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Bhojpuri Spl: किसान आंदोलन में बिदेशी दखल- जान ना पहचान, मौसी पांव लागीना

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अमेरिका में गला फार के गावे वली रिहाना (Rihanna) के भारत के किसान के बारे में का मालूम बा? फूहर सिनेमा में काम करे वली मिया खलीफा (Mia Khalifa) त इहो ना जानता होइहें कि खेती कइसे होला लेकिन उहो टुभुक देली.

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सरसती पूजा के तैयइयारी चलत रहे. बिनाबादनी पुस्तकालय में राय-बिचार खातिर लोग जुटल रहे. सब तय-तमान्ना हो गइल तs पुस्तकालय के सचिव गौरीकांत अखबार उठा के कहले, राजनीति के हाल तs अजबे हो गइल बा. किसान आंदोलन खेती के खुशहाली खातिर शुरू भइल रहे. अब एकरा में राजनीतिक नेता लोग भी घुसपैठ कर देले. भोट बनावे बिगाड़े के खेल शुरू हो गइल. किसान के नांव पs देश में राजनीति शुरु भइल तs विदेश में भी कांव- कांव होखे लागल. दिवाकर कवि कहले, ठीके कहत बानी गौरीकांत जी, भला बताईं, अमेरिका में गला फार के द गावे वली रिहाना के भारत के किसान के बारे में का मालूम बा ? फूहर सिनेमा में काम करे वली मिया खलीफा त इहो ना जानता होइहें कि खेती कइसे होला लेकिन उहो टुभुक देली. स्वीडन के ग्रेटा थनबर्ग के उमिरे केतना बा ? लेकिन भारत के किसान के समर्थन में उहो खाड़ा हो गइली. ऊ तs खैर कहीं कि ग्रेटा के गलती से पोल खुल गइल ना तs भारत के खिलाफ बड़का साजिश के पते ना चलित. ई तीनो लोग के भारत के बारे में कुछुओ नइखे मालूम. लेकिन बहती गंगा में हाथ धोवे खातिर फटाक से कूद गइल लोग. जान ना पहचान, मौसी पाव लागीना. लेखक विजय विनायक पूछले, कइसन साजिश ?

ग्रेटा के गलती से खुलल पोल
दिवाकर कवि कहले, जब कुछ अदिमी के कम उमिर में कामयाबी मिल जाला तs ओकरा से सम्हरले ना सम्हरे. स्वीडन के रहे वली ग्रेटा थनबर्ग के उमिर अबहीं कुल्लम 18 साल बा. लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में उनकर दुनिया भर में नांव बा. ग्रेटा भी किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट कइले रही. नदान ग्रेटा गलती से अपना ट्वीट में भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनावे वला जोजना के भी साझा कर देली. तब लोग के पता चलल कि बिदेशी लोग किसान आंदोलन के आड़ में भारत के डंवाडोल कइल चाहत बाड़े. ग्रेटा ट्वीट में कहले रही- विरोध प्रदर्शन में शामिल होइए, एकजुटता वाली तस्वीर ई मेल कीजिए. भारत से किसान आंदोलन के फोटो, बीडियो मंगावल जात रहे जवना से कि ट्वीटर पs भारत सरकार के खिलाफ माहौल बनावल जा सके. भारत सरकार पs दबाव बनावे के खातिर प्रोपगंडा फैलावे के साजिश रहे. 4-5 फरवरी के ट्वीटर पs तहलका मचावे के पलानिंग रहे. जब ग्रेटा के आपन गलती के इलिम भइल तब ऊ आपन ट्वीट के डिलीट कर देली. लेकिन तब ले उनकर पोल पट्टी खुल गइल रहे.

मिया खलीफा केतना जाने ली खेत-किसानी?
विजय विनायक पूछले, ग्रेटा थनबर्ग के नांव तs सुनले रहीं लेकिन ई मिया खलीफा अउर रिहाना के हs ? दिवाकर कवि कहले, इनका लोग के परिचय मत्ते पूछीं तs ठीक बा. अइसनो-अइसन लोग अतना गंभीर आंदोलन पs जहर उगिलिहें, केहू सोचले ना रहे. मिया खलीफा के उमिर 27 साल बा. पहिले ई अमेरिका के फूहर सिनेमा में काम करत रहीं. बियाह कइला के बादो ऊ देह देखावले सिनेमा में काम करत रही. एही में बिबाद उनकर मरदाना से अलगाव हो गइल. परिवार जब उनका काम से नफरत करे लागत तs 2016 में ऊ गंदा सिनेमा छोड़ देली. उनकर परिवार लेबनान से 2001 में अमेरिका गइल रहे. लेबनान खुद्दे साम्प्रदायिक हिंसा के आग में जले वला देश रहल बा. इहां ईसाई- मुसलमान अउर शिया सुन्नी के लड़ाई में ना जेने केतना आदिमी के जान चल गइल.

