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Bhojpuri आंदोलन से जुड़ल घनश्याम शुक्ल के याद करते जनवादी लेखक संघ बिहार के अध्यक्ष प्रोफेसर नीरज सिंह

Bhojpuri आंदोलन से जुड़ल घनश्याम शुक्ल के याद करते जनवादी लेखक संघ बिहार के अध्यक्ष प्रोफेसर नीरज सिंह

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आखर परिवार के अभिभावक आ कुशल नेतृत्वकर्त्ता आदरणीय घनश्याम शुक्ल जी के निधन ना खाली पंजवार आ आखर परिवार खातिर बलुक सउंसे भोजपुरी आंदोलन खातिर संचहूं के बहुत दुखद समाचार बा. हम उहांके बहुत दुखी मन से आपन विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहल बानी.

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शुक्ल जी समाजवादी विचारधारा के प्रति आजीवन समर्पित रहीं. उहांके सन 1974 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के नेतृत्व में शुरू भइल महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी के समाप्ति आ रोजगारपरक शिक्षा नीति के मांग के साथ शुरू भइल आ अंततः तानाशाही विरोधी सम्पूर्ण क्रांति में तब्दील सत्ता परिवर्तनकारी आंदोलन के एगो समर्पित कार्यकर्ता रहीं. ओह आन्दोलन के समाप्ति के बादो उहाँके अपना आसपास एगो सुखी, समरस आ प्रगतिशील समाज के निर्माण के सपना के जमीन पर उतारे खातिर आजीवन प्रयासरत रहनी हां. जयप्रभा महाविद्यालय ,कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पं. बिस्मिल्ला खान संगीत विद्यालय आ एम .सी. मैरीकॉम खेल अकादमी जइसन परिकल्पना के साकार कइल उहें जइसन क्रांतिकारी सोच राखे वाला ऋषितुल्य समाजकर्मी के बस के बात रहल हा . आज पंजवार के लइकी सभ अगर हॉकी जइसन खेल में आपन विशिष्ट पहचान बनावे के दिशा में तेजी से अग्रसर बाड़ीस , त निश्चित रूप से ओकरा पीछे शुक्ल जी आ उहाँके आपन आदर्श मानके पूर्ण समर्पित भाव से उहाँके साथे चलेवाला भाई संजय सिंह जइसन मनस्वी युवा लोगन के ही संकल्प आ साधना बा .

सन 2014 में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग के अध्यक्ष नियुक्त भइला के बाद हमार भोजपुरी आंदोलन के साथे सक्रिय जुड़ाव भइल . कुछ ही समय के बाद हमरा मॉरीशस यात्रा के सुअवसर भी मिलल जहवां बहुत से भोजपुरी सेवी लोगन से भेंट भइल. ओहि घरी से हम भोजपुरी भाषा आ साहित्य के विकास खातिर सक्रिय तमाम संस्थन के गतिविधियन से भी जुड़नी . फेसबुक प नवीन जी , संजय जी , देवेंद्र जी आदि लोगन के पोस्ट के माध्यम से आखर आ भोजपुरिया स्वाभिमान आंदोलन के जाने के मौका मिलल . कुछ दिन तक हम आखर के व्हाट्सएप ग्रुप से भी जुडल रहनी . ओहि क्रम में छपरा में पंचमेल के स्थापना सम्मेलन में भाग लेबे के हमरा अवसर मिलल .ओहिजा हमार भेंट पंजवार आ आखर के भोजपुरिया स्वाभिमान आंदोलन के चर्चित नाम भाई संजय सिंह जी से भइल . हम उहाँके पंजवार के अश्लीलता मुक्त भोजपुरी आंदोलन के बरियार केंद्र बनावे खातिर बहुत उत्साहपूर्वक बधाई दिहनी त उहाँके आपन बड़प्पन देखावत बहुत विनम्रतापूर्वक ई श्रेय अकेले लेबे से इनकार कइनी आ आखर के उपलब्धि के अपना गुरुजी आदरणीय घनश्याम शुक्ला जी के नेतृत्व में अनुकरणीय टीम भावना के साथे कइल गइल काम के परिणाम बतावनी . फेर उहाँके विस्तार से शुक्ल जी के बारे में बतावनी . जवन उहाँके ओह घरी हमरा के बतवले रहीं , आज मोटामोटी सभ केहुये जानत बा , एह से हम ओकरा के दोहराइब ना . हं , ई जरूर कहब कि अपना गुरुजी से पहिले पहिल हमरा के संजय जी ही परिचय करवले रहीं . तबहूँओ ऊ शुक्ल जी से हमार प्रत्यक्ष परिचय ना रहे .

