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Bhojpuri: रामराज आ गोरक्षा आंदोलन खातिर हमेशा याद रखल जइहें करपात्री जी

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भगवान शिव क नगरी काशी एक से एक महान विभूतिन से समृद्ध रहल हौ. स्वामी करपात्री महराज अइसनय एक विभूति रहलन. सन् 1910 के आ ...अधिक पढ़ें

साधना अइसन कि एक हाथे के अंजुरी में जेतना अमाय, 24 घंटा में ओतनय सुरुज बिसवय से पहिले खायं. एकरे बावजूद शरीर अउर चेहरा सुरुज की नाईं बरय. करपात्री नाव ओनके एही योग्यता के नाते पड़ल.

करपात्री महराज महात्यागी अउर महाभक्त रहलन. त्याग एतना कि खुद शंकराचार्य क पद नाहीं लेहलन, बल्कि अपने गुरु स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के 165 साल से खाली ज्योतिष्पीठ पर बइठाइ देहलन. आजीवन एक वस्त्रधारी, गंगाजल सेवी अउर धनस्पर्श से दूर रहि के देश-दुनिया में धर्म अउर ज्ञान क प्रचार कइलन. धर्मसम्राट क पदवी पावय वाला उ एकमात्र संत रहलन.

करपात्रीजी क जनम प्रतापगढ़ जिला के भटनी गांव में रामनिधि ओझा अउर शिवरानी देवी के घरे सन् 1907 में भयल रहल. आठ-नौ साल के उमर में ही ओन्हय सत्य क ज्ञान होइ गयल. माई-बाबू नौ साल के उमर में ही महादेवी से ओनकर वियाह कइ देहलन. एक बिटिया भी पैदा भइल. लेकिन हरिनारायण क गृहस्थी में मन नाहीं लगल. भगवान गौतम बुद्ध की नाईं एक दिना राती के घर-बार छोड़ि के चलि देहलन, उमर 17 साल रहल. दशनामी परंपरा क संत, स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती से संन्यास क दीक्षा लेहलन अउर हरिहरानंद सरस्वती बनि गइलन. पंडित जीवनदत्त से संस्कृत सीखलन, स्वामी विश्वेश्वाश्रम महराज अउर अचुत्मुनि महराज से वेदांत अउर न्यायशास्त्र क शिक्षा लेहलन. शुरू में कुछ साल तक गंगा के किनारे-किनारे घूमयं अउर रेती में ही कुछ समय अराम कइ लेयं. कहीं भी एक दिना से जादा न रहयं. ओनकर तर्क रहल कि कहीं भी अधिक समय तक रहले से ओह स्थान से लगाव होइ जाला. संन्यासी के संसार से लगाव न होवय के चाही. हलांकि 1940 में उ अखिल भारतीय धर्मसंघ क स्थापना कइलन अउर काशी में आपन डेरा जमाइ लेहलन.

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करपात्री महराज जब पैदा भइलन तब देश गुलाम रहल. देश तरह-तरह के समस्या में फंसल रहल. सनातन धर्म पर मुगलन के बाद अब अंगरेजन क हमला होत रहल. करपात्री महराज अपने तरीके से जहां देश के अजादी बदे काम कइलन, ओही सनातन धर्म के अजादी अउर विकास क भी काम कइलन. धर्म, अध्यात्म, समाज, राजनीति पर कई किताब लिखलन. वेदार्थ पारिजात, रामायण मीमांसा, विचार पीयूष, मार्क्सवाद और रामराज्य जइसन किताब लिखि के उ दुनिया के आगे आपन मंतव्य पेश कइलन. करपात्री महराज दुनिया के कुल समस्या के समाधान बदे रामराज्य के विकल्प क वकालत कइलन. उ विषय नाहीं बल्कि विश्व कल्याण क बात करय. उ एकरे बदे एक ठे नारा देहलन, जवन आज भी धर्मसंघ क मूल सिद्धांत हौ -’धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो.’ यानी जब धर्म क जीत होई, अधर्म क नाश होई अउर हर प्राणी के बीच आपस में सद्भाव कायम होई, तबय विश्व क कल्याण होइ पाई. इहय ’रामराज्य’ हौ अउर इहय ’वसुधैव कुटंबकम’ भी.

करपात्रीजी महराज आपन सोच सकार करय बदे शिक्षा, धर्म अध्यात्म, राजनीति हर जगह हस्तक्षेप कइलन. लेकिन खुद आजीवन करपात्री बनल रहि गइलन. देश में रामराज्य लियावय बदे उ 1948 में रामराज्य परिषद नावे क राजनीतिक दल भी बनइलन. पार्टी 1952 के आम चुनाव में तीन सीट जीतलस. 1962 में भी दुइ सीट पर जीत मिलल. सन् 1957 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में रामराज्य परिषद के 17 सीट मिलल. बाद में परिषद क जनसंघ में विलय होइ गयल. हिंदू कोड बिल क विरोध, गोरक्षा अउर हिंदू राष्ट्र ओनकर राजनीतिक मुद्दा रहल. करपात्री महराज गोरक्षा पर देश में बड़ा आंदोलन चलउलन. गोरक्षा कानून बनावय बदे सात नवंबर, 1966 के दिल्ली में ऐतिहासिक आंदोलन क नेतृत्व कइलन. उ आंदोलन लोग आज भी याद करयलन. गोरक्षा पर ओइसन आंदोलन देश में आजतक नाहीं भयल.

करपात्री महराज रामराज्य क बात करयं, लेकिन उ काशी विश्वनाथ मंदिर में दलितन के प्रवेश के खिलाफ रहलन. इहय कारण रहल कि समाज क एक बड़ा तबका ओनसे जुड़ि नाहीं पइलस. ओनकर इ सोच ओनकरे चिंतन अउर आचरण में अंतर भी उजागर करयला. जब ओनसे उमर में 10 साल छोट समाजवादी नेता राजनारायण के संघर्ष के नाते 1956 में दलितन के विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश क अनुमति मिलल, तब करपात्री महराज विश्वनाथ मंदिर के भ्रष्ट घोषित कइ देहलन. ओनकर कहना रहल कि अब शिवलिंग में भगवान विश्वनाथ नाहीं रहि गयल हयन. जब पत्रकार लोग ओनसे पूछलन कि आप इ बात कइसे कहि सकयलन, का आप विश्वनाथ जी के जात देखले हयन? त करपात्री महराज कहलन कि ’हां, हम देखले हई’. एकरे बाद करपात्रीजी अपने पूजा-पाठ बदे मीरघाट में नया शिवमंदिर बनवइलन, अउर आजीवन विश्वनाथ मंदिर नाहीं गइलन. करपात्रीजी के प्रभाव में काशी नरेश विभूति नारायण सिंह भी विश्वनाथ मंदिर जाब छोड़ि देहलन. काशी के केदार घाट पर सात फरवरी, 1982 के स्वामी करपात्री महराज गंगा में ब्रह्मलीन होइ गइलन.

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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