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Bhojpuri: जातीय जनगणना पर लालू फैक्टर के चलते आक्रामक भइल जदयू, अब आगे का?

सामाजिक न्याय के लाली देखत-देखत मुखमंतरी नीतीश कुमार भी लाल हो गइले. तब्बे नूं जातीय जनगणना के सवाल पs धुर विरोधी तेजस्वी के रंग में रंग गइले. सामाजिक न्याय के लालिमा में रंगल नीतीश कुमार के भाव-भंगिमा देख के भाजपा के लोग चिंता में पड़ गइल बाड़े.

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लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल, लाली देखन में गयी, मैं भी हो गयी लाल . आकाशदीप भोरे-भोरे किताब निकाल के संत कबीर के दोहा रटत रहन. मास्टर बिसम्भरनाथ के घरे भोरे पढ़े के पुरान परिपाटी आजो कायम रहे. हां, अब ललटेन के बदले बिजली के बौल जरे लागल बा. बिसम्भरनाथ शिक्षक रहन . ऊहो फजिरे नित्यक्रिया से निबरित होके गाय के गवत देत रहन. आकाशदीप के दोहा सुन के बिसम्भरनाथ मने मन सोंचले लगले, कबीर दास की जे के कबिता के रहस्यवाद आज राजनीतो में देखाई पड़ रहल बा. ‘मैं भी हो गयी लाल’ के मतलब का बा ? अदृश्य शक्ति के देखत -देखत मन ओकरे में विलीन हो जाला. मौजूदा राजनीति के हाल तs अइसने बुझाता. सामाजिक न्याय के लाली देखत-देखत मुखमंतरी नीतीश कुमार भी लाल हो गइले. तब्बे नूं जातीय जनगणना के सवाल पs धुर विरोधी तेजस्वी के रंग में रंग गइले. सामाजिक न्याय के लालिमा में रंगल नीतीश कुमार के भाव-भंगिमा देख के भाजपा के लोग चिंता में पड़ गइल बाड़े.

लालू फैक्टर के चलते जदयू भइल आक्रामक
गाय के सानी-पानी कइला के बाद मास्टर बिसम्भरनाथ फुलवारी में घास सोहे लगले. अतने में बेलपत्तर लेवे खातिर बैजनाथ बटोही ऊहां पहुंच गइले. बैजनाथ बटोही पत्र-पत्रिका में कहानी-लिखत रहन. मास्टर साहेब के पक्का संघतिया रहन. बेलपत्तर तूरला के बाद बैजनाथ बोटोही मास्टर बिसम्भरनाथ से बतियावे लगले. कहले, एह घरी तs नीतीश बाबू के राजनीतिक एसटैंड चर्चा में बा. पेगासस जासूसी कांड अउर जातीय जनगणना पर उनकर बिचार भाजपा से बेलकुल अलग बा. अतना सुन के मास्टर बिसम्भरनाथ खुरपी एक देने राख के घास गढ़ल छोड़ देले. कहले, जदयू के राजनीति रुख के केहू अंदाजा ना लगा सके. जातीय जनगणना के मुद्दा पs पहिले नीतीश कुमार अउर तेजस्वी जादव में जुबानी जंग भइल रहे. जब नीतीश बाबू जातीय जनगणना खातिर केन्द्र सरकार से पुनरबिचार करे के अपील कइले तs तेजस्वी एकरा पs कटाक्ष कर देले. तेजस्वी तंज कसले कि केन्द्र सरकार में हिंसदारी के बादो मुखमंतरी जी काहे अनुनय बिनय कर रहल बाड़े ? अगर केन्द्र सरकार उनकर बात ना मानी तs ऊ का करिहें ? तेजस्वी ई बात के भी क्रेडिट लेवे लगले कि उनके मांग पs जातीय जनगणना के प्रस्ताव बिधानसभा से पास भइल रहे. जब जदयू के ई बुझाये लागल कि ई मुद्दा पs राजद लीड ले रहल बा तs उहो मैदान में कूद गइल. लालू फैक्टर के चलते नीतीश कुमार एह मुद्दा पs आक्रामक हो गइले. नीतीश कुमार सामाजिक न्याय के राजनीत में सबसे आगा रहल चाहत बाड़े.

