Bhojpuri Spl: जब ले समोसा में आलू रही, तब ले लालू के शासन रही

सांच बात ई बा कि सरकार से बाहर रहला के बादो लालू सचहूं समोसा के आलू नियर बिहार आ बिहार से बाहर के राजनीति में बनल बाड़े. भलहीं अबे उनकर बुढ़ापा जेल में कटत बा, बाकिर जवनी गंतिया उनकर दरबार जेल भा अस्पताल में सजत रहेला, ओही से उनकर अपने बनावल कहाउत सांच साबित हो जाला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 22, 2021, 1:25 PM IST
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लालू प्रसाद आ लालू यादव नाम से बेसी चलन में लालू रहल बा. लालू के लेके केतने कहाउत-किस्सा-परतोख बनल-बनावल आ सुनल-सुनावल गइल. एही में एगो इहो रहे- जब ले समोसा में आलू रही, तब ले लालू के शासन रही. ई खुदे लालू अपना भाषन में कहस. शासन के माने अगर सरकार ले सीमित मानल जाव त ई कहाउत अब बेमानी हो गइल बा, बाकिर सांच बात ई बा कि सरकार से बाहर रहला के बादो लालू सचहूं समोसा के आलू नियर बिहार आ बिहार से बाहर के राजनीति में बनल बाड़े. भलहीं अबे उनकर बुढ़ापा जेल में कटत बा, बाकिर जवनी गंतिया उनकर दरबार जेल भा अस्पताल में सजत रहेला, ओही से उनकर अपने बनावल कहाउत सांच साबित हो जाला.

खुन्नस खाये वाला ललुआ कह के लालू के पुकारे ला, त राजनीति में ऊ लालू जी, लालू प्रसाद आ लालू यादव के नाम से मशहूर बाड़े. करीब 50 साल पहिले माने 1974 के जय प्रकाश जी के आंदोलन से निकलल लालू राजनीति में आजुओ कवनो बड़ पोलिटिशियन से कम नइखन. बिना उनकर नाम लिहले सरकारी भा विरोधी पक्ष के नेता लोग के राजनीतिक पाठ पूरा ना होखे. केहू उनकरा शासन में जंगल राज के जिकिर करेला त केहू उनकर सामाजिक न्याय के बड़ाई करेला. हाले में बिहार के चुनाव में लालू के जंगल राज फेर से चर्चा में रहल. माने लालू इलेक्शन के मुद्दा रहले. उनकर दल त लालू के नाम आगे क के वोट मंगबे कइलस.

लालू राजनीति के केतना असरदार चेहरा हउअन, एकरा के समझे खातिर एगो अवसर के जिकिर जरूरी बा. 1998 में लालू चारा घोटाला में धरइला के बाद पटना के बेऊर जेल में रहले. ओही घरी चंद्रशेखर पटना अइले. थोरहीं दिन पहिले चंद्रशेखर के सरकार गिरल रहे आ ऊ पूर्व पीएम हो गइल रहले. पटना में आवते ऊ लालू से भेंट करे बेऊर जेल गइले. उनकर प्रेस कांफरेंस होत रहे. केहू पूछ दीहल कि चारा घोटाला के आरोपी से काहें मिले गइल रहनी हां, एह से रउरा छवि पर खराब असर ना पड़ी? चंद्रशेकर के जवाब से पत्रकार लोग के मुंहे बंद हो गइल. ऊ कहले कि तोहरा लोगिन के भाई, बाप भा बेटा-भतीजा कवनो बड़ कांड क के जेल जाव त तोहनी का ओकरा से भेंट करे ना जइबअ का? लालू पर अबहीं आरोप लागल बा, जब साबित होई त ऊ दोषी कहइएं. तबो हमार संबंध अइसहीं रही. रिश्ता रोज ना बनेला आ रोज ना तूरल जाला.