अपना मंडवा में भूला गइली, दोसरा के मंडवा में गीत
किसान के मानवाधिकार के बात करे वली मिया खलीफा के सबसे पहिले तs अपना देश में इंसानियत के बात उठावल चाहत रहे. लेकिन ऊ तs खून से लाल लेबनान के छोड़ के अमेरिका भाग गइली. उहावां निक जबून काम से डॉलर के कमाई कइली. उनका तs लेबनान में जा के आंदोलन करे के चाहीं. लेकिन चमक दमक के जिनगी जिये वला मिया खलीफा अब अमेरिका से बइठ के भारत के अंदरुनी मामला में बोल रहल बाड़ी. जहां तक बात रिहाना के बा तs ऊहो अमेरिका के गायिका हई. उनकर परिवार वेस्टइंडीज के बारबाडोस से अमेरिकी गइल रहे. गायिकी के बदौलत रिहाना चार हजार करोड़ रोपेया से अधिका कमाइल बाड़ी. अमेरिका अपनहीं गोरा-कला के लड़ाई में अझुराइल बा. अतना खुशहाल देश में आज ले काला लोग के सम्मान ना मिलल. रिहाना एकरा विरोध में आज ले तs कवनो जोरदार आंदोलन ना कइली. खाली ट्वीट अउर भाषण कइला से का होई. ई बात सही बा कि रिहाना कोरोना काल में 15 करोड़ रोपेया दान देले रही. लेकिन भारत के किसान आंदोलन से उनकर कवनो लेना देना ना रहे. तबहुओं दुनिया में चर्चा बटोरे खातिर ट्वीट कर देली.

किसान आंदोलन पs राजनीति के रंग
सब लोग के बात सुन के गौरीकांत जी कहले, आपन-आपन राजनीति चमकावे के फेर में कुछ लोग किसान आंदोलन के भटका देले. महेन्द्र सिंह टिकैत राजीव गांधी के जमाना में बरियार किसान आंदोलन कइले रहन. ओकरा बादो किसान के समस्या खतम ना भइल. तीस-पैंतीस साल बीत गइल लेकिन किसान के तकलीफ जस के तस बा. महैन्द्र सिंह टिकैत के एक खूबी ई रहल कि ऊ किसान आंदोलन पs राजनीति के रंग ना चढ़े देले. लेकिन उनकर लइका राकेश टिकैत खुल्लमखुल्ला आंदोलन के राजनीतिक मंच बना देले. अब किसान से अधिका यूपी में जाट भोट के एकजुट होखे के बात हो रहल बा. 1987-88 में महेन्द्र सिंह टिकैत के भारत में सबसे ब़ड़ किसान नेता मानल जात रहे. लेकिन ऊ कबो चुनाव ना लड़ले. राकेश टिकैट तs अपना बाबूजी के पासंगो में नइखन. तबहुओं ऊ चुनाव में किस्मत आजमा चुकल बाड़े. 2007 के यूपी बिधानसभा चुनाव में ऊ खतौली से निरदलीय खाड़ा भइल रहन. लेकिन जीते के कहो जमानते जपत हो गइल. 2014 में राकेश टिकैत अमरोहा से राष्ट्रीय लोक दल के टिकट पs चुनाव लड़ले. लेकिन फेन जमानत जपत हो गइल. राकेश टिकैत तs राजनीतिक आदिमी हवें. उनका किसान आंदोलन में तs राजनीति के भाव बा. ऊ अपना बाबूजी जइसन खांटी किसान नइखन. ऐह से अब ई आंदोलन पहिले जइसन ना रह गइल. गौरीकांत जी कहले, अइसे ई हमार बिचार बा, रउआ सभे अलग राय रख सकिना. (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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