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Bhojpuri में पढ़ें: का मंतरी से जादा पावरफुल बा IAS अफसर ?

शासन बेवस्था में मंतरी के पद सचिव से ऊपर बा. लेकिन हकीकत में मंतरी निरबल अउर लाचार काहे हो जाले ? हाले में बिहार सरकार के एगो मंतरी कहले रहन कि उनकर हाल अइसन बा कि चपरासी भी बात नइखे सुनत. आखिर कइसे अउर काहें?

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पोरफेसर जनार्दन ठाकुर इलाहाबाद यूनभरसिटी से रिटायर भइला के बाद पटना में रहत रहन. पत्रकार हेमंत हिमकर उनकर इंटरभ्यू खातिर पहुंचले. कैमरा, माइक सेट हो गइल तs सवाल-जबाब के सिलसिला शुरू भइल. हेमंत- शासन बेवस्था में मंतरी के पद सचिव से ऊपर बा. लेकिन हकीकत में मंतरी निरबल अउर लाचार काहे हो जाले ? हाले में बिहार सरकार के एगो मंतरी कहले रहन कि उनकर हाल अइसन बा कि चपरासी भी बात नइखे सुनत. का कवनो सचिव के हैसियत मंतरी से भी ऊपर हो सकेला ? पोरफेसर ठाकुर जबाब देले, शासन बेबस्था में जब मुखमंतरी भा परधानमंतरी शक्तिशाली हो जाला तs ओकर हनक सभ बिभाग में कायम रहेला. अइसे तs बिभाग में मंतरी अउर सचिव के बीच तालमेल बनल रहेला. लेकिन जब हित के टकराव शुरू हो जाला तs मामला बिगड़ जाला. जहां तक सचिव के ताकत के सवाल बा, एकर उत्तर परिस्थिति अउर समय पs निर्भर बा.

का मंतरी से जदा पावरफुल बा IAS ?
हेमंत- कवनो आइएएस अफसर के ताकत कइसे समय अउर परिस्थिति पs निर्भर बा ? पोरफेसर ठाकुर- एह सवाल के जबाब में बिशन नारायण टंडन के कहानी सुनs. बिशन टंडन इलाहाबाद यूनिभरसिटी से इतिहास में एमए कइले रहन. 1951 में आइएएस अफसर बन गइले. यूपी कैडर मिलल. जतने करमठ रहन ओतने हिम्मती भी रहन. 1969 ऊ दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर रहन. उनकर काम के मुस्तैदी के खबर सरकार भिरी पहुंचल. इंदिरा गांधी परधानमंतरी रही. बिशन टंडन के इलाहाबादी सरोकार भी काम आइल. उनका के परधानमंतरी सचिवालय में संयुक्त सचिव बना दिहल गइल. ओह घरी पीएमओ के पीएमएस कहल जात रहे. इलाहाबाद में पढ़ल अउर जवाहर लाल नेहरू के करीबी पीएन हक्सर पीएमएस (प्राइम मिनिस्टर सेक्रेटेरियट) के हेड रहन. हक्सर साहेब भी बिशन टंडन के कबिलियत से बहुत परभावित रहन. बिशन टंडन आपन किताब (पीएमओ डायरी : प्रील्यूड टू द इमरजेंसी) में ओह घरी के बात बिस्तार से लिखले बड़े.

