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Bhojpuri: मान मंदिर वेधशाला: बनारस के 'जंतर मंतर' क जानीं खासियत

Bhojpuri: मान मंदिर वेधशाला: बनारस के 'जंतर मंतर' क जानीं खासियत

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बनारस एक अइसन शहर हौ, जहां देश के हर राजन, रजवाड़न क कवनो न कवनो निशानी जरूर होई. चाहे उ हिंदू राजा होयं, या मुगल. हिंदू राजा काशी के महिमा के नाते इहां गंगा किनारे महल, मंदिर, धर्मशाला बनवउलन त मुगल काशी क बखान सुनि के इहां अइलन, कुछ तोड़-फोड़ कइलन, कुछ नया बनवइलन.

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बनारस में अइसन तमाम निशानी इतिहास क गवाह बाइन. मान मंदिर वेधशाला अइसनय एक निशानी हौ. आज से लगभग 300 साल पहिले गंगा के किनारे बनल इ वेधशाला बनारस क ’जंतर मंतर’ कहल जाला.

मान मंदिर वेधशाला क निर्माण आमेर क राजा सवाई जय सिंह द्वितीय 1737 में करउले रहलन. सवाई जय सिंह गणित, खगोल शास्त्र अउर वास्तु शास्त्र में बहुत रुचि रखय, जवने के नाते उ देश में कुल पांच जंतर मंतर क निर्माण करउलन -जयपुर, दिल्ली, बनारस, उज्जैन अउर मथुरा. मथुरा वाला जंतर मंतर 1857 के विद्रोह से पहिलय मुगल लोग तोड़ि देहलन. लेकिन बाकी चारों जंतर मंतर अबही तक मौजूद हयन. बनारस क मान मंदिर वेधशाला ओही चार में शामिल हौ. मान मंदिर वेधशाला बनारस में एकदम गंगा के किनारे मान मंदिर घाटे पर मौजूद हौ.

आमेर क राजा मान सिंह लगभग 1600 ईस्वी में इहां एक ठे महल बनवउले रहलन, जवने के मान मंदिर कहल जाला. महल के साथे घाट क भी निर्माण भइल. मान मंदिर महल बहुत ही खूबसूरत हौ. निर्माण में मुगल अउर राजपूताना दूनों शैली क समावेश हौ. महल के स्थान क चयन भी अद्भुत हौ. झरोखा से खड़ा होइ के देखा त गंगा के कुल घाट क नजारा मिलयला. आमेर राजघराने क ही महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय सन् 1737 में मान मंदिर महल के उप्पर छते पर पथरे क एक ठे शानदान वेधशाला बनवउलन. वेधशाला के निर्माण बदे विशेषज्ञ मिस्त्री भागीरथ अउर राज ज्योतिषी पंडित गोकुल चंद भावन जयपुर से काशी आयल रहलन. पंडित गोकुल चंद के ज्योतिषीय गणना अउर निर्देशन में मिस्त्री भागीरथ बड़ी मेहनत से वेधशाला क निर्माण करउलन.

मान मंदिर वेधशाला काशी में महाराजा सवाई जय सिंह क देहल एक बेहतरीन उपहार हौ. वेधशाला में चक्र यंत्र, नाड़ी यंत्र, दिगांश यंत्र, दक्षिणोत्तरभित्ति यंत्र अपने आप में शानदार हयन. इहां मौजूद सम्राट यंत्र सबसे बड़ा अउर प्रभावी हौ. सम्राट यंत्र से ग्रह नक्षत्रन के दिगांश क गणना कयल जाला. वेधशाला में मौजूद नाड़ी वलय यंत्र गोल अकार में हौ. इ यत्र दुइ दिशा में बंटल हौ -दक्षिण गोल अउर उत्तर गोल. एह यंत्र से सुरुज अउर दूसरे ग्रहन के दिशा के बारे में पता चलयला. एकरे साथे समय क भी जानकारी मिलयला. इ यंत्र क खास बात इ हौ कि सूरुज उअले के साथ ही इ परछाई के अधार पर समय बतावय लगयला. इ यंत्र एतना सटीक हौ कि जब सुरुज उत्तर दिशा में होलन तब परछाई यंत्र के उत्तर गोल पर पड़यला. सुरुज दक्षिण होलन त परछाई दक्षिण गोल पर पड़यला. इ यंत्र के सूर्य घड़ी भी कहल जाला. मान मंदिर वेधशाला में अलग-अलग विषय क कुल आठ यंत्र हयन. पुन्नवासी के अउर गर्मी के मौसम में इ कुल यंत्र एकदम सटीक समय बतावयलन. ठंढी के मौसम में समय क गति थोड़ी तेज होइ जाला.

मान मंदिर वेधशाला बनारस में पारंपरिक भारतीय खगोल शास्त्र क एक अमूल्य धरोहर हौ. एह धरोहर के खूब सहेजि के रखय क जरूरत हौ. बनारस क सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सौजन्य से मान मंदिर क 2019 में जीर्णोद्धार भइल. इहां आभासीय अनुभूति संग्रहालय खोलल गइल, जवने में बनारस के सांस्कृतिक पहचान क कई ठे झांकी लगावल गइल हइन. लाइट शो क भी व्यवस्था हौ, जवने में गंगा अवतरण के अलावा दूसर पौराणिक कहानी प्रदर्शित कइल जालिन. लेकिन महल के छते पर मौजूद वेधशाला क कई यंत्र खस्ताहाल होत हयन. देखरेख अउर मरम्मत क बहुत जरूरत हौ. सन् 1978 से वेधशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन हौ. लेकिन एकर जेतना रखरखाव होवय के चाही, होइ नाहीं पावत हौ.

पहिले त मान मंदिर अउर वेधशाला के बारे में लोगन के ओतना पता ही नाहीं रहल, लेकिन जब से मान मंदिर क जीर्णोद्धार भइल, इहां नई-नई व्यवस्था भइल, प्रधानमंत्री मोदी लोकार्पण कइलन, तब से लोग एह स्थान के बारे में जानय लगलन. देखवइयन क भीड़ भी आवय लगल. लेकिन वेधशाला के यंत्रन के बारे में जानकारी देवय क कवनो व्यवस्था नाहीं हौ. न त यंत्र क खासियत बतावय बदे गाईड हयन, अउर न सूचना पट्ट पर ही जानकारी देहल गइल हौ. एकरे नाते वेधशाला देखय जाए वालन क ज्ञानवर्धन नाहीं होइ पावत. शासन-प्रशासन के एह बारे में जरूर सोचय के चाही. फिर भी राजेंद्र प्रसाद घाटे के बगल में मौजूद मान मंदिर बनारस में एक अद्भुत दर्शनीय स्थल हौ. बनारस घूमय जाए वालन के इहां जरूर जाए के चाही. आनंद आई. देसी लोगन बदे 25 रुपिया अउर विदेशिन बदे 300 रुपिया क टिकट हौ.

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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