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Bhojpuri: लाला लाजपत राय 1905 में ही देइ दिहे रहलन 'असहयोग आंदोलन' क मंत्र

Bhojpuri: लाला लाजपत राय 1905 में ही देइ दिहे रहलन 'असहयोग आंदोलन' क मंत्र

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चार सितंबर, 1920 के कलकत्ता में कांग्रेस क अधिवेशन भयल. महात्मा गांधी इहां अंगरेजन के खिलाफ देशव्यापी असहयोग आंदोलन शुरू करय क प्रस्ताव पेश कइलन. प्रस्ताव पास होइ गयल. लेकिन कम लोगन के पता होई कि अंगरेजन के खिलाफ असहयोग क मंत्र लाला लाजपत राय कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में 1905 में ही देइ दिहे रहलन. इ अलग बात हौ कि लालाजी क इ मंत्र ओह समय कांग्रेसिन के रास नाहीं आयल. खास बात इ कि कलकत्ता अधिवेशन क अध्यक्षता लाला लाजपत राय ही कइले रहलन.

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देश, देश क जनता अंगरेजी शासन से छटपटात रहल. अंगरेजी शासन जनता पर शिकंजा कसत जात रहल. नेतन क बात शासन सुनय के तइयार नाहीं रहल. ओह समय कांग्रेस बस एतना चाहत रहल कि शासन-प्रशासन में जनता क सुनवाई होय, हिस्सेदारी होय, जनता के राहत मिलय. एही एजेंडा के लेइ के बनारस में 1905 में कांग्रेस क अधिवेशन भयल. अधिवेशन क अध्यक्षता गोपालकृष्ण गोखले करत रहलन. लाला लाजपत राय भी अधिवेशन में पहुंचल रहलन. अंगरेजन के प्रति उदारता अउर भिक्षावृत्ति वाली कांग्रेस क इ नीति लाला लाजपत के पसंद नाहीं रहल. लालाजी अधिवेशन में खुलि के एह नीति क विरोध कइलन, अउर अंगरेजन के खिलाफ निष्क्रिय प्रतिरोध क नीति अपनावय क आग्रह कइलन. निष्क्रिय प्रतिरोध यानी असहयोग. लेकिन अधिवेशन में ओनकर इ आग्रह खारिज होइ गयल. बनारस अधिवेशन में हलांकि स्वशासन, अउर स्वदेशी के विचार पर आगे बढ़य क प्रस्ताव पास भयल, जवन अपने आप में राष्ट्रीय आंदोलन क एक बड़ी उपलब्धि रहल. प्रतिरोध क आग्रह खारिज भइले के बाद एही ठिअन कांग्रेस में गरम दल क नींव पड़ि गइल. लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिनचंद्र पाल गरम दल क नेता बनि गइलन. लेकिन गरम दल क इहय मंत्र आगे चलि के नरम दल क सबसे बड़ नेता मोहनदास करमचंद गांधी अपनइलन. इ मंत्र अजादी क मंत्र बनि गयल. असहयोग आंदोलन क अधार इहय रहल. अंगरेजी सरकार हिलि गइल. बनारस अधिवेशन में लाला लाजपत राय कहले रहलन, ’’भारतीयों की शिकायत पर अंग्रेज तभी ध्यान देने को विवश होंगे, जब उनकी जेब पर सीधा खतरा हो जाएगा.’’ गांधी तबतक दक्षिण अफ्रीका से भारत नाहीं आयल रहलन.

महात्मा गांधी 1915 में भारत अइलन. देशभर में घूमि के पूरी परिस्थिति के अच्छे से समझलन. ओकरे बाद कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में 1920 में गांधी अंगरेजी शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन क प्रस्ताव पेश कइलन. अब इ संजोग देखा कि जवन प्रस्ताव लालाजी 15 साल पहिलय पेश कइले रहलन, आज ओही प्रस्ताव के समय उ कांग्रेस क अध्यक्षता करत रहलन. गांधी क असयोग आंदोलन क प्रस्ताव अधिवेशन में पारित होइ गयल. भारत में महात्मा गांधी क इ पहिला आंदोलन रहल. असहयोग आंदोलन में शहर से लेइके गांव तक, छात्र से लेइके नौकरी पेशा तक, किसान-मजदूर-नौजवान हर वर्ग, जाति, धरम क लोग बढ़ि-चढ़ि के हिस्सा लेहलन. अंगरेजी सरकार क पसीना छूटि गयल.

लाला लाजपत अउर गांधी के सोच में समानता क इ सूत्र कलकत्ता अधिवेशन में ही नाहीं जुड़ल रहल. गांधी जब दक्षिण अफ्रीका में अश्वेत लोगन के समान अधिकार देवावय बदे सत्याग्रह चलावत रहलन, ओही समय लाला लाजपत राय गांधी से प्रभावित भइलन अउर आंदोलन में मदद बदे 40 हजार रुपिया चंदा जुटाइ के भेजले रहलन. गांधी के असहयोग आंदोलन में पंजाब जोरदार तरीके से भागीदारी कइलस त एकरे पीछे शेर-ए-पंजाब लाला लाजपत ही रहलन. आंदोलन में हिस्सा लेहले के नाते 1921 में ओन्हय 18 महीना जेल क सजा होइ गइल.

लाला लाजपत तीक्ष्ण बुद्धि वाला दूरदर्शी नेता रहलन. दृढ़संकल्प वाला साहसी नेता रहलन. कठिन से कठिन निर्णय लेवय में तनिखव आगा-पीछा न करय. ओनकर कहना रहल, ’’आप अपने मजबूत जज्बातों के आधार पर ही कड़े निर्णय ले सकते हैं.’’ अपने एही सोच, समझ अउर कर्मठता के चलते उ देश-समाज खातिर बहुत कुछ कइलन, आगे बहुत कुछ कइ सकत रहलन, लेकिन समय से पहिलय ओनके जिनिगी पर विराम लगि गयल. साइमन कमीशन क देश में विरोध होत रहल. 30 अक्टूबर, 1928 के कमीशन लाहौर पहुंचल. लालाजी के नेतृत्व में प्रतिरोध जुलूस निकलल. हजारन क भीड़ नारा लगावत क आगे बढ़त रहल. अंग्रेजी पुलिस जुलूस पर लाठीचार्ज शुरू कइ देहलस. लालाजी बुरी तरह घायल होइ गइलन. फिर भी उ अंगरेजन के ललकरलन, ’’मेरे शरीर पर पड़ी हरेक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत की अंतिम कीलें साबित होंगी.’’ लालाजी क इ ललकार 15 अगस्त, 1947 के जमीन पर उतरल. लेकिन लाठीचार्ज के जानलेवा घाव के नाते 17 नवंबर, 1928 के ही उ दुनिया छोड़ि के चलि गइलन. लाला लाजपत राय क जनम 28 जनवरी, 1865 के पंजाब में लुधियान जिला के ढूढिकें गांव में भयल रहल.
(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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