नि परीक्षा के घड़ी आइल.ओकर बड़ा कारुणिक वर्णन ‘कविता कौमदी’ के एगो कविता में मिलेला.

“सीता आँखियाँ में भरलीं बिरोग एकटक देखिन.सीता धरती में गईं समाय कुछौ नहीं बोलिन..” हिंदी के प्रसिद्ध कवि रामनरेश त्रिपाठी कहते है कि “इस एक टक देखने और कुछ न बोलने में ही सीता ने सब कुछ कह डाला.” मतलब ई कि धरती के कोख से पैदा भईल सीता आपन पतिव्रता सिद्ध करें खातिर फिर धरती में समा गइलीं.ई गुहार लगावत कि- “फट जा री धरती समा जा री सीता केसों की हो गई दूब हो राम.इस रे पुरूष का मुख नहीं देखूँ जीवत दिया वनवास हो राम.”

फिर भी सीता जी के मन में पति राम के प्रति दाम्पत्य प्रेम के जवन भाव है, अंतिम उदगार के रूप में प्रकट भईल बा- अजुओं ओकर कवनों जोड़ ना मिलीं.आपन सर्वस्व उत्सर्ग के बाद भी सीता जी के अपना पति श्रीराम के प्रति अइसन उतकट प्रेम सचमुच अतुलनीय बा.

“इस रे काया पर हल भी चलैंगे खेती करैंगे श्रीराम हो राम.इस रे काया पर दूब जमैंगी गौवें चरावें श्रीराम हो राम..इस रे काया पर गंगा बहैंगी नीर पिलावें श्रीराम हो राम..” सीता की रामजी के प्रति अइसन पवित्र भावना के वजह से ही वाल्मीकि जी “ सीतायाश्च चरितं महत्” के प्रतिष्ठा प्रदान करत बानी.गुरु वशिष्ठ पत्नी अरुंधती बतावत बाड़ी कि-लोपामुद्रा, अनसूया और मैं तीन पतिव्रताएं प्रसिद्ध थी.अब तुम्हें लेकर चार गिनी जायेंगी.

अगर ध्यान से देखल जाये, तब राम जी भी सोता से कम दुर्भाग्यशाली अपना पूरा जीवन में नइखन.छुटपन में ही ऋषि विश्वामित्र के निवेदन पर यज्ञ के रक्षा करें खातिर भेंज दिहल गइलें.विवाह के बाद कभी गृहस्थ जीवन ठीक से ना बीतल.चढ़त जवानी में चौदह वर्ष के उम्र में वनवास के आदेश भईल.वनवास से वापसी के बाद फिर लोकापवाद में सीता के परित्याग करें के पड़ल.अंत समय में अयोध्या के गुपतार घाट पर सरजू में जलसमाधि लेबे के पड़ल.एकरा बावजूद रामजी के ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ वाला अउर सीता जी के ‘पतिव्रता’ वाला रूप लोकजीवन में बरकरार बा.विवाह पंचमी के अवसर पर राम- सीता जी के विवाहोत्सव खूब धूमधाम से अयोध्या, जनकपुर अउर यहां तक शिव नगरी काशी में भी पूरा तैयारी के साथ मनावल जात बा.पूरा रश्मोरिवाज के साथ.हर साल एह अगहन पंचमी के अवसर पर कुछ सन्त- भक्त, अयोध्या से राम बारात लेकर आजुओं जनकपुर पहुँचे ला.एह वजह से अयोध्या के जनकपुर से प्रगाढ़ के सांस्कृतिक आज तक कायम बा.सीताधाम के महंत जी एक बार बतावत रहलन कि हाल-हाल तक राजा जनक जवना जमीन पर बईठी के सीता जी के कन्यादान कइलें रहनी, ओकर मालगुजारी वसूल के अयोध्या मंदिर में जात रहें.अब ऊँ परम्परा टूटी गईल बा.ओकरा के फिर से जिंदा करें के जरूरत बा.खाली सरकारी स्तर पर ई काम ना होई.महंत जी बतावत रहनीं कि-अयोध्या अउर जनकपुर के लोगन के मिलजुल के ई प्रयास करें के पड़ीं.वइसे सरकार की ओर से कोशिश अयोध्या से जनकपुर तक बस चलावें के भी भईल रहें.अब पता नइखें चलत कि बस कहां गईल.काशी से काठमांडू तक- विश्वनाथ से पशुपतिनाथ तक सांस्कृतिक एकता बरकरार रहें, एह खातिर भी कइगो सांस्कृतिक कार्यकर्म के घोषणा भारत सरकर की ओर से भईल रहें.बाकि कवनों योजना पर अभी तक कुछ खास काम नइखें हो पावल.खाली घोषणा होकर रहीं गईल बा.फिर भी लोकमन में राम-सीता के प्रति श्रद्धा वइसे बरकार बा.हर साल अगहन के ‘विवाह पंचमी’ के अवसर ऊँ पर प्रकट भी होला.

(मोहन सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर