लता मंगेशकर के जन्मदिन पर भोजपुरी विशेष - लता जी के गीतवा करेजा छुएला

लता जी के भोजपुरी गीत केहू के मगन क दबे वाला बाने सब
लता जी के भोजपुरी गीत केहू के मगन क दबे वाला बाने सब

जवना समय लता मंगेशकर भोजपुरी फिलिम में गावत रहली उ समय भोजपुरी सिनेमा के स्वर्णकाल रहे. विशेष बात ई बा कि जवना बेरा ई सब होत रहे ओह बेरा अभिनेता से लेके क्रू तक हिंदी भा दोसर विकसित इंडस्ट्री के होत रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 28, 2020, 3:50 PM IST
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भोजपुरी में लता मंगेशकर जी के गाना दिव्य बाने सब. उनकर आवाज पा के मिठास वाली ये भाषा के गीत में अमृत घुल जाला. उनका जन्म दिन के मौका पर उनकर बहुत सारा गीत याद आ जाला. लागेला कि उनकर आवाज भोजपुरिये खातिर बनल बा. का रउरा मालूम बा कि गायिकी खातिर भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण आ दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित स्वर कोकिला लता मंगेशकर भोजपुरी में भी अनेक कालजयी गीत गवले बाड़ी. लता मंगेशकर भोजपुरी के पहिलके फिल्म में गाना गवले बाड़ी आ ओकर वीडियोज अभियो काफी देखल जाला. लता जी के पहिलका सबसे मशहूर गाना पहिला भोजपुरी फिल्म हे गंगा मईया तोहे पियरी चढईबो के टाइटल ट्रैक रहे जेकरा के उ अपना छोट बहिन उषा मंगेशकर के साथ मिलके गवले बाड़ी. ई गाना इतिहास रच गइल.

एह गीत के संगीत तबके हिंदी फिल्मन के प्रसिद्ध संगीकार चित्रगुप्त जी देले रहनी आ लिखले रहनी लीजेंड गीतकार शैलेन्द्र जी. ‘’ हे गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो, सइंया से कर द मिलनवा हे राम'' केकरा ईयाद ना होई.

आज सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी के जन्मदिन ह. अइसे त आज तीन गो शख्सियत के जन्मदिन बा. शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर आ भारत खातिर पहिला व्यक्तिगत ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीते वाली अभिनव बिंद्रा के. लेकिन हम बात करत लता मंगेशकर के.
लता मंगेशकर के जन्म 28 सितम्बर 1929 के इन्दौर में पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर आ माता शेवंती के घरे भइल. लता के बाबूजी मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक आ थिएटर एक्टर रहलें जबकि माई गुजराती रहली. बचपने से लता के घर में गीत-संगीत के माहौल मिलल आ पांचे साल के उमिर से उनकर बाबूजी उनका के संगीत सिखावे लगलें.
1942 में पिता के निधन के बाद लता पर परिवार के जिम्मेदारी आ गइल. तब लता जी हिंदी-मराठी फिल्मन में अभिनय भी कइली. मराठी फिल्म में गाना भी गवली. तब से शुरू भइल सिलसिला कुछ साल पहिले तक जारी रहल. 2001 में उनका के भारत रत्न से सम्मानित कइल गइल. एकरा पहिले पद्मभूषण (1969), दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1989) आ पद्म विभूषण (1999) से पुरस्कृत कइल गइल. तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार आ आठ बार फिल्मफेयर पुरस्कार जीतली. मध्यप्रदेश सरकार त लता मंगेशकर के नाम पर भी पुरस्कार देला.  लता जी 20 भाषा में 30 हजार से बेसी गाना गवले बाड़ी. आज हम बात करत बानी भोजपुरी सिनेमा के संगीत में उनका योगदान के.



