Bhojpuri: लालू जी के बेल मिलला से का बिहार में राजनीतिक भूकंप आ जाई ?

लालूजी (Lalu Prasad Yadav) के जमानत मिले से राजद में खुशी बा. तेजपरताप (Tej Pratap Yadav) जोश में बोल रहल बाड़े. कवनो सरकार गिरावल अतना आसान बा का ? स्पीकर चुनाव में लालू जी जेल से जोड़-तोड़ के नतीजा देख लेले बाड़े. ऐह हाल में ऊ शायदे अइसन कवनो कोशिश करस.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2021, 4:39 PM IST
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लालू जादव साढ़े तीन साल के बाद जेल से बहरी अइहें तs का बिहार में राजनीतिक भूकंप आ जाई ? तेजपरताप तs नीतीश सरकार गिरावे के बात कर रहल बाड़े ? रजनीकांत के सवाल पs गौरीशंकर कहले, लालू जी अभी बेराम बाड़े, दिल्ली में उनकर इलाज चल रहल बा. अबहीं ऊ एम्स में ही रहिहें. कोरोना के हाल देख के शायदे ऊ पटना आवस. अगर एम्स में बइठल-बइठल सरकार गिरावे के कूबत रहित तs ई काम तीन महीना पहिलहीं हो जाइत. ऊ तs जनवरिये से एम्स में बाड़े. लालूजी के जमानत मिले से राजद में खुशी बा. तेजपरताप जोश में बोल रहल बाड़े. कवनो सरकार गिरावल अतना आसान बा का ?

स्पीकर चुनाव में लालू जी जेल से जोड़-तोड़ के नतीजा देख लेले बाड़े. ऐह हाल में ऊ शायदे अइसन कवनो कोशिश करस. दीनानाथ दूनो जना के बात सुनत रहन. ऊ रजनीकांत से कहले, उनका सामने तs सबसे बड़ सवाल राजद के एकजुटता के बा. राजद में का कवनो कम समस्या बा ? 2013 में सजायाफ्ता भइला के बाद जब लालू जी के जमानत मिलल रहे तs राजद के भभिस बनावे खातिर उनका सोनिया गांधी के सामने हथजोड़िया करे के पड़ल रहे. अब लालू जी के जादू पहिले वला नइखे रह गइल.

70 दिन बाद जेल से बहरी अइला के बाद लालू जी का कइले ?

दीनानाथ के बात पs रजनीकांत फेन सवाल दगले, तs का लालू जी के जमानत मिलला से बिहार के राजनीत पs कवनो असर ना पड़ी ? दीनानाथ सहज भाव से कहले, बिहार के राजनीत पs ताs ना, हां ! राजद के राजनीत पs जरूर असर पड़ी. लालू जी के बहरी आवे से राजद में अनुशासन के भावना बढ़ जाई. जवन सीनियर लीडर दल में घुटन महसूस कर रहल बाड़े उनको राहत के सांस मिल जाई. अगर लालू जी बहरी रहिते तs विधानसभा कांड ना भइल रहित. अब लालू जी के मौजूदगी में राजद नया उतसाह से आपन राजनीतिक दिशा तय कर सकेला. 2013 में एइसने भइल रहे. जब लालू जी जेल बाहरी अइले तs राजद के मजबूत करे खातिर पसेना बहावले. चारा घोटला मामला में लालू जी के पहिला सजाय अक्टूबर 2013 में भइल रहे. एकरा चलते उनकर सांसदी खतम हो गइल अउर जेल भी जाये के पड़ल.
लालू जी देश के पहिला लोकसभा सांसद हवें जिनका सजाय के चलते सदस्यता गंवावे के पड़ल रहे. जेल में 70 दिन गुजरला के बाद 13 दिसम्बर 2013 के उनका जमानत मिलल रहे. ओह घरी राजद के स्थिति कमजोर रहे. बिधानसभा में 22 सदस्य रहन तs लोकसभा में तीन सदस्य बांच गइल रहन. पाटी में जान फूंकल जरूरी रहे. लालू जी जइसहीं जेल से बहरी अइले सबसे पहिले सोनिया गांधी के बड़ाई में जुट गइले. कहले, कांगरेस से परधानमंतरी पद के कंडिडट चाहे राहुल गांधी होखस भा केहू दोसर, ऊ हार हाल में सपोट करिहें. लोकसभा चुनाव खातिर अपना मनहीं कांगरेस से गठबंधन करे के बात करे लगले. लेकिन कांगरेस लालू जी कवनो भाव देवे के मूड में ना रहे.

