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Bhojpuri Special: जवन खेमा में तेजस्वी रहिहें ऊहां कन्हैया के निबाह ना होई !

सीपीआइ (CPI) के राज्य सचिव के कहनाम रहे कि कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) अब कहीं ना जइहें. उनकर कन्हैया से बात भी भइल बा. लेकिन, राजनीति में अब निजी हित विचारधारा पs भारी पड़ गइल बा. भाकपा माले के कट्टर वामपंथी कहल जाला लेकिन लालू जी (Lalu Prasad Yadav) एकरा के 1993 में तूर देले रहन.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 17, 2021, 6:34 PM IST
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कौमनिस्ट नेता लोग के मिटिंग चलत रहे. कामरेड किशोरी लाल कहले, कन्हैया के जदयू में जाए के चरचा से वामपंथी विचारधारा के बहुत नोकसान हो रहल बा. जवन कन्हैया के देशभर में मोदी विरोधी बड़का चेहरा मानल जाला, अब ऊ एनडीए में जइहें तs लोग का कही ? के कौमनिस्ट पार्टी पs भरोसा करी ? शौकत अली किशोरी लाल के टोकले, लेकिन काल्ह तs सीपीआइ के राज्य सचिव के कहनाम रहे कि कन्हैया कुमार अब कहीं ना जइहें. उनकर कन्हैया से बात भी भइल बा. पारसनाथ कहले, राजनीति में अब निजी हित विचारधारा पs भारी पड़ गइल बा. भाकपा माले के कट्टर वामपंथी कहल जाला लेकिन लालू जी एकरा के 1993 में तूर देले रहन. लालू जी ओह दौर में कवना पार्टी में ना तूर-फार कइले रहन. कवनो अचरज ना कि जदयू के लोग भी कन्हैया के अपना पाला में करे के फेरा में होखस. अब सवाल ई बा कि का कन्हैया सीपीआइ अउर महागठबंधन से अनराज बाड़े ?

कन्हैया का नराज बाड़े ?
किशोरी लाल कहले, कन्हैया के समय भी ठीक नइखे चलत. पहिले बिहार चुनाव में अनेदेखी भइल. अब उनका नांव पs पार्टी (सीपीआइ) में विवाद हो गइल बा. बहुत अदिमी के कहनाम बा कि जब ले तेजस्वी यादव एकछ नेता रहिहें तब ले महागठबंधन में कन्हैया कुमार के निबाह ना होई. कन्हैया जब महागठबंधन के स्टार प्रचारक बन जइहें तब तेजस्वी के ब्रांडिंग कइसे होई ? तब शौकत अली पूछले, तs का कन्हैया के जानबूझ के दरकिनार कइल जाता ? किशोरी लाल जबाब देले, तेजस्वी के कौमनिस्ट पार्टी के सहजोग तs चाहीं लेकिन कन्हैया से उनका परहेज बा. 2019 के लोकसभा चुनाव में तेजस्वी भाकपा माले के आरा सीट तs देले लेकिन बेगूसराय में कन्हैया के खिलाफ आपन कंडिडेट दे देले रहन. ओह घरी अगर तेजस्वी कन्हैया के समरथन कइले रहिते तs नतीजा बदल भी सकत रहे. लेकिन तेजस्वी अपनो (राजद) हरले अउर कन्हइयो के हरवले. राजद के ई बात मंजूर नइखे कि कवनो युवा नेता तेजस्वी से आगा निकले. ऐही के चलते महागठबंधन बिहार चुनाव में कन्हैया के स्टार प्रचारक ना बनवले रहे. अब उनकर नांव सीपीआइ नेता से मारपीट के बिबाद में जुड़ गइल बा. उनका खिलाफ पार्टी में निंदा प्रस्ताव भी पास भइल बा. जाहिर बा एह सभ बात से उनकर मन उचटल बा.