के बा पिछड़ा बर्ग के सबसे बड़ हितैषी ?
बैजनाथ बटोही पूछले, एकर मतलब ई ब कि जातीय जनगणना के आड़ में ई बात के लड़ाई चल रहल बा कि पिछड़ा बर्ग के सबसे बड़ नेता के बा? पिछड़ा वर्ग के सबसे बड़ हितैषी के बा ? एकर जबाब में मास्टर विसम्भरनाथ कहले, राजद होखे भा जदयू , दूनो के मूल आधार पिछड़ा बर्ग के भोटर बाड़े. जदयू के साथे अतिपिछड़ा बर्ग के भोटर बाड़े. मानल जाला कि बिहार में अतिपिछड़ा बर्ग के करीब 25 परसेंट भोटर बाड़े. चुनावी राजनीत में अतना बड़ संख्या के महत्व समझल जा सकेला. 2016 में पंचाइत चुनाव खातिर अतिपिछड़ा बर्ग के 127 जाति के सूची निकलल रहे. एकरा में कई जाति के लोग के ना के बराबर चर्चा होखे ला. अब जइसे पहिरा, सोता सीकलगर, ईटफरोश, रिसिया जइसन जाति के लोग कवना हाल में बाड़े एकर बेलकुल जानकारी नइखे. जदयू के कहनाम बा कि अगर पिछड़ा बर्ग के सभी जाति के लोग के गिनती हो जाई तs कल्याणकारी जोजना बनावे में सहूलियत होई. चर्चा ई बा कि जदयू को लोग ई जानल चाहते बाड़े कि अतिपिछड़ी जाति के वास्विक जनसंख्या का बा ? पिछड़ी जाति में जादव समुदाय अउर गैरजादव समुदाय के आबादी के अनुपात का बा ? अगर ई जनसंख्या मालूम हो जाई तs राजद के खिलाफ चुनावी रणनीति बनावे में आसान हो जाई. ऐह से जदयू जातीय जमगणना खातिर बढ़ चढ़ के मांग कर रहल बा. ओकरा भाजपा का ना, आपन राजनीत के चिंता बा.

तब बदल जाई राजनीत के पूरा हुलिया
मास्टर बिसम्भरनाथ अउर बैजनाथ बटोही बतियावत-बतियावत फुलवारी से दलान पs आ गइले. बैजनाथ बटोही पूछले, का जदयू अउर राजद में फेन मेल हो सकेला ? बिसम्भरनाथ कहले, जातीय जनगणना के मांग जोर पकड़ रहल बा. अब तs भाजपा के नेता भी एकर मांग करे लागल बाड़े. मुजफ्फरपुर के भाजपा सांसद अजय निषाद एकर समर्थन कर देले बाड़े. अगर जातीय जनगणना हो गइल अउर एकर रिपोट जारी हो गइल तs समझ लs कि भारत के चुनावी राजनीति के पूरा हुलिया बदल जाई. तब केकर जरूरत होई अउर केकर ना, ई सब जातीय जनसंख्या पs निर्भर करी. कवन जाति के काट में कवन जातीय गठबंधन बनी, ई अबहीं ना कहल जा सकेला. एह से ई कहल जल्दबाजी होई कि नीतीश कुमार अउर लालू जादव में मेल हो जाई. अभी तs केन्द्र सरकार पs दाबव बनावे खातिर राजद-जदयू में मिलाप भइल बा. अगर नीतीश कुमार सरकार के खर्चा पs बिहार में जातीय जनगणना करा देले तs पिछड़ा के मसीहा के नाया तस्वीर बन जाई. तब का नीतीश बाबू के कवनो मदद के दरकार रही ?

का होई बिहार में ?
बैजनाथ बटोही फेन सवाल दगले. कहले, अगर मान लीं कि केन्द्र सरकार नीतीश कुमार के प्रस्ताव ठुकरा दिही अउर बिहार में पूरा बिपक्ष जदयू के समर्थन में आ जाई, तs का होई ? मास्टर बिसम्भरनाथ कहले, राजनीत में कवनो चीज असंभव नइखे. लेकिन बहुत कम संभावना बा कि जदयू राजद के साथे सरकार बनावे. अगर नीतीश कुमार राजद संगे सरकार बना लिहें तs ई बात प्रमाणित हो जाई कि 2017 में ऊ सामाजिक न्याय आंदोलन के साथे धोखा कइले रहन. सवाल उठे लागी कि अब भ्रष्टाचार के आरोपी के साथे ऊ कइसे सरकार बना ले ले ? ई कइला से नीतीश बाबू के साख धूमिल हो जाई. दोसर बात ई बा कि ऊ गठबंधन के बादो सरकार चलावे में केहू के दखल पसंद ना करे ले. कहल जाला कि 2017 में लालू जादव के रोज-रोज के हस्तक्षेप से ऊबिया के हीं ऊ आपन रास्ता बदल ले ले रहन. जहां तक हमार भरोसा बा, नीतीश कुमार अपना साख से कबो समझौता ना कर सकेले. काठ के हांड़ी दोहरिया के आग पs ना चढ़ी. बतकही में बैजनाथ बटोली के देर होखे लागल. अतने में उनक लइका पहुंच के कहले, बाबूजी घरे चलीं, माई पूजा करे खातिर बेलपत्तर मांग रहल बाड़ी. (अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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