सोनिया गांधी से मोलकात हो गइल जरूरी

गौरीशंकर पूछले, तs का कांगरेस लालू जी के बाद मान गइल ? दीनानाथ कहले, ना, लालू जी के बहुत पापड़ बेले के पड़ल रहे. जब कांग्रेस देने से कवनो जबाब ना मिलल तs लालू जी के चिंता बढ़ गइल. दरअसल कांग्रेस 2009 के बेइजती से बहुत खफा रहे. लालू जी 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन सीट देवे ऑफर देले रहन. यूपीए सरकार में मंतरी रहला के बादो लालू जी कांगरेस के बिना औकात वला पाटी कहे लगले. लालू जी, लोजपा के साथे मिल के कांगरेस के दरकिनार कर देले. ऊ अपना चुनावी भासन में कह देले रहने कि अगर कांग्रेस सरकार राम मंदिर के ताला ना खलोवले रहित तो ई बिबाद अतना ना बढ़ल रहित. एह बयान से सोनिया गांधी, परनब मुखरजी, राहुल गांधी लालू जी बहुत अनराज हो गइले.



चुनाव के बाद रिजल्ट निकलल तs राजद के चार अउर कांग्रेस के दू सांसद चुनइले. लोजपा के सफाया हो गइल. रामविलास पासवान जइसन नेता चुनाव हार गइले. कांग्रेस के तौहीन कइल लालू जी पs भरी पड़ गइल. मनमोहन सिंह के अगुवाई में जब यूपीए के सरकार बनल तs लालू जी के मंतरी ना बनावल गइल. सोनिया गांधी के उनका पs से भरोसा उठ गइल रहे. कांगरेस के लालू जी के मदद के दरकार ना रहे. एकरा बादो लालू जी कांगरेस के एकतरफा समरथन दे देले. लेकिन एकरा बादो कांगरेस के लालू जी से दूरी बनल रह गइल.

लालू जी सोनिया गांधी से कहले, अब गलती ना होई

रजनीकांत के उतसुकता बढ़ गइले तs पूछले, आगा का भइल. दीनानाथ कहले, लालू जी के जेल से छूटला दस बारह दिन हो गइल रहे. 2014 के नवका साल आवे वला रहे. चार- पांच महीना के बाद लोकसभा के चुनाव रहे. एक जनवरी 2014 के लालू जी, सोनिया गांधी से मोलकात करे दिल्ली गइले. बहुत मोसकिल के बाद लालू जी के सोनिया गांधी से मोलकात भइल रहे. ओह घरी अखबार में पढ़ले रहीं कि लालू जी, सोनिया गांधी के मनावे खातिर कहले रहन कि अब दोहरिया के अइसन गलती ना होई. सोनिया गांधी से उनकर चुनावी गठबंधन के बात भइल. लेकिन बात फाइनल करे खातिर लालू जी के चार दिन के बाद राहुल गांधी से भी भेंट करे के पड़ल. लोकसभा चुनाव में राजद-कांगरेस के गठबंधन हो गइल. लेकिन तुरंते बिबाद शुरू हो गइल. अपरिल 2014 में लालू जी कांग्रेस कंडिडेट अशोक राम के परचार खातिर समस्तीपुर गइल रहन.

पतरकार लोग उनका से सवाल पूछले कि रउआ मंच पs राहुल गांधी, सोनिया गांधी काहे नइखन आवत ? एह सवाल पs लालू जी कह देले कि अब ई लोग के केहू पूछ रहल बा का ? एह बयान पs खूब हंगामा भइल. 2019 के लोकसभा चुनाव मे भी कंगरेस-रजद खटपट भइल रहे. 2020 के बिधनसभा में हार के दोस राजद, कांगरेस के माथा पs मढ़ देले रहे. लेकिन एक बात पक्का बा कि चाहे कतनो बिबाद अउर झंझट रहे, बिहार में दूनो दल के गठबंधन अभी ले अटूट बा. ई बात सुन के गौरीशंकर कहले, अब लालू जी जब जेल से बहरी अइहें तs ऊ कांगरेस के मेल से ही नीतीश कुमार के घेरे के कोशिश करिहें. बतकही होते रहे कि बौजू चा चैती छठ के परसादी ले आ गइले. फेन तीनों संघतिया परसादी खाये लगले. (लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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