“सीपीआइ- कन्फ्यूजन पार्टी ऑफ इंडिया”
बांकेबिहारी हाले फिलहाल में लाल झंडा उठवले रहन. मीटिंग में ऊ सवाल पूछले, तs एकर मतलब का भइल ? का राजद के दबाव में आ गइल बिया सीपीआइ ? पारसनाथ कहले, 2021 के बिहार चुनाव में जब वामपंथी दलन के राजद से गठबंधन के फैदा मिलल तs स्थिति बदल गइल. भाकपा माले के सीट 3 से 12 हो गइल. सीपीआइ अउर सीपीएम के भी दू-दू विधायक हो गइले. एह से अब तीनो वामपंथी दल तेजस्वी के आग नरम पड़ गइल बाड़े. चरचा तs इहो बा कि राजदे के इशारा पs सीपीआइ कन्हैया के साइडलाइन कइले बा. बांकेबिहारी फेन पूछले, जब कन्हैया जेएनयू में रहन तब उनका नांव से मोदी सरकार बेयाकुल रहे. अब उहे कन्हैया के बिहार में केहू पूछे वला नइखे ? ई कवन राजनीत हs ? सीपीआइ कबो कांग्रेस तs कबो राजद के पीठईंया चढ़ के राजनीत करी तs का ओकर किस्मत बन जाई ? पारसनाथ कहले, एही बात के तs कन्हैया बिरोध कइले रहन. अप्रैल 2018 में कन्हैया सवाल उठवले रहन कि सीपीआइ काहे नइखे कांग्रेस से अलगा होके आपन रास्ता चुन रहल बिया? ऊ तs ईहां तक कह देले रहन कि सीपीआइ, कन्फ्यूजन पार्टी ऑफ इंडिया बन के रह गइल बिया. कन्हैया के ई बेयान पs खूब हंगामा मचल रहे. लेकिन लागत बा कि कन्हैया के कहनाम ठीके रहे. दोसरा के इशारा पs एतना लोकप्रिय नेता के अनदेखी कइल कहां तक ठीक बा ?



जब लालूजी लगवले वामपंथी दलन में सेंध
शौकत अली पुरान नेता रहन. उनका बिहार के राजनीत के बहुत समझबूझ रहे. ऊ कहले, आज भले कौमनिस्ट पार्टी के लोग राजद के दोसतियारी से खुश बा लेकिन ई लोग के जरूर इयाद राखे के चाहीं कि लालूजी के समय का भइल रहे. 1990 में लालूजी अल्पमत के सरकार चलावत रहन. बहुमत खातिर ऊ दोसरा दल के खंड-बिखंड कइले. 1990 के बिहार बिधानसभा चुनाव में भाकपा माले के 6 बिधायक जीतल रहन. भाजपा के 39 बिधायक रहन. लालूजी दूनो दल में सेंध लगा देले. 1991 के शुरू में लालू जी के शह पs भाजपा के 13 विधायक बिधानसभा में बइठे के अलग बेवस्था कर लेले. इनका लोग के अलग गुट के मान्यता भी मिल गइल. भाजपा के कुछ बागी नेता के लालूजी मंत्री भी बना देले. 1993 में लालूजी भाकपा माले के 6 में 4 बिधायक तूरे के अपना पार्टी में मिला लेले. एही तरे रामलखम राम रमण पहिले सीपीआइ के बिधायक रहन. 1980 अउर 1995 के विधानसभा चुनाव ऊ सीपीआइ के टिकट पs खजौली (मधुबनी) से जीतल रहन. सीपीआइ के समर्पित नेता होखला के बादो रामलखन राम रमण 2000 में लालू जी के साथे आ गइले. 2000 के चुनाव ऊ राजद के टिकट पs जीतले. आज के समय में बिचारधारा से समझौत के चलते ही कौमनिस्ट पार्टी के मनोबल लगातार गिर रहल बा. अब ना पहिले जइसन कैडर बाड़े ना पार्टी बिया. अंत में कामरेड किशोरी लाल कहले, अब आगा का होई, मालूम ना, लेकिन नीतीश सरकार के मंत्री संगे कन्हैया के मोलकात बहुत खटक रहल बा. (लेखक अशोक कुमार शर्मा जी वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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