लालू में लोग के अपना ओर खींचे के गजब ताकत रहल बा. उनकर स्टाइले अलग रहेला. एकरा बारे में आल इंडिया रेडियो के कोलकाता सेंटर में 20 साल पहिले तैनात एक जने अफसर बतवले रहले. ऊ कहले कि केहू के ई मालूम नइखे कि लालू के भाषण के स्टाइल नया किसिम के कइसे हो गइल. ऊ ओकर राज बतवले. इमरजेंसी में नेता लोग के संगे लालू जब जेल में बंद रहले त ओइजा मनोरंजन के कवनो साधन ना रहे. रेडियो के पटना केंद्र से लोहा सिंह एगो नाटक आवे, जवना में लोहा सिंह के डायलाग हिन्दी, भोजपुरी आ अंगरेजी शब्दन के मिला के होखे. गांव के लोग बड़ा चाव से सुने. लालू ओह नाटक के कई गो संवाद इयाद क लिहले रहले. जब नेता लोग कहे कि लालू जी, तनी कुछ सुनाईं ना. बस, लालू लोहा सिंह के स्टाइल में चालू हो जास आ ठठा के सभे हंसे लागे. लालू समझ गइले कि ई पढ़ल-लिखल लोग के एह स्टाइल से हंसावल जा सकेला त अनपढ़-गंवार के पटावल त अउरी आसान होई. जेल से निकलला के बाद लालू के बोली-बतकही से लेके भाषन तक उहे स्टाइल रह गइल.
लालू के केस के स्टाइल भी इयाद होई. उनकर केस एतना छोट कटाव कि कंगही के जरूरते ना पड़े. लालू के केस के एह स्टाइल के कुछ लोग साधना कट कहे लागल. एई पर लालू के जवाब होखे- धत्त, कवनो हम लइकी हईं का, जे साधना कट कटवाएब. अरे, हम त जान-बूझ के अइसने कटवाई ले कि ना कंगही के जरूरत पड़ी आ ना आईना के. लालू के भाषन के एगो लाइन ओह घरी बड़ा मशहूर भइले रहे, जब चुनाव के भाषण में ऊ लोग से कहले- बिहार के सड़क को अइसन बनवाएंगे, जो हेमा मालिन के गाल से भी चीकन होगा. बड़-बड़ साहित्यिक लोग अइसन बिंब प्रयोग करे में फेल हो जाई. सड़क के चिकनाई के तुलना हीरोइन के गाल से.

लालू कहीं कवनो सभा में बचपन में खेलल खेल के लाइन दोहरावस त कबो भइंस के पीठ पर चरावे के बात कहस. गांव में ई कुल लोग देखले-सुनले रहे, एह से सभे मजा लेव. जइसे ऊ कहस- ओका, बोका, तीन तड़ोका. माहौल देख आ मिजाज भांप के कहीं कहस- हेलल हेलल भइंसिया पानी में, दूधवो ना पीयनीं जवानी में. उनकरा भाषण के एतना असर रहे कि देश से लेके विदेशी पाकिस्तान तक लोग उनकरा भाषण के दीवाना रहे. राज्यसभा के अबे उपाध्यक्ष हरिवंश बतावत रहले कि ऊ चेन्नई में केहू लोकल आदमी के घरे बइठल रहले. बतकही चलत रहे. जइसहीं टीवी पर लालू भाषण देत लउकले, घर वाला तुरंते टीवी के आवाज बढ़ा दिहले. उनका लालू के भाषण ना बुझाइल, बाकिर बोले के हाव-भाव देख के ऊ खूब हंसले. बाद में हरिवंश पूछले कि लालू के बात समझ में आइल हा, त ऊ कहले कि भाषण त ना समझनी हां, बाकिर हाव-भाव से देख के हंसी आ गइल रहल हा.

लालू खाली हंसावे वाला नेता ना हउवन. ऊ हंसिये-मजाक में कई गो गूढ़ बात कह देले. 1998 में हम जवना अखबार में रहनी, ओकरा सालाना समारोह में ऊ आइल रहले. चारा घोटाला में नाम अइला के बाद ऊ सीएम त ना रहले, बाकिर राबड़ी देवी के सीएम बना के पीछे से सरकार त उहे चलावस. ओह घरी सुशील कुमार मोदी के प्रतिपक्ष के नेता पद देबे में पेंच फंसल रहे. कार्यक्रम में माले नेता महेंद्र सिंह, सुशील कुमार मोदी आ लालू प्रसाद मंच पर बइठल रहे लोग. लालू हमरा के बोला के कान में कहले- का बोले के होई हो. हम कहनी कि सब अखबार के लोग आइल बा. कुछ असन बोलीं कि लोग छापे खातिर मजबूर हो जाव. ना त केहू एह कार्यक्रम के खबर ना छापी. लालू उठले आ मंच पर बइठल लोग के नाम के संगे पद बता के संबोधनल शुरू कइले. जब सुशील मोदी के बारी आइल त कहले- बगल में सुशील मोदी जी बानी. इहां के हम कवन पद बताईं. चलीं, आज बताइए दे तानी. हां, त हमरा बगल में बैठे नेता प्रतिपक्ष सुशील कुमार मोदी जी. संगे इहो साफ कइले कि ई काम सरकार के बा, बाकिर आज हम पार्टी के अध्यक्ष के नाते राबड़ी देवी से कहेब कि अब नेता प्रतिपक्ष सुशील जी के बना दीहल जाव. अखबार वाला लोग के लाइन मिल गइल छापे के. (लेखक ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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