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Bhojpuri Spl: लालू के लाल तेजप्रताप का बंसुरी खातिर काट दिहें बंसवार?

बिहार पंचायत चुनाव (Bihar Panchayat Chunaw) के लेके सरगर्मी तेज बा. एह बीच लालू के लाल तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) अपने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अउर राजद (RJD) के बड़ नेता में शुमार जगदानंद सिंह (Jagada Nand Singh) पर भड़क गइलें. आखिर का मामला बा? पढ़ीं...

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बिहार में पंचायत चुनाव के सुगबुगाहट बढ़ला के बाद गांव में राजनीति के जोड़- घटाव शुरू हो गइल बा. कवना गांव में केकर केतना भोट बा, लोग इहे हिसाब-किताब में बाझल बाड़े. टुनटुन मुखिया के दलान पs दुपहरिया में ताश मंडली जमा रहे. भोलानाथ ताश के गड्डी फेंटत-फेंटत राजाराम देने देख के कहले, देखिहs पत्ती मत चिन्हे लगिहs. दीनानाथ अउर कौशल हंस के कहले, ना, ना खेल एकदम पाक्का होई. मुखिया जी एहिजे नू बाड़े. टुनटुन मुखिया कहले, खेल होखे भा राजनीति, जीत-हार तs लागल रहेला. लेकिन कवनो खेल ईमानदारिये से खेले के चाहीं. राजनीत के खेल में दांव-पेंच अधिका होखे ला, ऐह से समझबूझ के तनी बेसी जरूरत पड़ेला. अगर समझदारी ना रही तs बनलो खेल बिगड़ सकेला. देख लs, राजद के का हाल भइल बा. तेजपरताप बंसुरी खातिर बंसवार काटे पs तूलल बाड़े.

बेर बेर एक्के गलती !
दीनानाथ पोलटिक्स के मास्टर रहन. अखबार में देश-विदेश के खबर छान मारत रहन. दीनानाथ कहले, लालू जी के बिना राजद के हाल बेहाल बा. जइसे बिना माथ मालिक के घर में मनमानी शुरू हो जाला वइसहीं राजद में हो रहल बा. लालूजी जेल में बाड़े एह से पाटी में जब ना तब खूर-खार होखे लागत बा. तेजपरताप रह-रह के एक्के गलती दोहरा रहल बाड़े. जगतानंद सिंह लालूजी के जोड़ा-पारी के हवें. भला बतावs जगता बाबू जइसन सीनियर नेता तेजपरताप के स्वागत में दुआरी पs खाड़ा रही ? लागत रहे कि तेजपरताप जगता बाबू के बेइजज्ते करे खातिर राजद के औफिस में गइल रहन. मीडिया के पहिलहीं बोला के अइसन इंतजाम कइल गइल रहे कि जगता बाबू के ई बेइज्जती सबके मालूम हो जाए. तेजपरताप सब कोई सामने खुलम्मखुल्ला कह देले कि जगतानंद जइसन लोगन के चलते राजद बरबाद हो रहल बा. तीन-चार महीना पहिले अइसहीं रघुबंस बाबू के भी बेइज्जती कइले रहन. तेजपरताप के ई रवइया से राजद के सीनियर नेता बहुत चिंता में बाड़े.

आत्मसम्मान गिरवी राख के कइसे राजनीत होई ?
टुनटुन मुखिया कहले, रीजनल पार्टी के साथे इहे दिक्कत बा. जे पार्टी के बनवलस ओकरे दम पs ओकर भविष्य टिकल रहेला. ऊ नेता आपन दबदबा कायम राखे खातिर कवनो दोसर नेता पनपे ना देला. ओकरा बराबर कवनो दोसर नेता तइयार ना हो पावे ले. बाद में इहे नीति पार्टी खातिर काल हो जाला. जब पार्टी के अस्थापना करे वला नेता कवनो अफतरा में पड़ जाला तs ओकरा के सम्हारे वला केहू ना रहे. नेता के परिवार के लोग पार्टी के अपना पाकिट में समझे लागे ला. नवीन पटनायक अपवाद बाड़े. बाकी देख लs कि तृणमूल, अन्नाद्रमुक, समाजवादी पार्टी के का हाल बा. चर्चा बा कि ममता बनर्जी आपन भतीजा अभिषेक बनर्जी के चलते परेशान बाड़ी. अभिषेक बनर्जी पs भी आरोप बा कि ऊ पार्टी के सीनियर लीडर के बेइज्जत करे ले. एकरे चलते चुनाव के पहिले तृणमूल में भगदड़ मचल बा. अगर तेजपरताप के इहे रवइया रही तs राजद में भी गदर मच सकेला. केहू आपन आत्मसम्मान गिरवी राख के कय दिन राजनीति करी ? सोच लs कि अगर लालूजी अउर नीतीश जी आजो एक्के साथे रहिते तs का कोई इनका लोग के हरा सकत रहे ? लेकिन मान -प्रतिष्ठा पs आंच आइल तs नीतीशो जी लालूजी से अलगा हो गइल रहन. सत्ता आज राजद खातिर सपना हो गइल बा.

