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Bhojpuri: एक औरत के आंसू पर खड़ा हौ दुनिया क अनोखा जौनपुर क शाही पुल, पढ़ीं कहानी

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आदि गंगा के नावे से मशहूर गोमती नदी पर जौनपुर में मौजूद शाही पुल अपने रूप-रंग अउर खासियत के नाते पूरी दुनिया में अनोखा हौ। इ दुनिया क पहिला पुल हौ, जवने क ऊंचाई जमीनी के बराबर में हौ। सन् 1564 ईस्वी में बनल इ पुल आजतक चालू हौ। केतना बाढ़-तूफान आइल-गइल, लेकिन पुले के मजबूती पर कवनों असर नाहीं पड़ल।

  • News18Hindi
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शाही पुले क चउड़ाई 26 फुट हौ, अउर एकरे दूनों तरफ दुइ फुट तीन इंच चउड़ा मुड़ेर बनल हौ। पुले के दुइ ताखन के जोड़े पर गोमटी बनल हइन। पहिले एह कुल गोमटिन में दुकान लगय। पुले के बीचों बीच एक ठे चउतरा हौ, जवने पर शेरे क एक ठे बड़ी क प्रतिमा बनल बा, जवने क अगली दूनों टांग एक ठे हाथी के पीठी पर हौ। प्रतिमा एतना सुंदर हौ कि लोग देखय आवयलन। इ पुल जौनपुर शहर क शान हौ।

एतना मजबूत अउर एतना सुंदर पुल आखिर बनल कइसे? एकरे पीछे एक ठे बहुत रोचक, मार्मिक अउर प्रेरक कहानी हौ। शाही पुल क निर्माण दरअसल दिल्ली क बादशाह अकबर करउले रहल। पुले क डिजाइन अफगानी वास्तुकार अफजल अली तइयार कइले रहल। एक दइयां अकबर बादशाह अपने लाव लश्कर के साथे जौनपुर आयल रहल। अकबर इहां शाही किला में ठहरल रहल। एक दिना संझा के उ गोमती नदी में नौका विहार करय गयल। उहां देखलस कि नदी के किनारे एक ठे औरत चदरा में मुंह चोराइ के रोअत हौ। अकबर बादशाह में मानवीय संवेदना कूटि कूटि के भरल रहल। उ औरत के पास गयल अउर रोवय क कारण पूछलस। औरत बतउलस कि उ नदी के ओह पार से सूत बेचय एह पार आइल रहल। लउटय में संझा होइ गइल अउर नाव वाला देर भइले के नाते चलि गयल। घरे में नान्ह-नान्ह दुइ ठे लड़िका अकेलय हयन, उ का करत होइहय, का खइहय, कइसे रहिअय? इहय कुल सोचि के रहि नाहीं जात हौ, अउर रोआई आवत हौ। अकबर औरत क दुख सुनि के तुरंत ओहके अपने नावे में बइठइलस अउर नदी ओह पार छोड़ि देहलस। एकरे साथ ही उ दीन-दुखियन बदे नदी में नाव क प्रबंध करय क आदेश भी देइ देहलस। एही ठिअन अकबर के गोमती पर पुल बनवावय क प्रेरणा मिलल। एक औरत क आंसू शाही पुल क बुनियाद बनि गयल।

अकबर अपने प्रधानमंत्री अउर जौनपुर के सुबेदार मुनईन खान खाना के आदेश देहलस कि गोमती नदी पर एक ठे पुल बनावल जाय, ताकि नदी के दूनों तरफ क लोग नदी के आर-पार आसानी से आइ जाइ सकय। अकबर क आदेश रहल कि पुल एतना मजबूत रहय कि एकर मौजूदगी कयामत तक रहय। बादशाह के आदेश पर पुल क निर्माण शुरू भयल। लेकिन इ पुल बनाइब एतना आसान नाहीं रहल। जवने जगहे पुल बनय के रहल, उहां नदी में पानी बहुत रहल, अउर ओही ठिअन एक ठे कुंड रहल, जवने के गहराई के बारे में केहूं के पता नाहीं रहल। अइसन परिस्थिति में नदी क बहाव मोड़य क फैसला भयल। पहिले पांच ताखा क दक्षिणी पुल बनाइ के गोमती के ओह तरफ मोड़ि देहल गयल। एकरे बाद 10 ताखा क पुल बनल, जवने के नीचे आज नदी बहत हौ।

शाही पुल के बनावय में सुंदरता अउर मजबूती, दूनों क बहुत ध्यान रखल गयल हौ। एह पुले पर 28 गोमटी बनल हइन, जवने के नाते पुले के सुंदरता में चार चांद लगि गयल हौ। पांच ताखा वाले दक्षिणी पुले क लंबाई 176 फुट अउर उत्तरी 10 ताखा वाले पुले क लंबाई 353 फुट हौ। इ दुनिया क पहिला पुल हौ, जवने के सतह क ऊंचाई जमीन के बराबर में हौ। एह पुले के बहुत साल बाद अइसय एक ठे पुल लंदन में 1810 में बनल, जवने के वाटर लू के नावे से जानल जाला। शाही पुल के बनवावय में तीन-चार चाल क समय लगल रहल, अउर एहपर ओह जमाने में लगभग 30 लाख रुपिया क खर्चा आयल रहल। पुल जब बनय शुरू भयल रहल, तब एक ठे पत्थर लगावल गयल, जवने पर फारसी में पुले के शुरुआत क तारीख 1564 ईस्वी लिखल हौ, अउर जब पूरा पुल बनि के तइयार होइ गयल तब पुले के करेसी बजार वाले छोर पर एक पत्थर लगावल गयल, जवने पर फारसी में पुल के पूरा होवय क साल 1568 ईस्वी लिखल गयल। इ दूनों पत्थर अबही भी मौजूद हयन।

शाही पुल के बनावय में ओह समय पत्थर अउर सीसा क जादा इस्तेमाल कयल गयल रहल। जवने के नाते इ पुल आजतक अखम बनल हौ। केतना बार भयानक बाढ़ आइल, पूरा पुल पानी में कई दिना तक डूबल रहल, लेकिन एकरे मजबूती पर कवनो असर नाहीं पड़ल। आज जब साल भर-छह महीना पहिले क बनल पुल बरसात के पानी में बहि जात हयन, त इ शाही पुल अपने बुढ़ाई में भी अइसन पुलन के हाल पर, अउर अइसन पुल बनावय वालन पर ठहाका लगाइ के हंसयला, अउर ताल ठोकि के चुनौती भी देला कि हमरे नियर मजबूत बनि के देखावा त जानी। जौनपुर क इ शाही पुल वाकई देश-दुनिया के पुलन क शहंशाह हौ।

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं। आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं)

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