जब संयुक्त सचिव के कलम से बनत रहन राज्यपाल
हेमंत- का बिशन टंडन जी के समय नौकरशाही बहुत मजबूत रहे ? पोरफेसर ठाकुर – ओह घरी टोटल नौकरशाही तS ना लेकिन पीएमएस बहुत शक्तिशाली रहे. पीएमएस के आंगा कैबिनेट सचिवालय भी फीका पड़ गइल रहे. एक बेर इंदिरा गांधी के राज्यपाल के नियुक्ति करे के रहे. एकर फाइल बिशन टंडन डील करत रहन. एक दिन इंदिरा गांधी उनका बोला के कहली, मैंने आपके काम को आसान करते हुए राज्यपाल पद के लिए एक योग्य व्यक्ति को खोजा है. आप एक बार उनसे मिल लें. आगंतुक सज्जन से टंडन जी मिलले. कुछ देर बात बिचार कइले. एकरा बाद परधानमंतरी इंदिरा गांधी के चेम्बर में पहुंचले. बिना कवनो लाग लपेट के सीधे कहले, माफ कीजिएगा मैडम, आपकी पसंद बिल्कुल गलत है. वे सिर्फ आठवीं पास हैं और थोड़ी बहुत शायरी करते हैं. अगर इनको कुछ बनाना है तो पार्टी में भेज दीजिए. इंदिरा गांधी अतना बात सुन के चुप रह गइली. टंडन जी के बात मान के इंदिरा गांधी ओह शायर महोदय के राज्यपाल ना बनवली. एह बात से हेमंत तूं अनुमान लगा सके लs कि कवनो शासक के ईमानदार अउऱ हिम्मती अफसर के केतना जरुरत रहेला. अइसने योग्य अफसर धीर-धीरे एक दिन ताकतवर ब्यूरोक्रेट बन जाला. लेकिन ई ताकत चार दिन के चांदनी हs.

इंदिरा जी के जमाना में IAS बनावत रहन मंतरी के लिस्ट
हेमंत- का बिशन टंडन जी के हैसियत मंतरी अउर राज्यपाल लोग से भी अधिक रहे ? पोरफेसर ठाकुर- प्रत्यक्ष रूप से तs ई संभव ना रहे लेकिन घुमाफिर के अइसने स्थिति रहे. बिशन टंडन के हैसियत समझे खातिर एगो अउरो प्रसंग सुनावत बानी. एक बेर परधानमंतरी इंदिरा गांधी के केबिनेट में फेरबदल करे के रहे. ऊ नाया मंतरीमंडल खातिर बिशन टंडन के खाका तइयार करे के कहली. पीएमओ हो चाहे सीएमओ हो, ओही अफसर के बोलावल जाल जे तेज, बुद्धिमान अउर निष्ठावान होखे. ई अफसर लोग परधानमंतरी भा मुखमंतरी के आंख, कान, नाक कहा ले. पूरा शासन, परशासन अउर मंतरी लोग के कामकाज पs ई अफसर लोग के नजर रहेला. इंदिरा गांधी टंडन जी के मोटामोटी समझा देली कि कइसे केकरा के जोग्य उम्मीदवार मानल जाई. टंडन जी अपना हिसाब से लिस्ट बना के परधानमंतरी के चेम्बर में पहुंचले. इंदिरा गांधी कागज पढ़ के टेबुल पर रख देली. फेन तनी अचरज में कहली, अरे ! आपने तो उनका नाम रखा ही नहीं ?

जब परधानमंतरी के सामने डट गइल अफसर
टंडन जी निडर हो के कहले, क्या रउआ उनका के मंतरी बनाइब ? टंडन जी प्रधानमंत्री सचिवालय में सबसे बड़ अफसर ना रहन. उनकर पोस्ट संयुक्त सचिव के रहे. उनका ऊपर भी अफसर रहन. लेकिन एकरा बादो ऊ सही बात खातिर डट के जबाब देले. लेकिन इंदिरा गांधी टंडन जी के ई बेबाकी से तनी रंज हो गइली. ऊ जोर दे के कहली, कई बार कई फैसलों में राजनीतिक पहलू को भी देखना पड़ता है. ई बात होते रहे कि परधानमंतरी के प्रिंसपल सेकरेटरी पीएन हक्सर चेम्बर में आवे के इजाजत मंगले. हक्सर साहेब के देख के इंदिरा गांधी पूरा बात बतवली. तब हक्सर साहेब कहले, टंडन जी बिल्कुल ठीक कह रहे हैं. अगर इन महाशय को आप मंत्री बनाना चाहती हैं तो फिर नये काबिनेट की बात भूल जाइए. परधानमंतरी भा मुखमंतरी के आगा बहुत कम अफसर के बोले के हिम्मत होखे ला. योग्य अउर ईमानदार अफसर ही अइसन साहस देखा सकेला. लेकिन कबो-कबो इहे खूबी ओकरा खातिर आफत बन जाला.

