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Bhojpuri में पढ़ें- कोलकाता के स्वादिष्ट दुपहरिया के भोजन

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दिन के परंपरागत कलकतिया भोजन सचहूं अंगुरी तक चटवा देला. रसे- रसे खा के राउर रोआं- रोआं तृप्त हो जाई. मन पर आनंद के नशा ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
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कहीं- कहीं त मिष्टी दही का संगे ई तीनो मिठाई रहेली सन. आजुओ जे खाए के सौखीन बा, ओकरा भोजन में ई कुल चीज ना रही त ओकरा भोजन अधूरा लागी. अच्छा मजा ई कि मछरी के झोल में भी आलू, टमाटर रहेला आ आलू दम में आलू का संगे टमाटर रहेला. हरदी, लहसुन, पियाज आ अदरख मछरियो का झोल में परेला आ आलू दम में भी. अब रउरा मन में आवत होई कि कौना मछरी के झोल? त सरकार बंगाल में झोल वाली नाना प्रकार के मछरी बाड़ी सन, जइसे- हिलसा (बांग्ला में उच्चारण- इलिस), रोहू (बांग्ला उच्चारण- रुई), कादला, गुर्जवाली, पाब्दा, पाम्लेट, सोल, बोयाल, भेटकी.. वगैरह- वगैरह. अच्छा हिलसा समुद्री मछरी ह. एकरा में ओमेगा-3 पावल जाला.

रोहू त हमनी के भोजपुरिया समाज में भी बड़ा प्रेम से खाइल जाले. बांग्ला समाज में हिलसा, रोहू आ कादला मछरी के प्रति एगो अलगे आकर्षण रहेला. हर मछरी के बनावे के अलग- अलग तरीका होला, बाकिर एह कुल्ही में झोल (अपना पसंद के अनुसार पातर भा गाढ़ मसाला के रस) जरूर रहेला. इहे झोल जब भात का संगे सानि के चटनी आ कुर्र- कुर्र सलाद का संगे जब खाइब त बस मन में आनंद के लहर उठे लागी आ राउर आंखि आटोमेटिक मुंदा जाई. जे शाकाहारी बा ओकरा ई आनंद आलू के झोल, परोरा (परवल) आ कटहर के झोल में मिल जाला. कटहर के तरकारी के मांस के शाकाहारी विकल्प कहल जाला. माने जौन मजा रउरा मांस- मछरी खा के पाइब, ऊहे मजा रउरा कटहर के गरम मसाला देके बनल झोल में मिल जाई. बल्कि मांसाहारी लोगन से भी ढेर आनंद कटहर के नीमन बनल झोल में आ जाई. एगो बात अउरी, आजुओ एह मान्यता के माने वाला लोग बाड़न कि जौन मसाला सिलबट्टा पर पीस के तैयार होला ओकर मोकाबिला ग्राइंडर- मिक्सर के पीसल मसाला ना करी. हालांकि हम एह बात के नइखीं मानत, बाकिर भोजन के कुछ सौखीन लोग आजुओ एह बात पर अड़ल बा.

अब रउरा मन में आवत होई कि बंगाल के “कशा मांसो” का ह? त सरकार, सूखा मसालेदार मांस के “कशा मांसो” कहल जाला. ई रसदार ना रहे. सूखले रही बाकिर एकरा चारो ओर सूखल मसाला रही. “कशा मांसो” बकरा आ मुर्गा दूनो के रहेला. आमतौर पर भोजन का संगे खीर (बांग्ला में- पाएस) भी रहेला. अइसन खीर जौन खूब गाढ़ कइल दूध में बनल होखे आ जौना में नाना प्रकार के सूखा फल डालल होखे. ईहो मदमस्त करे वाला व्यंजन ह. जदि रउरा पूड़ी (बांग्ला में- लूची) खातानी त ओकरा संगे खीर जरूरे रही. एक तरह कहि सकेनीं- जहां पूड़ी, तहां खीर. पूड़ी का संगे झोल वाला आलू दम (बांग्ला में- दम आलू) जरूरे रहेला. ऊहे आलू दमवा पूड़ी का संगे मुंह में जाला त आनंदातिरेक होला.

अच्छा एगो साप्ताहिक व्यंजन बा ओकरा चर्चा के बिना भोजन पुराण अधूरा रहि जाई. एह व्यंजन के नांव ह- बिरयानी. बिरयानी मांसाहारी आ शाकाहारी दूनो होला. बिरयानी के मुख्य गुण ई ह कि ओकरा में से एगो सुगंध आवत रहेला. खा के हाथ धो लेब तबो एगो सुगंध रउरा हाथ में बनल रही. बिरयानी आ पुलाव (पोलाव) में अंतर बा. बिरयानी बनावे खातिर पहिले चावल के उबालल जाला, ओकरा बाद ओकरा ऊपर कुछ खास सूखा मसाला देके चिकन, मटन भा सोयाबीन वगैहर के परत बना के दुबारा पकावल जाला. बिरयानी में दालचीनी, केसर, लौंग, इलायची जरूर रहेला. कुछ बिरयानी चटपटा आ मसालेदार रहेला. जबकि पुलाव में बिरयानी के तुलना में मसाला के मात्रा कम रहेला. पुलाव में चावल का संगे शुद्ध घीव के छौंक का साथे कुछ खास सब्जी डाल के पकावल जाला. अब एघरी, पुलाव में भी बिरयानी नियर लौंग- इलायची के चूरा छिड़क दिहल जाता त पोलाव के सवाद तनी बढ़ि जाता. हं, पुलाव में चावल डालत का घरी तनी नून डालल जाला. बिरयानी बनते ओकरा के कौनो बरतन भा पैकेट में पैक क दिहल जाला, ताकि ओकर खुश्बू जस के तस बनल रहो. पुलाव का संगे अइसन कौनो बाध्यता नइखे. बिरयानी कम आंच पर ढेर देर पकावल जाला, जबकि पुलाव कम समय में बन जाला.

अब केहू कहे कि भोजपुरिया भाई लोग त खाली दाल, भात, तरकारिए खात होई. जी ना, भोजपुरिया भाई सवाद के मास्टर होला लोग. भोजपुरिया भाई लोगन का घरे ऊपर वर्णित पकवान में से बहुत कुछ बनेला. पूड़ी, परावठा, कचौड़ी आ खीर बनेला. जीभ चटकारे वाला चोखा बनेला. बहुते किसिम के व्यंजन बनेला- जौना में से- मकुनी, ठेकुआ आ सिरका वाला अचार अउरी कहीं ना मिली. भोजपुरिया भाई लोग मस्तमौला होला. दोसरा के सुख- दुख में कामे आवेला आ खूब पसंद से स्वादिष्ट भोजन करेला आ करावेला. हमार दावा बा कि कौनो सौखीन भोजपुरिया भाई का घरे रउरा एक बेर भोजन क लेब त ओह भोजन के आनंद रउरा जीवन भर मन परी.

(विनय बिहारी सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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