आदरणीय शुक्ल जी से प्रत्यक्ष परिचय के सुयोग हमरा आरा में ही उपलब्ध भइल . भइल ई कि सम्प्रति कैलिफोर्निया, अमेरिका में रहेवाली भोजपुरी के प्रख्यात आरानिवासी लोकगायिका स्वस्ति पांडेय के आरा आगमन के उपलक्ष्य में उनकरा सम्मान में सुप्रसिद्ध आरा नागरी प्रचारिणी सभा के सभागार में एगो दू घंटा के कार्यक्रम आयोजित कइल गइल . स्वस्ति हमार गुरुजी आ पूर्व सहयोगी स्व. डॉ कपिलदेव पांडेय जी के सुपुत्री हई आ हमार शिष्या भी हई . खैर , ओह कार्यक्रम में हमहूँ आमंत्रित रहीं . गइल भी रहीं . ओहि कार्यक्रम में शुक्ल जी से हमार पहिला बेर प्रत्यक्ष भेंट भइल . संयोग से ई मुलाकात भी संजय सिंह जी ही करववनी . ओकरा बाद हमनी के संगहिं बइठ के सउँसे कार्यक्रम देखनी जा . अंत में आयोजक लोग के तरफ से हम आ साहित्यकार – मित्र भाई जितेंद्र कुमार जी आदरणीय घनश्याम शुक्ल जी समेत तमाम विशिष्ट आमंत्रित लोगन के अंगवस्त्र देके सम्मानित भी कइनी जा. साथे बइठे के दौरान हमनी के जेपी आंदोलन में.अपना भागीदारी आ सक्रियता के जानकारी एक – दूसरा से साझा कइनी जा . ई एगो बहुते सुखद सुअवसर रहे हमरा खातिर . शुक्ल जी के सहज – सादगीपूर्ण स्नेहिल व्यवहार आ ओह दिन उहाँके के संक्षिप्त संग – साथ एगो अविस्मरणीय अनुभव बन गइल रहे .

शुक्ल जी से हमार दोसरका भेंट सन 2019 में पंजवार में ही भइल रहे . अवसर रहे देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी के जयंती प आयोजित दू दिवसीय भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के . हम ओहदिन लगभग समय से पंजवार पहुँचल रहीं . आयोजन – स्थल पर ओह घरी ले कवनो खास भीड़ ना रहे बाकिर लोगन के आवे के सिलसिला शुरू हो गइल रहे . गाड़ी से उतरते हम परिचित आयोजक लोग के खोजे के सुरुये कइले रहीं कि आगे बढ़ के शुक्ल जी हमरा के अंकवारि में भर लेहनी . उहाँके ऊ गर्मजोशी ताजिनगी भुलाये के चीज नइखे . फेर त कहवां उठाईं , कहवां बइठाईं आ ओहि में उपस्थित लोगन से भेंट करवावे के सिलसिला . गहिर आत्मीयता से सराबोर ओह आतिथ्य भावना के तत्परता के अंत तबे भइल रहे जब उहाँके हमरा के भाई जौहर साफ़ियाबादी जी आ सुजीत सिंह सौरभ के साथे कॉलेज के छत पर चल रहल भोजन के कार्यक्रम में सम्मिलित करवा दिहनी . हम उहाँसे से बेर- बेर अउर अतिथि लोगन के देखे के आग्रह करीं आ उहाँके ई कह के हमरा के चुप करा दिहीं कि ‘ अउर लोग पंजवार पहिलहुँ आवत रहल बा , रउआ पहिला बेर आइल बानी . अगिला बेर आइब त रउआ एह परिवार के सदस्य होके रहब.’ बाकिर ऊ उहाँके के आपन विशिष्ट अंदाज रहे आत्मीयता प्रदर्शन के . जेकरा से भेंटी , ओहितरे गर्मजोशी आ आत्मीयता के साथे भेंटी.

ओहिजा हमरा सम्मेलन के पहिलका दिन के उद्घाटन- सह- विचार गोष्ठी सत्र के अध्यक्षता करे के सौभाग्य मिलल रहे . सम्मेलन के उद्घाटनकर्ता रहीं जय प्रकाश विश्वविद्यालय , छपरा के तत्कालीन विद्वान आ सहृदय कुलपति डॉ. हरिकेश सिंह जी .आचार्य जौहर साफ़ियाबादी के संगे-संगे मंच प भाई डॉ.भगवती प्रसाद द्विवेदी , डॉ. राम नारायण तिवारी,डॉ. प्रकाश उदय , डॉ. प्रमोद कुमार तिवारी सहित बहुत से स्थानीय गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे . कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजन समिति के तरफ से शुक्ल जी अतिथि लोग के भोजपुरिया गमछा अउर फूलमाला पेंहा के बहुते हार्दिकता के साथे स्वागत कइले रहीं आ बहुत प्रभावशाली आ सुलझल अंदाज में अश्लीलता विरोधी भोजपुरिया स्वाभिमान आंदोलन के आरम्भ के पृष्ठभूमि प प्रकाश डलले रहीं . दोसरा सत्र यानी सांझ के सत्र में युवा रचनाकार लोग के कविता पाठ के कार्यक्रम रहे . हमरा ओहि दिन आरा लौट आवे के त रहे बाकिर हम कविता – पाठ वाला कार्यक्रम के आद्यंत सुन के लवटे के मूड में रहीं . पंडाल में बइठले रहीं कि प्रियवर देवेंद्र नाथ तिवारी जी अनुरोधपूर्वक कहलन कि आदरणीय भाई रामनारायण तिवारी जी के हम अपना साथे लेले जयितीं त बहुत बढ़िया रहीत. उहाँके गाजीपुर लवटल जरूरी बा. हं, रउआ शुक्लजी के घर पर भोजन कर के जाये के बा ‘देवेंद्र जी के बात मानके हम अपना कार्यक्रम के संशोधित कर दिहनी आ अपना प्रिय शिष्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह आ भाई साहेब सिंह विजेता जी के साथे आदरणीय शुक्ल जी के घरे गइनी. ओहिजा उहाँके के सपरिवार जतना उत्साह आ सम्मान के साथे हमनी के भोजन करवनी, ऊ भुलाये के चीज नइखे. खइला-पियला के बाद उहाँके जइसन गाढ़-छल्हिगर आ सवदगर सजाव दही भरपेट आग्रहपूर्वक खिअवनी, ओकर कवनो जबाब नइखे . उहाँके बेर-बेर अनदिनों कबहीं पंजवार आवे के कहनी, बाकिर कहां ! कोरोना के आमद भइल आ प्रत्यक्ष मिले -जुले के सभ राह -रास्ता बंद भ गइल. बीच में कभीं संजय जी उहाँसे फोन प परस्पर कुसल-क्षेम जानेवाला संक्षिप्त बातचीत करवले रहीं . ओह दौरान भी उहे जानल – पहचानकल आत्मीयता, स्नेह आ सम्मान के भाव .