कड़ुआ सच केकरो ना सोहाय
हेमंत- का टंडन जी बाद में कवनो संकट पड़ गइल रहन ? पोरफेसर जनार्दन ठाकुर- रुतबा अउर रुआब वक्त के आनी जानी हs. टंडन जी 1969 से 1976 तक परधानमंतरी सचिवालय में संयुक्त सचिव रहन. 1974 के बाद से परधानमंत्री इंदिरा गांधी को सोच बदले लागल रहे. शासन में संजय गांधी के दखल शुरू हो गइल रहे. 1975 में इमरजेंसी लागू भइल तs संजय गांधी अउर तकतवर हो गइले. इहां तक के सरकारी फाइल संजय गांधी भिरी जाये लागल. अफसर अउर मंतरी के निरदेश मिले लागल कि ऊ संजय गांधी से सलाह के बाद कवनो फैसला करस. टंडन जी खरा खरा बोले वला आदिमी रहन. ऊ संजय गांधी के दखलंदाजी पs रोक लगावे खातिर इंदिरा गांधी के सलाह देवे लगले. टंडन जी के ई बात मंजूर ना रहे कि ऊ संजय गांधी से सलाह लेवे खातिर उनका भिरी जास. आत्मसम्मान पs आंच आइल त टंडन जी आपन लंबित परमोशन के बात उठा देले. संजय गांधी के बिरोध करे के चलते इंदिरा गांधी टंडन जी से नाराज हो गइली.

अइसे शुरू भइल ढलान
पोरफेसर साहेब के बात जारी रहे. टंडन जी के परमोशन के फाइल बहुत दिन तक अंटकल रहल. लेकिन अंत में सरकार के परमोशन देवे के पड़ल. परमोशन तs हो गइल लेकिन उनकर बदली कला अउर संस्कृति विभाग में कर दिहल गइल. एक दिन इंदिरा गांधी टंडन जी के बोलवली अउर रुष्ट भाव में कहली, आपके खिलाफ बहुत शिकायतें मिल रहीं थीं. कई लोगों ने गंभीर आरोप भी लगाये हैं. आप नये मंत्रालय में जा रहे हैं तो वहां ठीक से काम कीजिएगा. एकरा बाद टंडन जी के पीएमएस से बिदाई हो गइल. 1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी हार गइली. जनता पाटी के सरकार बनल तs मारुति कांड के जांच करे खातिर गुप्ता आयोग के गठन भइल रहे. टंडन जी गुप्ता आयोग के जांच में संजय गांधी के खिलाफ गवाही देले रहन.

वक्त के आनी जानी हs रुतबा अउर रुआब
हेमंत- अंतिम सवाल, का टंडन जी के साहस के कीमत चुकावे के पड़ल ? पोरफेसर जनारदन ठाकुर सांस खींच के कहले, बहुत जादा.1980 में जब इंदिरा गांधी दोबारा जीत के अइली तब ले उनकर खुनन्स उर बढ़ गइल रहे. टंडन जी के मूल कैडर में यूपी भेज दिहल गइल. उनका के राज्य प्रशासनिक अकादमी के डायरेक्ट बना के संट कर दिहल गइल. एतने ना परधानमंतरी सचिवालय से यूपी सरकार के लिखित आदेश दिहल गइल कि आइएएस अधिकारी बिशन टंडन के कवनो परमोशन मत दिहल जाव. एह प्रताड़ना से ऊब के टंडन जी 1983 में भीआरएस लेले. जब ऊ भीआरएस के दरखास देले रहन ओह घरी यूपी के मुखमंतरी श्रीपति मिश्र रहन. ऊ टंडन जी के काबिलियत से बाकिफ रहन लेकिन आलाकमान के दबाव में उनका दरखास मंजूर करेके पड़ल. एही से कह रहल बानी कि ई समय समय के बात हs कि के कमजोर बा अउर के ताकतवर बा. अतने पs इंटरभ्यू खतम हो गइल. (अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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