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Bhojpuri में पढ़ें- आईं जानल जाउ जुलाई में ग्रह गोचर का बा

Bhojpuri में पढ़ें- आईं जानल जाउ जुलाई में ग्रह गोचर का बा

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जुलाई, ग्रह गोचर का हिसाब से बहुते महत्व वाला महीना बा. शनि वक्री बाड़न आ वक्री होत- होत मकर राशि में चलि जइहन. बुद्धि- विचार आ वाणी के ग्रह बुध मिथुन राशि में चलि जइहें आ एही महीना में शुक्र भी वृष राशि छोड़ि के मिथुन राशि में आ जइहें. त बा नू ध्यान देबे वाला बात? 

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बुध 2 जुलाई के सबेरहीं मिथुन राशि में प्रवेश करिहें आ शुक्र 13 जुलाई के मिथुन में जइहें माने बुध आ शुक्र के युति भइला में 11 दिन के अंतर बा बाकिर बुध मिथुन में 17 जुलाई के कर्क में चलि जइहें. त ई युति थोरहीं दिन के रही. आईं एकरा के विस्तार से देखल जाउ कि कौन ग्रह कहां जाता आ ओकर प्रभाव का परी.

मिथुन राशि में बुध 17 जुलाई ले रहिहें. एकरा बाद बुध महाराज कर्क राशि में ढुकि जइहें. रउवां सब जानते बानी कि मिथुन राशि के स्वामी बुध हउवन. बुध के ई खूबी ह कि ऊ बड़ा जल्दी फल देलन. त मिथुन राशि आ धनु राशि वाला लोगन के बहुत अच्छा फल मिली. मिथुन राशि के जदि केहू लेखक बा आ कौनो किताब लिखे के सोचता त इहे ऊ समय बा जब ओकरा किताब लिख देबे के चाहीं. अब आईं शुक्र महाराज पर.

ऊपर  लिखिए दिहल बा कि मिथुन राशि में शुक्र 13 जुलाई के आवतारे. कतना दिन खातिर? त 23 दिन खातिर. शुक्र के ज्योतिष में ऐशो आराम के ग्रह मानल जाला. एकरा पहिले शुक्र प्रधान लोग नया- नया जगह जाए के सोची. कुछ लोग पहाड़ भा समुद्र वाली जगह पर जा भी सकेला. जे घरहीं परमानेंट रहता ओकरो कहीं अच्छा जगह जाए के मिली भा कौनो अइसन आदमी से भेंट होई कि मन प्रसन्न हो जाई. अब आईं ग्रह लोगन में राजा के पदवी वाला सूर्य महाराज पर.
सूर्य भा रवि महाराज के कर्क राशि में गोचर 16 जुलाई के रात खान होता.

पंचांग का कहता? कि 16 जुलाई के रात 11 बजि के 10 मिनट पर सूर्य कर्क राशि में ढुकतारे आ ओइजा 17 अगस्त 2022 तक ले बिराजमान रहिहें. कर्क राशि के लोगन खातिर बहुते अच्छा बात बा. बाकिर जेकरा जन्म कुंडली में सूर्य के स्थिति अच्छा नइखे ओकरा रिस्क वाला काम ना करे के चाहीं. काहें से कि बदनामी के डर रहेला.चोरी, पाकेटमारी भा कौनो चीज भुलाए के डर रहेला.

जुलाई में कर्क राशि में बुध ढुकतारे. कब? त 17 जुलाई के बुध 12 रात के करीब मिथुन राशि से निकल के कर्क राशि ढुकि जइहन. कर्क राशि के लोग बातचीत में अचानक पहिले से ज्यादा तर्कबुद्धि वाला हो जाई लोग. जौन काम पहिले से रुकत आइल बा, ओकरा बने के योग बनी. हो सकेला कौनो नया काम करे के विचार मन में उठे. नया काम सफल होई आ ओकरा से बढ़ंती होई. अब आईं शनि महाराज पर.