एक आदिमी के सेना के इहे हाल
राजाराम पूछले, अगर पार्टी के संस्थापक नेता थाक जाई तs का हो सकेला ? टुनटन मुखिया कहले, भिरिये य़ूपी में देख लs. मोलायम सिंह जादव अपना दम पs समाजवादी पार्टी के कहां से कहां ले गइले. मुख्यमंत्री बनले. रक्षा मंत्री बनले. लेकिन जइसहीं मोलायम सिंह थाक गइले, पार्टी में उठा-पटक शुरू हो गइल. अखिलेश जादव अउर शिवपाल जादव लड़-भिड़ के पार्टी के बराबद कर देले. ‘एक आदमी के सेना’ के इहे हाल होखे ला. सेनापति थउसले, पार्टी थउस गइल. जब ले जयललिता रही, अन्नाद्रमुक के तमिलनाडु में बोलबाला रहे. 2016 के बिधानसभा चुनाव में जीत के जयललिता सरकार बनवली. चुनाव के पांच महीना बाद जब उनकर देहांत हो गइल तs अन्नाद्रमुक के हाल डूबल जहाज जइसन हो गइल. तीन साल के बाद जब लोकसभा के चुनाव भइल तs अन्नाद्रमुक के किला माटी के भीत अइसन भराभरा गइल. सरकार रहला के बादो 39 सीट में से एक्के पs जीत मिलल. एक आदिमी के करिश्मा पs कय दिन पार्टी चली ?

अपने गोड़ पs अपने से मरले कुदारी !
कौशल कहले, लालूजी समाजवादी बिचार के नेता हवें. बिहार में लोकदल अउर जनता दल, समाजवादी धारा के आगा बढ़वलस. पहिले लोकदल में कर्पूरी ठाकुर, गजेनदर नारायण हिमांशु, हिंदकेसरी जादव, अनूप लाल जादव जइसन तपल- तपावल नेता रहन. पार्टी संगठन के आधार पs चलत रहे. राह देखावे खातिर लोहिया-जेपी के सिद्धांत रहे. मनमानी के कवनो गुंजाइश ना रहे. मिल-बिचार के फैसला होत रहे. एक नेता के जगह लेवे के खातिर दोसर नेता सक्षम रहे. लेकिन राजद में अइसन कुछउओ निइखे. 1997 में लालू जी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहन. ओह घरी चारा घोटला में नांव आइला के चलते उनका के अध्यक्ष पद छोड़े के कहल गइल. लेकिन लालूजी तइयार ना भइले.

1997 में जब शरद यादव के खाड़ा कर के जनता दल अध्यक्ष चुने के तइयारी होखे लागल तs लालूजी अनराज हो गइले. जुलाई 1997 में ऊ जनता दल तूर के आपन नाया पार्टी (राजद) बना लेले. जगतानंद सिंह शुरूए से लालूजी के साथे बाड़े. जगता बाबू नियम-कैदा से चले वला नेता हवें. 2010 के बिधानसभा चुनाव में उनकर लइका सुधाकर सिंह भाजपा के टिकट पs चुनाव लड़ले रहन. लेकिन जगता बाबू अपना बेटा के हरावे खातिर मोरचा खोल देले रहन. ऊ अपना बेटा के हरवाइये के दम लेले. कम बोले ले लेकिन नाप-तउल के बोले ले. लालूजी खुद्दे उनकर इज्जत करे ले. लेकिन कवना गती-मती से तेजपरताप उनका खिलाफ एतना बड़ बात बोल देले. ई तs उहे बात हो गइल जइसे कि केहू अपना गोड़ पs अपने से कुदारी मरला लेवे. (लेखक अशोक कुमार शर्मा जी वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)

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