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Bhojpuri Spl: दिल्ली के शासन व्यवस्था में सुधार के विधेयक से बौखलइलें केजरीवाल, जानीं का ह पूरा विवाद

दिल्ली केंद्र शासित प्रदेस ह, आ मौजूदा कानून में वेवस्था रहल बा कि भूमि आ कानून वेवस्था छोड़ि के सभ क्षेत्र में दिल्ली विधानसभा कानून बना सकेले आ ओकरा के लागू कइ सकेले. हालांकि कानून के मोताबिक मानल जात रहल हा कि ई बेवस्था ओइसन राज्यन जइसन नइखे, जवन पूर्ण राज्य कहाले स. उदाहरण खातिर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि पूर्ण राज्य हवन स.

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जब से केंद्र सरकार दिल्ली के शासन व्यवस्था में सुधार खातिर संसद में विधेयक ले आइल बिया, तब से एक बार फेरू दिल्ली के राजनीति में खिचखिच बढ़ि गइल बा. दिल्ली के मुख्यमंत्री आ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के अगुआई में जंतर-मंतर पर एह प्रस्तावित कानून के खिलाफ परदर्शन हो चुकल बा.

दरअसल केंद्र सरकार गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी ऑफ देलही एक्ट 1991 में संशोधन करे जा रहलि बिया. एह कानून के मोताबिक दिल्ली में संविधान के अनुच्छेद 239 कख में दिहल वेवस्था के मुताबिक विधानसभा के चुनाव आ शासन वेवस्था चलि रहल बा. चूंकि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेस ह, आ मौजूदा कानून में बेवस्था रहल बा कि भूमि आ कानून बेवस्था छोड़ि के सभ क्षेत्र में दिल्ली विधानसभा कानून बना सकेले आ ओकरा के लागू कइ सकेले. हालांकि कानून के मोताबिक मानल जात रहल हा कि ई बेवस्था ओइसन राज्यन जइसन नइखे, जवन पूर्ण राज्य कहाले स. उदाहरण खातिर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि पूर्ण राज्य हवन स.

चूंकि दिल्ली पूर्ण राज्य ना ह, त एकरा विधानसभा आ सरकार पर उपराज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति यानी केंद्र सरकार के नियंत्रण रहे के मान्यता रहल. लेकिन दिल्ली में प्रचंड बहुमत से दू-दू बेर सरकार बनाइ चुकल आम आदमी पार्टी एह सिद्धांत के खारिज करत रहलि हा. एकरा खिलाफ ऊ सुप्रीम कोर्ट में गइलसि आ सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ई वेवस्था दू साल पहिले दिहलसि कि दिल्ली में चुनल सरकार के काम में उपराज्यपाल कवनो बाधा ना डालि साकेले. उनुका के सरकार आपन फैसला के खाली जानकारी दिही.

एह फैसला के बाद से केंद्र शासित प्रदेस में उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार के जवन सर्वोच्चता रहे, ऊ खत्म हो गइल. ओहि के सुधारे खातिर केंद्र सरकार दिल्ली के सरकार के अधिकार तय करे वाला संशोधन विधेयक लेके संसद में आइल बिया. एह पर जवन फैसला होई, ऊ त बाद के बात बा. बाकिर ई जाने के चाहीं कि दिल्ली के शासन वेवस्था विधानसभा बने के पहिले कइसन रहे.

मुगलिया सल्तनत के दौरान दिल्लिए से देस के शासन चलत रहे. जब 1857 में पहिलका स्वाधीनता संग्राम भइल त क्रांतिकारी लोग ओह घरी आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के सम्राट घोषित कइले रहे लोग. जब अंग्रेज स्वाधीनता संग्राम के दबा दिहले स त उहनि के शासन खातिर दिल्ली के पंजाब सूबा के जोड़ि दिहले स. तब से दिल्ली पंजाब सूबा के मेहरौली जिला के एगो हिस्सा रहे. जब 1911 में जब दिल्ली में जब राजधानी आइल त 12 दिसंबर 1911 के अंग्रेज दिल्ली के पंजाब राज्य के मेहरौली जिला के चीफ कमिश्नर के अधीन कई के केंद्रीय शासन के तहत ले लिहले स. तब से लेके आजादी के बाद तकले इहे वेवस्था चलत रहे.

आजादी के बाद पट्टाभि सीतारमैया समिति बनलि, जवन राज्यन के शासन वेवस्था पर आपन रिपोर्ट दिहलसि. ओह रिपोर्ट के बाद दिल्लियो में विधानसभा बनल. हालांकि सीतारमैया समिति दुनिया के बड़ देसन जइसे अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि के राजधानी के शासन सिस्टम देखि के आपन सिफारिस दिहलसि कि राजधानी के अलग शासन वेवस्था होखे के चाहीं. जवना में ओकरा के अलग से कानून-वेवस्था छोड़ि के बाकी काम दे देबे के चाहीं. उ समिति विधानसभा के होखला से इनकार ना कइलसि त ओहके चलते दिल्ली में 1951 में विधानसभा बनलसि. तब विधानसभा के अधिकतम सदस्य संख्या 50 राखलि गइल रहे. दिल्ली के पहिलका मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश बनले. बाकिर जब 1953 में राज्यन के पुनर्गठन खातिर फजलु रहमान समिति बनल त ऊ अजमेर आ दिल्ली जइसन चीफ कमिश्नर शासित राज्यन के नजदीक में सामिल कइ देबे के चाहीं. चूंकि दिल्ली में केंद्र के दफ्तर बाड़न स, दूतावास बाड़े स, त ओह वजह से दिल्ली के केंद्र के अधीन शासन रखे के इंतजाम कइल गइल. ओकरा बाद 1956 में दिल्ली के विधानसभा खतम कइ दियाइल आ ओकरा खातिर नगर निगम के वेवस्था भइल. फेरू महानगर परिषद बनावल गइल. बाद में जब जनता पार्टी के 1977 में शासन आइल त दिल्ली के राज्य के दर्जा देबे के फैसला लिहलसि.

हालांकि जनता पार्टी के सरकार जल्दीए गिरि गइल. एह बीचे कांग्रेस आ भाजपा दूनों दल दिल्ली के राज्य के दर्जा देबे के मांग लेके आंदोलन करत रहलि. बाद में 1987 में सरकारिया आयोग बनल. बाद में न्यायमूर्ति सरकारिया जब प्रेस काऊंसिल के अध्यक्ष बनि गइले त उनुका जगहि पर बालाकृष्णन समिति बनलि आ ऊ कुछ विषय छोड़ि के दिल्ली के अलगा राज्य बनावे खातिर पर सुझाव दिहलसि. ओहि में दिल्ली सरकार के आठ गो विषय पर काम करे के वेवस्था दिहलसि. ओहि सुझाव के आधार पर 1991 में तब के केंद्रीय गृहमंत्री शंकर राव चव्हाण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम पेश कइले रहले. ओहि से देखल जाउ त दुनिया के जाताना बड़ देसन के राजधानी बाड़ी स, ओह में खाली ऑस्ट्रेलिया के राजधानी केनबर्रा में ही दिल्ली नियर विधानसभा बिया. आ उहवों ओइसहीं लड़ाई होत रहेला, जइसे इहंवा हालि के दिन में केंद्र आ राज्य सरकार में होत रहेला. बाकिर हर जगह स्थानीय शासन नगर निगम नियर बा. (लेखक उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं.)