सही माने में मधुरता
आज भोजपुरी फिल्म के गाना के मतलब दिनेश लाल यादव, पवन सिंह आ खेसारी लाल यादव के गाना हो गइल बा. एही तीन जाना के गीत सबसे ज्यादा सुने के मिलेला. हालाँकि अक्षरा सिंह, रानी चटर्जी, काजल राघवानी जइसन एक्ट्रेसेस भी गावल शुरु कर देले बा आ इन्हन लोग के भी आज सुनल जाता. लेकिन भोजपुरी मे कबहूँ अइसन दौर रहे, जब हिंदी फिलिम के लीजेंड गायक भी भोजपुरी फिल्मन में गीत गावत रहे लोग. उ भोजपुरी सिनेमा के सुनहरा दौर रहे, जब मोहम्मद रफी साहब, किशोर कुमार, मन्ना डे, लता मंगेशकर, आशा भोंसले अउर तलत महमूद सहित ओह बेरा के लगभग हर बड़ा बॉलीवुड गायक भोजपुरी के एक से बढ़ के एक सुपरहिट गीत गवले रहे लोग.

आज लता जी के जन्मदिन ह त मिसाल के तौर पर रउआ सभन के सामने हम लता मंगेशकर के गावल कुछ भोजपुरी गीत पर चर्चा कर रहल बानी. एह चर्चा से रउआ लोग के ई बात पता चली कि गीत-संगीत के स्तर पर हमनी के केतना दरिद्र हो गइल बानी जा. कहाँ रहनी जा आ कहाँ आ गइल बानी जा. जहाँ पहुँचल बानी जा दुनिया के नजर में उहे हमनी के छवि बन गइल बा. काहे कि गाना सिर्फ गाना ना ह, उ शब्द के खोखला कंकाल ना ह, उ हमनी के घर-आंगन अउर समाज के आईना ह. त का हमनी के अइसने लंगटा, निर्लज्ज, बेहया अउर मूर्ख बानी जा. एक तरफ त भोजपुरी फिल्म दुनिया भर में हमनी के भाषा के प्रचार-प्रसार कइले बा त दूसरा तरफ हमनी के इज्जत के तार-तार कइले बा. हमनी के बेभरम कइले बा. हमनी के बेटी-बहिन के रस्ता-पेड़ा में चलल मुश्किल कइले बा. एही से हम अपना गौरवशाली इतिहास के झलक देखा रहल बानी कि ओह में आज के फ़िल्मकार लोग आपन चेहरा देखे अउर वाल्मीकि लेखा सुधरे.

भोजपुरी सिनेमा के स्वर्ण काल 
जवना समय लता मंगेशकर भोजपुरी फिलिम में गावत रहली उ समय भोजपुरी सिनेमा के स्वर्णकाल रहे. जब एक से बढ़ के एक अमर फिलिम आ गाना के निर्माण भइल. एह में एगो अउर विशेष बात ई बा कि जवना बेरा ई सब होत रहे ओह बेरा अभिनेता से लेके क्रू तक हिंदी भा दोसर विकसित इंडस्ट्री के होत रहे. त जवन काम ओह बेरा भइल उ आज भी भोजपुरी सिनेमा में एगो मील के पत्थर बा. जबकि एह समय भोजपुरी में काम करे वाला अधिकांश लोग भोजपुरिये क्षेत्र के बाटे लोग तबो गीत-संगीत मे भोजपुरीपन नइखे आवत. गीत-संगीत से लेके फिलिम के हर क्षेत्र में पहिले से गिरावट आइल बा, ह्रास भइल बा. आज ग्लैमर के नाम पर फूहड़ता आ गीत के नाम पर तुकबन्दी होत बा. बहुत दुखद बा ई. तब हिंदी के टॉप के लोग भोजपुरी में काम करत रहे तबो भोजपुरी फिल्म के नाम भोजपुरी में रहत रहे अउर फिल्म के कहानी में, संवाद में अउर फिल्मांकन में भोजपुरियत बरकरार रहे. बाकिर अभी सभे भोजपुरी के बा लेकिन फिल्म के नाम रखाता हिंदी में अउर कथा-कहानी त बॉलीवुड अउर साऊथ के फिल्म के कॉपी पेस्ट होते बा, संवादों सी-ग्रेड हिंदी फिल्म के छिछोरा किरदार के हिंदी-भोजपुरी मिक्स भाषा जइसन हो गइल बा. भाषा पर केहू के नियंत्रण नइखे. ओकर बलात्कार जारी बा. ई बलात्कार गीत के भाषा में भी बा. कहे के मतलब ई कि एह घरी के अधिकांश गीत में भोजपुरी के संस्कार गायब बा अउर भाषा के बलात्कार जारी बा अउर निर्लज्ज, बेहया कलाकार पत्रकार से बतियावत में ई कहतो बा कि हमार सबसे हिट गाना बा 'पाण्डे जी का बेटा हूँ, चुम्मा चिपक कर लेता हूँ.' भा 'तनी सा जीन्स ढीला करs.' अउर 'दूध पी के मुंह फेर लिया, पिया मेरा कुछ नहीं किया.'

