Bhojpuri: जानीं के रहली नटी बिनोदिनी? उनकर जीवन के कुछ रोचक प्रसंग

अपना अभिनय आ कला से बिनोदिनी बंगाली थिएटर के नया आयाम दिहली एहीसे आजुओ बंगाल में ऊ ‘नटी बिनोदिनी’ के नाम से लोगन के दिल में बाड़ी. समय-समय पर बंगाली थिएटर आ टीवी धारावाहिकन में उनकरा कहानी के दोहरावत जात रहेला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 12:01 PM IST
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नटी बिनोदिनी पर भोजपुरी में बहुते कम लेख मिली. के रहली नटी बिनोदिनी? बिनोदिनी दासी (जनम- सन 1862, मृत्यु- सन 1941) के नटी बिनोदिनी के नाम से ढेर जानल जात रहल ह. ऊ कलकत्ता के बांग्ला भाषा के एगो प्रसिद्ध नाट्य अभिनेत्री रहली. नटी बिनोदिनी 12 साल के उमिर में एक्टिंग शुरू कइली आ 23 साल के उमिर में नाटक कइल छोड़ि दिहली. काहें छोड़ली? ई प्रसंग बाद में आई. रंगमंच छोड़ला का बाद सन 1913 में नटी बिनोदिनी आपन आत्मकथा लिखली “आमार कथा” (The Story of My Life) जौना के अंग्रेजी अनुवाद आजुओ बड़ा चाव से पढ़ल जाला. नटी बिनोदिनी उन्नीसवीं शताब्दी के रेयर अभिनेत्री रहली जौन खाली 11 साल तक रंगमंच पर रहि के भारी ख्याति पवली आ कैरियर के शिखर पर रहते अचानक नाटक से सन्यास ले लिहली. एही 11 साल में ऊ 80 गो नाटक में एक्टिंग क चुकल रहली.

बंगाली थिएटर देश के गिनल- चुनल थिएटर रहे जौन अपना नाटकन में महिला कलाकारन के स्टेज पर उतार दिहलस. ओही शुरुआती दौर के पहिला कुछ महिला कलाकारन में से एगो रहली बिनोदिनी दासी. ना त पहिले मरदे, औरत बनि के एक्टिंग करत रहल ह लोग. त नटी बिनोदिनी के माता आ दादी वेश्या रहे लोग. घर में घनघोर गरीबी रहे. उनकरा छोट भाई के सिर्फ पांच साल के उमिर में एसे शादी क दियाइल कि दहेज़ में सोना के गहना मिली जौना के बेंचि के घर के खर्चा चली. भाइयो कुछ दिन बाद मरि गइल. बिनोदिनी के ऊपर घर चलावे के ज़िम्मेदारी आ गइल. नतीजा ई भइल कि 12 साल के उमिर से ही ऊ थिएटर करे सुरू दिहली. थिएटर के दुनिया से उनकर पहिचान ओह समय के एगो थिएटर गायिका गंगाबाई करववली. गंगाबाई उनकरा घर में किराया पर रहे आइल रहली आ ऊहे बच्ची बिनोदिनी के गायन सिखावे लगली. एह लेख में आगे बहुत रोचक बात बाड़ी सन. बाकिर कुछ फैक्ट जानल जरूरी बा. कुछ लाइन उनुका फैक्ट पर रहो. ओकरा बाद रोचक तथ्य पर.

अपना अभिनय आ कला से बिनोदिनी बंगाली थिएटर के नया आयाम दिहली एहीसे आजुओ बंगाल में ऊ ‘नटी बिनोदिनी’ के नाम से लोगन के दिल में बाड़ी. समय-समय पर बंगाली थिएटर आ टीवी धारावाहिकन में उनकरा कहानी के दोहरावत जात रहेला. ऊ पहिला एक्टर रहली जौन एकही नाटक में अलग- अलग भूमिका में आके लोगन के अपना अभिनय कला से चकित क देसु. ‘मेघनाद वध’ में ऊ छव गो अलग-अलग भूमिका निभावली – परिमाला, बरुनी, रती, माया, महामाया आ सीता. एकरा अलावा ‘दुर्गेश नंदिनी’ नाटक में ऊ तीन गो किरदार के अभिनय कइली. त उनुकरा अभिनय के रेंज के आजु ले केहू मूल्यांकन ना क पावल.