शनि महाराज के गोचर मकर राशि में गोचर 12 जुलाई के सबेरे करीब साढे 10 बजे होता.  त शनि मकर राशि में आ जइहें. रउवां सब जानते बानी कि शनि एघरी वक्री बाड़न. वक्री का बारे में एगो दोसरा लेख में विस्तार से बतावल जा चुकल बा. त वक्री भइल- भइल शनि एही साल 23 अक्टूबर के मकर राशि में मार्गी होखिहन. अब आईं गुरु महाराज पर. गुरु भा वृहस्पति के ग्रह लोगन के गुरु कहल जाला. जेकरा कुंडली में गुरु नीक जगह पर रहेले ओकरा में बुद्धि, धन आ प्रतिष्ठा के कमी ना रहेला.

जुलाई में ही गुरु मीन राशि में वक्री होतारे.29 जुलाई के रात 1 बजे गुरु मीन राशि में वक्री हो जइहन. अब रउरा दिमाग में ई सवाल उठत होई कि  गुरु मार्गी कब होइहन. काहें से कि जेकर गुरु जन्म कुंडली में गुरु वक्री बाड़े ओकरे गोचर में गुरु के वक्री भइला के लाभ मिली. कौनो डूबल धन मिल जाई. अचानक कहीं से लाभ मिल जाई भा केहू कौनो गिफ्ट दे दी. जदि ई कुल ना होई त रउरा के कहीं खूब स्वादिष्ट भोजन के आमंत्रण मिली. त गुरु भा वृहस्पति 24 नवंबर 2022 के मीन राशि में ही मार्गी हो जइहन. त जेकरा जन्म कुंडली में वृहस्पति बरियार बाड़न, ऊ वक्री भइला के चिंता मत करो. खाली बियफे (वृहस्पतिवार) के दिन पीयर कपड़ा पहिरत रहीं आ पीयर चीज के सेवन करत रहीं.

ज्योतिष के कुछ नियम फेल हो गइल बाड़े सन. उदाहरण खातिर दू गो नियम दिहल जा रहल बा, जौन फेल बा.
1-  जदि व्यय भाव में गुरु बइठल बाड़न त ऊ जातक हरमेसा अपना दुश्मन लोगन से घेराइल रही, बाकिर जीत ओकरे होई. ओकर दुश्मन कतनो ओकरा के हरावे के कोशिश करिहें, ऊ अपराजित रही. ऊ जातक शत्रु से ही लाभ कमा ली. ओकरा बुद्धि, बल आ चातुर्य के कौनो मोकाबिला ना रही. बाकिर कई जगह ई नियम फेल हो गइल बा. एसे फल बहुत सोच- समझ के करे के चाहीं.

2- कि मकर आ कुंभ लग्न छोड़ि के शुक्र जदि द्वादश भाव में बाड़े त व्यक्ति गुप्त ढंग से व्याभिचार में लिप्त रहेला आ अपना वासना के कारन बदनाम हो जाला. ओकर समाज में कौनो इज्जत ना रहे. ओकरा के बस खराब संगति वाला लोग पसंद करेला. बाकिर देखल गइल बा कि ई राय भी कई मामला में गलत साबित भइल बा. द्वादश भाव में शुक्र वाला लोग अच्छा चरित्र वाला भी मिलल बाड़े. काहें से कि शुभ ग्रह दृष्टि के कारन अशुभ फल कट जाला. त ज्योतिष में कौनो ग्रह कहां बइठल बा, एकरा पर फल ना कहे के चाहीं. ओह ग्रह के नक्षत्र आ उप नक्षत्र के स्थान के जांच भी कइल बहुत जरूरी होला. द्वादश भाव के शुक्र वाला जातक के एकदम से चरित्र के कमजोर ना कहल जा सकेला.

(विनय बिहारी सिंह भोजपुरी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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