साठ से लेके अस्सी के दशक तक जवन गाना दिल से कनेक्ट होत रहे, दिल के साथ ट्यून होत रहे, उ अब चोली अउर चुनरी के साथ कनेक्ट हो गइल बा अउर ओही से ट्यून होता. आइटम डांसर कहतिया कि 'हम लहंगा झार देम त ओमे से ना जाने केतना नेता लोग निकल जाई.' पता ना उ लहंगा ह कि पार्लियामेंट ह कि नेता जी लोग के बईठाका ह. दरअसल एह घरी के भोजपुरी गीत-संगीत पर जेतना वैज्ञानिक प्रयोग होता, ओतना त विज्ञान के प्रयोगशाला में भी ना होत होई. फिल्म 'पत्थर के सनम' में एगो गाना में ओकर हीरो आ गायक कल्लू अपना हीरोइन से कहsतारें कि 'ए रानी पियल कर कद्दुआ के रस, जवानी तोहर वश में रही.' त अभी के भोजपुरी सिनेमा तरह-तरह के वैज्ञानिक प्रयोग से गुजरता, लैब में पड़ल बा. देखीं आगे कइसन-कइसन चमत्कार होता?

फिलहाल हमनी के लता जी के भोजपुरी गीतन के मजा लिहल जाय.
जइसन कि हम बतइबे कइनी ह कि लता मंगेशकर भोजपुरी के पहिलके फिल्म में गाना गवले बाड़ी हे गंगा मईया तोहे पियरी चढईबो अपना छोट बहिन उषा मंगेशकर के साथ मिलके. दूनू बहिन के जोड़ी एगो अउर मचलत गाना एही फिल्म में गवले रहे लोग जवना के बोल रहे 'मारे करेजवा में तीर'. ई गाना सुनला पर अइसन लागेला कि कवनो हिंदी के सदाबहार नगमा सुन रहल बानी जा.

लता मंगेशकर दूसरकी भोजपुरी फिल्म लागी नाही छूटे राम में भी एगो गाना गवले रहली. उ गाना भोजपुरी सिनेमा के चंद माइलस्टोन गाना में से एक बा. ‘’लाली लाली होठवा से बरसे ललईया हो कि रस चुएला " गाना के तब के बॉलीवुड के मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी लिखले रहनी. लता जी के साथ तलत महमूद एह गाना के गवले रहले. कुमकुम आ असीम कुमार पर फ़िल्मावल एह गीत के जोड़ नइखे .
लुक छिप बदरा में गाना मुजरा शैली में फिल्मावल गइल गाना बा जवना के लता मंगेशकर ही गवले बाड़ी. ई गाना तब के हिंदी फिल्मन के मुजरा गाना के बराबरी करत रहे आ नॉन भोजपुरिया लोग भी एकरा के खूब चाव से सुने. इहो गाना भोजपुरी के पहिलके फिल्म से रहे.

ताजा तरीन दौर में भी एगो गीत
लता मंगेशकर बाद के फिल्म में भी गाना गवले बाड़ी. उ रवि किशन के फिल्म दूल्हा अइसन चाही में एगो गाना गवले बाड़ी. गाना रीतिया पिरितिया के खेल रवि किशन आ स्वीटी छाबड़ा पर फिल्मावल गइल बा. एही फिल्म से अभी के भोजपुरी फिल्मन के दमदार विलेन अवधेश मिश्रा भोजपुरी में डेब्यू कइले रहले.
पुराना भोजपुरी फिल्मन के गाना के शब्द आ संगीत के स्तर देखीं त उ बॉलीवुड के बराबर लागत बा अउर ओह में खाली भाषा के फर्क बा. आज के भोजपुरी फ़िल्मी गीत के सुनीं भले उ खेसारी लाल गवले होखस, पवन सिंह गवले होखस या केहू और गायक, उ गीत-संगीत हिंदी गीतन के पास तक नइखे फटकत, बराबरी के बात त सपना बा. ( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार हैं )
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