संयोग से शुक्ल जी से पिछला 24 अक्टूबर के तनिका देर खातिर मिले के सौभाग्य मिलल रहे . अवसर रहे सिवान जिला भोजपुरी विकास मंडल के अधिवेशन में शामिल होखे के . हमार परम् मित्र मार्कण्डेय दीक्षित के आदेश रहे कि स्मृतिशेष पं अक्षयबर दीक्षित स्मृति – ग्रंथ के लोकार्पण -समारोह में रउआ जरूर आयीं . हम अपना मित्र – साहित्यकार भाई जितेंद्र कुमार जी के साथे ओह आयोजन में शामिल होखे खातिर गइल रहीं . शुक्ल जी ओह कार्यक्रम में कुछ देर खातिर आइल रहनी . तब हमरा उहाँके असाध्य बीमारी के बारे में पता भी ना रहे . बस , उहाँसे संक्षिप्त हाल – चाल भइल . हम ना जानत रहीं कि उहाँसे आखिरी बार भेंट हो रहल बा .

आदरणीय घनश्याम शुक्ल जी एगो क्रांतिकारी युगपुरुष रहनी हां . बिहार के ग्रामीण समाज में जहां भांति – भांति के विकृति पनप रहल बाड़ीस, जाति – धर्म आ क्षेत्र के आधार पर सामाजिक विघटन के प्रक्रिया चल रहल बा , ओहिजा देश आ समाज के शिक्षा आ संस्कृति के प्रसार के माध्यम से जोड़े के सकारात्मक प्रयास करेवाला शुक्ल जी जइसन इक्का – दुक्का क्रांतिकारी साधक व्यक्तित्व नदी के द्वीप के समान कहीं – कहीं दिखलाई पड़ रहल बाड़न . शहनाई के जादूगर भारतरत्न पं . बिस्मिला खान के जन्मस्थली डुमरांव आ कर्मस्थली काशी में उनकरा नाम प कवनो संस्था के स्थापना भइल बा कि ना, हमरा एकर जानकारी नइखे , बाकिर पंजवार में उहाँके नाम पर संगीत विद्यालय के स्थापना शुक्ल जी कइले बानी . असहीं महान महिला मुक्केबाज एम. सी .मेरीकॉम के नाम प बिहार के एगो लगभग अनाम – अनजान गांव पंजवार में बिना कवनो सरकारी सहयोग के खेल अकादमी के स्थापना होई , ई बात अशांत सुदूर उत्तर- पूर्व के कवनो आदमी कभी सोचलहुँ ना होई . जेपी के नाम प सिताबदियारा , छपरा आ पटना में राष्ट्रीय – अंतराष्ट्रीय स्तर के संस्थानन के स्थापना जरूर बहुत महत्त्वपूर्ण कहल जाई बाकिर पंजवार में जयप्रभा महाविद्यालय के सामाजिक सहयोग से स्थापना संचहूँ के ऐतिहासिक महत्त्व के कार्य कहल जाई . निश्चित रूप से ई सब कार्य आ संस्थन के चलते शुक्ल जी हमेशा इयाद कइल जाइब.

स्मृतिशेष घनश्याम शुक्ल जी अपना सकारात्मक, धर्मनिरपेक्ष आ सुस्पष्ट समाजवादी-राष्ट्रवादी सोच आ साधना के बल पर एगो प्रेरणादायक व्यक्तित्व आ कर्मवीर युगपुरूष के रूप में आवेवाली पीढियन के स्मृति में हमेशा बनल रहब. उहाँके स्मृति के बेर-बेर सादर नमन आ अश्रुपूरित श्रद्धांजलि.

(देवकुमार पुखराज वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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