‘चैतन्य लीला’ में उनकर अभिनय के चर्चा पूरा बंगाल में फइल गइल. दर्शकन के लागे कि जइसे खुदे संत चैतन्य महाप्रभु सामने आके खड़ा हो गइल बाड़े. चैतन्य महाप्रभु के एक्टिंग नटी बिनोदिनी कइले रहली. ई नाटक एगो अउरी वजह से चर्चा में रहे. महान संत रामकृष्ण परमहंस, खुदे एह नाटक के देखे खातिर आ गइले. नाटक देखला का बाद ऊ नटी बिनोदिनी के कला से एतना प्रभावित भइले कि खुदे जाके बिनोदिनी से मिलले आ उनुका कला के सराहना कके आसिरबाद दिहले.
आजु भी कहल जाला कि ‘चैतन्य लीला’ के समय नटी बिनोदिनी के थिएटर कैरियर अपना चरम पर रहे. हर तरफ अभिनय के दुनिया में उनकरे नांव सुना. एकरा दू साल बाद, सन 1887 में ऊ आपन आखिरी नाटक ‘बेल्लिक बाज़ार’ नाटक में अभिनय कके सिर्फ 24 साल के उमिर में रंगमंच के दुनिया से अलग हो गइली. कारन? लोग अलग-अलग वजह बतावेला. केहू कहेला कि संत चैतन्य के भूमिका से उनुका मन पर एतना गहिर छाप परल कि उनुकर मन एह दुनिया से विरक्त हो गइल, त केहू कहेला कि अपना निजी संबंध के कारन ऊ एक्टिंग कइल छोड़ि दिहली. ईहो माने वाला ढेर आदमी बाड़े जे कहेला कि रामकृष्ण परमहंस के आसिरबाद में एतना असर रहे कि उनुकर मन भगवान में लागि गइल आ थिएटर उनुकरा व्यर्थ लागे लागल. जौन भी कारन होखे, बाकिर नटी बिनोदिनी के अभिनय के छाप अइसन रहे कि आजु ले उनुकर नांव अमर बा. थिएटर के पहिली महिला कलाकारन में से एगो रहला के अलावा, नटी बिनोदिनी आपन आत्म-कथा लिखे वाली गिनल- चुनल दक्षिण एशियाई अभिनेत्रियन में से एगो गिनाली.

सन 1913 में ‘अमार कथा’ लिखली आ 1924-25 में ‘अमार अभिनेत्री जीबन’ किताब लिखली. ए किताबन में ऊ अपना जीवन (स्टेज पर आ स्टेज के बाहर) के उतार-चढ़ाव के बारे में रोचक ढंग से लिखले बाड़ी. एह किताबन में ऊ थिएटर के दुनिया में महिला के साथे पक्षपात आ दुर्व्यवहार के उजागर कइले बाड़ी. उनकरे किताब पढ़ि के लोगन के पता चलल कि कइसे कलकत्ता के मशहूर ‘स्टार थिएटर’ के निर्माण खातिर नटी बिनोदिनी अपना देह के सौदा कइली.

गिरीश चंद्र घोष जब आपन एगो थिएटर बनावे के सोचले त उनुकर ई सपना, नटी बिनोदिनी के भी सपना बनि गइल. बाकिर समस्या रहे कि रुपया कहां से आई? तले गिरीश घोष के एगो व्यवसायी गुरुमुख रे ऑफर दिहले कि ऊ उनुकरा के थिएटर बनावे खातिर रुपया दीहें. बाकिर बदला में गुरुमुख राय कहले कि अपना नाटक मंडली के सबसे होनहार आ मशहूर कलाकार- नटी बिनोदिनी हमरा के देदीं. माने नटी बिनोदिनी उनुकर उप पत्नी बनि के रहसु. नटी बिनोदिनी के ई जानकारी मिलल. उनुका कुछ समुझे में ना आइल कि का करसु? उनुका के असमंजस से निकाले खातिर गुरुमुख राय एगो अउरी पासा फेंकले. कहले कि जदि नटी बिनोदिनी उनुकर ई शर्त मानि लीहें त ऊ थिएटर के नांव नटी बिनोदिनी के नांव पर रखिहें.



अपना कुछ साथी कलाकारन के समुझवला आ अपना गुरु गिरीश चंद्र घोष के सपना खातिर नटी बिनोदिनी गुरुमुख राय के शर्त मानि लिहली. एगो शादीशुदा आदमी के साथे उप पत्नी बनि के रहे खातिर ऊ स्वीकार क लिहली. उद्देश्य ई रहे कि कला आ रंगमंच के सही मुकाम मिल सके. बाकिर उनुका ई पता ना रहे कि जौना रंगमंच के ऊ आपन मुकुट बनवले बाड़ी उहे रंगमंच उनुका संगे धोखा करी.

थिएटर के निर्माण पूरा भइल त गुरुमुख राय आ गिरीश चंद्र घोष थिएटर के नांव बिनोदिनी थिएटर ना राखि के ‘स्टार थिएटर’ राखि दिहल लोग. ओह लोगन के लागल कि वेश्या परिवार के लड़की के नांव पर थिएटर के नांव राखल ठीक नइखे. ये वो पल था जब दकियानूसी सोच, कला और किए गए वादे पर भारी पड़ चुकी थी. नटी बिनोदिनी के दिल पर बड़ा भारी चोट लागल. बाकिर केहू तरे ऊ एकरा के सहि लिहली.

नटी बिनोदिनी ज़हर के घूंट पी लिहली. कौनो विरोध ना कइली. बाकिर उनुकर नाराजगी उनकरा किताबन में लउकि जाई. नटी बिनोदिनी के किताबन में ऊ कुछ सवाल खुद से कइले बाड़ी जौन कि किताब के मार्मिक अंश मानल जाला. त नटी बिनोदिनी अपना पहिचान खातिर लेखन के माध्यम से लड़ाई लड़त- लड़त मरि गइली आ एही से उनकर अमरता भी जुड़ि गइल. बिना कौनो स्कूली पढ़ाई के, एगो परफेक्ट आ दिल छू लेबे वाली आत्मकथा लीखल निश्चिते विलक्षण प्रतिभा कहाई. नटी बिनोदिनी 100 गो के करीब कविता भी लिखले रहली. केहू सरियावे, जतन करे वाला रहित त उहो पढ़े के मिलित. कउनो दुर्लभ चीज भुला जाला तब जाके ओकर असली कीमत के पता चलेला. (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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